अज़रबैजान-आर्मीनिया की जँग दो गांवों के लिए फिर भड़की, रूस ने मामला शांत कराया

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अज़रबैजान और आर्मीनिया के बीच नागार्नो काराबाख़ के इलाक़े में जंग के ख़त्म होने के बाद इस सप्ताहांत पहली बार फिर झड़पें हुई हैं.
रिपोर्टें हैं कि अज़रबैजान की फ़ौज ने दो पहाड़ी गांवों की घेराबंदी कर दी थी जहां आर्मीनियाई लड़ाकों की एक टुकड़ी ने डेरा डाल रखा था.
हालांकि रूस के शांति सैनिकों ने वहां पहुँचकर मामले को शांत कराया.
अज़रबैजान के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इस झड़प में उसके चार सैनिक मारे गए हैं.
दूसरी तरफ़ आर्मीनियाई पक्ष का कहना है कि अज़रबैजान की कार्रवाई में उसके छह लड़ाके घायल हो गए.
दोनों ही पक्षों ने एक दूसरे पर पहले हमला करने का आरोप लगाया है.
झड़प कहां हुई?
अज़रबैजान-आर्मीनिया के बीच ये झड़प नागार्नो-काराबाख़ के दक्षिणी इलाक़े के दो गांवों में हुई.
अज़ेरी भाषा में इन गांवों को चाइलाक्काला और क्योना ताखलर कहते हैं जबकि आर्मीनियाई ज़ुबान में इनका नाम ख़त्साबेर्ड और खिन ताखेर है.
दस नवंबर को जब दोनों देशों के बीत युद्ध समाप्त हुआ था तो आर्मीनिया सैनिकों की एक टुकड़ी इन दो गांवों में रह गई थी.
लेकिन इसके आस-पास के इलाक़े या तो सुनसान पहाड़ियां हैं या फिर अज़ेरी फ़ौज के नियंत्रण वाले लड़ाकों का इलाक़ा.
चाइलाक्काला इन इलाक़ों से होकर गुज़रने वाली एक पहाड़ी सड़क के किनारे बसा गांव है और क्योना ताखलर इसके ठीक बग़ल का गांव है.
इस सड़क के पूरब और पश्चिम के दोनों छोर अब अज़रबैजान के नियंत्रण वाले इलाक़े हैं.
रूस के शांति सैनिक
रूसी शांतिसैनिकों की एक छोटी सी टुकड़ी इन गांवों में सप्ताहांत के आख़िर में पहुँची और मामले को शांत कराया. इसे फ़िलहाल अस्थाई उपाय के तौर पर ही देखा जा रहा है.
आर्मीनिया के रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को अज़रबैजान की कार्रवाई को 'हमले की कोशिश' क़रार दिया.
इससे पहले शुक्रवार को नागार्नो-काराबाख़ के रक्षा मंत्रालय (जिसे मान्यता नहीं है) ने बताया कि काराबाख डिफ़ेंस आर्मी के तीन सैनिक अज़रबैजान के साथ हुई झड़प में घायल हो गए थे.
रूस के रक्षा मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है कि हादरुत के इलाक़े में 11 दिसंबर को संघर्ष विराम के उल्लंघन का एक मामला उसके शांति सैनिकों की जानकारी में आया है.
रूसी शांति सैनिकों के मुख्यालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया है, "हादरुत के इलाक़े में छोटे ऑटोमैटिक हथियारों से गोलीबारी की घटना हुई है. पूर्ण युद्ध विराम के लिए दोनों ही पक्षों को फ़ौरन कहा गया."
काराबाख़ में हालात
हालांकि रूसी पक्ष के बयान में ये भी कहा गया है कि 11 दिसंबर को हादरुत के इलाक़े में हुई गोलीबारी संघर्ष विराम के उल्लंघन की एकमात्रा घटना है.
उधर, अज़रबैजान के राष्ट्रपति इलहाम अलीयेव ने कहा है कि काराबाख़ में हालात सामान्य हैं लेकिन इसके साथ ही उन्होंने ऐसी घटनाओं पर चिंता भी ज़ाहिर की.
शनिवार की शाम अज़रबैजान के रक्षा मंत्रालय ने आर्मीनिया पर उकसावे की कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कहा कि वो काराबाख़ में संघर्ष विराम का पालन कर रहा है.
अज़रबैजान के रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, "आर्मीनियाई पक्ष ने अज़रबैजान के आज़ाद कराये गए इलाक़ों में संघर्ष विराम का उल्लंघन करके उकसावे की कार्रवाई की है. अज़ेरी फ़ौज ने इसका कड़ा जवाब दिया है. फ़िलहाल वहां पर संघर्ष विराम का पालन किया जा रहा है."
आर्मीनियाई फ़ौज की वापसी
शनिवार को ओएससीई मिंस्क ग्रुप के देश अमेरिका और फ्रांस के प्रतिनिधियों ने बाकू का दौरा किया जहां राष्ट्रपति इलहाम अलीयेव से उनकी भेंट हुई.
नागार्नो काराबाख़ के इलाक़े में 27 सितंबर को लड़ाई भड़की थी और रूस के राष्ट्रपति पुतिन की मध्यस्थता के बाद नौ-दस नवंबर की दरमियानी रात को ये जंग उस वक़्त ख़त्म हुई जब दोनों देश संघर्ष विराम के लिए तैयार हो गए थे.
समझौते के तहत आर्मीनिया के नियंत्रण वाले सात इलाक़े अज़रबैजान की दख़ल में आ गए. इन क्षेत्रों पर काराबाख़ की पहली लड़ाई के दौरान आर्मीनिया का क़ब्ज़ा हो गया था. इनमें शुशा और हादरुत जैसे शहर भी शामिल हैं जो अब अज़रबैजान के क्षेत्र हो गए हैं.
इन इलाक़ों से आर्मीनियाई फ़ौज की वापसी का काम पहले ही पूरा हो चुका है. पहली दिसंबर को आर्मीनिया ने आख़िरी लाचिन का इलाक़ा भी छोड़ दिया.
अज़रबैजान में इस लड़ाई को एक बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है जबकि आर्मीनिया में इसे कई लोग आत्मसमर्पण कह रहे हैं.
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