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कोरोना के दौर में अमरीका में बंदूक़ों की रिकॉर्ड बिक्री क्यों
- Author, मैक्स मात्ज़ा
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, वॉशिंगटन
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
अमरीका में कोरोना वायरस तेज़ी से फैल रहा है.
इस महामारी के बीच अमरीकी लोगों ने पिछले महीने रिकॉर्ड हथियार ख़रीदे.
अमरीकियों की फ़ायरआर्म्स की पिछले महीने की गई यह ख़रीदारी गुज़रे 20 साल में सबसे अधिक है.
आख़िर इसकी क्या वजह है?
हर दिन मौतों के बढ़ते आंकड़े और पूरे देश के किसी न किसी रूप में लॉकडाउन में होने के बावजूद कई अमरीकी हथियारों को इस महामारी से लड़ाई में अहम मान रहे हैं.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसा महज सामाजिक अव्यवस्था को लेकर पैदा हो रहे डर के चलते नहीं है.
इन आँकड़ों से क्या पता चलता है?
एफ़बीआई (फ़ेडरल ब्यूरो ऑफ़ इनवेस्टिगेशन, भारत में आईबी की तरह की अमरीका में घरेलू अपराधों की जांच करने वाली एजेंसी) ने मार्च 2020 में 37 लाख बैकग्राउंड चेक किए.
यह 1998 के बाद से सबसे बड़ा बैकग्राउंड चेक है. एफ़बीआई ने 1998 में ही इंस्टैंट बैकग्राउंड चेक प्रोग्राम शुरू किया था.
यह आँकड़ा बताता है कि मार्च 2019 के मुक़ाबले मार्च 2020 में इसमें 11 लाख का इज़ाफ़ा हुआ है.
21 मार्च को ही 2,10,000 बैकग्राउंड चेक किए गए. यह एक दिन का सबसे बड़ा आँकड़ा है.
अमरीकी मीडिया के मुताबिक़, एफ़बीआई के डेटा से पता चलता है कि इस साल मार्च में ही 20 लाख से ज़्यादा हथियार (गन, फ़ायरआर्म्स) ख़रीदे गए.
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भगदड़ जैसी मची हुई है...
इलिनॉय प्रांत इस मामले में सबसे आगे रहा. यहां मार्च में क़रीब 5 लाख हथियार बिके. इसके बाद टेक्सस, केंटुकी, फ़्लोरिडा और कैलिफ़ोर्निया का नंबर आता है.
पूरे देश में असलहों की दुकानें ने रिपोर्ट की है कि वे अपने यहां इनका स्टॉक नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि लोगों में इनकी ख़रीदारी के लिए भगदड़ जैसी मची हुई है.
मार्च 2020 में हथियारों की बिक्री के आँकड़ों ने इसके पिछले 33 लाख के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है. यह रिकॉर्ड दिसंबर 2015 का था.
उस वक्त ओबामा प्रशासन ने इस बात की संभावना की ओर इशारा किया था कि वह असॉल्ट राइफ़लों की बिक्री पर रोक लगा सकता है.
कैलिफ़ोर्निया के बर्नार्डिनो में हुई मास शूटिंग (बड़े पैमाने पर लोगों को गोली मारने) की घटना को देखते हुए ओबामा प्रशासन इस ओर क़दम बढ़ाता दिख रहा था.
असलहों की बिक्री क्यों आसमान छू रही है?
जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी लॉ स्कूल के प्रोफ़ेसर टिमोथी लिटन अमरीकी गन इंडस्ट्री के एक्सपर्ट माने जाते हैं.
लिटन बताते हैं कि कोरोना वायरस की महामारी के इस दौर में असलहों की बिक्री बढ़ने की मोटे तौर पर दो वजहें हैं.
पहली वजह यह डर है कि सिविल सोसाइटी, जिसमें फ़ायर, पुलिस और स्वास्थ्य सेवाएं आती हैं, की हालत किसी दिन बुरी तरह से ख़राब हो सकती है.
इसके चलते क़ानून और व्यवस्था का ढांचा चरमरा सकता है.
टिमोथी कहते हैं कि लोगों को लगता है कि अगर ऐसे हालात पैदा हुए तो हथियार ख़ुद को बचाए रखने का तरीक़ा साबित हो सकते हैं.
दूसरी वजह इस चिंता से जुड़ी हुई है कि सरकार बड़े लेवल पर लोगों के निज़ी मसलों में दखल देते हुए हथियार रखने जैसे अधिकारों पर कंट्रोल कर सकती है.
हथियार रखने का हक़
अमरीकी संविधान में लोगों को हथियार रखने का अधिकार है.
लिटन ने कहा, "सार्वजनिक स्वास्थ्य के कई क़दम मसलन, घर पर ही रहने जैसे लोगों की आवाजाही पर पाबंदी लगाने, लोगों की मनचाही चीजों की ख़रीदारी पर रोक लगाने जैसे उपायों से लोगों को लग रहा है कि सरकार उनकी आज़ादी छीन सकती है."
टमोथी ने बीबीसी न्यूज़ से कहा कि कुछ हद तक ये दोनों वजहें एक-दूसरे से उलट हैं.
उन्होंने कहा, "कुछ लोगों को चिंता है कि सरकार बिखर रही है और वह लोगों की सुरक्षा नहीं कर पाएगी. दूसरी ओर, कुछ लोगों को लग रहा है कि सरकार बेहद मज़बूत हो रही है और वह उनकी आज़ादी पर पाबंदियां लगाने वाली है."
मैंने अपने लिए पहला हथियार क्यों ख़रीदा?
हाल में ही गन ख़रीदने वाले एक शख्स ने बीबीसी न्यूज़ को बताया कि उन्होंने 12 मार्च को दो हथियार ख़रीदे. एनबीए के सभी गेम्स को निलंबित करने के ऐलान के अगले दिन ही उन्होंने असलहे ख़रीद लिए.
नाम न छापने की शर्त पर इस शख्स ने बताया कि इमरजेंसी अधिकारियों की ओर से गाइडेंस को देखते हुए उन्होंने अपना यह फ़ैसला किया. इमरजेंसी अधिकारियों ने अमरीकियों से कहा था कि वे अपने यहां कुछ दिनों के लिए खाने-पीने की चीज़ों और पानी का इंतजाम कर लें क्योंकि सप्लाई में दिक्कत आ सकती है.
कैलिफ़ोर्निया के बर्कले में रहने वाले और अब शिकागो शिफ़्ट हो चुके इस शख्स ने बताया, "मुझे लगता है कि भले ही मामूली हों मगर मैं यह आशंका दरकिनार नहीं कर सकता कि देश में एक अस्थायी नागरिक अव्यवस्था पैदा हो सकती है और उस वक्त मैं पूरी तरह से पुलिस डिपार्टमेंट के भरोसे नहीं रह सकता."
उन्होंने कहा, "ऐसे हालात में गन एक सस्ता इंश्योरेंस है." वह तर्क देते हैं कि खाने-पीने और दूसरी चीज़ों का इंतजाम रखना अच्छा है, लेकिन आप इनकी सुरक्षा नहीं कर सकते तो यह सब बेकार है.
क्या है प्रतिक्रिया?
कुछ राज्यों ने हथियारों की दुकानों को एक आवश्यक कारोबार के तौर पर चालू रखने की इजाजत दी हुई है. जबकि अनिवार्य लॉकडाउन के चलते 90 फ़ीसदी अमरीका बंद पड़ा है. न्यूयॉर्क, मैसाचुसेट्स और न्यू मैक्सिको में दुकानों को बंद करा दिया गया है, लेकिन इन्हें ऑनलाइन बिक्री करने की इजाजत दे दी है.
वॉशिंगटन ने दुकानों को बंद रखने के आदेश दिए हैं, लेकिन कई दुकानें बैन के बावजूद खुल रही हैं. गन कंट्रोल की वकालत करने वालों ने दुकानों को बंद करने के फ़ैसले को सही बताया है.
एंटी-गन वॉयलेंस ब्रैडी कैंपेन के प्रेसिडेंट क्रिस ब्राउन ने एनबीसी न्यूज़ से कहा, "असलहों की तत्काल ख़रीद-फ़रोख्त का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है. साथ ही इस बात का तो बिल्कुल अधिकार नहीं है कि हथियार ख़रीदते-बेचते वक्त कोरोना को फैलाया जाए."
मॉम्स डिमांड एक्शन की शैनॉन वाट्स कहती हैं कि उनकी चिंता नए गन ओनर्स के परिवारों से जुड़ी हुई है. उनका कहना है कि ये परिवार पहले से नाज़ुक बने हालात में और ख़तरे में आ गए हैं.
नेशनल राइफ़ल एसोसिएशन (एनआरए) की स्पोक्सवुमन एमी हंटर ने बीबीसी न्यूज़ को भेजे अपने बयान में कहा, "कैदियों को ज़मानत पर रिहा किए जाने और क़ानून-व्यवस्था लागू करने वाली एजेंसियों के चुनिंदा कॉल्स पर ही एक्शन लिए जाने से कई लोगों को लग रहा है कि इस असाधारण वक्त में सेल्फ़-डिफ़ेंस बेहद ज़रूरी चीज़ है."
उन्होंने कहा, "कुछ एंटी-गन राजनेताओं के हथियारों की दुकानों को ताला लगवाने की कोशिशें क़ानून के दायरे में रहने वाले अमरीकियों के लिए बेहद चिंताजनक है. इसी वजह से गन शॉप्स को खुले रहने देने की अपनी कोशिशों के लिए एनआरए को कोई खेद नहीं है. कानून का पालन करने वाले लोग अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा इसके ज़रिए सुनिश्चित कर सकते हैं."
हथियारों की बिक्री पर किससे असर पड़ता है?
अमरीका की घरेलू राजनीति का गन सेल्स पर प्रभाव रहता है. डेमोक्रेटिक कैंडिडेट्स को हथियार रखने के अधिकारों पर अंकुश लगाने वालों के तौर पर देखा जाता है. दूसरी ओर, प्रेसिडेंट ट्रंप समेत रिपब्लिकन पार्टी के लोगों हथियार रखने के समर्थक माने जाते हैं.
प्रेसिडेंट ओबामा की दो बार जीत के बाद हथियारों की बिक्री में तेजी आई. यह बिक्री 2016 में टॉप पर पहुंच गई. उस दौरान हिलेरी क्लिंटन राष्ट्रपति चुनावों में बढ़त दर्ज कर रही थीं और ऐसा लग रहा था कि ट्रंप हार जाएंगे.
ट्रंप की जीत के बाद हथियारों की बिक्री में गिरावट आई.
मास शूटिंग्स की वजह से हथियार समर्थकों में यह चिंता पैदा हुई कि सरकार गन कंट्रोल के फैसले ले सकती है. इस वजह से भी असलहों और गोलियों की बिक्री में इज़ाफ़ा हुआ.
लिटन ने कहा, "लोगों की बेचैनी के स्तर में उतार-चढ़ाव के साथ-साथ हथियारों की खरीदारी भी घटती-बढ़ती रहती है."
वह कहते हैं कि आमतौर पर चिंता हथियारों तक पहुंच को लेकर रहती है. वह कहते हैं, "या इस मामले में एंग्ज़ाइटी सरकारी मशीनरी के कमजोर पड़ने या सरकार के बेहद ताकतवर होने को लेकर पैदा हो रही है."
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