BBC Hindi: बीते हफ़्ते की वो ख़बरें, जो शायद आप मिस कर गए

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नमस्ते.

उम्मीद है कि आप अच्छे होंगे, खुश होंगे.

हम जानते हैं कि रोज़मर्रा की आपा-धापी के बीच आपके लिए देश-दुनिया की हर ख़बर पर नज़र रखना मुश्किल होता होगा.

ऐसे में हम लाए हैं बीते सप्ताह की कुछ दिलचस्प और अहम ख़बरें, जिन पर शायद आपकी नज़र ना गई हो.

ये पाँच ख़बरें आपने पढ़ लीं तो ये समझिए कि आप पूरी तरह से अपडेटेड हो गए.

सऊदी अरब का यह फ़ैसला क्या भारत के लिए चिंता बढ़ाने वाला है?

दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देश सऊदी अरब और सर्वाधिक ऊर्जा खपत वाले देश चीन के बीच रिश्तों का आधार अभी तक तेल ही रहा है, लेकिन अब इन दोनों देशों के बीच रिश्तों की तस्वीर बदल रही है.

शनिवार-रविवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में हुए 10वें अरब-चीन व्यापार सम्मेलन में दोनों देशों ने अपने रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश की है.

इस सम्मेलन में दोनों देशों के बीच दस अरब डॉलर के समझौते हुए हैं.

पिछले हफ़्ते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सऊदी अरब के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन-सलमान ने फ़ोन पर बात की थी. दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की थी.

सऊदी अरब ने श्रीनगर में जी-20 की एक बैठक में अपने प्रतिनिधि को नहीं भेजा था. श्रीनगर में जी-20 की बैठक कराने पर पाकिस्तान ने आपत्ति दर्ज कराई थी. पूरी कहानी यहां पढ़ें.

बड़े मुकाबलों में क्यों पिट जाती है टीम इंडिया?

तो आखिरकार वही हुआ जिसका हर किसी को डर था. एक असंभव सी जीत का सपना लेकर मैच के आखिरी दिन टीम इंडिया की बल्लेबाज़ी ताश के पत्तों की तरह ऐसी बिखरी जिससे 1990 के दशक वाली कमज़ोर भारतीय टीमों की यादें ज़ेहन में दोबारा ताजा हो गई.

जीतना तो दूर की बात, टीम इंडिया मैच को दूसरे सत्र तक भी ले जाने में नाकाम रही और विराट कोहली जैसे दिग्गज बल्लेबाज़ एक बार फिर से दुनिया के सबसे बड़े प्लेटफॉर्म पर नाकाम हुए.

अगर टीम इंडिया ने पिछले एक दशक में कोई भी आईसीसी ट्रॉफी नहीं जीती है तो इसमें एक बड़ी वजह कोहली जैसे बल्लेबाज़ का हर अहम नॉक-ऑउट मैचों में नाकाम होना है. पूरी कहानी यहां पढ़ें.

कोलंबिया के घने जंगलों में 40 दिन तक कैसे ज़िंदा रहे ये चार बच्चे?

शुक्रवार 9 जून की रात, कोलंबिया के घने जंगलों के बीच से सेना के वाकी टॉकी पर ज़िंदगी की वो गूंज सुनाई दी जिसके लिए पूरा देश दुआ मांग रहा था: 'चमत्कार, चमत्कार, करिश्मा, चमत्कार!'

वॉकी टाकी पर सेना के कोडेड संदेश से लोगों को पता चला कि पिछले 40 दिनों से घने जंगलों के बीच जो चार बच्चे लापता थे, वो मिल गए हैं... ज़िंदा और सही सलामत.

ये चारों बच्चे, कोलंबिया के हुईतोतो आदिवासी समुदाय के हैं. सभी बच्चे एक मई को हुए विमान हादसे के वक़्त से लापता थे. चारों बच्चे उस हल्के विमान में सफ़र कर रहे थे, जो एक मई को तड़के अमेज़न के घने जंगलों के बीच दुर्घटना का शिकार हो गया था.

इस हादसे में बच्चों की मां की मौत हो गई थी. जिसके बाद 13 साल, 9 बरस, चार साल और एक साल के ये बच्चे उन घने जंगलों के बीच फंस गए थे, जहां पर ज़हरीले सांपों, ख़तरनाक जगुआर और मच्छरों का बसेरा है.

राहत और बचाव करने वालों को शुरुआत में लगा था कि विमान हादसे में इन चारों बच्चों की भी मौत हो गई है.

लेकिन, जंगल में बच्चों के पैरों के निशान, अधखाए जंगली फलों और दूसरे सुराग़ों ने बचाव टीमों के बीच ये उम्मीद जगा दी कि विमान दुर्घटना के बाद शायद ये बच्चे ज़िंदा बच गए और मदद मांगने के लिए हादसे वाली जगह से दूर चले गए. पूरी कहानी यहां पढ़िए.

नसीरुद्दीन शाह ने पाकिस्तान के सिंधियों से क्यों मांगी माफ़ी

नसीरुद्दीन शाह भारतीय फ़िल्म जगत के अब तक के सबसे अनुभवी अभिनेताओं में से एक हैं लेकिन उनका विवादों से चोली दामन का नाता रहा है.

वह अपनी बेबाक टिप्पणियों के कारण अतीत में विवादों का केंद्र रहे हैं.

उनके शब्दों के तीर से न तो दिलीप कुमार बच सके और न ही भारत के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना या फिर साथी अदाकार अनुपम खेर.

नसीरुद्दीन शाह ने कभी भी अपनी बात कहने से परहेज़ नहीं किया चाहे वह किसी के ख़िलाफ़ ही क्यों न हो और वह अपनी बात पर टिके रहने के लिए भी जाने जाते हैं.

लेकिन हाल ही में उन्होंने सिंधी भाषा पर दिए एक विवादास्पद बयान पर माफ़ी मांगी है, जिस पर कई पाकिस्तानियों ने उन्हें सराहा है. दूसरी और उन्हें भारत में मराठी भाषा को फ़ारसी से जोड़ने पर भी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. पूरी कहानी यहां पढ़ें.

भारत में डायबिटीज़ पर लैंसेट की रिपोर्ट डराने वाली क्यों

लैंसेट के एक ताज़ा शोध अध्ययन के मुताबिक़ भारत में 10.1 करोड़ लोग डायबिटीज़ से ग्रसित हैं.

वहीं भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के एक सर्वे के मुताबिक भारत में 13.6 करोड़ लोग प्री-डायबिटीज़ के साथ जी रहे हैं.

टाइप-2 डायबिटीज़ इस बीमारी का सबसे सामान्य रूप है.

डायबिटीज़ में लोगों के शरीर में ब्लड शुगर की मात्रा बढ़ जाती है क्योंकि शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन हार्मोन का निर्माण नहीं कर पाता है. इस हार्मोन के सही से काम नहीं कर पाने से भी डायबिटीज़ होती है.

द लैंसेट डायबिटीज़ एंड एंडोक्राइनोलॉजी में प्रकाशित इस शोध को भारत के प्रत्येक राज्य को व्यापक रूप से कवर करने वाला पहले शोध माना जा रहा है, जिसमें देश पर असंक्रामक रोगों के बोझ का आकलन किया गया है.

शोधकर्ताओं का मानना है कि भारत की आबादी में डायबिटीज़ का प्रसार पूर्व में लगाए गए अनुमानों से कहीं अधिक है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान था कि भारत में 7.7 करोड़ लोग डायबिटीज़ से ग्रसित होंगे और लगभग 2.5 करोड़ प्री-डायबिटीज़ की स्थिति में होंगे. नज़दीकी भविष्य में डायबिटीज़ होने के ख़तरे को प्री-डायबिटीज़ कहा जाता है. पूरी कहानी यहां पढ़िए.

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