ब्याज दरें घटाने का फ़ैसला वापस, निर्मला सीतारमण के मंत्रालय की 'भूल' पर क्या बोले विपक्षी नेता

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भारत सरकार ने छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरें घटाने के अपने फ़ैसले को 24 घंटे से भी कम समय में वापस ले लिया जिसकी सोशल मीडिया पर ख़ासी चर्चा हो रही है. साथ ही विपक्ष के नेताओं ने भी इस पर तंज़ कसा है.
सरकार ने बुधवार को वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में कटौती करने का ऐलान किया था.
लेकिन गुरुवार सुबह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे 'भूल से जारी हुआ आदेश' बताकर रद्द कर दिया. उन्होंने कहा कि ब्याज दरें पहले की तरह ही बनी रहेंगी. एक ट्वीट के ज़रिये उन्होंने इसकी जानकारी दी है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लिखा, "छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज की दरें वही रहेंगी, जो पिछली तिमाही में थीं. इस संबंध में भूल से जो आदेश जारी किया गया था, उसे वापस लिया जाता है."
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बुधवार को वित्त मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर यह कहा था कि 'छोटी बचत योजनाओं, जैसे सेविंग डिपोज़िट और फ़िक्स्ड डिपोज़िट समेत पीपीएफ़ (पब्लिक प्रोविडेंट फंड), सीनियर सिटिज़न सेविंग सर्टिफ़िकेट (एससीएसएस), नेशनल सेविंग सर्टिफ़िकेट (एनएससी), किसान विकास पत्र (केवीपी) और सुकन्या समृद्धि बचत योजना (एसएसवाई) के लिए ब्याज दरों में कमी की जाएगी और नई ब्याज दरें 1 अप्रैल 2021 से 30 जून 2021 तक लागू रहेंगी.'
पिछली तीन तिमाहियों में छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने के बाद सरकार की ओर से कटौती की यह पहली घोषणा थी.
लेकिन इस आदेश को एक रात में ही वापस ले लिया गया.
वित्त मंत्री ने 'भूल' को इसकी वजह बताया है, लेकिन विपक्षी पार्टियों के नेता और आम लोग इस पर तंज़ कस रहे हैं.
सीतारमण ने अपने ट्वीट में जिस अंग्रेज़ी शब्द 'oversight' (भूल) का ज़िक्र किया था, वो भी ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है.
विपक्ष के नेता क्या बोले
तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने ट्वीट किया, ''एक बार फिर शर्मिंदगी, क्योंकि मो-शा (मोदी-शाह) चुनावी रैलियों में ट्रकों से पंखुड़ियाँ फेंकने और अप्रैल फ़ूल के चुटकुलों वाले झूठे वादे करने में व्यस्त हैं.''
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कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट किया, ''क्या वाक़ई सरकार की स्कीम पर ब्याज दरें घटाने का फ़ैसला भूल से हुआ? या फ़ैसला वापस लेने की समझ चुनाव के कारण आयी है?''
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टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने ट्वीट किया, ''सबसे बड़ा अप्रैल फ़ूल का चुटकुला क्या है? ये कि छोटी बचत की स्कीम पर घटाई गई ब्याज दरों का फ़ैसला भूल से लिया गया था? या ये कि निर्मला सीतारमण देश की वित्तमंत्री हैं?''
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कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सवाल किया, ''माननीय वित्तमंत्री जी, आप सर्कस चला रही हैं या सरकार? लोग अर्थव्यवस्था का हाल समझ सकते हैं, जब करोड़ों लोगों को प्रभावित करने वाला फ़ैसला भूल से लिया जाता है. बतौर वित्तमंत्री आप पद पर बने रहने का अधिकार खो चुकी हैं.''
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लिखा है, "पेट्रोल-डीज़ल पर तो पहले से ही लूट थी, चुनाव ख़त्म होते ही मध्यम-वर्ग की बचत पर फिर से ब्याज कम करके लूट की जाएगी. जुमलों की झूठ की, ये सरकार जनता से लूट की!"
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सरकार के फ़ैसला वापस लेने पर आम लोगों की राय
सौरभ नाम के एक ट्विटर यूज़र ने लिखा, ''निर्मला सीतारमण ने फ़ैसला वापस लेने पर कहा- कैसा लगा मेरा मज़ाक?''
नीरव पांचाल लिखते हैं, ''ये यू-टर्न सरकार है. पाँच राज्यों के चुनावों के बाद यही फ़ैसला लागू करेंगे.''
कमलेश कुमार ने लिखा है कि ''मैडम वित्त मंत्रालय भूल से फ़ैसला कैसे कर लेता है? ज़िम्मेदार व्यक्ति को सज़ा दीजिए, ताकि वो मई में ये भूल दोबारा ना करे.''
अमन जैन लिखते हैं, ''निर्मला सीतारमण को दशक की बेस्ट परफ़ॉर्मिंग वित्त मंत्री का पुरस्कार एक अप्रैल को दिया जाना चाहिए.''
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