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छत्तीसगढ़ में कोवैक्सीन का टीकाकरण रोकने का क्या है पूरा मामला
- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, रायपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
- प्रकाशित
छत्तीसगढ़ में कोरोना के टीके को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है.
राज्य में कोरोना टीका के क्लिनिकल ट्रायल की ख़बरों के बीच स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा है कि कोवैक्सीन के तीसरे चरण के परिणाम जब तक नहीं आ जाते, तब तक इसके टीकाकरण की अनुमति नहीं दी जा सकती.
टीएस सिंहदेव ने पिछले महीने और फिर इस महीने की 8 तारीख़ को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन को कोवैक्सीन नहीं भेजने के लिए चिट्ठी भी लिखी थी.
अब इसके जवाब में डॉक्टर हर्षवर्धन ने अपनी एक चिट्ठी ट्विटर पर पोस्ट करते हुए टीएस सिंहदेव से कहा है कि "इस तरह के अभूतपूर्व समय में, आपको किसी भी टीके की हिचकिचाहट को दूर करने में मदद करनी चाहिए और निहित स्वार्थ के बजाये जनहित में काम करना चाहिए."
इस ट्वीट के बाद टीएस सिंहदेव ने एक के बाद एक, पांच ट्वीट कर कोवैक्सीन को लेकर अपनी चिंता फिर से दुहराई है.
टीएस सिंहदेव ने बीबीसी से कहा-"यह एक गंभीर विषय है. जब तक इस टीके के परीक्षण के तीसरे चरण के परिणाम नहीं आ जाते, उसके उपयोग की अनुमति देना सही नहीं है. हम राज्य की जनता की जान को ख़तरे में नहीं डाल सकते. अब जबकि कोरोना की लहर थोड़ी कम हुई है, तब कोरोना के टीकाकरण के नाम पर किसी भी तरह की हड़बड़ी उचित नहीं है."
इधर विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार निजी कंपनी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कोवैक्सीन का विरोध कर रही है.
दूसरी ओर एक निजी कंपनी ने इस टीके के क्लिनिकल ट्रायल की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. इसके लिए कई गांवों में स्वयंसेवकों को तैयार किया गया है और उनसे अनुबंध किये गये हैं.
विवाद कहां से हुआ शुरू
भारत में पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर कोरोना का टीका कोविशील्ड बनाया है. वहीं कोवैक्सीन टीके का निर्माण भारत बायोटेक ने किया है.
कोरोना वायरस के टीकों का तीन चरणों में परीक्षण किया जाना था. कोविशील्ड के तीनों चरणों के परीक्षण परिणाम तो सामने आये परंतु कोवैक्सीन के तीसरे चरण के परिणाम अब तक सामने नहीं आये हैं.
इस साल जनवरी में भारत सरकार ने दोनों ही टीकों को उपयोगी मानते हुये जब देश भर में टीकाकरण की शुरुआत की, उसी समय छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कोवैक्सीन का विरोध किया था.
टीएस सिंहदेव कहते हैं-"अगर तीन चरणों में परीक्षण का प्रावधान है तो बिना तीनों चरण के परीक्षण और उसके परिणाम के किसी को टीका लगाना सुरक्षित नहीं है. इसी आधार पर मैंने पिछले महीने की 21 तारीख़ को देश के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन को पत्र लिखकर तीसरे चरण के परिणाम आने तक, कोवैक्सीन का टीका नहीं भेजने का अनुरोध किया था. लेकिन कोविशील्ड के साथ-साथ कोवैक्सीन का टीका भी छत्तीसगढ़ भेज दिया गया."
टीएस सिंहदेव, कोवैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल पर सवाल उठाते हुए टीका लगाये जाने से पहले भरे जाने वाले सहमति पत्र का हवाला दे रहे हैं.
सिंहदेव कहते हैं-"कोविशील्ड के साथ किसी तरह के सहमति पत्र को भरने की अनिवार्यता नहीं है. लेकिन कोवैक्सीन के साथ सहमति पत्र भरना ज़रूरी है. इस सहमति पत्र में साफ़-साफ़ लिखा गया है कि कोवैक्सीन की क्लिनिकल प्रभावकारिता अभी स्थापित नहीं की गई है और क्लिनिकल ट्रायल के तीसरे चरण का अभी भी अध्ययन किया जा रहा है."
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राजनीति भी हुई शुरू
टीएस सिंहदेव ने इसके बाद सोमवार को फिर से डॉक्टर हर्षवर्धन को एक चिट्ठी लिखकर तीसरे चरण के परीक्षण परिणाम तक कोवैक्सीन नहीं भेजने का अनुरोध किया.
गुरुवार को इसका जवाब देते हुए डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा कि तमाम मंज़ूरी के बाद आपात स्थिति में कोवैक्सीन के टीकाकरण को मंज़ूरी दी गई है.
डॉक्टर हर्ष वर्धन ने अपनी चिट्ठी में लिखा- "टीकों की पर्याप्त आपूर्ति छत्तीसगढ़ में पहुँचाई गई है, जिसके ख़िलाफ़ राज्य में केवल 9.55% फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीका लगाया गया है जो चिंता का विषय है. श्री टीएस सिंह देव जी, ग़ैर-मुद्दों को सनसनीखेज़ बनाने के बजाय कृपया राज्य में वैक्सीन कवरेज में सुधार पर ध्यान दें."
इसके अलावा हर्षवर्धन ने अपनी चिट्ठी ट्विटर पर भी पोस्ट की और टीएस सिंहदेव को जनहित में काम करने की सलाह दी.
इसके बाद टीएस सिंहदेव ने एक के बाद एक, पांच ट्वीट करते हुए अपनी चिंता ज़ाहिर की.
उन्होंने अपने ट्वीट में राज्य में 71.60 फ़ीसदी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के टीकाकरण का हवाला देते हुए कहा है कि राज्य में टीकाकरण प्रगति पर है और टीकाकरण की प्रतिशतता बढ़ेगी.
सिंहदेव ने कोरोना के टीकाकरण के बजाये, नाक में डाले जाने वाली दवा से संबंधित एक ख़बर के साथ ट्विटर पर लिखा है-" श्रीमान, जबकि दुनिया अधिक प्रभावी और कुशल टीकाकरण विकल्पों की दिशा में आगे बढ़ रही है, न केवल क्षमता में बल्कि कार्यान्वयन में भी, ऐसे में क्या सामान्य समुदाय की थोड़ी सी भी शंका को नज़रअंदाज़ करते हुए प्रक्रिया में भाग लेना बुद्धिमानी है!"
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राज्य सरकार का विरोध
इन विवादों के बीच छत्तीसगढ़ में विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने भी टीएस सिंहदेव को घेरने की कोशिश शुरू कर दी है.
राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक का कहना है कि टीएस सिंहदेव कोरोना टीकाकरण के नाम पर राजनीति कर रहे हैं और उनकी यह कोशिश आम लोगों को मुश्किल में डालने वाली साबित होगी.
धरमलाल कौशिक ने आरोप लगाते हुए कहा-"कोवैक्सीन का निर्माण सरकारी कंपनी ने किया है. लेकिन टीएस सिंहदेव सरकारी कंपनी के ही उत्पाद पर सवाल खड़े कर रहे हैं. प्राइवेट कंपनियों को प्रमोट करेंगे और सरकारी कंपनियों पर आपको भरोसा नहीं है. इसमें संदेह उत्पन्न होता है."
हालांकि कोवैक्सीन के तीसरे चरण के परीक्षण परिणाम अभी तक लंबित रहने और टीकाकरण के साथ क्लिनिकल ट्रायल पर कोई भी टिप्पणी नहीं करना चाहता.
छत्तीसगढ़ में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर महेश सिन्हा कहते हैं-"देश में दोनों वैक्सीन को आपातकालीन स्थिति में उपयोग के लिए अनुमति दी गई है. दुनिया भर में कोरोना के जितने भी वैक्सीन आये हैं, उनके अंतिम परिणाम का अभी तक पता नहीं है."
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