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डॉक्टर करते रहे ऑपरेशन और लड़की बजाती रही पियानो
- Author, शुरैह नियाज़ी
- पदनाम, भोपाल से बीबीसी हिंदी के लिए
- प्रकाशित
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक अनोखे तरीक़े से नौ साल की बच्ची पर ऑपरेशन किया गया. इस ऑपरेशन के ज़रिए ब्रेन ट्यूमर निकाला गया और इस दौरान बच्ची पियानो बजाती रही.
यह ऑपरेशन ग्वालियर के बिरला अस्पताल में डॉक्टर अभिषेक चौहान ने शुक्रवार को किया. डॉक्टर ने ऑपरेशन करके सिर की हड्डी से ट्यूमर निकाल दिया और अब बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है.
मुरैना ज़िले के बानमोर में रहने वाली सौम्या को मिर्गी आती थी. सौम्या पिछले दो सालों से मिर्गी की चार दवाएं ले रही थीं लेकिन उन्हें कोई फ़ायदा नहीं हो रहा था.
लगभग एक साल पहले पता चला की उन्हें ब्रेन ट्यूमर है. परिवार इसका ऑपरेशन करवाने के लिए तैयार नहीं था क्योंकि यह ऑपरेशन न सिर्फ़ काफ़ी मुश्किल था बल्कि जोख़िम भरा भी था. वहीं यह भी आशंका थी कि बच्ची ज़िंदगी भर के लिए अपंग हो सकती है.
परिवार ने हाल ही में जब दोबारा से बच्ची के मस्तिष्क की जाँच करायी तो पता चला कि ट्यूमर का आकार पहली बार की जाँच से लगभग चार गुना बढ़ गया है.
परिवार ये सर्जरी किसी बड़े शहर में करवाना चाहता था लेकिन उन जगहों पर सर्जरी कराने का ख़र्च ग्वालियर की तुलना में तीन गुना अधिक आ रहा था. इसी वजह से परिवार ने ग्वालियर में ही ऑपरेशन कराने का फ़ैसला लिया.
ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर अभिषेक चौहान ने बीबीसी को बताया, "यह एक मुश्किल ऑपरेशन था और इसमें ज़रा सी भी गड़बड़ी होने पर बच्ची की जान के साथ ही दूसरी दिक़्क़तों की आशंका बहुत ज़्यादा थी."
बिरला अस्पताल के मुताबिक़, पूरे विश्व में इतने छोटे बच्चे के ऑपरेशन का इस तरह का यह दूसरा मामला है, जिसमें ब्रेन ट्यूमर के ऑपरेशन के दौरान नौ वर्षीय बच्ची पियानो बजाती रही.
डॉक्टर अभिषेक ने बताया, "यह ऑपरेशन अवेक क्रेनोटामी पद्धति से किया गया. कभी-कभी ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क के ऐसे हिस्से में होता है कि उसके पास ही ब्रेन का वह हिस्सा होता है जो कि शरीर के उन कार्यों को नियंत्रित करता है जो हमारे लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं."
उन्होंने आगे बताया, "ट्यूमर को सर्जरी से निकलते समय मस्तिष्क का कुछ मिलीमीटर अतिरिक्त हिस्सा अगर निकल जाये तो मस्तिष्क के उस हिस्से से नियंत्रित होने वाले काम फिर कभी नहीं किये जा सकते."
डॉक्टर अभिषेक ने बताया, "अवेक क्रेनोटामी में रोगी को बेहोश नहीं करते. केवल सर्जरी वाले भाग को सुन्न किया जाता है और न्यूरोसर्जन ट्यूमर निकालते समय रोगी से कोई न कोई गतिविधि करवाते रहते हैं. जैसे ही सर्जरी में प्रयुक्त उपकरण मस्तिष्क के उपयोगी हिस्से को छूता है उस हिस्से द्वारा नियंत्रित गतिविधि रुक जाती है और सर्जन को तत्काल पता चल जाता है और वो सतर्क हो जाते हैं."
इस तरह से मस्तिष्क के उपयोगी हिस्से को बग़ैर किसी नुक़सान पहुंचे, ब्रेन टयूमर निकाल दिया जाता है.
इंटरनेट पर मौजूद जानकारी के अनुसार अभी तक पूरी दुनिया में इससे छोटे एक ही बच्चे का ऐसा ऑपरेशन किया गया था. यह ऑपरेशन बेंगलुरू में किया गया था. बच्चों का इस तरह का ऑपरेशन करना काफ़ी जटिल होता है.
डॉक्टर अभिषेक ने बताया कि बच्ची अब पूरी तरह से सामान्य है और उसको अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई है.
सौम्या के मामा सूरज सिंह ने बीबीसी को बताया कि अब पूरा परिवार ख़ुश है.
उन्होंने कहा, "उसका ट्यूमर लगातार बढ़ रहा था और अगर वो एक भी समय दवाई नहीं लेती थी तो उसे दौरे आना शुरु हो जाते थे. लेकिन अब ऑपरेशन के बाद वो अच्छी है."
सौम्या चौथी कक्षा में पढ़ती हैं. उसका परिवार अब उम्मीद कर रहा है कि सौम्या अब आम बच्चों की तरह रह पायेंगी.
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