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कोरोना संक्रमण: टिफ़िन सेंटर बना दो की मौत की वजह, 56 पुलिसकर्मी क्वारंटीन
- Author, अनूप दत्ता
- पदनाम, भोपाल से, बीबीसी हिन्दी के लिए
- प्रकाशित
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में 8 अप्रैल की शाम को जब कोविड-19 का पहला मामला सामने आया तो जिला प्रशासन ने तत्काल सख़्ती शुरू कर दीं और लोगों से घर से बाहर न निकलने की अपील की.
प्रशासन ने मरीज़ को भोपाल एम्स भेज दिया और उनके संपर्क में आए लगभग सभी लोगों को क्वारंटीन कर दिया. भोपाल और रायसेन की दूरी लगभग 47 किलोमीटर है.
इस बीच झुग्गी झोपड़ियों और तंग गलियों से बेख़बर जिला मुख्यालय के वार्ड नंबर 7 के एक घर में चल रहे टिफिन सेंटर में रोजाना की तरह खाना तैयार किया जाता रहा. यहां बनने वाला खाना पुलिसकर्मियों को जाता था.
टिफ़िन सेंटर में अच्छा खाना तैयार करने की जिम्मेदारी परिवार के बड़े बेटे पर थी जो पांच अन्य लोगों की मदद से खाना तैयार करवाते थे.
ये लोग उन वार्ड से आते थे, जिनकी तंग गलियों के बीच बसे घरों से लगातार कोरोना संक्रमण के मामले सामने आ रहे थे. लेकिन घर के एक हिस्से में स्थित यह टिफ़िन सेंटर लगातार चल रहा था. घर के दूसरे हिस्से में टिफ़िन सेंटर मालिक के परिवार के लोग रहते थे. उनके परिवार में माता-पिता और पत्नी के अलावा दो छोटे भाई, उनकी पत्नियां और तीन बच्चे रहते थे.
अचानक बिगड़ी तबीयत
20 अप्रैल को अचानक टिफ़िन सेंटर के मालिक की तबीयत बिगड़ गई.
सेंटर मालिक के छोटे भाई ने मुझे बताया, ''सर्दी-जुकाम और गले में दर्द की शिकायत पर मैं अपने बड़े भाई को जिला अस्पताल ले गया. उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी. उनको कोरोना का संभावित मरीज़ बताकर एक इंजेक्शन दिया गया और उन्हें सामान्य बताकर घर रवाना कर दिया."
वो कहते हैं, ''दो दिन बाद जब उनकी हालत में कोई बदलाव नहीं आया तो उन्हें कोविड-19 का संभावित मरीज़ बताकर जिला अस्पताल के जनरल वार्ड में भर्ती कर लिया गया. सांस लेने में उनकी तकलीफ बढ़ रही थी. 23 अप्रैल को हालत बिगड़ने पर उनकी पत्नी के साथ उन्हें भोपाल भेजा गया जहां उन्हें हमीदिया अस्पताल के कोविड-19 वार्ड में भर्ती किया गया.''
इस बीच दूसरे भाई की तबीयत बिगड़ने लगी तो उन्हें वापस रायसेन जाना पड़ा.
वो कहते हैं "24 अप्रैल की सुबह करीब 5 बजे वार्ड से सूचना आई कि बेड नंबर 4 के मरीज़ की मौत हो गई."
लॉकडाउन के चलते टिफ़िन सेंटर मालिक के भाई भोपाल नहीं पहुंच पाए. इन परिस्थितियों में पत्नी को ही पति का अंतिम संस्कार करना पड़ा.
इस बीच दूसरा भाई जिसकी तबीयत खराब थी उसे हालत बिगड़ने पर रायसेन जिला चिकित्सालय से भोपाल रेफर कर दिया गया.
"रात 12 बजे के करीब वो हमीदिया अस्पताल के कोविड-19 वार्ड में भर्ती हो चुके थे और 25 अप्रैल की रात लगभग 12 बजे उनकी भी मौत हो गयी."
टिफ़िन सेंटर से अचानक फैले कोरोना संक्रमण ने दो दिन में 12 सदस्यों के एक परिवार के दो लोग छीन लिए.
सदमे से गुज़र रहे परिवार के सदस्यों को दो जिलों के तीन अलग-अलग अस्पतालों में क्वारंटीन किया गया.
दूसरे भाई के अंतिम संस्कार के बाद जब उसकी पत्नी बेहोश हुई तो उन्हें राजधानी के एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया. इलाज के दौरान उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव निकली तो उन्हें इसी अस्पताल में क्वारंटीन किया गया.
इस बीच रायसेन जिला प्रशासन ने टिफ़िन सेंटर मालिक के 70 साल के पिता और 65 साल की मां माता को एम्स भोपाल में शिफ्ट कर दिया.
टिफ़िन सेंटर मालिक भाई ने बताया, ''मुझे, मेरी बड़ी भाभी और उनके दो बच्चे, छोटी भाभी का एक बेटा, मेरी पत्नी और हमारी 9 दिन की नवजात बच्ची को रायसेन जिला चिकित्सालय में भर्ती कर क्वारंटीन कर दिया गया." एक ही परिवार में हुई दो मौतों ने प्रशासन को एक्शन लेने पर मजबूर कर दिया.
जिला कलेक्टर उमाशंकर भार्गव ने अनाधिकृत तौर पर इलाज करने वाले एक स्वास्थ्यकर्मी को निलंबित कर दिया और जिला चिकित्सालय के चिकित्सा अधिकारी से भी जवाब तलब किया.
इसके साथ ही टिफ़िन सेंटर का खाना खाने वाले पुलिसकर्मियों को क्वारंटीन कर दिया गया. रायसेन की एसपी मोनिका शुक्ला के मुताबिक, कुल 56 पुलिसकर्मियों को भी क्वारंटीन किया गया है.
टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद परिवार के बाकी 10 सदस्य अस्पताल से घर लौटे और क्वारंटीन हो गए.
रायसेन के इस घटना ने मध्यप्रदेश सरकार के कोरोना की जंग लड़ने की सच्चाई को उजागर कर दी.
जन स्वास्थ्य अभियान से जुड़े और स्वास्थ्य विशेषज्ञ अमूल्य निधि का मानना है कि रायसेन जिला प्रदेश के उन जिलों में से एक है जिनका नाम कोरोना सैंपल लेने के मामले में सबसे खराब है.
वो बताते हैं कि भोपाल और इंदौर के अलावा प्रदेश के लगभग सभी ज़िलों में रोज़ाना औसतन 35 लोगों के सैंपल लिए गए. इससे स्थिति स्पष्ट है कि प्रशासन ने कोरोना के सैंपल लेने में देरी की और समस्या गंभीर बन गई.
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