प्रह्लाद जानी: माताजी ने 79 साल से नहीं लिया था 'अन्न-जल'?

    • Author, तेजस वैद्य
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

चुंडीवाले माताजी के नाम से प्रसिद्ध गुजरात के अंबाजी में रहने वाले प्रह्लाद भाई जानी का निधन 91 वर्ष की आयु में मंगलवार को हुआ. 79 सालों से उन्होंने खाना पीना त्याग रखा था और उनका दावा था कि ध्यान (मेडिटेशन) से उन्हें ऊर्जा मिलती है.

उनकी मौत की ख़बर पर गुजरात के मुख्यमंत्री ने श्रद्धांजलि देते हुए ट्विटर पर लिखा कि "सालों से खाना पीना त्याग देने वाले माता जी वैज्ञानिकों के लिए भी शोध का विषय थे."

उनके बहुत सारे फॉलोवर्स ने सोशल मीडिया पर इनसे जुड़े मैसेजेस पोस्ट किए जिससे यह ट्रेंड में भी रहा.

गुजरात के क़ानून और शिक्षा मंत्री भूपेंद्र सिंह चुडासमा ने श्रद्धांजलि देते हुए ट्विटर पर लिखा, "1929 में पैदा होने के बाद सिर्फ़ 12 साल की उम्र में माताजी ने खाना पीना छोड़ दिया था."

भूपेंद्रसिंह चुडासमा ने ये भी लिखा कि माताजी से मिलने वो अंबाजी स्थित उनके आश्रम गए थे और माताजी भी उनके गांधीनगर के दफ़्तर में आए थे.

सालों से एकांतवास में रहते प्रहलाद जानी कोई चमत्कारी पुरुष थे या मेडिकल रहस्य इस विषय पर 2010 में एक शोध किया गया था.

कोई व्यक्ति इतने सालों के बिना पानी खुराक के कैसे जी सकता है, इस पर अहमदाबाद में डॉक्टर्स की एक टीम ने जांच की थी और उसमें सेना भी दिलचस्पी ले रही थी.

15 दिनों तक चला टेस्ट

अहमदाबाद में 2010 में 22 अप्रैल से 06 मई तक यानी कि 15 दिन तक प्रह्लाद जानी को स्टर्लिंग अस्पताल में रखा गया जिसमें डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ़ फिजियोलॉजी एंड एप्लाइड साइंसेज के निदेशक डॉ जी. इलावलगान, न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर शाह, डॉ. उरमन ध्रुव (परामर्श चिकित्सक और मधुमेह विशेषज्ञ), डॉ. हिमांशु पटेल (नेफ्रोलॉजिस्ट) जैसे लोगों ने उनका परीक्षण किया था.

इस जांच के दौरान प्रहलाद जानी की लगातार 24 घंटे सीसीटीवी कैमरे से और व्यक्तिगत तौर पर भी सुपरविजन किया गया. उनका एमआरआई, अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे किया गया. साथ ही उनपर क्लीनिकल, बायोकेमिकल और रेडियोलॉजिकल परीक्षण भी किए गए.

जांच दौरान प्रह्लाद जानी ने एक बार भी न कुछ खाया न पीया ही था. न ही इस दौरान उन्होंने मल मूत्र ही त्याग किया था.

इस परीक्षण के बाद डॉ. सुधीर शाह ने पत्रकारों को ये बताया था कि, ''हम बीते 100 से अधिक समय से माताजी का अवलोकन (ऑबजर्व) कर रहे हैं. इस दौरान न तो उन्होंने कुछ भोजन, पानी लिया और न ही उन्होंने मल मूत्र का त्याग ही किया."

डॉ जी. इलावलगान ने उस समय कहा था कि, "प्रहलाद जानी सालों से बिना भोजन और पानी किए हैं. सेना के जवान रेगिस्तान जैसी कठिन भौगोलिक स्थिति में तैनात किए जाते हैं. ऐसी परिस्थितियों में खान पान में तक़लीफ होना आम सी बात है. ऐसे में कैसे टिके रहना है यह जानने के लिए ही हमने इस शोध में रुचि दिखाई."

हालांकि, तब डॉक्टरों की ओर से यह भी कहा गया कि अस्पताल में किए गए इन परीक्षणों की अपनी सीमाएं हैं. आने वाले कुछ और समय में प्रहलाद जानी पर कुछ और शोध किए जाने हैं. इसके लिए उनका घर पर होना ज़रूरी है.

डॉ जी. इलावलगान जब प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे तब हार्ट केयर फाउंडेशन के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल ने एक न्यूज़ चैनल के माध्यम से इलावलगान को कहा था कि आप एक डॉक्टर नहीं फिजियोलॉजिस्ट हैं. ऐसे मुद्दे पर कोई बयान देने से आपको बचना चाहिए और आपकी विश्वसनीयता को जोख़िम में नहीं डालना चाहिए.

दावे पर उठते सवाल

इसके जवाब में इलावलगान ने कहा था, "हम कोई दावा नहीं कर रहे हैं, हम सिर्फ़ यह जानना चाहते हैं कि अगर बिना खाए पीये कोई व्यक्ति जीवित रह रहा है तो ये कैसे संभव है."

प्रहलाद जानी मूल रूप से मेहसाणा के चराडा गांव के रहने वाले थे. इस साल मार्च में, सोशल मीडिया पर अफ़वाह फैली कि उनका निधन हो गया है. जिसका खंडन करते हुए अंबाजी माता देवस्थान ट्रस्ट ने कहा था कि माताजी चैत्र नवरात्रि के अवसर पर मौन धारण कर एक गुफ़ा में बैठे थे.

माथे पर टीका, नाक में नथ, लाल रंग के वस्त्र और सफ़ेद दाढ़ी माताजी की पहचान थी.

गुजरात के एक तर्कशास्त्री पीयूष जादूगर ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "ये उनका दावा था कि वो खाते पीते नहीं थे लेकिन और एक केस स्टडी के तौर पर अपने शरीर का अध्ययन करवाने की ज़रूरत थी लेकिन उन्होंने ऐसा होने नहीं दिया. ये ऐसा सवाल है जिसका जवाब हमारे पास अब नहीं है. उन्होंने ये भी दावा किया था कि वो 300 साल जिएंगे लेकिन वह दावा ग़लत साबित हो चुका है. सामान्य जीवन गुजारने वाले व्यक्ति भी तो 100 साल जीवित रह ही लेते हैं."

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