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कोरोना: झांसी में सरकारी मंडी में तरबूज़ के किसानों को जाने से रोका, लगाया ताला
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, लखनऊ से बीबीसी हिंदी के लिए
- प्रकाशित
लॉकडाउन और मौसम की बेरुख़ी ने किसानों को पहले से ही परेशान कर रखा है, अब उन्हें सरकारी कर्मचारियों की मनमानी का भी शिकार होना पड़ रहा है. झांसी में तरबूज़ की खेती करने वाले सैकड़ों किसानों को मंडी में प्रवेश करने से ही रोक दिया जिससे ग़ुस्साए किसानों ने सड़क के दोनों ओर तरबूज़ लदे ट्रैक्टरों की लाइन लगा दी.
झांसी ज़िले में मऊरानीपुर की मंडी में रविवार को जब किसान अपने तरबूज़ बेचने के लिए मंडी पहुंचे तो किसानों को देखते ही मंडी में ताला लगा दिया गया और उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया. ग़ुस्साए सैकड़ों किसानों ने जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी थीं, मंडी के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया.
प्रदर्शन में पहुंचे एक किसान अयोध्या प्रसाद ने बीबीसी को बताया, "हम लोग फ़सल को तैयार करने के लिए दिसम्बर से ही मेहनत कर रहे हैं और आज जब ये तैयार हो गई है तो मंडी में इसे बेचने से मना किया जा रहा है. अब स्थानीय मंडी में ही हमारी उपज नहीं बिक पाएगी तो किसान क्या करेगा. हम इसी के भरोसे रहते हैं, खाएंगे क्या. हमारी तो लागत भी नहीं निकल पाएगी."
किसानों का आरोप है कि मंडी में पिछले कई दिनों से किसान तरबूज़ लाकर बेच रहे थे लेकिन रविवार को अचानक मंडी के गेट पर ताला लगा दिया गया. रविवार को मऊरानीपुर तहसील क्षेत्र के सैकड़ों किसान जब ट्रैक्टरों में तरबूज़ लादकर मंडी पहुंचे तो वहां तैनात कर्मचारियों ने उन्हें मंडी के अंदर जाने से मना कर दिया. इसके बाद किसानों ने अपने ट्रैक्टर सड़क के किनारे खड़े कर दिए और मंडी के गेट पर प्रदर्शन करने लगे.
मऊरानीपुर के मंडी सचिव रामकुमार साहू इसकी वजह सोशल डिस्टेंसिंग को बताते हैं.
उनका कहना है, "कोरोना वायरस के चलते उच्चाधिकारियों ने निर्देश दिया है कि सोशल डिस्टेंसिंग अपनाई जाए लेकिन किसानों ने अचानक भीड़ लगा दी. तरबूज़ ट्रैक्टर पर लादकर यहां जमा हो गए हैं. भीड़ न बढ़ने पाए इसलिए मंडी को बंद कर दिया गया. कुछ व्यापारियों ने किसानों को भ्रमित करके तरबूज़ मंडी में मँगा लिए जबकि यहां भीड़ लगाने से मना किया गया था."
बताया जा रहा है कि कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए झांसी ज़िले की मऊरानीपुर तहसील प्रशासन ने नवीन गल्ला मंडी को बंद करके एक अन्य सब्ज़ी मंडी खोलने की अस्थाई व्यवस्था की है लेकिन किसान यहीं आते हैं.
किसान नेता शिवनारायण सिंह परिहार बताते हैं, "सरकार कुछ कहती है, अधिकारी कर्मचारी कुछ कहते हैं. सरकार कहती है कि मंडियों में किसान अपनी फ़सल बेच सकते हैं. कई ट्रालियों में तरबूज़ लेकर किसान मऊरानीपुर मंडी में डेरा डाले हुए हैं. ये नहीं बिका तो सड़ जाएगा और फ़सल सड़ी तो किसान भूख से मर जाएगा. तहसीलदार ने हाथ खड़े कर दिए हैं. ये बेलगाम सिस्टम किसान की जान ले लेगा. हम तो यही कह रहे हैं कि सोशल डिस्टेंसिंग करो या कोई और नियम लगाओ लेकिन किसान की फ़सल तो ख़रीदो."
तरबूज़ किसान न सिर्फ़ अपनी उपज बेचने को लेकर परेशान हैं बल्कि कई जगहों पर खेतों में तरबूज़ सड़े जा रहे हैं. लॉकडाउन के अलावा पिछले कई दिनों से मौसम में बदलाव और कई बार हुई बारिश ने भी तरबूज़ की फ़सल को मंडियों तक और बाज़ारों तक पहुंचने से रोक दिया. गंगा, यमुना के अलावा अन्य नदियों के किनारे इस मौसम में तरबूज़, खीरा, ककड़ी, ख़रबूज़ा, लौकी जैसी सब्ज़ियों और फलों की पैदावार होती है.
प्रयागराज में क़रीब तीन बीघे खेत में तरबूज़ बोने वाले एक किसान मनोहर सिंह ने बताया कि उन्होंने साठ हज़ार से ज़्यादा की लागत लगाई थी लेकिन बाज़ार तक न पहुंच पाने के कारण तरबूज़ खेतों में ही ख़राब हो जा रहा है.
नदियों के किनारे हज़ारों एकड़ ज़मीन पर बोई गई इन सब्ज़ियों को उगाने वाले किसान परेशान हैं. किसान नेता शिवनारायण सिंह परिहार कहते हैं, "लॉकडाउन के चलते किसान बड़ी मंडी तक जा नहीं पा रहा है और गांवों में सब्ज़ियां बिक नहीं पा रही हैं. ऐसे में किसान परेशान है कि वह अपनी लागत कैसे निकाल पाएगा. कछार इलाक़ों में पैदा होने वाली इन फ़सलों को उगाने के लिए किसान जी-तोड़ मेहनत करते हैं. घड़े में पानी भरकर सिंचाई करते हैं क्योंकि रेत में पानी का और कोई साधन नहीं रहता. यदि सब्ज़ी और फल न बिक पाया तो सारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा."
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