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जम्मू और कश्मीर में सोशल मीडिया बहाल लेकिन टूजी मिलेगी स्पीड
आज यानी बुधवार को जम्मू और कश्मीर में सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया गया. लेकिन इंटरनेट की स्पीड अभी भी 2G ही रहेगी.
बीते साल पांच अगस्त को केंद्र सरकार ने जम्मू और कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया था और उस वक़्त से ही यहां इंटरनेट सेवा बाधित थी.
कई शर्तों के साथ इसी साल 25 जनवरी को जम्मू और कश्मीर में इंटरनेट सेवा शुरू की गई है लेकिन स्पीड 2G ही रखी गई. इंटरनेट सेवा शुरू किये जाने के साथ एक शर्त यह भी थी कि सोशल मीडिया पर प्रतिबंध बना रहेगा और साथ ही कुछ चुनिंदा वेबसाइट्स ही खुलेंगी.
आज जब जम्मू और कश्मीर में सोशल मीडिया को चालू किये जाने का आदेश आया तो यह बेशक कश्मीर में रह रहे लोगों के लिए राहत की बात रही. साथ ही इस आदेश में किसी चुनिंदा वेबसाइट का भी ज़िक्र नहीं है.
इससे पहले अधिकारियों की तरफ़ से जो आदेश आया था उसमें सिर्फ़ 16सौ वेबसाइट्स के ही एक्सेस को मान्यत दी गई थी.
हालांकि सोशल मीडिया को चालू तो ज़रूर कर दिया गया है लेकिन उसके इस्तेमाल को लेकर कुछ नियम व शर्तें भी हैं...
इंटरनेट की स्पीड 2G ही रहेगी जबकि पोस्टपेड सिम कार्ड का इस्तेमाल करने वालों के लिए इंटरनेट पर एक्सेस बना रहेगा. वहीं दूसरी ओर प्री-पेड सुविधा के लिए इंटरनेट तब तक उपलब्ध नहीं होगा जब तक की सारे वेरिफ़िकेशन ना हुए हों. ये वेरिफ़िकेशन ठीक वैसे ही होंगे जैसे किसी पोस्ट पेड कनेक्शन के लिए किये जाते हैं.
जारी आदेश में यह भी कहा गया है कि ये नियम और शर्तें आने वाले 17 मार्च तक लागू रहेंगी और इनमें इस दौरान संशोधन भी किया जा सकता है.
अभी तक अधिकतर कश्मीरी सोशल मीडिया पर बने रहने के लिए वीपीएन का इस्तेमाल कर रहे थे.
क ओर जहां कुछ कश्मीरी इस फ़ैसले से खुश हैं वहीं एक बड़ा तबक़ा यह भी मानता है कि प्रतिबंध हटा दिये जाने के बाद भी उन्हें कोई बहुत राहत नहीं मिलने वाली क्योंकि स्पीड तो ना के बराबर ही है.
सुप्रीम कोर्ट को करना पड़ा हस्तक्षेप
क़रीब सत्तर लाख लोगों की आबादी वाली कश्मीर घाटी में बीते साल अगस्त महीने से इंटरनेट बंद था. इंटरनेट बंद था तो सोशल मीडिया पर एक्सेस भी नहीं था.
इसके विरोध में कई जनहित याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट को भेजी गई थीं.
कश्मीरी पत्रकार अनुराधा भसीन ने सुप्रीम कोर्ट में इंटरनेट पर जारी पाबंदियों को हटाने के लिए याचिका दाख़िल की थी. जिसके बाद कोर्ट ने इस मसले पर बात करते हुए इंटरनेट को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अधिकार को इस्तेमाल करने के लिए ज़रूरी चीज बताया था.
इसके साथ ही कोर्ट ने कहा था कि इंटरनेट बंद किए जाने से जुड़े आदेश और प्रक्रियाएं तार्किक होनी चाहिए. कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत इंटरनेट इस्तेमाल करना मूलभूत अधिकार है.
कोर्ट ने अपने आदेश में सरकार को इस निर्णय की समीक्षा करने को कहा था लेकिन जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट पर पाबंदी को ख़त्म करने का आदेश नहीं दिया था.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के एक हफ़्ते बाद जम्मू और कश्मीर प्रशासन के गृह विभाग ने अस्पतालों, बैंक और सरकारी दफ़्तरों में ब्रॉडबैंड इंटरनेट को फिर से शुरू करने का आदेश दिया था.
इस आदेश में इंटरनेट सर्विस प्रदाताओं से संस्थानों को इंटरनेट सेवा देने से पहले कुछ वेबसाइटों को चुनने को कहा गया था.
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