झारखंड: भीड़ पर चार लोगों की पीटकर हत्या करने का आरोप

    • Author, रवि प्रकाश
    • पदनाम, रांची से, बीबीसी हिंदी के लिए.
  • प्रकाशित

झारखंड में गुमला ज़िले के सिसकारी गांव में पहले पीटकर और फिर गला रेतकर चार लोगों की हत्या का मामला सामने आया है.

पुलिस को शक है कि इस हत्याकांड का कारण अंधविश्वास हो सकता है क्योंकि मारे गए चारों लोग (दो पुरुष और दो महिलाएं) गांव में झाड़-फूंक का काम किया करते थे. इनकी उम्र साठ से सत्तर साल के बीच थी.

आरोप है कि हमलावरों ने इन्हें जगाया और फिर गांव के अखाड़ा के पास लाकर उनकी हत्या कर दी. यह घटना रविवार तड़के तीन बजे की बताई जा रही है. यह गांव सिसई थाना क्षेत्र का हिस्सा है.

गुमला के एसपी अंजनी कुमार झा स्वयं घटनास्थल पर हैं.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "पहली नज़र में यह मामला अंधविश्वास का लगता है. हमलोगों ने गाँव वालों से बातचीत की है लेकिन वे अभी बहुत कुछ नहीं बता पा रहे हैं. एक मृतक दंपती की बेटी ने पुलिस को घटना के बारे में बताया है."

"कुछ गाँव वालों ने सार्वजनिक और गोपनीय, दोनों तरह से हमें कुछ सूचनाएं दी हैं. हम उनकी जांच कर रहे हैं. इसके बाद पुलिस रिपोर्ट दर्ज करा दी जाएगी और हम कुछ ठोस बताने की स्थिति में होंगे."

एसपी ने कहा, "संभव है कि इस घटना में आस-पड़ोस के लोगों का ही हाथ हो. मरने वाले लोगों में एक दंपती (पति-पत्नी) के अलावा एक पुरुष और एक महिला शामिल है. पुलिस को सभी मृतकों की लाशें एक ही जगह पड़ी मिलीं. हमने उन्हें पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है."

क्या है मामला

इस हमले में मारी गई दंपती चापा उरांव और पीरा उराईन की बेटी सिलवंती ने बताया कि अपराधियों ने भोर में दरवाज़ा खटखटाकर जगाया और फिर उनके मां-बाप को बाहर बुलाकर दरवाज़ा बाहर से बंद कर दिया.

सिलवंती कहती हैं, "इसके बाद सुबह हमें उनकी लाशें मिलीं.'' एक मृतक की बहु बुधनी ने बताया कि क़रीब 20-25 लोगों के समूह ने इस घटना को अंजाम दिया लेकिन रात होने के कारण हमलोग उन्हें नहीं पहचान पाए. उन लोगों ने हमारे घर मे बाहर से ताला बंद कर दिया था. इसलिए हमलोग बाहर नहीं निकल सके."

सिसकारी गाँव गुमला जिल़े के सिसई थाना क्षेत्र का हिस्सा है. गुमला से क़रीब 25 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में रहने वाली अधिकतर आबादी आदिवासियों की है.

मारे गए चारों लोग भी आदिवासी थे. इस इलाक़े में नक्सलियों का भी प्रभाव रहा है.

ज़्यादातर लोग ग़रीब हैं और मज़दूरी कर अपनी ज़िंदगी चलाते हैं. इस इलाक़े में महिलाओं को डायन बताकर प्रताड़ित करने के मामले पहले भी देख गए हैं.

मॉब लिंचिंग या कुछ और?

कुछ स्थानीय पत्रकारों ने बताया कि 2-3 दिन पहले इस गाँव में एक जन अदालत भी लगाई गई थी. इसमें चारों पर डायन और जादू टोना करने के आरोप लगाए गए थे. इसके बाद से ही स्थिति तनावपूर्ण थी. हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पा रही है.

गाँव के पूर्व मुखिया रवि उरांव ने बताया कि उन्हें भी सुबह इस घटना की जानकारी मिली लेकिन गांव में किसी जन अदालत की सूचना नहीं है.

उन्होंने दावा किया कि अगर ऐसा होता, तो उन्हें इसकी जानकारी ज़रूर होती. गांव के दूसरे लोग भी इस बारे में कुछ नहीं बता रहे हैं.

इस बीच पुलिस के आला अफसरों ने ग्राम प्रधान से भी पूछताछ की है. जिन लोगों की हत्या हुई है वो हैं- 60 वर्षीय सुन्ना उरांव, 69 साल के चापा उरांव, पीरा उराईन (60) और फगनी उराईन (65).

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