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बरेली में बच्ची की मौत के लिए कौन दोषी?
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
- प्रकाशित
सरकारी अस्पतालों में बदहाली और मरीजों से बदसलूकी का जो नमूना बरेली में दिखा, वो व्यवस्था पर तो सवाल उठाता ही है, संवेदनहीनता की भी पराकाष्ठा को दिखाता है.
चार दिन की बीमार बच्ची को इलाज के लिए डॉक्टर बच्ची के परिजनों को बरेली के ज़िला अस्पताल और महिला अस्पताल के बीच दौड़ाते रहे और इसी दौरान उस दुधमुंही बच्ची ने अपनी दादी की गोद में दम तोड़ दिया.
मामला संज्ञान में आते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ज़िला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को निलंबित कर दिया और महिला अस्पताल की सीएमएस के ख़िलाफ़ विभागीय कार्रवाई करने के आदेश दिए.
बरेली ज़िले के बिसारतगंज के रहने वाले सुरेंद्र अपनी चार दिन की बेटी को लेकर बुधवार को बरेली के महाराणा प्रताप जिला संयुक्त चिकित्सालय गए थे.
सुरेंद्र का आरोप है कि वहां बेटी का इलाज करने की बजाए उनसे महिला अस्पताल जाने को कहा गया जबकि ज़िला अस्पताल में भी बाल रोग विशेषज्ञ मौजूद थे.
सुरेंद्र के मुताबिक, "महिला अस्पताल में बेड खाली न होने की बात कहकर हमें फिर से ज़िला अस्पताल भेज दिया गया. करीब तीन घंटे की इस भागदौड़ में बेटी की मौत हो गई. हमने अस्पताल के डॉक्टरों से कहा भी कि बच्चों के डॉक्टर हैं और उन्हीं को दिखाना है लेकिन ज़िला अस्पताल में भर्ती करने से मना कर दिया गया. हम लोग गिड़गिड़ाते रहे, बच्ची की ज़िंदगी की दुहाई देते रहे, लेकिन डॉक्टर और अस्पताल के कर्मचारी पसीजे नहीं."
बच्ची की मां ने कहा कि हम लोगों ने पहले लाइन में लगकर पर्चा बनवाया लेकिन उसके बाद बताया गया कि अस्पताल में जगह नहीं है.
किसकी ग़लती?
बच्ची की माँ सुषमा देवी के मुताबिक, "जब शिकायत करने के लिए हम लोग सीएमएस के पास पहुंचे तो दोनों सीएमएस एक दूसरे के ऊपर बात टालने लगे. पुरुष अस्पताल के सीएमएस कहने लगे कि महिला अस्पताल की ग़लती है और महिला अस्पताल वाले ज़िला अस्पताल को दोषी ठहरा रहे हैं. ग़लती चाहे जिसकी हो, हमारी बच्ची तो दुनिया से चली गई."
महिला अस्पताल की सीएमएस डॉक्टर अलका शर्मा का कहना है कि हमारे पास बच्चों के इलाज के लिए मशीनें नहीं हैं लेकिन इस सवाल का जवाब उनके पास भी नहीं है कि बिना मरीज को देखे ही मशीनों की कमी को कैसे दोष दिया जा सकता है.
सरकार ने डॉक्टरों की इस संवेदनहीनता की गंभीरता से लिया और तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों अस्पतालों के विभागाध्यक्षों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है.
बुधवार की देर रात ही योगी सरकार ने ज़िला अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर कमलेंद्र स्वरूप गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने और ज़िला महिला चिकित्सालय की चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर अलका शर्मा के ख़िलाफ़ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए हैं.
बरेली के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर विनीत कुमार शुक्ल ने भी मामले में लापरवाही की बात स्वीकार की है.
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, "ये बड़ी लापरवाही है. ये पहला मामला नहीं है बल्कि इससे पहले भी ऐसा हो चुका है. कई बार मैंने खुद बच्चों को भर्ती करवाया है. जिस वजह से बच्ची की मौत हुई है ऐसे कई मामले पहले भी आए हैं. मामले की जाँच के लिए एक कमेटी गठित की गई है. जाँच रिपोर्ट आने के बाद शासन को भेजेंगे."
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