सार्वजनिक जगहों पर हस्तमैथुन के बढ़ते मामले, महिलाओं के पास क्या हैं क़ानूनी विकल्प

    • Author, सुशीला सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

21 जुलाई, शाम के करीब सात बजे थे.

बेंगलुरु के टाउन हॉल में मणिपुर में जारी हिंसा के ख़िलाफ़ हो रहे प्रदर्शन में भाग लेने के बाद अथिरा पुरुषोत्तम घर लौटने के लिए टैक्सी बुक कर रही थीं.

लेकिन टैक्सी न मिलने के कारण उन्होंने रेपिडो बाइक बुक की.

केरल से आने वाली अथिरा पुरुषोत्तम एक स्वंयसेवी संस्था में काम करती हैं और युवाओं को यौन और प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों के बारे में जागरूक करने का काम करती हैं.

अथिरा कहती हैं कि रेपिडो ड्राइवर ने उनसे दूसरा नंबर शेयर किया और कहा कि वो ट्रैफिक में फंसा है और उसे आने में देरी होगी.

अथिरा पुरुषोत्तम बीबीसी से बातचीत में कहती हैं कि जो बाइक उन्होंने बुक की थी और जो उन्हें लेने आई थी उनके नंबर प्लेट अलग थे.

जब अथिरा ने ड्राइवर से बदली हुई नंबर प्लेट के बारे में पूछा तो ड्राइवर ने जवाब दिया कि रेपिडो की बाइक सर्विसिंग के लिए गई है इसलिए वो दूसरी बाइक लाया है.

अथिरा पुरुषोत्तम ने बुकिंग के संबंध में पूरी जानकारी पुख़्ता की और वो घर जाने के लिए बाइक पर बैठ गईं .

उस दिन क्या हुआ

वे बताती हैं कि उनके घर के रास्ते में एक ऐसी जगह आती है, जहां एक कन्स्ट्रक्शन साइट है और वो काफ़ी सुनसान है.

अथिरा कहती हैं, ''इस रास्ते में ड्राइवर ने बाइक की रफ़्तार धीमी कर दी और वो बाइक केवल दाएं हाथ से चलाने लगा और उसका बांया हाथ हिल रहा था, उसका कद छोटा था तो मैंने ध्यान से देखा तो पाया कि वो हस्तमैथुन कर रहा था.''

अथिरा पुरुषोत्तम बताती हैं, ''जहां ये घटना हुई वहां कोई घर नहीं था, मैं घबरा गई. मुझे लगा कि चुप रहना बेहतर है क्योंकि मैं खुद को ख़तरे में नहीं डालना चाहती थी. मुझे डर था कि कहीं वो मेरा रेप न कर दे.''

वे कहती हैं, ''मैं नहीं चाहती थी कि इस व्यक्ति को मेरे घर का एड्रेस पता चले तो मैंने उसे 200 मीटर दूर छोड़ने को कहा और उसके जाने के बाद मैंने घर की तरफ़ कदम बढ़ाए.''

अथिरा कहती हैं कि इस व्यक्ति ने इसके बाद उन्हें वाट्सअप पर संदेश भेजने शुरू किए तब मैंने उसे ब्लॉक कर दिया.

इस मामले के बारे में अथिरा ने रेपिडो से शिकायत दर्ज की और इसके बाद तुरंत रेपिडो ने कार्रवाई करते हुए ड्राइवर को ब्लैक लिस्ट कर दिया है.

इस मामले में अथिरा पुरुषोत्तम ने एफ़आईआर भी दर्ज कराई है जिसमें अभियुक्त के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 354(ए)354(डी) और 294 लगाई गईं है.

ऐसा अकेला मामला नहीं है

अथिरा पुरुषोत्तम के साथ बेंगलुरु में जो हुआ वो पहला मामला नहीं है.

हाल ही में दिल्ली मेट्रो में सरेआम हस्तमैथुन करते हुए व्यक्ति का वीडियो भी वायरल हुआ था.

इस घटना को दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने शर्मनाक बताते हुए तुरंत कार्रवाई की मांग की थी और दिल्ली पुलिस नोटिस जारी किया था.

इस मामले में पुलिस ने एफ़आईआर भी दर्ज की है.

वहीं कर्नाटक में भी हाल ही में एक महिला यात्री ने शिकायत की थी कि ड्राइवर ने उन्हें पोर्न दिखाया और हस्तमैथुन किया.

विकृत मानसिकता की निशानी

मनोचिकित्सकों के अनुसार ये एक बीमार मानसिकता की निशानी है और इसे मेंटल हेल्थ से जुड़ी बीमारी नहीं माना जा सकता.

मनोचिकित्सक डॉक्टर पूजाशिवम जेटली बीबीसी से बातचीत में कहती हैं कि सार्वजनिक जगहों या महिलाओं के समक्ष किया गया इस तरह का कृत्य ये दर्शाता है कि ऐसे व्यक्ति के लिए यौन सुख सर्वोपरि होता है और वो ये समझ नहीं पाता कि ऐसा करना समाज में अस्वीकार्य है.

उनके अनुसार, ''ये सोच सदियों से चला आ रही है जहां पुरुषों के जननांग को ताकत के प्रतीक की तरह पेश किया जाता है. वहीं सार्वजनिक जगहों , महिलाओं या बच्चों के समक्ष अपने निजी अंगों को दिखाना या पोर्न देखना बताता है कि वो कमज़ोर हैं और व्यक्ति जो चाहे कर सकता है वे उसे रोक नहीं सकते.''

'दबंगई की सोच'

इसी बात को आगे बढ़ाते हुए जेंडर मामलों पर काम करने वाले पत्रकार नासिरूद्दीन कहते हैं कि सार्वजनिक तौर पर इस तरह की हरकत दंबग मर्दानगी, पितृसत्ता और विकृत यौन मानसिकता की निशानी है.

वे कहते हैं, ''पुरुषों के अंग को मर्दानगी से जोड़कर देखा जाता है और उसी से अपनी मर्दानगी साबित करना चाहता है वहीं उसके कामयाब प्रदर्शन को लेकर चिंतित भी रहता है.''

नासिरूद्दीन के अनुसार,''समाज में आपने अकसर देखा होगा कि एक मर्द गंजी, अंडरवेयर पहनकर खुलेआम घूमता नज़र आएगा वहीं वो कहीं भी खड़े होकर पेशाब कर सकता है लेकिन ये बात किसी को अटपटी नहीं लगती है. वहीं महिलाओं को वो उसके अंगों में समेटकर देखता है और उसे यौन इच्छा को पूरा करने के ज़रिए के तौर पर देखता है.''

डॉ पूजाशिवम जेटल कहती हैं कि ऐसे लोग वास्तविकता से दूर रहते हैं और उन्हें समझ नहीं आता की ऐसी हरकत से दूसरे कितने आहत हो सकते हैं.

ये देखा जा रहा है कि ख़बरों में ऐसे मामले ज़्यादा सामने आ रहे है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि उनमें इजाफ़ा हुआ है लेकिन ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग बढ़ी है.

क़ानून का सहारा

हर महिला कभी न कभी , किसी न किसी उम्र में अपने घर या सार्वजनिक जगहों में इस तरह के बुरे अनुभव से गुजरती ही है.

इनमें से अभी भी कई महिलाएं शर्म के मारे चुप रह जाती हैं और कुछ मुखर होकर इसके ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ उठाती हैं.

एक पल के लिए अथिरा पुरुषोत्तम भी कमज़ोर पड़ी लेकिन फिर उन्होंने रेपिडो, सोशल मीडिया और फिर पुलिस के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराई.

भारतीय क़ानून के अनुसार अगर किसी महिला के साथ ऐसी कोई घटना होती है तो वो ज़ीरो एफ़आईआर दर्ज़ करा सकती है यानी हादसा कहीं भी हुआ हो वो किसी भी थाने में अपनी एफ़आईआर दर्ज करा सकती है.

वहीं ऑनलाइन भी शिकायत दर्ज करा सकती हैं.

महिला मामलों पर खुलकर बोलने वाली और हाई कोर्ट की वकील सोनाली कड़वासरा कहती है कि सोशल मीडिया पर अपनी बात उठाना ठीक है लेकिन क़ानून के रास्ते से चलना सही है क्योंकि वो एक औपचारिक तरीका होता है.

उनके अनुसार, ''अगर महिला सही में मामले में कार्रवाई चाहती है तो एफ़आईआर जल्द से जल्द दर्ज कराए और शांति से सोच समझकर अपने साथ हुई पूरी घटना की जानकारी दे.''

वहीं वो ऐसे मामलों में एक और महत्वपूर्ण बात बताती हैं और वो ये कि अगर कोई भी महिला टैक्सी की सेवा लेती है , सैलून या साफ़-सफ़ाई के लिए कंपनी से कर्मचारी को घर पर बुलाती है और घर पर सेवा देना वाला व्यक्ति कोई अनुचित हरकत करता है तो महिला को कंपनी में शिकायत दर्ज करानी चाहिए.

ये कंपनियां वर्किंग प्लेस या कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न को लेकर बने POSH एक्ट 2013 के तहत कार्रवाई करने को बाध्य होती हैं.

सोनाली कड़वासरा बताती हैं, ''भले ही जो महिला शिकायत कर रही है वो उनकी कंपनी में काम नहीं करती लेकिन जो उत्पीड़न कर रहा है वो कंपनी का कर्मचारी है और कंपनी उसके ख़िलाफ़ आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के तहत कार्रवाई आगे बढ़ाती है."

अथिरा के मामले में भी रेपिडो ने अभियुक्त के ख़िलाफ़ कार्रवाई की.

बेंगलुरु में हुए मामले में आईपीसी की धारा 354 (ए) 354 (डी) और 294 के तहत मामला दर्ज किया गया है.

सोनाली कड़वासरा बताती हैं कि इन दोनों धाराओं में यौन उत्पीड़न के तहत मामला बनता है, जहां 354 किसी महिला के साथ अभद्रता करने के साथ किए गए हमले या बलपूर्वक अपराध से संबंधित है, वहीं 354(ए) सज़ा के बारे में बताता है जिसमें अधिकतम तीन साल की सज़ा का प्रावधान है. धारा 354 स्टॉकिंग या पीछा करने से संबंधित है.''

वहीं धारा 294 सार्वजनिक जगह पर अशलील हरकत करने से संबंधित है जिसमें तीन महीने की सज़ा और जुर्माने का प्रावधान है.

दिल्ली स्थिति स्वंयसेवी संस्था परी की संस्थापक योगिता भयाना अपने निजी अनुभव बताते हुए कहती हैं कि उनके साथ भी ऐसी घटनाएं हुईं हैं और वो भी घबरा गईं थीं.

लेकिन ऐसे मामलों से घबराना नहीं चाहिए और मदद मांगनी चाहिए.

साथ ही, ऐसे मामलों पर शिकायत ज़रुर दर्ज करें क्योंकि शायद आप उसे दरकिनार करके आगे बढ़ जाएँ लेकिन ऐसे व्यक्ति काअगला निशाना दूसरी लड़की बनेगी और फिर ऐसा व्यक्ति ऐसी हरकत करता रहेगा.

वहीं जब भी ऐसी सेवाएं जैसे अगर आप टैक्सी ले रही हैं तो बुकिंग की सारी जानकारी दोबारा चेक करने के बाद ही यात्रा करें.

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