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मणिपुर में कुकी शांति समिति का करेंगे बहिष्कार, मुख्यमंत्री की मौजूदगी पर विरोध- प्रेस रिव्यू
गृह मंत्रालय के मणिपुर में शांति स्थापित करने के लिए शांति समिति गठित करने के एक दिन बाद अधिकतर कूकी सदस्यों ने पैनल में मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह और उनके समर्थकों की मौजूदगी का विरोध करते हुए पैनल का बहिष्कार करने की बात कही है.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक कूकी सदस्यों का कहना है कि पैनल में शामिल करने के लिए उनसे सहमति नहीं ली गई है. उनका तर्क है कि केंद्र सरकार को वार्ता के लिए सहायक परिस्थितियां बनानी चाहिए.
शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मणिपुर के अलग-अलग समूहों के बीच शांति स्थापित प्रक्रिया शुरू करने के लिए एक शांति समिति की घोषणा की थी. राज्य की गवर्नर अनुसूइया उइके के नेतृत्व वाली इस समिति में कुल 51 सदस्य हैं.
इस समिति में शामिल कई लोगों ने अख़बार को बताया है कि उन्हें सहमति लिए बिना ही समिति का हिस्सा बना दिया गया है. ऐसे ही एक सदस्य कूकी इनपी मणिपुर (केआईएम) के अध्यक्ष अजांग खोंगसाइ ने कहा है कि वो मणिपुर सरकार के साथ शांति वार्ता में नहीं बैठेंगे.
द हिंदू से बात करते हुए खोंगसाई ने कहा, “इस पैनल में इंफाल में सक्रिय नागरिक समूह कोकोमी (मणिपुर अखंडता पर समन्वय समिति) भी है, जिसने कूकी लोगों के ख़िलाफ़ युद्ध घोषित कर रखा है. हम शांति चाहते हैं लेकिन इस अहम पड़ाव पर, जब हिंसा जारी है, हम मणिपुर सरकार के साथ वार्ता नहीं कर सकते हैं.”
वहीं भारतीय रक्षा लेखा सेवा से रिटायर्ड जे. लुंगडिम का कहना है कि उनका नाम बिना उनकी सहमति के पैनल में शामिल कर लिया गया है.
2020 में रिटायर होने वाले लुंगडिम कहते हैं, “2016 में मुझे रूस के साथ हथियार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए भेजा गया था. मैंने 37 साल सेवा की और अब मुख्यमंत्री हमें विदेशी कह रहे हैं. इस शांति पैनल में केंद्र सरकार के अधिकारी होने चाहिए, अन्यथा ये कामयाब नहीं होगा. ये शर्मनाक है कि ये मुद्दा एक महीने से लटका हुआ है.”
केंद्र सरकार की तरफ़ से घोषित इस शांति पैनल में मणिपुर के पूर्व पुलिस महानिदेशक पी डोंगेल भी हैं. 1 जून को सृजित किए गए पद ऑफ़िसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (गृह) पर उनका रातोंरात तबादला किया गया. इसी महीने रिटायर होने जा रहे कूकी समुदाय से आने वाले डोंगेल को 3 मई को राज्य में हिंसा शुरू होने के बाद किनारे कर दिया गया था.
इस शांति पैनल में चर्चित थिएटर कलाकार रतन थियाम भी शामिल हैं. उन्होंने दस जून के केंद्र सरकार के प्रयासों पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शन भी किया था. थियाम ने सवाल उठाया था कि प्रधानमंत्री राज्य की स्थिति को लेकर ख़ामोश क्यों हैं.
मणिपुर में हिंसा शुरू हुए एक महीने से अधिक समय हो गया है. कूकी और मैतेई समुदायों के बीच 3 मई को हिंसा शुरू हुई थी. इस हिंसा में सौ से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. 50 हज़ार से अधिक लोग बेघर हुए हैं और पुलिस के असलाह केंद्रों से 4 हज़ार से अधिक हथियार लूटे जा चुके हैं.
गृह मंत्रालय ने कहा है कि इस समिति का मक़सद राज्य के अलग-अलग नस्लीय समूहों के बीच शांती प्रक्रिया शुरू करना है.
द इंडीजीनियर ट्राइबल लीडर्स फोरम (आईटीएलएफ़) का कहना है कि क्षेत्र में ऐसी किसी भी शांति समिति के गठन से पहले हालात का सामान्य होना बेहद ज़रूरी है. एक बयान में आईटीएलएफ़ ने कहा है कि, “शांति की तुरंत आवश्यक्ता पर ज़ोर देते हुे आईटीएलएफ़ समिति में मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह को शामिल किए जाने का विरोध करती है.
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उत्तराखंडः मुसलमानों ने बुलाई महापंचायत, हिंदुओं ने कहा होने नहीं देंगे
उत्तराखंड में मुसलमान नेताओं ने समुदाय को निशाना बनाये जाने के ख़िलाफ़ महापंचायत करने की घोषणा की है.
राज्य के मुसलमान धार्मिक नेताओं ने 18 जून को राजधानी देहरादून में महापंचायत का आह्वान किया है.
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक मुसलमान नेताओं का कहना है कि राज्य में मुसलमानों को निशाना बनाये जाने के ख़िलाफ़ ये पंचायत बुलाई जा रही है.
उत्तराखंड में उत्तरकाशी में हिंदू समूहों ने मुसलमानों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किए हैं और मुसलमान दुकानदारों को इलाक़ा छोड़ जाने के लिए कहा है.
उत्तरकाशी में 26 मई को एक नाबालिग हिंदू लड़की एक मुसलमान और एक हिंदू युवक के साथ चली गई थी. इस घटना के बाद से ही इलाक़े में तनाव व्याप्त है.
स्थानीय लोगों ने इस घटना के पीछे कथित लव जेहाद होने का दावा किया है. हिंदू समूह दावा करते हैं कि हिंदू महिलाओं को फंसाने के लिए मुसलमान लव जेहाद करते हैं. हालांकि भारत की अदालतें या सरकारें इसे अधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं करती हैं.
पुलिस ने 27 मई को दोनों अभियुक्तों उबैद ख़ान (24) और जितेंद्र सैनी (23) को गिरफ़्तार कर लिया था.
लेकिन इस घटना के बाद से हिंदूवादी समूहों ने कई इलाक़ों में प्रदर्शन किया है और मुसलमानों की दुकानों पर हमलों की भी रिपोर्टें हैं.
उत्तरकाशी के पुरोला बाज़ार में 5 जून को मुसलमानों को इलाक़ा छोड़ जाने की चेतावनी देते हुए पोस्टर लगाए गए थे. इलाक़े से कई मुसलमान परिवार घर छोड़कर भी चले गए हैं.
शनिवार को देहरादून के शहर काज़ी मोहम्मद अहमद क़ासमी के नेतृत्व में हुई एक बैठक में राज्य में मुसलमानों की स्थिति पर चर्चा की गई. अब 18 जून को मुसलमान धार्मिक नेताओं की एक महापंचायत होगी. इसमें राज्य के अलग-अलग हिस्सों से मुसलमान धार्मिक नेता हिस्सा लेंगे.
मोहम्मद अहमद क़ासमी ने कहा, “पहाड़ों से मासूम मुसलमानों को निकाला जा रहा है. जिन्होंने अपराध किया है उन्हें सज़ा मिलनी चाहिए लेकिन पूरे समुदाय को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए. किसी एक व्यक्ति की करतूत की वजह से बाकी लोगों को क्यों बेरोज़गार किया जा रहा है?”
उन्होंने कहा कि महापंचायत के ज़रिये हम ये अपील करना चाहते हैं कि मासूमों को सज़ा ना दी जाए.
वहीं हिंदूवादी समूहों का कहना है कि वो 18 जून को मुसलमानों की पंचायत नहीं होने देंगे. हिंदू समूहों ने 15 जून को पंचायत बुलाई है.
देवभूमि रक्षा अभियान के संस्थापक स्वामी दर्शन भारती ने अख़बार से कहा, “हम इसे (मुसलमानों की महापंचायत) को होने नहीं देंगे, चाहें हमें कोई बड़ा क़दम ही क्यों ना उठाना पड़े.”
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बृजभूषण शरण सिंह ने रैली से बीजेपी को दिया संदेश
द टेलीग्राफ़ ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने गोंडा में अपनी रैली से बीजेपी को संदेश दिया है.
रविवार को बृजभूषण ने कैसरगंज क्षेत्र में 35 किलोमीटर लंबा रोड शो करने के बाद रैली की.
बृजभूषण शरण सिंह ने ये रैली मोदी सरकार की नौ साल की उपलब्धियां गिनाने के लिए की थी.
लेकिन अख़बार अपनी रिपोर्ट में बृजभूषण के एक क़रीबी के हवाले से लिखता है कि इसका असल मक़सद बीजेपी को ये संदेश देना था कि वो कैसरगंज़, गोंडा, बलरामपुर, फ़ैज़ाबाद और श्रावस्ती सीटों पर बीजेपी को नुक़सान पहुंचाने की क्षमता भी रखते हैं.
भारतीय कुश्ती संघ के निवर्तमान अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ महिला पहलवानों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं और उनके ख़िलाफ़ लंबा धरना किया है.
केंद्र सरकार ने पहलवानों से बातचीत में कहा है कि दिल्ली पुलिस 15 जून तक अपनी जांच पूरी कर लेगी और उसके बाद ही कार्रवाई होगी.
प्रदर्शनकारी पहलवान बृजभूषण की गिरफ़्तारी की मांग करते रहे हैं. बृजभूषण अपने आप को बेग़ुनाह बताते रहे हैं.
15 जून के बाद ही अब तय होगा कि बृजभूषण शरण सिंह आगे क्या करेंगे. लेकिन इससे पहले रैली करके उन्होंने अपनी ताक़त दिखा दी है.
बृजभूषण के क़रीबी ने अख़बार को बताया है कि बृजभूषण ये जानते हैें कि प्रधानमंत्री या अमित शाह उनसे इस्तीफ़ा देने के लिए कह सकते हैं.
वो कहते हैं, “लेकिन वो इस्तीफ़ा देने के लिए तैयार नहीं है. उन्होंने ऐलान कर दिया है कि वो 2024 में कैसरगंज सीट से चुनाव लड़ेंगे. ऐसा कहकर उन्होंने पार्टी को चुनौती तो दे ही दी है.”
बालपुर में हुई रैली में क़रीब दस हज़ार लोग शामिल हुए. इससे पहले बृजभूषण का जगह जगह स्वागत किया गया.
पंजाब के सरकारी स्कूलों से बल्ब से लेकर खिलौने तक, सब चोरी हुए
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ पंजाब के सरकारी स्कूलों से बल्ब से लेकर खिलौने तक चोरी कर लिए गए हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक स्कूलों से खाद्य सामग्री, बैटरी, संगीत उपकरण, पंखे, इनवरटर, तारें और यहां तक फ़ाइलें तक ग़ायब हो रही हैं.
स्कूल के प्रशासन का कहना है कि इसकी वजह टूटी हुई दीवारें, चौकीदारों की कमी और नशेड़ी हैं.
गर्मियों की छुट्टियों से पहले कई जगह सरकारी स्कूलों से पंखे और बर्तन को सुरक्षित रखने के लिए ग्राम प्रधानों के घरों पर पहुंचा दिया गया है.
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सीमावर्ती ज़िले से लेकर मध्य पंजाब के ज़िलो में स्कूलों में चोरियां आम बात हो गई हैं.
फ़िरोज़पुर के ज़िला शिक्षा कार्यालय के डाटा के मुताबिक पिछले डेढ़ साल में ज़िले में स्कूलों में चोरी की 123 वारदातें हुई हैं.
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