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अहमदाबाद प्लेन क्रैश: एयर होस्टेस मैथिली की मां बोलीं- लगता है वो कहीं से आकर बात करेगी
- Author, अल्पेश करकरे
- पदनाम, बीबीसी मराठी के लिए
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
पिछले साल 12 जून 2025 को गुजरात के अहमदाबाद से लंदन जा रहा एयर इंडिया का एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था. इस हादसे में विमान सवार 242 लोगों में से 241 लोगों की मौत हो गई थी.
मरने वालों में महाराष्ट्र के रायगढ़ ज़िले के न्हावा गांव की 22 साल की मैथिली पाटिल भी शामिल थीं. वो एयर इंडिया के चालक दल का हिस्सा थीं.
इस विमान हादसे को लगभग एक साल होने को आ गए हैं, लेकिन अब तक इस हादसे के पीछे की स्पष्ट वजह का पता नहीं चल पाया.
मैथिली की मां का कहना है कि उनकी बेटी तो वापस नहीं लौट सकती है लेकिन इस मामले की गहन जांच हो ताकि वो ये सच जान पाएं कि ये हादसा कैसे हुआ.
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परिवार ने आर्थिक तंगी के बावजूद शिक्षा दिलाई
मैथिली की मां ने बीबीसी मराठी से बातचीत में कहा, "मेरी बेटी मुझे वापस नहीं मिलेगी. लेकिन इस दुर्घटना के पीछे की असली वजह का पता लगाया जाना चाहिए. इसके अलावा मेरी कोई और अपेक्षा नहीं है."
मैथिली अपने परिवार की सबसे बड़ी बेटी थी.
हादसे से दो साल पहले ही मैथिली पाटिल एयर इंडिया में क्रू मेंबर के तौर पर नौकरी शुरू की थी.
तीन भाई-बहनों में मैथिली सबसे बड़ी थीं. उनके पिता पनवेल के पास स्थित एक निजी कंपनी में कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर काम करते हैं. बेहद आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने तीनों बच्चों को शिक्षा दिलाई.
नौकरी मिलने के बाद परिवार और अपने भाई-बहनों की पढ़ाई की ज़िम्मेदारी काफी हद तक मैथिली ने संभाल ली थी. उनके शिक्षक और पड़ोसी बताते हैं कि वह बेहद मेधावी, मेहनती और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित लड़की थी.
न्हावा गांव के टी. एस. रहमान स्कूल से बारहवीं तक की पढ़ाई करने वाली मैथिली बचपन से ही एयर होस्टेस बनने का सपना देखती थीं.अपने दो साल के करियर में वो कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का हिस्सा थीं.
मैथिली की मौत के बाद बीता एक साल कैसे गुज़रा, इस बारे में बीबीसी मराठी से बात करते हुए उनकी मां प्रमिला पाटिल भावुक हो गईं.
वो कहती हैं, "मेरी दुनिया पूरी तरह थम गई है. इसलिए ज़िंदगी में क्या बदलाव आया है, यह सचमुच बता पाना मुश्किल है. आज भी ऐसा लगता है कि वह कहीं से आएगी और मुझसे बात करेगी."
प्रमिला पाटिल कहती हैं, "मैथिली परिवार की सबसे बड़ी बेटी थी. उसकी इच्छा थी कि वह अपने भाई-बहनों की पढ़ाई पूरी करवाए और परिवार की ज़िम्मेदारियां संभाले. मैंने उससे शादी के बारे में पूछा था, तब उसने मुझसे पांच साल का समय मांगा था, क्योंकि वह पहले अपने भाई-बहनों की शिक्षा पूरी करवाना चाहती थी और घर की ज़िम्मेदारी भी उठाना चाहती थी."
बेटी गई तो परिवार पर भी आर्थिक संकट आया
मैथिली की नौकरी लगने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आने लगा था, लेकिन उनकी मौत के बाद परिवार एक बार फिर संघर्ष के दौर में पहुंच गया है.
प्रमिला पाटिल कहती हैं, "उसकी नौकरी लगने के बाद मुझे किसी से भी मदद मांगने की ज़रूरत नहीं पड़ती थी. अब वह सब कुछ संभालने वाली थी, इसलिए मैं भी निश्चिंत हो गई थी. लेकिन उसके जाने के बाद हालात फिर पहले जैसे हो गए हैं. अब हमें दोबारा शून्य से शुरुआत करनी पड़ रही है."
वो कहती हैं कि पिछले एक साल के दौरान परिवार ने मुख्य रूप से पिता की आय और रिश्तेदारों की मदद के सहारे घर का खर्च चलाया है.
उन्होंने कहा, "आज हमारी स्थिति ऐसी है कि हम बेटी की मौत के बाद मिली आर्थिक सहायता के सहारे जीवन बिता रहे हैं."
'कम से कम यह तो पता चले कि गलती किसकी थी'
संयुक्त राष्ट्र की नागरिक उड्डयन संस्था आईसीएओ के तय अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, किसी विमान दुर्घटना की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर जारी की जानी चाहिए, जबकि अंतिम रिपोर्ट 12 महीनों के भीतर पूरी होने की अपेक्षा की जाती है.
दुर्घटना के बाद विमान का ब्लैक बॉक्स जांच के लिए भेजा गया था. विभिन्न एजेंसियों ने जांच भी शुरू की गई. लेकिन हादसे के लगभग एक साल होने के बाद भी उन्हें अब तक दुर्घटना के वास्तविक कारण की जानकारी नहीं मिल सकी है.
प्रमिला पाटिल ने कहा, "हमें उम्मीद थी कि कुछ न कुछ जानकारी मिलेगी. कम से कम यह तो पता चलेगा कि आखिर गलती किसकी थी."
वो कहती हैं, "मुझे नहीं लगता कि यह पायलट की गलती हो सकती है. अगर विमान में कोई तकनीकी ख़राबी होती है, तो उसे उड़ान के लिए अनुमति नहीं दी जाती. हर चीज़ की बेहद सख्ती से जांच की जाती है. मेरी बेटी भी मुझे इन जांच प्रक्रियाओं के बारे में अक्सर बताया करती थी."
प्रमिला पाटिल ने कहा, "हमें अब तक कोई जानकारी नहीं दी गई है. हम अब भी इंतज़ार कर रहे हैं. उम्मीद है कि किसी दिन यह पता चलेगा कि आखिर गलती किसकी थी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं किसी और के साथ दोबारा न हों."
उनका कहना है कि उनकी मांग सिर्फ़ अपनी बेटी के लिए नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए भी है.
उन्होंने कहा, "हमें सिर्फ़ इतनी जानकारी मिल जाए कि यह हादसा आखिर कैसे हुआ, यही हमारी एकमात्र अपेक्षा है. इस मामले की और गहन जांच होनी चाहिए. आखिर इसमें मेरी बेटी का क्या दोष था?"
नौ महीने बाद मिला बेटी का बैग
इस एक साल के दौरान परिवार को अपनी बेटी की कुछ यादें और दुर्घटना से जुड़ी कुछ चीजें वापस मिली हैं. प्रमिला पाटिल बताती हैं कि 30 मार्च 2026 को मैथिली का बैग सौंपा गया.
उन्होंने कहा, "कई लोगों के बैग ठीक हालत में नहीं मिले थे, लेकिन उसका बैग हमें सुरक्षित स्थिति में मिली. बैग के साथ कुछ अन्य सामान भी वापस मिला. एक साल पहले हम दोनों ने मिलकर वह बैग खरीदा था. उस समय उसने मुझसे कहा था कि यह बैग आग में भी गिर जाए तो इसे कुछ नहीं होगा."
वो कहती हैं, "जब वह बैग हमें वापस मिला तो मुझे उसकी वो बात याद आ गई."
प्रमिला पाटिल बताती हैं कि एयर इंडिया की ओर से समय-समय पर उनसे संपर्क किया जाता रहा है.
उन्होंने कहा, " एयर इंडिया की ओर से फोन आते हैं. वे हमारा हालचाल पूछते हैं. उन्होंने हमारी मदद भी की है. अगर कोई सामान मिलता है, तो उसकी जानकारी भी देते हैं."
हालांकि, उनका कहना है कि राज्य प्रशासन या स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से उन्हें कोई मदद नहीं मिली. वो बताती हैं कि प्रीतम म्हात्रे की एक संस्था ने उनके दो बच्चों की इस साल की फ़ीस भरी है. उनका कहना है, "इस घटना के बाद राजनीतिक लोगों ने हमारी ओर उतना ध्यान नहीं दिया, जितनी हमें उम्मीद थी."
'विमान उड़ान के लिए उपयुक्त न हो, तो उसे उड़ाया ही न जाए'
मैथिली की मां कहती हैं कि उनकी प्रशासन से एक ही मांग है कि हादसे की असल वजह पता लगे क्योंकि मैथिली तो उनके पास कभी नहीं आएगी.
उनका कहना है कि अगर हादसे की असल वजह की जानकारी हुई तो भविष्य में कोई दूसरा परिवार इस तरह की त्रासदी का सामना नहीं करेगा.
उन्होंने कहा, "विमान की जांच बेहद सावधानी और पूरी गंभीरता से की जानी चाहिए. यदि विमान उड़ान के लिए उपयुक्त स्थिति में नहीं है, तो उसे उड़ाया ही नहीं जाना चाहिए.
बेवजह निर्दोष लोगों की जान जा रही है. मेरी बेटी मुझे वापस नहीं मिलेगी, लेकिन इस हादसे के पीछे की वजह का पता लगाया जाना चाहिए. इसके अलावा मेरी कोई और अपेक्षा नहीं है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.