अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे पर फिर हमले किए, खाड़ी में संघर्ष विराम पर संकट गहराया

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संघर्ष विराम के बीच अमेरिका और ईरान ने एक दूसरे के ठिकानों पर फिर हमले किए हैं.

अमेरिकी सेना का कहना है कि उसने होर्मुज़ स्ट्रेट की ओर दागे गए ईरान के चार 'वन-वे अटैक ड्रोन' को मार गिराया है.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने एक बयान में कहा कि अमेरिकी सेना ने "आगे के हमलों से बचाव के लिए बाद में गोरुक और क़ेशम द्वीप पर ईरान के क़ेशम द्वीप के रडार ठिकानों पर हमला किया."

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरआईबी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने इसके जवाब में कुवैत में दो अमेरिकी एयर बेस और बहरीन में अमेरिकी नौसेना के ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं.

अमेरिकी सेना ने कहा कि इन ड्रोन्स से 'क्षेत्रीय समुद्री यातायात को ख़तरा' था.

सेंटकॉम ने दावा किया है कि शुरुआती आकलन से पता चला है कि खाड़ी के दो देशों पर दागी गई ईरान की सात मिसाइलों में से छह को रोक दिया गया और एक अपने लक्ष्य तक नहीं पहुँच पाई.

ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी इरना के मुताबिक़, आईआरजीसी ने अमेरिका को चेतावनी दी कि वह 'ऐसी शरारती हरकतों' को दोहराने से बचे. उसने कहा कि अगर इस तरह की कार्रवाई जारी रही तो ईरान सीमित जवाबी कार्रवाई से संतुष्ट नहीं होगा.

आईआरजीसी ने यह भी चेतावनी दी है, "हॉर्मुज़ स्ट्रेट को तेल और गैस के निर्यात के लिए पूरी तरह बंद किए जाने के परिणामों की ज़िम्मेदारी वॉशिंगटन की होगी."

शुक्रवार को सेंटकॉम ने एक्स पर जानकारी दी, "यूएसएस ट्रिपोली (एलएचए-7) अरब सागर से गुजर रहा है. यह एंफ़िबियंस असॉल्ट शिप ईरान के ख़िलाफ़ जारी अमेरिकी नाकेबंदी की मदद कर रही है."

"नाकेबंदी के नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी बलों ने 129 कॉमर्शियल जहाज़ों का मार्ग बदलवाया है और 6 जहाज़ों को निष्क्रिय कर दिया है."

कुवैत और बहरीन में अमेरिकी बेस पर हमले का दावा

ईरान ने दावा किया है कि उसकी मिसाइलों ने कुवैत में अमेरिकी एयर बेस और बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े की अहम सुविधाओं को निशाना बनाया.

आईआरजीसी न्यूज़ ने एक पोस्ट में बताया है, "ईरान ने कुवैत की तेल सुविधाओं पर ज़बरदस्त हमला किया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने कुवैत के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाते हुए एक और बड़ा हवाई हमला किया है. इस हमले को अब तक के सबसे अहम हमलों में से एक माना जा रहा है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है."

हैदराबाद में ईरान के कॉन्सुलेट जनरल ने एक एक्स पोस्ट में लिखा, "आईआरजीसी के जनसंपर्क विभाग के अनुसार, शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात में क़रीब 01.30 बजे, अमेरिकी हमलावर सेना के उकसावे और निर्देश पर चार तेल टैंकरों ने आईआरजीसी नौसेना की चेतावनियों को नज़रअंदाज़ करते हुए और बिना किसी तालमेल के होर्मुज़ स्ट्रेट से गैरकानूनी रूप से निकलने की कोशिश की."

आईआरजीसी के मुताबिक़, चेतावनी के बाद एक तेल टैंकर को निशाना बनाकर रोका गया और बाकी टैंकर वापस लौट गए.

इस घटना के बाद, शनिवार तड़के 2.00 बजे अमेरिकी ड्रोन ने क़ेशम में एक टेलीकम्युनिकेशन पोर्ट और सिरिक में एक पोर्ट पर दो मिसाइलें दागीं.

इस ताज़ा घटनाक्रम से दोनों देशों के बीच तनाव तेज़ी से बढ़ गया है, जिससे मध्य पूर्व में बड़े टकराव का डर पैदा हो गया है.

युद्धविराम पर ख़तरा

यह घटना अमेरिका और ईरान के बीच एक-दूसरे पर हमलों के कुछ दिनों बाद हुई है, जिससे दोनों देशों के बीच चल रहे नाजुक संघर्ष-विराम (सीजफायर) पर ख़तरा मंडराने लगा था.

स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, बुधवार को कुवैत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ईरानी ड्रोन हमलों में एक शख़्स की मौत हो गई और 60 से अधिक लोग घायल हो गए थे.

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने हवाई अड्डे पर हुए हमले की जिम्मेदारी लेने से इनकार किया और दावा किया कि यह नुक़सान अमेरिकी मिसाइल इंटरसेप्टर की ग़लती के कारण हुआ था.

सेंटकॉम ने इस दावे को ग़लत बताया और दावा किया कि ईरान ने हवाई अड्डे पर "जानबूझकर, सोच-समझकर और बिना किसी उचित कारण के" हमला किया.

इससे पहले आईआरजीसी ने कहा था कि उसने ईरानी तेल टैंकर और क़ेशम द्वीप पर अमेरिकी हमलों के जवाब में खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था.

स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर अमेरिका और ईरान आमने-सामने

ये हमले तब हुए जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम वार्ता रुक गई और युद्ध समाप्त करने का समझौता आगे नहीं बढ़ सका.

अमेरिका और इसराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर व्यापक हमले किए, जिससे पूरे मध्य पूर्व में संघर्ष छिड़ गया.

ईरान ने खाड़ी में इसराइल और अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमला करके और होर्मुज़ स्ट्रेट को तकरीबन पूरी तरह बंद करके जवाब दिया.

होर्मुज़ स्ट्रेट के ज़रिए आम दिनों में दुनिया का लगभग 20% तेल और एलपीजी सप्लाई होता रहा है. ईरान के इस कदम से वैश्विक स्तर पर तेल की क़ीमतें बढ़ गईं.

अप्रैल की शुरुआत में युद्धविराम पर सहमति के तुरंत बाद, अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी कर दी. जिसके बारे में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह "किसी समझौते पर पहुंचने और उस पर हस्ताक्षर होने तक पूरी क्षमता से लागू रहेगा."

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