अमेरिका में एक फ़ेडरल जज ने शुक्रवार को ट्रंप प्रशासन की उस इमिग्रेशन नीति को रद्द कर दिया, जिसके कारण 39 देशों के प्रवासियों के लिए अमेरिका में रहने और प्रवेश पाने की प्रक्रिया कठिन हो गई थी.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, अमेरिका में रोड आइलैंड की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जॉन मैककोनेल जूनियर ने कहा कि इन नियमों से अफ़्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और मिडिल ईस्ट के देशों के लोग कानूनी अनिश्चितता में फंसे हुए थे.
जज ने कहा, "प्रवासी लोग कानूनी प्रक्रिया का पालन कर रहे थे, लेकिन महीनों तक उनके आवेदन अटके रहे क्योंकि यूएससीआईएस (यूएस सिटिज़नशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज़) ने उन्हें आगे नहीं बढ़ाया. जबकि ये नीतियां बिना कानूनी अधिकार के बनाई गईं और प्रवासी विरोधी सोच से प्रभावित थीं."
दरअसल, यूएससीआईएस ने ये नीतियां उस समय बनाई थीं जब वॉशिंगटन डीसी में दो नेशनल गार्ड सैनिकों पर गोली चलाई गई थी. अभियोजकों का कहना है कि यह हमला एक अफ़ग़ान प्रवासी ने किया था.
इस घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा था, "थर्ड वर्ल्ड के सभी देशों से प्रवास को स्थायी रूप से रोक दिया जाएगा ताकि अमेरिकी सिस्टम पूरी तरह ठीक हो सके."
इसके बाद उन्होंने यात्रा प्रतिबंध वाले देशों की संख्या बढ़ाकर 39 कर दी. पूरी तरह प्रतिबंध वाले देशों में अफ़ग़ानिस्तान, ईरान, हैती, सोमालिया, वेनेज़ुएला और सीरिया शामिल थे.
भारत का नाम सूची में नहीं था, इसलिए भारत के लिए चिंता करने की कोई बात नहीं है.