शहज़ाद भट्टी कौन है जिसके नेटवर्क का नाम अमित शाह और एनआईए ने लिया है

प्रकाशित
पढ़ने का समय: 9 मिनट

गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को अपने एक्स अकाउंट पर जारी एक बयान में कहा कि मोदी सरकार ने स्वतंत्रता दिवस से पहले पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के समर्थित कथित चरमपंथी संगठन 'शहज़ाद भट्टी नेटवर्क' को ख़त्म कर दिया था.

साथ ही गृह मंत्री बने बताया कि इस नेटवर्क के 200 से ज़्यादा कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया गया, और संगठन के विनाशकारी हमलों की योजनाओं को नाकाम कर दिया गया.

उसी दिन, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अमित शाह के दावे को ख़ारिज करते हुए कहा, "इस तरह का प्रोपेगैंडा पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भारत के नापाक अभियान का एक और सबूत है, जिसका मक़सद अपनी आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से ध्यान हटाना और अपने छोटे राजनीतिक हितों के लिए पाकिस्तान को दोषी ठहराना है."

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के बयान में आगे कहा गया, "भारत के बेबुनियाद और गुमराह करने वाले बयान भारत के राज्य-प्रायोजित आतंकवाद, टारगेटेड हत्याओं और विदेशी इलाकों में विध्वंसक गतिविधियों से अंतरराष्ट्रीय ध्यान नहीं हटा सकते."

हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब भारतीय अधिकारियों ने देश में चरमपंथी गतिविधियों को लेकर 'शहज़ाद भट्टी नेटवर्क' नाम का इस्तेमाल किया है.

शहज़ाद भट्टी कौन है, जो इस कथित चरमपंथी नेटवर्क को चलाता है, और भारतीय अधिकारियों ने उसके ख़िलाफ़ क्या आरोप लगाए हैं?

अमित शाह ने क्या दावा किया?

एक्स पर जारी एक बयान में गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया कि भारतीय सुरक्षा बलों ने 14 राज्यों में अलग-अलग जगहों पर कोऑर्डिनेटेड ऑपरेशन में पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई द्वारा सपोर्टेड एक कथित मिलिटेंट संगठन 'शहज़ाद भट्टी नेटवर्क' को ख़त्म कर दिया है.

अमित शाह ने इसे आतंकवाद के ख़िलाफ़ भारत की 'ज़ीरो टॉलरेंस' पॉलिसी का एक उदाहरण बताया.

गृह मंत्री ने बताया कि नेटवर्क के पास से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद, जिसमें पाकिस्तान ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के निशान वाले हैंड ग्रेनेड, पिस्तौल, कारतूस और जासूसी के लिए इस्तेमाल होने वाले सीसीटीवी कैमरे बरामद किए गए.

भारत ने अब तक इस नेटवर्क पर क्या-क्या कहा?

इस साल 9 जून को, भारत की नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने शहज़ाद भट्टी नेटवर्क के ख़िलाफ़ ऑपरेशन के बारे में एक बयान जारी किया.

बयान में कहा गया कि कथित चरमपंथी शहज़ाद भट्टी से जुड़े चरमपंथी गैंगस्टर नेटवर्क के ख़िलाफ़ तीन मामलों के संबंध में, भारत के दो राज्यों, पंजाब और हरियाणा के नौ ज़िलों में 18 जगहों पर कोऑर्डिनेटेड ऑपरेशन किए गए और कई लोगों से पूछताछ की गई.

एनआईए ने कहा कि छापेमारी के दौरान, अलग-अलग कम्युनिकेशन नेटवर्क, फ़ाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन और इन तीन मामलों में जांच के दायरे में आए लोगों की गतिविधियों से जुड़ी पूछताछ के अलावा, कई डिजिटल डिवाइस और डॉक्यूमेंट भी ज़ब्त किए गए.

एजेंसी ने कहा कि मार्च 2025 में पंजाब के जालंधर शहर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रोजर संधू के घर पर हुए ग्रेनेड हमले में शहज़ाद भट्टी के शामिल होने का पता चला है और अप्रैल 2026 में शहज़ाद भट्टी को इस मामले में भगोड़ा आरोपी घोषित किया गया था.

एनआईए ने दावा किया कि शहज़ाद भट्टी नवंबर 2025 में हरियाणा के सिरसा ज़िले के महिला पुलिस स्टेशन और जनवरी 2026 में हरियाणा के अंबाला ज़िले के बलदेव नगर पुलिस स्टेशन में हुए धमाकों का भी कथित मास्टरमाइंड था.

एनआईए की ओर से 11 जुलाई को जारी एक और बयान में कहा गया कि एनआईए ने अंबाला के बलदेव नगर पुलिस स्टेशन की पार्किंग में हुए कार बम धमाके के मामले में शहज़ाद भट्टी समेत आठ लोगों के ख़िलाफ़ चार्जशीट फ़ाइल की है.

एनआईए के मुताबिक़, हरियाणा के पंचकूला की स्पेशल कोर्ट में एनआईए की ओर से जमा की गई चार्जशीट में करमजीत सिंह उर्फ़ ​​टोनी, आकाश, सोरिब उर्फ़ ​​सोबी उर्फ़ ​​सौरभ, रमन कुमार, सत्यम, सुखदेव सिंह उर्फ़ ​​सुखा और अमरजीत सिंह उर्फ़ ​​अंबी के नाम शामिल थे.

एनआईए ने दावा किया कि शहज़ाद भट्टी ने भारत में ऑपरेशन के लिए एक लोकल नेटवर्क बनाया था और पुलिस ठिकानों पर हमलों के लिए लॉजिस्टिकल सपोर्ट देने और एक्सप्लोसिव का इंतज़ाम करने की ज़िम्मेदारी लोकल लोगों को सौंपी थी. एजेंसी ने कहा कि आकाश भारत में शहज़ाद भट्टी का मेन कॉन्टैक्ट था और दूसरे आरोपियों के साथ हमलों की प्लानिंग और कोऑर्डिनेशन के लिए ज़िम्मेदार था.

एनआईए ने कहा कि जांच में यह भी पता चला कि शहज़ाद भट्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और सीक्रेट कम्युनिकेशन चैनलों के ज़रिए अभियुक्तों को भर्ती किया और उन्हें चरमपंथी विचारधाराओं की ओर प्रेरित किया.

बीबीसी ने इस बारे में डिटेल्स के लिए दिल्ली पुलिस और नई दिल्ली में मौजूद नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) के प्रवक्ताओं से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है. उनकी प्रतिक्रिया आते ही उसे इस स्टोरी में शामिल किया जाएगा.

शहज़ाद भट्टी ने आईएसआई से कनेक्शन से किया इनकार

बीबीसी उर्दू ने शहज़ाद भट्टी से भारतीय अधिकारियों द्वारा उन पर लगाए गए आरोपों पर उनसे जवाब लेने की कोशिश की है, लेकिन इस स्टोरी के लिखे जाने तक उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.

हालांकि, 19 जुलाई को टिकटॉक और फ़ेसबुक पर शहज़ाद भट्टी द्वारा जारी एक वीडियो में, उन्होंने भारत सरकार और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा उन पर लगाए गए सभी आरोपों से इनकार किया.

शहज़ाद भट्टी ने पहले भी सोशल मीडिया पर भारतीय अधिकारियों द्वारा उन पर आतंकवाद और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से संबंधों के बारे में लगाए गए आरोपों के बारे में बयान दिए हैं.

उनके वीडियो टिकटॉक और फ़ेसबुक पर शहज़ाद भट्टी के नाम वाले अकाउंट से दिखाई दे रहे हैं.

एनआईए के 9 जून को जारी बयान के लगभग दो हफ़्ते बाद इस अकाउंट से एक वीडियो पब्लिश किया गया.

23 जून को पब्लिश हुए वीडियो में, ख़ुद को शहज़ाद भट्टी बताने वाले आदमी ने कहा कि वह भारत से अक्सर ऐसी ख़बरें सुन रहा है, जिसमें ''कभी शहज़ाद भट्टी के चार नौकर, तो कभी पाँच नौकर अरेस्ट हो रहे हैं.'' उसने कहा कि ''यह सब झूठी ख़बरें हैं.''

''वे किसी और के नौकरों को अरेस्ट करते हैं और उन पर मेरा नाम डाल देते हैं, यह कहते हुए कि शहज़ाद भट्टी के इतने नौकर अरेस्ट हुए हैं.''

उन्होंने आगे कहा कि अगर उनके ख़िलाफ़ कोई सबूत है, तो उन्हें सामने लाना चाहिए. ''सबूत दिखाओ, कुछ चैट दिखाओ कि ये सच में मेरे नौकर हैं, शहज़ाद भट्टी के नौकर हैं.''

हालांकि, अपने वीडियो में ख़ुद को शहज़ाद भट्टी बताने वाले आदमी ने माना कि भारत में कुछ लोग उसके लिए काम करते हैं, लेकिन उसने यह नहीं बताया कि यह काम किस तरह का है.

इसी तरह, 16 मार्च को अपने फ़ेसबुक पेज पर जारी एक वीडियो में शहज़ाद भट्टी ने कहा कि भारतीय संस्थाओं के इस दावे से उनका कोई लेना-देना नहीं है कि अंबाला से आरडीएक्स बरामद किया गया था.

"आप कह रहे हैं कि आरडीएक्स राजस्थान से पंजाब ले जाया गया, वहां से अंबाला होते हुए हनुमानगढ़ और फिर वापस लाया गया. क्या आप सो रहे थे? आपकी संस्थाएं कहां थीं?"

उन्होंने दावा किया कि जिस संस्था ने इस घटना की ज़िम्मेदारी ली है, उसने भारतीय पुलिस को चेतावनी दी है कि अगर पंजाब में फ़र्ज़ी पुलिस एनकाउंटर बंद नहीं हुए, तो सरकारी संस्थाएं ज़िम्मेदार होंगी.

भारतीय जांच एजेंसियों द्वारा आईएसआई के साथ उनके संबंधों के आरोपों पर बात करते हुए उन्होंने कहा, "वे मुझे आईएसआई से जोड़ते हैं. अगर मैं आईएसआई का कर्मचारी होता, तो मैं छह साल तक पाकिस्तान के बाहर नहीं रह रहा होता. मैं वापस पाकिस्तान चला जाता."

"मैं एजेंसी का कर्मचारी नहीं हूं. मेरी अपनी समस्याएं हैं. आपके ही गैंगस्टरों से हमारी दुश्मनी चल रही हैं."

लॉरेंस बिश्नोई के साथ रिश्ते का दावा

शहज़ाद भट्टी ने एक और वीडियो में दावा किया कि उनका लंबे समय से भारतीय गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के साथ संबंध रहा है. उनका कहना था कि भारतीय गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के साथ उन्होंने रिश्ता सिर्फ़ दो वजहों से ख़त्म किया था. "एक तो सिद्धू मूसेवाला की वजह से और दूसरा यह कि वह अपने नौकरों का इस्तेमाल करने के बाद उन्हें छोड़ देता है."

"मैंने भारत में अपने लिए काम करने वालों को कभी नहीं छोड़ा."

उन्होंने जम्मू-कश्मीर के एक डीजीपी की दी गई चेतावनी का ज़िक्र करते हुए कहा कि कि वह सिर्फ़ पाकिस्तानी संस्थाओं के प्रति जवाबदेह हैं. "जब मैं पाकिस्तान जाऊंगा, तो वहीं जवाब दूंगा."

"मुझे आपके देश में आने या वहां नेटवर्क बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं है."

कई भारतीय सोशल मीडिया यूज़र्स और पत्रकारों का दावा है कि शहज़ाद भट्टी यूएई में रहता है, लेकिन बीबीसी इस दावे की पुष्टि नहीं करता है.

इस साल 4 जुलाई को शहज़ाद के टिकटॉक अकाउंट (जिसके 3.6 मिलियन फ़ॉलोअर्स हैं) पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में, उसे दुबई के एक रेस्टोरेंट में बैठे देखा जा सकता है. 31 जनवरी, 2025 को फ़ेसबुक पर पोस्ट की गई तस्वीरों में शहज़ाद को दुबई मॉल में भी देखा जा सकता है.

भारतीय पत्रकार प्रवीण स्वामी ने एक्स पर लिखा, "मुझे हैरानी है कि यूएई, जो मिडिल ईस्ट में भारत का सबसे क़रीबी पार्टनर है, ने अभी तक इस व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया है, जिस पर भारत के ख़िलाफ़ आतंकवाद में शामिल होने का आरोप है. अमीराती सुरक्षा एजेंसियां ​​बहुत असरदार हैं और पहले भी भारत के निवेदन पर उम्मीद से ज़्यादा सहयोग करती रही हैं, इसलिए यह मामला ख़ास तौर पर अहम है."

9 सितंबर, 2025 के एक और वीडियो में, शहज़ाद दुबई क्रीक में एक क्रूज़ पर दोस्तों के साथ दिख रहा है.

उसके टिकटॉक अकाउंट पर पोस्ट किए गए कई वीडियो में बैकग्राउंड म्यूज़िक भारतीय चैनलों पर उससे जुड़ी ख़बरों का है, जिसमें उसे भारत में हमलों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है.

शहज़ाद के कई वीडियो और तस्वीरों में, वह जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (एफ़) के नेता फ़ारुख़ इम्तियाज़ खोखर के साथ भी दिख रहा है.

फ़ारुख़ इम्तियाज़ खोखर रावलपिंडी और इस्लामाबाद में प्रभावशाली माने जाने वाले खोखर परिवार से हैं. वह इम्तियाज़ उर्फ़ ताजी खोखर के बेटे हैं, जो नेशनल असेंबली के पूर्व डिप्टी स्पीकर हाजी नवाज़ खोखर के भतीजे और पूर्व सीनेटर मुस्तफ़ा नवाज़ खोखर के चचेरे भाई हैं.

वह बिज़नेस, वेलफ़ेयर और सोशल मीडिया एक्टिविटीज़ में भी एक्टिव रहे हैं. हालाँकि, उनका नाम कई मामलों में सामने आता रहा है, जिसमें हत्या और एंटी-टेररिज़्म एक्ट से जुड़े मामले शामिल हैं.

14 जुलाई 2026 को रावलपिंडी की एक अदालत ने उन्हें और दो अन्य अभियुक्तों को माजिद सत्ती हत्या मामले में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें

BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह

कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.