'आपने इतने ब्रह्मोस दागे, अब जंग रोक दें': 'ऑपरेशन सिंदूर' पर बनी डॉक्यूमेंट्री की चर्चा, पाकिस्तान ने क्या कहा?

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मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई मिलिट्री झड़प को एक साल और तीन महीने से ज़्यादा हो गए हैं, लेकिन कुछ दिनों की इस झड़प पर दोनों देशों की राय अभी भी अलग-अलग है.

दोनों पक्षों ने जीत का दावा किया और युद्ध के दौरान हुए मिलिट्री नुक़सान के बारे में अलग-अलग बातें कहीं.

हाल ही में रिलीज़ हुई डिस्कवरी चैनल की डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म 'डीक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर' ने एक बार फिर इस झड़प को चर्चा का विषय बना दिया है.

इस फ़िल्म में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और दूसरे बड़े सैन्य अधिकारियों ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कामयाबी के कई दावे किए हैं.

दूसरी ओर, पाकिस्तानी सेना के पब्लिक रिलेशन डिपार्टमेंट (आईएसपीआर) ने इन दावों को ख़ारिज करते हुए इन्हें 'झूठा, विवादित और प्रोपेगैंडा पर आधारित' बताया है.

डॉक्यूमेंट्री में क्या है?

पहलगाम में पर्यटकों पर चरमपंथी हमले के बाद भारतीय सेना ने 6-7 मई, 2025 की दरमियानी रात को पाकिस्तान और उसके प्रशासन वाले कश्मीर में मिसाइल हमले किए थे.

इसे पहलगाम इलाक़े में 26 पर्यटकों की हत्या का जवाब बताया था जबकि पाकिस्तान ने हमेशा पहलगाम हमलों में शामिल होने के आरोपों से इनकार किया है.

भारत ने अपनी सैन्य कार्रवाई को 'ऑपरेशन सिंदूर' कहा था, जबकि पाकिस्तान ने अपने जवाबी ऑपरेशन को 'ऑपरेशन बुनयान अल मरसूस' कहा.

डॉक्यूमेंट्री 'डीक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर' का इंट्रोडक्टरी वीडियो डिस्कवरी चैनल इंडिया और डिस्कवरी प्लस इंडिया के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया है. बताया गया है कि पूरी डॉक्यूमेंट्री इन मीडिया प्लेटफॉर्म के एप्लीकेशन पर देखी जा सकती है.

हालांकि, एक्स और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के कई यूज़र्स ने अपने-अपने अकाउंट पर डॉक्यूमेंट्री अपलोड की है.

डॉक्यूमेंट्री में ऑपरेशन शुरू होने से लेकर सीज़फ़ायर तक की घटनाओं को मिलिट्री अधिकारियों के इंटरव्यू के ज़रिए बताया गया है.

इसमें, भारतीय मिलिट्री अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने पाकिस्तानी मिलिट्री ठिकानों, एयर बेस और कमांड सेंटर पर हमला करके भारी नुकसान पहुंचाया, जबकि पाकिस्तान के जवाबी हमले या तो टारगेट पर नहीं लगे या टारगेट तक पहुंचने से पहले ही रोक दिए गए और ख़त्म कर दिए गए.

डॉक्यूमेंट्री में यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान 10 मई, 2025 की सुबह तक सीज़फ़ायर चाहता था, और इसके लिए पाकिस्तानी आर्मी चीफ़ जनरल आसिम मुनीर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से संपर्क किया, और मार्को रुबियो ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से बात की.

दावे के मुताबिक़, "मार्को रुबियो से कहा गया था कि वे पाकिस्तानी डायरेक्टर जनरल ऑफ़ मिलिट्री ऑपरेशंस (डीजीएमओ) से उनके भारतीय समकक्ष से बात करने के लिए कहें, क्योंकि वे बात करने के लिए सही व्यक्ति थे."

डॉक्यूमेंट्री के लिए अपने इंटरव्यू में भारत के पूर्व डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई का दावा है कि पाकिस्तानी डीजीएमओ ने उनसे संपर्क किया और सीज़फ़ायर की मांग करते हुए कहा: "आपने हम पर इतने ब्रह्मोस मिसाइल दागे हैं, अब तो आपको सुकून मिल जाना चाहिए. और क्यों न हम इसे (जंग को) रोक दें?"

इसके आगे भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ एक इंटरव्यू का हिस्सा है, जिसमें वे कहते हैं कि पाकिस्तान ने "हमसे बार-बार रिक्वेस्ट की. उन्होंने कहा कि बहुत हो गया, आपने बहुत नुक़सान कर दिया है, अब सीज़फ़ायर कर लीजिए और हमने ये बात मान ली."

डॉक्यूमेंट्री के आख़िर में दी गई जानकारी के मुताबिक, इसे स्पार्कल वर्क्स फिल्म्स ने वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के लिए प्रोड्यूस किया है.

पाकिस्तानी सेना का क्या कहना है?

पाकिस्तानी सेना के इंटर-सर्विसेज़ पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने डॉक्यूमेंट्री में किए गए दावों को ग़लत बताते हुए कहा है कि "एक नाकाम मुहिम में हार मानने के बजाय, भारत ने इतिहास को अपने रंग में रंगने का फ़ैसला किया है."

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कहा गया: "इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने के लिए, भारतीय रचनाकारों ने तथाकथित बहुत ज़्यादा नाटकीय, एकतरफ़ा और झूठी कहानियाँ बनाईं, जिसे एक डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म के रूप में पेश किया गया है."

आईएसपीआर के मुताबिक, डॉक्यूमेंट्री में दिए गए बयानों में विरोधाभास है, जिससे पता चलता है कि घटनाओं का एक ऐसा पहलू पेश करने की कोशिश की गई है जो भारत के अंदर 'स्वीकार्य' है.

पाकिस्तान आर्मी के इंटर-सर्विसेज़ पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने कहा, "पहले भारत ने दावा किया था कि पहलगाम हमले के तीन कथित अपराधियों की पहचान कर ली गई थी और उन्हें तथाकथित ऑपरेशन सिंदूर के 82 दिन बाद 28 जुलाई, 2025 को मार दिया गया था. फिर भी डॉक्यूमेंट्री में दावा किया गया है कि यह ऑपरेशन पहलगाम घटना की 'सज़ा के तौर पर' शुरू किया गया था."

एक्स पर एक पोस्ट में, आईएसपीआर ने सवाल किया है कि "अगर पहलगाम हमले के 'कथित अपराधी' 28 जुलाई को मारे गए थे, तो भारत को यह बताना होगा कि 7 मई, 2025 को किसे सज़ा दी गई, जैसा कि वह दावा करता है."

आईएसपीआर ने इस मिशन में भारत के '100 फ़ीसदी कामयाबी' के दावे को ख़ारिज किया है.

आईएसपीआर के दावे के मुताबिक़, पाकिस्तानी आर्मी की जवाबी कार्रवाई में, "भारत में 26 मिलिट्री टारगेट पर हमला किया गया, जिसमें वे इंस्टॉलेशन भी शामिल थे जिनसे पाकिस्तानी नागरिकों को निशाना बनाया गया था, जिसमें लंबी दूरी के और सटीक गाइडेड हथियारों का इस्तेमाल किया गया."

आईएसपीआर के मुताबिक़, इस डॉक्यूमेंट्री के ज़रिए भारत ने "एक मिलिट्री गलती को कामयाबी के तौर पर दिखाने की कोशिश की है."

आईएसपीआर का कहना है कि उसे भारत के ख़िलाफ़ पाकिस्तानी आर्मी की कार्रवाई के बारे में 'कोई कहानी गढ़ने की ज़रूरत नहीं है' और 'पाकिस्तान की आर्म्ड फोर्सेज़ देश की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने के लिए पूरी तरह तैयार और काबिल हैं.'

पाकिस्तानी सेना के इन दावों पर अभी तक भारत की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

मई 2025 की झड़प के दौरान क्या जानकारी सामने आई?

डॉक्यूमेंट्री 'डीक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर' में भारतीय अधिकारियों का कहना है कि जब 6-7 मई की रात को पाकिस्तान और उसके प्रशासन वाले कश्मीर में मिसाइल हमले किए गए, तो पाकिस्तान ने शुरू में लाइन ऑफ़ कंट्रोल के पार जवाबी कार्रवाई की.

इस डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म में इंडियन एयर फोर्स के पूर्व वाइस चीफ़ नर्मदेश्वर तिवारी कहते हैं: "अगले 15 से 20 मिनट के अंदर, दोनों तरफ के 40 से 50 एयरक्राफ्ट हवा में थे."

साउथ वेस्टर्न एयर कमांड के कमांडर-इन-चीफ़ एयर मार्शल नागेश कपूर कहते हैं: "हम हवा में कड़ी नज़र रख रहे थे ताकि उनका कोई भी एयरक्राफ्ट इस तरफ (बॉर्डर के) हिस्से में न आ सके या अपने एयरस्पेस में रहकर हम पर बम न गिरा सके."

अगला वाक्य फिर से नर्मदेश्वर तिवारी का है, "हमने कई सरफेस-टू-एयर मिसाइलें दागी थीं, जिससे यक़ीनन दुश्मन को कुछ नुकसान ज़रूर हुआ था."

नर्मदेश्वर तिवारी के मुताबिक, "करीब दो घंटे बाद, उन्होंने (पाकिस्तानी एयरक्राफ्ट) वापस जाने का फैसला किया."

ध्यान देने वाली बात यह है कि डॉक्यूमेंट्री में नर्मदेश्वर और नागेश कपूर ने उस रात इंडियन एयरक्राफ्ट के नुकसान के बारे में कुछ नहीं कहा है, जबकि पाकिस्तान ने 7 मई को दावा किया था कि उसने छह इंडियन एयरक्राफ्ट गिराए थे.

जून 2025 में, इंडियन आर्म्ड फोर्सेज़ के चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ जनरल अनिल चौहान ने ब्लूमबर्ग टीवी को एक इंटरव्यू में बताया था कि "ज़रूरी बात यह नहीं है कि जेट्स को मार गिराया गया या नहीं, बल्कि यह है कि उन्हें क्यों मार गिराया गया."

बीबीसी वेरिफाई ने मई 2025 में तीन वीडियो वेरिफाई किए थे जिनमें दावा किया गया था कि उनमें दिख रहा मलबा इंडियन एयर फ़ोर्स द्वारा इस्तेमाल किए गए एक फाइटर जेट का था.

यह दावा डॉक्यूमेंट्री में भी किया गया है और सीज़फ़ायर के बाद, भारत सरकार ने यह भी कहा था कि 9 मई को अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फ़ोन करके बताया था कि पाकिस्तान अगले कुछ घंटों में एक बड़ा हमला कर सकता है.

दावे के मुताबिक़, "प्रधानमंत्री मोदी ने अपने जवाब में साफ़ कर दिया था कि अगर ऐसा कोई हमला होता है, तो हम करारा जवाब देंगे."

हालांकि, बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच जंग रोक दी है.

इस पर भारत की विपक्षी पार्टियों ने सवाल पूछा था कि सीज़फ़ायर के पीछे कौन था?

कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने पार्लियामेंट के एक सेशन को संबोधित करते हुए कहा था: "अगर पाकिस्तान सच में घुटने टेकने को तैयार था, तो आप रुके क्यों, आप झुके क्यों. आपने किसके सामने सरेंडर किया?"

भारत ने दावा किया था कि उसने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ अपने ऑपरेशन में '100 से ज़्यादा आतंकवादी' मारे हैं और मिलिटेंट कैंप, पाकिस्तानी एयर बेस और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया है.

भारत ने यह भी दावा किया कि उसने पांच पाकिस्तानी फाइटर जेट और एक बड़ा एयरक्राफ्ट मार गिराया था. हालांकि, पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने इससे इनकार किया और कहा कि 'एक भी पाकिस्तानी एयरक्राफ्ट को निशाना नहीं बनाया गया या नष्ट नहीं किया गया.'

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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