इंडिया गठबंधन की बैठक में कौन-कौन हुआ शामिल और किन मुद्दों पर बनी सहमति

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नई दिल्ली में सोमवार को इंडिया गठबंधन की बैठक में विपक्षी दलों के नेताओं ने गठबंधन की एकता पर ज़ोर दिया और कहा कि ये गठबंधन देश में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और लोगों के रोज़गार से जुड़े मुद्दे जोर-शोर से उठाएगा.

इंडिया गठबंधन के नेताओं ने विपक्षी दलों की एकता मज़बूत करने और भाजपा का मुकाबला करने के लिए नई रणनीति तैयार करने पर भी ज़ोर दिया.

बीजेपी ने इंडिया गठबंधन पर तंज़ कसते हुए कहा कि वोट चोरी नहीं हुआ बल्कि 'विपक्षी दलों का वजूद चोरी हुआ' है.

इंडिया गठबंधन की बैठक ऐसे समय में हुई है जब इसके कुछ घटक दलों के बीच गंभीर मतभेद खुलकर सामने आए हैं. बैठक में विपक्षी दल आम आदमी पार्टी और डीएमके शामिल नहीं हुए.

इसके साथ ही एक प्रमुख पार्टी तृणमूल कांग्रेस जो बड़े राजनीतिक संकट से जूझ रही है, इस बैठक में शामिल हुई.

जहां इस बैठक की तैयारी हो रही थी वहीं पार्टी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु रे ने अपनी राज्यसभा और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है.

ऐसी आशंका जताई जा रही है कि पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद बड़ी तादाद में तृणमूल कांग्रेस सांसद पार्टी से इस्तीफ़ा दे सकते हैं.

खड़गे ने बताया इंडिया गठबंधन क्या करेगा?

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि इंडिया गठबंधन की बैठक में 25 पार्टियों ने हिस्सा लिया.

गठबंधन की बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बताया कि विपक्षी दलों की बैठक में क्या-क्या फै़सले किए गए.

खड़गे ने कहा कि सभी दलों ने मिलकर पांच मुद्दों पर सहमति जताई है.

उन्होंने कहा, ''एसआईआर, वोटर लिस्ट में हेरफेर और चुनाव की निष्पक्षता पर उठे गंभीर प्रश्नों पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को जल्द ही एक चिट्ठी भेजी जाएगी.''

''इसके साथ ही शिक्षा मंत्री से तुरंत इस्तीफ़े की मांग की जाएगी क्योंकि नीट और सीबीएसई की परीक्षा देने वाले लाखों युवाओं के साथ विश्वासघात हुआ है. उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ा है.''

खड़गे ने कहा, ''इंडिया गठबंधन देश की ख़राब होती आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोज़गारी, महंगाई और किसानों के मुद्दों पर केंद्र से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग करेगा. साथ ही जनसरोकारों और दूसरे अहम मुद्दे उठाता रहेगा.''

खड़गे ने बताया कि इंडिया गठबंधन हर दूसरे महीने अपनी बैठक करेगा. साथ ही मानसून सत्र में सदन में समन्वय बनाए रखेगा. हर सुबह लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ सभी विपक्षी दलों की बैठक होगी.

बैठक में कांग्रेस की सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्लाह पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की महबूबा मुफ़्ती और वामपंथी दलों के नेता शामिल हुए.

इसके अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सुप्रिया सुले, सीपीएम के जॉन ब्रिटास, सीपीआई के डी. राजा और कुछ अन्य छोटे दलों के नेताओं ने भी बैठक में हिस्सा लिया.

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे बैठक में वर्चुअल मीडियम से इसमें शामिल हुए.

डीएमके और आम आदमी पार्टी ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया. हालांकि आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बैठक के लिए आईं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी से मुलाक़ात की थी.

हालांकि पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि बैठक में उन्हीं दलों को बुलाया गया जो मूल इंडिया गठबंधन का हिस्सा रहे हैं.

डीएमके ने बैठक में शामिल न होने के बारे में क्या कहा

डीएमके के प्रवक्ता टीकेएस एलनगोवन ने कहा, "हमने पहले ही कहा था कि कांग्रेस अब हमारे साथ नहीं है. वह अब टीवीके के साथ है. कांग्रेस ने यह भी कहा है कि भविष्य में वह स्थानीय निकाय चुनाव और लोकसभा चुनाव भी टीवीके के साथ गठबंधन में लड़ेगी. इसका मतलब है कि वह अब हमारे गठबंधन का हिस्सा नहीं है. फिर हम उनके साथ क्यों रहें?"

एलनगोवन ने कहा, ''तमिलनाडु की राजनीति में कांग्रेस और टीवीके के बीच बढ़ती नज़दीकियों को देखते हुए डीएमके ने इंडिया गठबंधन की इस बैठक से दूरी बनाई है.''

उनका कहना था कि जब कांग्रेस राज्य में किसी दूसरे राजनीतिक गठबंधन के साथ आगे बढ़ रही है, तो डीएमके के लिए उस प्लेटफ़ॉर्म पर बने रहने का कोई मतलब नहीं है.

सीपीएम क्यों है ख़फ़ा

हालांकि सीपीएम ने इंडिया गठबंधन की बैठक में हिस्सा लिया.

लेकिन केरल चुनाव के बाद से ही इंडिया गठबंधन में शामिल प्रमुख पार्टी कांग्रेस और सीपीएम के बीच दरार दिखने लगी थी.

सीपीएम के जनरल सेक्रेट्री एमए बेबी ने पत्रकारों से कहा, ''इंडिया गठबंधन में शामिल हर दल को अधिक गंभीरता और साफ़ मक़सद के साथ काम करना चाहिए. दुर्भाग्य से, केरल चुनावों के दौरान कांग्रेस नेतृत्व का रवैया कुछ अलग था. उस समय यह बेबुनियाद आरोप लगाया गया था कि सीपीआई(एम) और एलडीएफ़ का भाजपा के साथ कोई समझौता है. जब गठबंधन की प्रमुख पार्टी अपने ही एक प्रमुख सहयोगी पर ऐसे आरोप लगाए, तो यह ठीक नहीं है. चुनाव के दौरान भी इस तरह के ग़ैर-ज़िम्मेदाराना आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए."

अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने क्या कहा

बैठक से पहले समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि इंडिया गठबंधन की नज़र 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों पर है.

उन्होंने कहा, "बंधु राज (भाईचारे का राज) स्थापित होना चाहिए और यही हमारी कोशिश रहेगी. उत्तर प्रदेश में आप देख रहे हैं कि क्या हो रहा है. अब महिलाएं भी उनसे नाराज़ हैं. इसलिए लोकतंत्र के मूल्यों की रक्षा करना ज़रूरी है.''

अखिलेश यादव ने कहा कि विपक्षी दलों को सामाजिक सद्भाव, भाईचारे और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट होकर काम करना चाहिए.

उन्होंने कहा, ''उत्तर प्रदेश में जनता के बीच बढ़ती असंतोष की भावना को देखते हुए इंडिया गठबंधन 2027 के चुनावों के लिए अपनी रणनीति तैयार कर रहा है.''

बैठक में हिस्सा लेकर बाहर निकले राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि चीफ़ जस्टिस को 'चुनाव में हो रही गड़बड़ी' को लेकर चिट्ठी लिखी जाएगी.

उन्होंने कहा कि चुनाव ईवीएम पर हो रहे हैं और बैलट पेपर से चुनाव होंगे तो बीजेपी कहीं नहीं टिकेगी.

गठबंधन की बैठक के बारे में क्या बोली बीजेपी

बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, "आज एक बैठक हुई और मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि एसआईआर हुआ, वोट चोरी हुई. एसआईआर तो केरल और तमिलनाडु में भी हुआ, जबकि तमिलनाडु में तो आपने दूसरी पार्टी के साथ सरकार बना ली. वहाँ तो सहयोगी ही चोरी हो गया."

पात्रा ने कहा, "केरल में सरकार बन गई तो एसआईआर को कोस नहीं रहे. बंगाल में हार गए तो एसआईआर को दोष दे रहे हैं. यह जो पाखंड की हद है, वह देश देख रहा है. अगर सही मायने में कुछ चोरी हुआ है तो विपक्षी गठबंधन वालों का वजूद चोरी हुआ है, आज धरातल पर इनमें से किसी दल का कोई वजूद नहीं है."

इंडिया गठबंधन की बैठक पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, "वे इतने अहंकारी हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तरह-तरह के बेतुके आरोप लगाते रहते हैं. उनके पास न एकता है और न ही गंभीरता. लगातार चुनावी हार के बाद उनका मनोबल पूरी तरह टूट चुका है."

उन्होंने कहा, ''आम आदमी पार्टी बैठक में नहीं थी और न ही डीएमके और टीवीके शामिल हुए. उन्हें डर है कि अगर वे इंडिया गठबंधन के साथ जुड़ेंगे तो हार जाएंगे. आम आदमी पार्टी हारी, टीएमसी हारी, डीएमके हारी और आरजेडी भी हार गई. उन्हें यह डर सताने लगा है कि इंडिया गठबंधन के साथ रहने का मतलब हार है. इसी कारण वे इस बैठक से दूरी बना रहे हैं.''

''कई दल बैठक से इसलिए भी दूर रहे क्योंकि उन्हें कांग्रेस पार्टी का एजेंडा समझ में आ गया है. कांग्रेस सभी छोटे दलों को कमज़ोर कर खुद को एकमात्र विपक्षी दल के रूप में स्थापित करना चाहती है.''

गठबंधन की बैठक के बारे में तिरुवनंतपुरम में मौजूद बीजेपी नेता वी. मुरलीधरन ने कहा, '' इंडिया गठबंधन एक ऐसा सिस्टम बन गया है जो ऑन होता है और कभी ऑफ़. इसलिए हमें यह भी नहीं पता कि इस समय इसमें कितनी पार्टियां शामिल हैं. फिलहाल यह 'ऑन' है, लेकिन यह कितने दिनों तक रहेगा, यह कोई नहीं जानता.''

उन्होंंने कहा, ''मैं इसे ज़्यादा अहमियत नहीं देता क्योंकि कई राज्यों में उन्हें बड़ी नाकामियों का सामना करना पड़ा है. केरल में वे आपस में ही लड़ रहे हैं. असम जैसे राज्यों में उन्हें करारी हार झेलनी पड़ी.''

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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