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परिमल नाथवानी कौन हैं, जिनके सामने झारखंड राज्यसभा चुनाव में 'टूट' गया इंडिया गठबंधन
- Author, मोहम्मद सरताज आलम
- पदनाम, रांची से बीबीसी हिंदी के लिए
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
झारखंड में गुरुवार की शाम राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव परिणाम घोषित हुए. इस चुनाव में एक सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के इंडिया गठबंधन प्रत्याशी की जीत हुई है.
लेकिन चौंकाने वाला नतीज़ा दूसरी सीट पर दिखा जहां क्रॉस-वोटिंग के बीच एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी ने शानदार जीत दर्ज की है.
नाथवानी को 28 वोट मिले, जिसके बाद उन्हें विजेता घोषित किया गया. वहीं, कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा को 20 वोट मिले.
इस जीत के साथ ही परिमल नाथवानी चौथी बार राज्यसभा सदस्य के रूप में संसद पहुंचेंगे.
जीत के बाद परिमल नाथवानी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, "राज्यसभा सदस्य के तौर पर चौथे कार्यकाल में सेवा करने का मौका मिलने पर मैं बहुत आभारी हूँ. यह पल मेरे लिए बहुत भावुक करने वाला है क्योंकि यह झारखंड से मेरा तीसरा कार्यकाल होगा."
"यही वह धरती है जहां से 2008 में मेरी संसदीय यात्रा शुरू हुई थी. अपनी कर्मभूमि में एक बार फिर लौटना मेरे लिए बहुत गर्व और विनम्रता की बात है."
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का आभार व्यक्त किया.
राजद और माले के विधायकों पर क्रॉस वोटिंग का आरोप
दरअसल इंडिया गठबंधन में झारखंड मुक्ति मोर्चा के 34, कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल के 4 और सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के 2 विधायक हैं.
कांग्रेस का आरोप है कि राजद और सीपीआई (एमएल) के विधायकों ने उनके उम्मीदवार को वोट नहीं दिया.
कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने प्रणव झा की हार के लिए राजद और माले के विधायकों पर धोखा देने के आरोप लगाया.
के. राजू ने कहा, "कांग्रेस के सभी 16 वोट सुरक्षित हैं, झारखंड मुक्ति मोर्चा ने 4 वोट दिए और कांग्रेस को 20 वोट मिले. यह स्थिति इसलिए बनी क्योंकि निर्दलीय उम्मीदवार ने पैसे का इस्तेमाल किया..."
लेकिन उनके आरोपों का पूर्व सीपीआई एमएल विधायक विनोद सिंह ने खंडन किया.
उन्होंने कहा, "के. राजू जी अपनी कमियों पर पर्दा डाल रहे हैं. कांग्रेस को खुद देखना चाहिए कि देशभर में किनके विधायकों ने सबसे ज़्यादा पाला बदला है. हमारे दोनों विधायकों ने मतदान किया, ऑब्जर्वर को दिखाया. के. राजू तो वहां थे नहीं तो उनके आरोप बेबुनियाद है."
वैसे दोनों प्रत्याशियों की जीत पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्यसभा चुनाव में नवनिर्वाचित दोनों सदस्यों बैद्यनाथ राम और परिमल नाथवानी को बधाई दी.
उन्होंने एक्स हैंडल पर लिखा, "झारखंड की आवाज़ को उच्च सदन में प्रतिनिधित्व देने के लिए आज दोनों जनप्रतिनिधि निर्वाचित हुए हैं."
उनके इस जीत पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सभी विधायकों को बधाई देते हुए कहा कि "नाथवानी का झारखंड से पुराना और गहरा जुड़ाव रहा है. उनके चुने जाने से झारखंड के विकास को गति मिलेगी."
कौन हैं परिमल नाथवानी?
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड में कॉर्पोरेट अफ़ेयर्स के डायरेक्टर परिमल नाथवानी भारतीय कॉर्पोरेट और राजनीतिक जगत में पहचान रखने वाला चेहरा हैं.
राजनीति और बिज़नेस के अलावा वह गुजरात फ़ुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष और प्रसिद्ध नाथद्वारा मंदिर बोर्ड के सदस्य भी हैं.
झारखंड राज्यसभा में मिली जीत के साथ बतौर राज्यसभा सांसद ये उनका चौथा कार्यकाल होगा.
व्यापार से राजनीति तक का सफ़र
70 साल के परिमल नाथवानी ने कभी मुंबई में कोल्डड्रिंक्स के बाद साबुन की फ़ैक्ट्री लगाई. वह यहीं नहीं रुके, इसके बाद 1990 के दशक में उन्होंने गुजरात के वडोदरा से 40 के क़रीब पीसीओ भी चलाए.
लेकिन कभी शेयर बाज़ार में क़िस्मत आजमाने के बाद बड़े आर्थिक नुक़सान के कारण तनाव से भी गुजरना पड़ा. लेकिन 1997 में रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के मालिक धीरूभाई अंबानी से हुई मुलाक़ात ने उनके जीवन की दिशा बदल दी.
दरअसल जामनगर भूमि अधिग्रहण नाथवानी की देखरेख में हुआ. गुजरात की इस ज़मीन पर जामनगर में दुनिया की सबसे बड़ी रिफ़ाइनरी स्थापित हुई.
परिमल नाथवानी ने इसके बाद मुड़ कर नहीं देखा और इस तरह वह धीरूभाई अंबानी के काफ़ी करीब आ गए.
नाथवानी मुकेश अंबानी और नीता अंबानी के लिए वह काफ़ी अहमियत रखते हैं.
उनकी उद्योग संबंधित समझ के कारण उनका क़द बढ़ता गया और नाथवानी को जियो नेटवर्क के विस्तार में अहम भूमिका निभाने का मौका मिला.
आज रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड में कॉर्पोरेट मामलों के निदेशक के पद पर कार्यरत परिमल नाथवानी पिछले तीन दशक से व्यापार, राजनीति और खेल प्रशासन में ख़ासे सक्रिय हैं.
वडोदरा स्टॉक एक्सचेंज लिमिटेड के अध्यक्ष रह चुके परिमल नाथवानी ने 30 सितंबर 2011 से 15 सितंबर 2012 तक इस पद पर अपनी सेवाएं दीं.
बतौर राज्य सभा सांसद
परिमल नाथवानी पहली बार 2008 में झारखंड से राज्यसभा के लिए पहले निर्दलीय सांसद के तौर पर जीते थे.
झारखंड के वरिष्ठ पत्रकार मनीष आनंद कहते हैं, "पहली बार भी क्रॉस वोटिंग का लाभ मिला और बहुत कम वोटों से परिमल नाथवानी को जीत मिली. उस बार झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी खुल कर समर्थन किया था."
दूसरे कार्यकाल में भी परिमल नाथवानी को झारखंड से ही निर्दलीय राज्यसभा सांसद बनने का मौका मिला. उनका कार्यकाल अप्रैल 2014 से 2020 तक चला.
वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक सिंह बीबीसी कहते हैं, "दूसरी बार उनको बतौर निर्दलीय प्रत्याशी कांग्रेस का अंदरूनी समर्थन मिला था."
तीसरे कार्यकाल में नाथवानी आंध्र प्रदेश से वाईएसआर कांग्रेस के टिकट पर जीतकर राज्यसभा पहुँचे थे.
चौथी बार नाथवानी को झारखंड से मिली जीत पर वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक सिंह कहते हैं, "इस जीत के लिए उनको समर्थन देने वाली एनडीए के पास कुल 24 विधायक थे. ऐसे में उनको कुल चार विधायक की जरूरत थी."
वह कहते हैं, "लेकिन उन्होंने अपनी तरफ़ से छह वोट का जुगाड़ कर लिया. दो के अमान्य होने के बावजूद उनको जीत मिली. लेकिन सवाल यही है कि ये छह वोट उनको कैसे मिले?"
बहरहाल चौथी बार बने राज्यसभा सांसद नाथवानी अपने पिछले सभी कार्यकाल के दौरान संसद में कई महत्वपूर्ण समितियों के सदस्य भी रहे हैं.
झारखंड में मिली इस जीत के बाद परिमल नाथवानी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "मैं एक नए संकल्प और पूरी ईमानदारी के साथ झारखंड और यहाँ के लोगों के हितों और आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करूँगा."
लेकिन झारखंड की राजनीति पर नज़र रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक सिंह मानते हैं कि "क्रॉस वोटिंग से नाथवानी को मिली जीत इंडिया गठबंधन में दरार का एक कारण बन सकती है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.