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बांकीपुर उपचुनाव: बीजेपी उम्मीदवार के नाम वापस लेने पर क्या बोले प्रशांत किशोर
बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी की ओर से घोषित उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा ने अपना नामांकन वापस ले लिया है.
अभिषेक सिन्हा ने नाम वापस लेने के पीछे का कारण पारिवारिक बताया है. उन्होंने गुरुवार को ही बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाख़िल किया था.
इसके बाद बीजेपी ने नीरज कुमार सिन्हा को अपना उम्मीदवार घोषित किया है. इस सीट से बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन विधायक थे. राज्यसभा के लिए सांसद चुने जाने के बाद उन्होंने इस सीट से इस्तीफ़ा दे दिया था.
इसी सीट से जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने चुनाव लड़ने की घोषणा की है. बीजेपी उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा के नाम वापस लेने पर जन सुराज के संस्थापक और उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने प्रतिक्रिया दी है.
प्रशांत किशोर ने कहा है कि जनता के पास अब विकल्प आ गया है तो बीजेपी को अब उम्मीदवार नहीं मिल रहा है.
वहीं विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल ने रेखा कुमारी उर्फ़ रेखा गुप्ता को अपना उम्मीदवार बनाया है.
प्रदेश पार्टी अध्यक्ष को सौंपा पत्र
अभिषेक कुमार सिन्हा ने नाम वापसी की घोषणा के साथ ही प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी से मुलाक़ात की है.
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को इस बारे में पत्र दिया है, जिसमें उन्होंने एनडीए का प्रत्याशी बनाए जाने और भरोसा जताए जाने के लिए केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व का आभार जताया.
उन्होंने लिखा है, "विनम्रता के साथ आपसे आग्रह करना चाहता हूं कि मैं पारिवारिक कारणों से विधानसभा उप चुनाव लड़ने में असमर्थ हूं."
साथ ही उन्होंने कहा है कि कार्यकर्ता के नाते वो निष्ठापूर्वक सेवा देते रहेंगे.
अभिषेक कुमार सिन्हा भारतीय जनता युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष, भारतीय जनता युवा मोर्चा (बीजेवाईएम) के पूर्व पटना महानगर अध्यक्ष और दो बार मंडल अध्यक्ष रह चुके है.
प्रशांत किशोर ने अभिषेक कुमार सिन्हा के नाम वापस लेने पर कहा है, "ये दिखाता है कि कोई भी विधानसभा या लोकसभा क्षेत्र किसी का गढ़ या जागीर नहीं है. अगर जनता खड़ी हो जाए तो बड़े से बड़े नेता का पसीना निकल सकता है. जिस बांकीपुर के बारे में कल तक भाजपा के लोग ये कह रहे थे कि हमारा इतना मज़बूत किला है कि हम किसी को भी खड़ा करेंगे तो जनता हमको वोट देगी. आज जनता के पास एक विकल्प आ गया है तो भाजपा को उम्मीदवार नहीं मिल रहा है."
"इस देश में पिछले कुछ सालों में देखा गया है कि भाजपा के डर से दूसरी पार्टी के उम्मीदवार भागते हैं, ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स के डर से उम्मीदवार भागते हैं. दूसरी पार्टी के उम्मीदवार को ये लोग ख़रीदते हैं. आज ऊपर वाले ने इनके साथ इंसाफ़ किया है. इनका उम्मीदवार किसी कारणवश मैदान छोड़कर भागा है. अब उनको चिंता करने दीजिए, 3 तारीख़ को जब रिज़ल्ट आएगा तो मुकम्मल हिसाब होगा."
बाक़ी पार्टियों ने भी घोषित किए उम्मीदवार
बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में नामांकन की अंतिम तारीख़ सोमवार यानी 13 जुलाई है.
जन सुराज के प्रशांत किशोर, आरजेडी की रेखा गुप्ता के अलावा लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की नई पार्टी जनशक्ति जनता दल ने इस सीट से सामाजिक कार्यकर्ता वीणा मानवी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है.
बीजेपी ने अब नीरज कुमार सिन्हा को अपना उम्मीदवार बनाया है. नीरज साल 2006 से बीजेपी के सदस्य हैं और दो बार मंडल अध्यक्ष रहे हैं.
पहले इस विधानसभा क्षेत्र को पटना पश्चिम सीट के नाम से जाना जाता था. पिता नबीन किशोर प्रसाद सिन्हा के असामयिक निधन के बाद नितिन नबीन ने राजनीति में क़दम रखा था और 2006 में पहली बार इस सीट से विधानसभा चुनाव जीता था.
तब से यह सीट लगातार उनके पास थी. पटना ज़िले की बांकीपुर विधानसभा सीट पर क़रीब चार लाख मतदाता हैं और यहां कायस्थ और वैश्य यानी व्यापारी वर्ग के मतदाताओं का प्रभाव माना जाता है.
इस क्षेत्र में कायस्थ समुदाय कुल मतदाताओं का क़रीब 15-20% है, जबकि वैश्य समुदाय भी पटना ज़िले की इस शहरी सीट पर एक बड़ा सामाजिक समूह है.
2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी के नितिन नबीन को 98 हज़ार से ज़्यादा वोट मिले थे. बीजेपी यहाँ से 1995 से चुनाव हारी नहीं है.
बीते चुनाव में रेखा गुप्ता आरजेडी की उम्मीदवार थीं. उन्हें नितिन नबीन के ख़िलाफ़ क़रीब 47 हज़ार वोट मिले थे. वहीं जन सुराज पार्टी की उम्मीदवार वंदना कुमारी को आठ हज़ार से भी कम वोट मिले थे.
प्रशांत किशोर अब क्यों मैदान में?
प्रशांत किशोर का विधानसभा उप चुनाव लड़ने का फ़ैसला कई मायनों में हैरान करने वाला भी है, क्योंकि बांकीपुर सीट को बीजेपी का गढ़ भी माना जाता है और राज्य में उसके नेतृत्व में सरकार भी चल रही है.
ऐसे में प्रशांत किशोर कितनी बड़ी चुनौती पेश कर पाएंगे, यह देखना भी दिलचस्प होगा.
इससे पहले, बिहार विधानसभा चुनाव-2025 के दौरान उन्होंने अंतिम समय में ख़ुद चुनाव लड़ने से मना कर दिया था. उन्होंने कहा था कि 'यह उनकी पार्टी का फ़ैसला था कि राज्य की अन्य सीटों पर ध्यान देना ज़रूरी है.'
इसके बाद भी विधानसभा चुनावों में उनकी पार्टी का खाता नहीं खुला था.
अपनी उम्मीदवारी पर प्रशांत किशोर ने अपनी पार्टी के साथियों, सहयोगियों, नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं का आभार जताया था.
उन्होंने कहा था, "मैं उन्हें भरोसा दिलाता हूं कि पिछले चार वर्षों से जन सुराज ही मेरा जीवन रहा है. आने वाले दस वर्षों तक, जब तक बिहार में बदलाव का सपना पूरा नहीं हो जाता, मेरा कोई दूसरा उद्देश्य नहीं है."
"मैं बांकीपुर उपचुनाव लड़ने की ज़िम्मेदारी को उसी लक्ष्य की तरफ एक कदम मानता हूं. नवंबर 2025 में हजारों और लाखों लोग जन सुराज के विचारों और प्रयासों से जुड़े थे."
पिछले बिहार चुनाव पर उन्होंने कहा, "नतीजों के बाद कई लोगों को निराशा हुई और उनका उत्साह भी कम हुआ. उनमें से ज़्यादातर का मानना है कि अगर जन सुराज बांकीपुर उपचुनाव जीतती है, तो इससे न सिर्फ़ यह आंदोलन मजबूत होगा, बल्कि बिहार में बदलाव की सोच को भी नई ताक़त मिलेगी."
"मैं विनम्रता के साथ यह ज़िम्मेदारी स्वीकार करता हूं."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.