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उत्तर प्रदेश: अंबेडकर नगर और बरेली में आंबेडकर की मूर्ति को लेकर हिंसा, महिलाओं पर पुलिस के लाठीचार्ज का पूरा मामला क्या है
- Author, अनंत झणाणें
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
उत्तर प्रदेश के दो ज़िलों से बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर की प्रतिमाओं से जुड़े विवाद और हिंसक वारदातों का मामला सामने आया है.
अंबेडकर नगर से एक वीडियो भी वायरल हुआ है जिसमें पुलिस कुछ महिलाओं पर लाठीचार्ज करती दिख रही है.
इसके साथ ही बरेली में आंबेडकर की एक प्रतिमा हटाने के कारण हिंसा और विवाद हुआ.
बरेली पुलिस का कहना है कि किसी भी महापुरुष की प्रतिमा लगाने के नियम होते हैं और बिना अनुमति के ऐसा करना ग़लत है.
आइए आपको बताते हैं कि आख़िरकार क्यों हुई यह घटनाएं और स्थानीय पुलिस ने क्या कार्रवाई की.
क्या है महिलाओं से मारपीट का वायरल वीडियो?
अंबेडकर नगर में हुई हिंसा से जुड़े दो वायरल वीडियो सामने आए हैं. 22 सेकंड के एक वीडियो में गाँव की कुछ महिलाएं पुलिस वालों के साथ हाथापाई करती नज़र आ रही हैं. ग्रामीण महिलाएं महिला पुलिसकर्मियों के साथ भी उलझती और मारपीट करती नज़र आ रही हैं. इसी झड़प में गाँव की कुछ महिलाओं के हाथ में डंडे भी दिख रहे हैं जिनसे वो पुलिसकर्मियों को मारती नज़र आ रही हैं. 36 सेकंड के एक दूसरे वीडियो में पुरुष पुलिस कर्मी एक नीली साड़ी पहने महिला (जिसके हाथ में एक डंडा भी दिख रहा है) को लाठी से मारते दिख रहे हैं. पुलिस एक ठेले वाली गुमटी के पीछे मौजूद एक महिला पर लाठी भांजने लगती है, जिसके बाद वो ज़मीन पर गिर जाती है. वायरल वीडियो में एक पुलिस अधिकारी फ़ोन पर मौके का वीडियो भी बनाता नज़र आ रहा है. बाद में एक गली में मौजूद कई लोग पुलिस पर पथराव करते दिख रहे हैं, और पुलिस भी उन पर जवाबी पथराव कर रही है.
क्या है अंबेडकर नगर पुलिस का कहना
घटना 11 अक्टूबर को हुई जिसमें जलालपुर क्षेत्र के वाजिदपुर मोहल्ले में बाबा साहब आंबेडकर की प्रतिमा पर कुछ अराजक तत्वों ने कालिख पोती, जिसके बाद मुक़दमा लिखा गया.
इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है.
मामले से जुड़ी एफ़आईआर में हमले में तहसीलदार की गाड़ी तोड़ने का आरोप लगाया गया है. और तहसीलदार के ड्राइवर को चोट लगी है और उसकी तहरीर पर एक एफ़आईआर दर्ज हुई है.
मुक़दमा सरकारी काम में बाधा डालने का भी है और उसके तहत सात लोगों की गिरफ़्तारी हुई है जिसमें चार महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं.
घटना के बारे में ज़िले के एसपी अजित सिन्हा ने बताया, "यह बाबा साहब भीमराव आंबेडकर की दीवार में उकेरी तस्वीर थी. यह एक खुले इलाके में थी और इस पर किसी ने कालिख पोत दी.
इस मामले में अज्ञात के ख़िलाफ़ मुक़दमा लिखा गया था. इसके बाद एसडीएम ने बैठक की जिसमें प्रतिमा की ज़मीन से सटी हुई एक विवादित ज़मीन का हल निकालने की कोशिश की गई."
पुलिस के मुताबिक़, एक पक्ष यह चाहता था कि उस परती ज़मीन को भी समाहित कर उसे पार्क का रूप दिया जाए.
स्थानीय एसडीएम ने एक बिस्वा बंजर ज़मीन को पार्क के रूप में घिरवा कर गेट लगाने का सुझाव दिया और पुलिस का दावा है कि दोनों पक्षों में इस पर सहमति बन गई.
लेकिन जिस दिन नगर पालिका के कर्मचारी उस एक बिस्वा (क़रीब 1350 वर्ग फ़ीट) ज़मीन को दीवार से घेरने पहुंचे, वहां पर कुछ महिलाएं पहुँच गयीं और एक बिस्वे के अलावा विवादित ज़मीन को भी घिरवाने की मांग करने लगीं.
आरोप है कि इन महिलाओं ने चहारदीवारी गिरा दी, एसडीएम पर पथराव हुआ और महिला आरक्षी की पिटाई की गई.
पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा महिलाओं की पिटाई के वायरल वीडियो के बारे में एसपी अजित सिन्हा ने कहा, "सीओ इस आरोप की जांच कर रहे हैं कि अगर किसी ने ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग किया है तो उसके ख़िलाफ़ भी कार्रवाई हो सके."
पुलिस ने यह भी जानकारी दी कि स्थानीय बर्णवाल परिवार (जिनकी विवादित ज़मीन है) की तरफ़ से उनकी निजी दीवार गिराने की तहरीर पर भी मुक़दमा दर्ज किया गया है.
क्या है अब गाँव का माहौल?
बर्णवाल परिवार के धीरज बर्णवाल ने स्थानीय पत्रकार प्रमोद श्रीवास्तव से बताया, "जिस दिन यह घटना हुई उस दिन हम अपनी ज़मीन पर निर्माण का काम करा रहे थे. गाँव के कुछ लोग आए और मुझे मारना-पीटना शुरू दिया, मेरे मिस्त्रियों को मारना-पीटना शुरू कर दिया. मुझे भी चोटें आईं. हमें दौड़ा-दौड़ा कर मारा गया."
धीरज बर्णवाल का आरोप है कि "एकदम सुनियोजित तरीके से लोग आए. ज़मीन की आठ बार पैमाइश की गई है. एक बिस्वा बंज़र है, सरकारी ज़मीन है, बाबा साहब के नाम से हो जाए, हमें उससे कोई मतलब नहीं है. यह लोग हमें बार-बार परेशान करते हैं."
बीबीसी ने दूसरा पक्ष भी जानने की कोशिश की लेकिन वहां पहुँच कर पाया कि मोहल्ले में काफ़ी सन्नाटा था.
बस्ती में एक दुकान खुली थी और वहां बैठे दुकान मालिक ने बताया कि, "जब रविवार को घटना हुई तब हम थे नहीं, हम शाम को आये और हमें बहुत ज़्यादा जानकारी नहीं है. यही सुनने में आया कि स्कूल के पास बाबा साहब की मूर्ति लगी थी, वहां पर कोई कालिख लगा गया. यहाँ और कोई दिक़्क़त नहीं है."
क्या है अंबेडकर नगर से बसपा के सांसद का कहना?
अंबेडकर नगर से बीएसपी के सांसद रितेश पांडेय ने इस मामले का वीडियो सोशल मीडिया में डाला है.
उन्होंने लिखा है, "बाबासाहेब की प्रतिमाओं को नुक़सान पहुंचाने का चलन अब जलालपुर भी आ पहुँचा, जो दुर्भाग्यपूर्ण है. इस कृत्य को अंजाम देने वालों के ख़िलाफ़ तुरंत जांच होनी चाहिए.
बाबासाहेब की प्रतिमा के साथ हुए अपमान का विरोध होना चाहिए. पर इसका विरोध कर रहे लोगों, विशेष रूप से महिलाओं, के प्रति जो प्रशासन और पुलिस का रवैया रहा है, उसकी जितनी भर्त्सना की जाए, कम है."
बरेली में आंबेडकर प्रतिमा स्थापित करने पर क्यों हुआ विवाद?
उत्तर प्रदेश के बरेली में भी आंबेडकर की एक प्रतिमा को हटाने का मामला सामने आया है.
एक वायरल वीडियो में पुलिस आंसू गैस के गोले दागते हुए दिख रही है, एक शख़्स छतों से पुलिस पर पथराव करते हुए नज़र आ रहा है.
फिर बाद में ज़िला प्रशासन के कुछ कर्मचारी एक ढकी हुई प्रतिमा को निकालने के लिए उसके बेस को ठोकते-पीटते नज़र आ रहे हैं.
मौके से जुड़े एक दूसरे वायरल वीडियो में गाँव की महिलाएं, महिला पुलिसकर्मियों से घिरी हुई नज़र आ रही हैं.
एक वायरल वीडियो में एक ग्रामीण महिला को महिला पुलिसकर्मी ले जाती हुई दिख रही हैं.
क्या है बरेली की पुलिस का कहना?
पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफ़आईआर के मुताबिक़, उन्हें क़स्बा साहूकारा में कुछ लोगों द्वारा बाबा भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा बिना प्रशासन की अनुमति के स्थापित करने की जानकारी मिली.
पुलिस का दावा है कि उन्होंने मौके पर मौजूद लोगों को समझाने की कोशिश की कि प्रतिमा लगाने के लिए प्रशासन की अनुमति की ज़रूरत होती है.
इसके बावजूद पुलिस का कहना है कि लोग आक्रोशित हो गए. बाद में और पुलिस बल, एसडीएम और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुँच गए.
पुलिस का कहना है कि कुछ लोगों ने महिलाओं को उकसा कर मौके पर बुला लिया. पुलिस का दावा है कि उसने लोगों को समझने के कोशिश की और लोगों को मूर्ति हटाने को कहा.
एफ़आईआर में लिखा है कि वहां मौजूद महिलाएं और पुरुष उकसावे में आ गए और लाठी डंडे लेकर पुलिस बल पर हमला कर दिया और फिर पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और आंसू गैस के गोले छोड़ कर पथराव कर रहे लोगों पर क़ाबू पाया.
बरेली पुलिस का कहना है कि शाम सवा पांच बजे ज़िला प्रशासन ने डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की मूर्ति को ससम्मान क़ब्ज़े में लेकर लोगों को वापस भेज दिया.
स्थानीय पुलिस का आरोप है कि एफ़आईआर में नामज़द 12 लोगों ने क़रीब 20 पुरुषों और 40 महिलाओं को उकसाने का काम किया. पुलिस ने कहा कि यह सभी लोग मौके से भाग निकले.
बरेली ग्रामीण के एसपी राज कुमार अग्रवाल का कहना है, "वो सरकारी ज़मीन थी. अगर कोई पब्लिक प्लेस है या अगर आपकी कोई निजी ज़मीन भी है तो सरकार के शासनादेश के अनुसार आपको अनुमति लेनी चाहिए.
हमने उनसे अनुरोध किया कि आप प्रतिमा अपने घर पर रखिए और आप एक अर्ज़ी दीजिए और उसमें हमलोग आपकी पैरवी करके मूर्ति लगवा देंगे. उस बात पर कुछ लोग तो मान गए, लेकिन कुछ लोग जान-बूझ कर चाहते थे कि बदमाशी हो. उनका मक़सद बाबा साहब के सम्मान का नहीं था."
इस विवाद से जुड़ी कार्रवाई के बारे में राजकुमार अग्रवाल ने बताया, "प्रशासन ने बहुत ही संयमित तरीक़े से आपस में बातचीत करके प्रतिमा को हटा दिया है और पुलिस ने जो चबूतरा बनाया था उसको हटा दिया है और पूरे प्रकरण में जो विधिक कार्रवाई है वो पुलिस कर रही है."
मामले में फ़िलहाल कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई हैं और पुलिस अभियुक्तों की तलाश कर रही है.
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