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थाईलैंड: घर वापसी के बाद जेल भेजे गए पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा क्या सत्ता में वापसी कर सकेंगे
- Author, जोनाथन हेड
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, बैंकॉक
- प्रकाशित
थाईलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा 15 साल के निर्वासन के बाद देश लौटे और देश लौटते ही उन्हें जेल भेज दिया गया.
थाकसिन शिनावात्रा ऐसे वक़्त में थाईलैंड लौटे हैं, जब देश में अगला नेता चुने जाने के लिए वोट डाले जाने हैं. कई लोगों का मानना है कि एक समझौते के तहत वो थाईलैंड लौटे हैं और वो ज़्यादा दिन जेल में नहीं रहेंगे.
थाकसिन शिनावात्रा को थाईलैंड का सबसे सफल चुना हुआ नेता माना जाता है. उन्हें साल 2006 में तख्तापलट के ज़रिए सत्ता से बाहर कर दिया गया था और उस पर प्रतिबंध भी लगा दिया गया था.
इसके बाद से वो देश से बाहर रह रहे थे. मगर अब राजनीतिक महत्वकांक्षाओं वाले इस टेलिकॉम कारोबारी ने थाईलैंड वापसी की है.
माना जा रहा है कि थाकसिन शिनावात्रा ने ये वापसी थाईलैंड में उन लोगों के साथ समझौते के बाद की है, जिन्होंने साल 2014 के तख्तापलट में थाकसिन की पार्टी को बेदखल किया था. तब उन्हें आठ साल तक की सज़ा सुनाई गई थी. इन आपराधिक मामलों को थाकसिन शिनावात्रा ने राजनीति से प्रेरित बताया है.
रिमांड पर भेजे गए थाकसिन
74 साल के थाकसिन शिनावात्रा सिंगापुर के रास्ते दुबई से स्थानीय समयानुसार 6 बजे प्राइवेट जेट से बैंकॉक पहुंचे. इस मौक़े पर थाकसिन शिनावात्रा के सैकड़ों समर्थक जुटे, जो नारे लगाकर अपने नेता का स्वागत कर रहे थे.
कई समर्थक पूरी रात यात्रा कर अपने नेता को देखने पहुंचे थे. हालांकि थाकसिन शिनावात्रा सभी से नहीं मिल पाए. वे अपनी दो बेटियों और बेटे के साथ एयरपोर्ट पर पहुंचे थे. उन्होंने राजा और रानी की तस्वीर का भी सम्मान किया.
इसके फौरन बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट ले जाया गया और जहां उन्हें आठ साल की सज़ा सुनाई गई. थाकसिन शिनावात्रा को फिर रिमांड पर जेल भेज दिया गया.
माना जा रहा है कि वे लंबे वक़्त तक हिरासत में नहीं रहेंगे.
एयरपोर्ट के बाहर माहौल
थाकसिन शिनावात्रा थाईलैंड में कितने अहम हैं, इसे इस बात से समझिए कि लोग सोमवार रात से एयरपोर्ट पर उनका इंतज़ार कर रहे थे. 63 साल की सैमनियांग कोंगपोलपार्न सुरीन प्रांत से यहां पहुंची हैं.
ये जगह थाकसिन की पार्टी का गढ़ रही है. सैमनियांग कहती हैं, "वो अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्री हैं. हालांकि मैं आज उनको देख नहीं पाई, पर मैं फिर भी आई ताकि उनका समर्थन कर सकूं."
वो कहती हैं, "मुझे इस बात से दिक़्क़त नहीं है कि वो सैन्य समर्थक सरकारों के साथ समझौता कर रहे हैं."
बीते तीन महीने में थाईलैंड में राजनीतिक तौर पर माहौल काफी उथल-पुथल वाला रहा है. संभावनाएं जताई जा रही हैं कि थाकसिन शिनावात्रा की फ्यू थाई पार्टी गठबंधन कर सत्ता में आ सकती है.
मई महीने में हुए चुनावों में मूव फॉरवर्ड पार्टी ने सबसे ज़्यादा सीटें जीती थी. मूव फॉरवर्ड पार्टी ने थाकसिन शिनावात्रा की फ्यू थाई पार्टी से शुरू में गठबंधन किया था.
थाकसिन शिनावात्रा की पार्टी के हाथ बंधे हैं?
अब ये तय माना जा रहा है कि इस गठबंधन में लगभग सभी को शामिल किया जाएगा. इसमें फ्यू थाई उन लोगों के साथ सरकार में शामिल होने की दिशा में बढ़ रही है, जिनसे उनकी कभी दुश्मनी थी.
फ्यू थाई पार्टी इस बात पर ज़ोर दे रही है कि नए फैसलों का पुराने से कोई नाता नहीं है. कुछ लोग इस पर यकीन भी कर रहे हैं.
ये सही है कि फ्यू थाई पार्टी के हाथ बंधे हुए हैं. ऐसा उस अनिर्वाचित संसद के कारण है, जो साल 2014 में हुए तख्तापलट के बाद सत्ता में पांच साल रही थी.
मई में हुए चुनावों में फ्यू थाई को सफलता हाथ नहीं लगी थी. चुनावों में फ्यू थाई पार्टी का प्रदर्शन ख़राब रहा था. फ्यू पार्टी के वोट मूव फॉरवर्ड पार्टी की तरफ शिफ्ट हुए हैं. इसी कारण फ्यू पार्टी पहली बार दूसरे नंबर पर रही है.
फिलहाल संसद में जो सीनेटर हैं वो सब सेना के नियुक्त किए हुए हैं. इन लोगों के पास ये अधिकार हैं कि वो 500 चुने हुए सांसदों के साथ नया प्रधानमंत्री चुनने के लिए होने वाली वोटिंग में हिस्सा लें.
ये साफ है कि सेना के तहत नियुक्त किए सीनेटर नहीं चाहते कि ऐसी पार्टी सत्ता में आए, जिससे राजशाही, सेना और उन कारोबारियों के गठजोड़ पर असर हो, जो दशकों से थाईलैंड के अहम फैसले लेते आए हैं.
इसी वजह से फ्यू थाई के साथ मूव फॉरवर्ड के गठबंधन को उन्होंने ख़ारिज किया, जबकि निचले सदन में वो बहुमत में हैं. ऐसे में जब फ्यू थाई गठबंधन करने के लिए बातचीत करने उतरी तो उसे सीनेट की मदद की ज़रूरत भी होगी. इसका मतलब ये हुआ कि फ्यू थाई को अपने पूर्व विरोधियों से भी समर्थन चाहिए होगा.
हालांकि फ्यू थाई पार्टी के नेताओं का कहना है कि पार्टी को कट्टरपंथी संगठनों के साथ सरकार में शामिल ना होकर बेहतर समझौते की कोशिशें करनी चाहिए. थाईलैंड में फ्यू थाई और मूव फॉरवर्ड पार्टी के बिना बना कोई गठबंधन फौरन गिर जाएगा.
इंतज़ार नहीं करना चाहती थी फ्यू पार्टी
फ्यू थाई पार्टी का नेतृत्व अब इंतज़ार नहीं करना चाहता था. इसे इस बात से समझिए कि फ्यू थाई ने शाही परिवार की घोर समर्थक पार्टी माने जाने वाली यूनाइडेट थाई नेशन से हाथ मिलाने से भी गुरेज़ नहीं किया.
इस पार्टी के नेता अतीत में थाकसिन शिनावात्रा के परिवार और उनके समर्थकों की आलोचना करते रहे हैं. यही वो पार्टी थी जिसने फ्यू थाई को सत्ता से बाहर करने में अहम भूमिका निभाई थी.
ऐसे में दो अलग विचारधारा के लोग अब एक साथ बैठेंगे और ये इस ओर भी इशारा करता है कि थाईलैंड की राजनीति किस तरफ बढ़ रही है.
शाही परिवार के घोर समर्थक माने जाने वालों के लिए मूव फॉरवर्ड एक ख़तरे की तरह है. इसमें ये बात कहना भी ज़रूरी है कि थाईलैंड की युवा आबादी शाही परिवार की दौलत और ताकत पर चर्चा की मांग कर रही है.
थाकसिन शिनावात्रा के लिए इस समय पार्टी की प्रतिष्ठा से ज़्यादा सत्ता में शामिल होना ज़्यादा ज़रूरी है. हालांकि थाकसिन शिनावात्रा की पार्टी में अभी ऐसे भी लोग हैं, जो इस नई डील से ख़ौफ़ में हैं.
इन लोगों का मानना है कि ज़मीन पर पार्टी की जो पकड़ है वो इससे कमज़ोर होगी.
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