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यमन के पास हमले में भारतीय झंडे वाला जहाज़ डूबा, यमन ने हूती विद्रोहियों को बताया ज़िम्मेदार
- Author, सोफ़िया फरेरा सैंटोस
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 4 मिनट
अधिकारियों ने बताया कि यमन के तट के पास एक प्रोजेक्टाइल की चपेट में आने के बाद भारतीय झंडे वाला एक जहाज़ पलट गया और डूब गया.
भारत के जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि एमएसवी फैज़ नूरे ओलिया पर सवार सभी 14 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया. इनमें 13 भारतीय नागरिक थे.
सोनोवाल ने इस 'बिना उकसावे के किए गए हमले' की निंदा की और कहा कि क्षेत्र में नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे.
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि जहाज़ पर हमला किसने किया. लेकिन सऊदी समर्थित यमनी सरकार ने इस हमले के लिए हूती विद्रोहियों पर आरोप लगाए हैं.
यह लाल सागर में जहाज़ों पर हुए हालिया हमलों की कड़ी में ताज़ा मामला है. इसी साल फ़रवरी में ईरान की ओर से होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद किए जाने के बाद कुछ टैंकर इस वैकल्पिक समुद्री मार्ग का इस्तेमाल कर रहे हैं.
बाद में भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर क्षेत्र में कमर्शियल जहाज़ों पर हो रहे हमलों को 'गहरी चिंता का विषय' बताया.
विदेश मंत्रालय ने कहा, "क्षेत्र में कमर्शियल जहाज़ों को निशाना बनाना बंद होना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय क़ानून के अनुरूप क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में मुक्त और निर्बाध नौवहन और व्यापार को जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए."
यमनी विदेश मंत्रालय ने क्या कहा
सऊदी समर्थित यमन सरकार के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, "यह हमला हूती आतंकवादी मिलिशिया की लगातार जारी आपराधिक गतिविधियों और हमलों की कड़ी का हिस्सा है."
"इन गतिविधियों में शहरों को निशाना बनाना, हवाई अड्डों और तेल प्रतिष्ठानों पर बमबारी करना, निर्यात बाधित करना और यमन के लोगों को आय के महत्वपूर्ण स्रोतों से वंचित करना शामिल है."
मंत्रालय के अनुसार, "इससे हूती तख्तापलट के कारण पैदा हुई मानवीय त्रासदी और गंभीर हो गई है."
"हूती समूह लाल सागर, बाब अल-मंदब स्ट्रेट और अदन की खाड़ी में बंदरगाहों और समुद्री नौवहन के लिए भी ख़तरा पैदा कर रहा है. साथ ही वह आर्थिक और व्यापारिक हितों को भी ऐसे तरीके से प्रभावित कर रहा है जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता कमज़ोर पड़ रही है."
फ़रवरी के अंत में ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमलों के बाद से क्षेत्र के कई समुद्री व्यापार मार्ग प्रभावित हुए हैं.
इसके बाद ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद कर दिया, जो दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में से एक है. इसका वैश्विक तेल क़ीमतों पर बड़ा असर पड़ा है.
सऊदी अरब से तेल लेकर आने वाले कुछ जहाज़ लाल सागर के वैकल्पिक समुद्री मार्ग से गुजर रहे थे, लेकिन हाल में यमन के हूती लड़ाकों द्वारा सऊदी टैंकरों पर किए गए हमलों ने क्षेत्र में जोखिम और बढ़ा दिया है.
अब लाल सागर में जोखिम बढ़ा
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, सऊदी समर्थित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के परिवहन मंत्रालय ने ईरान समर्थित हूतियों पर विस्फोटकों से भरी नाव का इस्तेमाल कर हमला करने का आरोप लगाया है.
हूतियों ने इस घटना पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
हूतियों ने 20 जुलाई को सऊदी अरब के लाल सागर बंदरगाहों की 'नाकाबंदी' की घोषणा की थी.
ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस एजेंसी ने पिछले एक सप्ताह में क्षेत्र में जहाज़ों पर कई हमलों की जानकारी दी है.
इसके बावजूद मंगलवार को तेल की क़ीमतें तीन सप्ताह के निचले स्तर पर आ गईं, क्योंकि अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने ईरान के साथ ऐसा समझौता होने की उम्मीद जताई जिससे होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोला जा सके.
जून में अमेरिका और ईरान ने सैन्य कार्रवाई रोकने, स्ट्रेट को दोबारा खोलने और अगले 60 दिनों में युद्ध समाप्त करने के लिए समझौता करने संबंधी 14 बिंदुओं वाले एमओयू पर सहमति जताई थी.
लेकिन हस्ताक्षर के तीन सप्ताह बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट में जहाज़ों पर ईरानी हमलों और उसके जवाब में अमेरिकी हमलों के बाद युद्धविराम को 'ख़त्म' घोषित कर दिया.
अमेरिकी अधिकारियों ने मंगलवार को कहा कि बातचीत में प्रगति हो रही है. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया कि स्ट्रेट को फिर से खोलने का समझौता बुधवार तक हो सकता है.
उधर, ईरान ने कहा है कि वह अमेरिका के साथ बातचीत नहीं कर रहा है और न ही उसकी ऐसी कोई योजना है. उसने कहा कि वह ओमान के साथ बातचीत कर रहा है.
हमने इस लेख का अनुवाद करने में एआई की मदद ली है, जिसे मूल रूप से अंग्रेज़ी में लिखा गया था. बीबीसी के एक पत्रकार ने प्रकाशन से पहले इस अनुवाद की जांच की. हम एआई का उपयोग कैसे कर रहे हैं, इसके बारे में और जानें.
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