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पाकिस्तान के उर्दू अख़बारों में भारत के कोरोना संकट पर क्या छप रहा?
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 4 मिनट
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते कोरोना के अलावा फ़्रांस के राजदूत को देश से वापस भेजे जाने का मुद्दा सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियों में रहा.
सबसे पहले बात कोरोना की.
पाकिस्तान में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार की गाइडलाइन्स को पूरी तरह लागू करने के लिए सेना की मदद लेने का फ़ैसला किया गया है.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राब्ता कमिटी के साथ बैठक करने के बाद कहा कि "देश में कोरोना के मामले तेज़ी से बढ़ते जा रहे हैं लेकिन अफ़सोस की बात है कि कोई भी नेशनल कमांड एंड ऑपरेशन सेंटर (एनसीओसी) के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं कर रहा है, इसलिए हमने पुलिस और रेंजर्स के अलावा सेना से भी कहा है कि वो सड़कों पर आएं और कोरोना की गाइडलाइन्स पर अमल करवाएं."
इमरान ख़ान ने कहा कि वो नहीं चाहते कि लॉकडाउन लागू किया जाए क्योंकि इससे देश की अर्थव्यवस्था को तो नुक़सान होता ही है लेकिन सबसे ज़्यादा परेशानी ग़रीबों और रोज़ाना मज़दूरी करके कमाने वालों को होती है.
इमरान ख़ान ने कहा कि अगर लोगों ने कोरोना गाइडलाइन्स का पालन नहीं किया तो मजबूरन उन्हें पूर्ण लॉकडाउन लगाना पड़ेगा.
एनसीओसी के अनुसार पिछले 24 घंटों में पाकिस्तान में संक्रमण के 5870 नए मामले सामने आए और 144 लोगों की मौत हुई. पाकिस्तान में अब तक सात लाख 84 हज़ार संक्रमित हो चुके हैं जिनमें इस वक़्त 84 हज़ार से ज़्यादा एक्टिव केस हैं.
भारत में कोरोना के बढ़ते मामलों पर पाकिस्तान में चिंता
इस हफ़्ते पाकिस्तानी मीडिया में भारत में कोरोना के बिगड़ते हालात पर भी ख़ूब चर्चा हुई.
अख़बार उम्मत ने ब्रितानी अख़बार डेली मेल की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए लिखा है कि भारत में मई के पहले हफ़्ते में रोज़ाना पाँच लाख से ज़्यादा संक्रमण के मामले आएंगे और क़रीब 5700 लोगों की रोज़ाना मौत होगी.
शनिवार को भारत में 3,46,786 नए मामले आए और 2624 लोगों की मौत हुई. अख़बार के अनुसार मोदी सरकार कोरोना के आँकड़ों को छुपा रही है और मरने वालों की संख्या 10 गुना ज़्यादा हो सकती है.
भारत में पिछले तीन दिनों से रोज़ाना तीन लाख से ज़्यादा नए मामले आ रहे हैं और दो हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो रही है. इस पर पाकिस्तान में ने केवल लोग चिंता जता रहे हैं बल्कि वहां से लोग मदद की भी पेशकश कर रहे हैं.
अख़बार जंग के अनुसार पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायुक्त को विदेश मंत्रालय के दफ़्तर में बुलाकर आधिकारिक रूप से उन्हें पाकिस्तान की तरफ़ से मानवीय आधार पर भारत को मदद की पेशकश की गई.
क़ुरैशी ने कहा कि वो भारत के जवाब का इंतज़ार कर रहे हैं.
उनका कहना था, "हम भारत को वेंटिलेटर, एक्स-रे मशीन, बाईपैप, मास्क और हमसे जो हो पाएगा वो मदद करेंगे. और इसे वाघा बॉर्डर के ज़रिए भारत भेजा जा सकता है."
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने भी ट्वीट कर भारत के लोगों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और कहा कि मानवता के सामने इस वैश्विक चुनौती का मिलकर सामना करना होगा.
पाकिस्तान के कई फ़िल्म स्टार और खिलाड़ियों समेत आम लोगों ने भी भारत के लिए दुख की इस घड़ी में साथ खड़े रहने का संदेश भेजा है.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार गायक और एक्टर अली ज़फ़र ने कहा है, "इस मुश्किल वक़्त में हम भारतीयों के साथ हैं क्योंकि इंसानियत से बड़ा कोई मज़हब नहीं."
पूर्व क्रिकेटर शोएब अख़्तर ने भी एक वीडियो जारी कर भारत के साथ हमदर्दी जताई है.
फ़्रांस के राजदूत को निकालने पर बहस को लेकर संसद में हंगामा
फ़्रांस से रिश्ता ख़त्म करने और फ़्रांस के राजदूत को पाकिस्तान से निकालने के मुद्दे पर पिछले हफ़्ते काफ़ी हिंसा हुई थी.
ईश निंदा विरोधी गुट तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) ने धमकी दी थी कि अगर पाकिस्तानी सरकार ने फ़्रांस के राजदूत को देश से निकालने की उनकी माँग पूरी नहीं की तो वो पूरे पाकिस्तान को बंद कर देंगे.
इमरान ख़ान की सरकार ने इससे निपटने के लिए संगठन पर पाबंदी लगी दी और संगठन के प्रमुख साद रिज़वी को गिरफ़्तार कर लिया.
इससे पाकिस्तान के कई शहरों में हिंसा भड़क गई और आख़िरकार 20 अप्रैल को सरकार ने संसद में फ़्रांस के राजदूत को बाहर निकालने का प्रस्ताव पेश किया.
सरकार ने जो प्रस्ताव पेश किया था उसमें कहा गया था कि फ्रांसीसी राजदूत को देश से बाहर भेजने के मुद्दे पर संसद में बहस होगी.
शुक्रवार को इस मसले पर संसद में बहस होनी थी लेकिन बहस नहीं हो सकी और विपक्ष के भारी हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई.
यह बहस शुक्रवार को होनी थी लेकिन शुक्रवार को कार्यवाही शुरू होते ही डिप्टी स्पीकर ने कहा कि पहले प्रश्नकाल होगा उसके बाद सदस्यों को इस पर बोलने का मौक़ा दिया जाएगा. लेकिन विपक्षी सांसदों ने बात नहीं मानी और वो वेल में आकर हंगामा करने लगे.
सत्ताधारी पाकिस्तानी तहरीक-ए-इंसाफ़ के कई सांसद भी ईश निंदा को लेकर नारेबाज़ी कर रहे थे और फ़्रांस के राजदूत को देश से निकाले जाने की माँग कर रहे थे.
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