T20 World Cup Final: ऑस्ट्रेलिया जीते या न्यूज़ीलैंड टी-20 क्रिकेट को मिलेगा नया सिकंदर

    • Author, मनोज चतुर्वेदी
    • पदनाम, खेल पत्रकार
  • प्रकाशित

ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड को परंपरागत प्रतिद्वंद्वी माना जाता है और इस कारण यह दोनों टीमें आमने-सामने होती हैं तो जीत पाने के लिए हर संभव प्रयास ज़रूर करती हैं. ऐसे में इन दोनों टीमों के बीच दुबई में खेले जाने वाले टी-20 विश्व कप के फाइनल में रोमांचक क्रिकेट ज़रूर देखने को मिलेगा.

ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड दोनों ही टीमों की क्रिकेट की दुनिया में अपनी धाक है लेकिन क्रिकेट के इस सबसे छोटे प्रारूप के विश्व कप में दोनों में से कोई भी टीम अब तक विजेता नहीं बन सकी है. ऐसे में जो भी टीम जीतें, दुनिया को टी-20 वर्ल्ड कप का नया चैंपियन मिलना तय है.

दिलचस्प बात यह है कि आईसीसी वनडे विश्व कप पर सबसे ज्यादा पांच बार ख़िताब पर क़ब्ज़ा जमाने वाली ऑस्ट्रेलिया सिर्फ़ एक बार 2010 में ही फाइनल तक चुनौती पेश कर सकी है.

ओपनरों पर रहेगी बड़ी ज़िम्मेदारी

ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड दोनों ही टीमों के पास दमदार ओपनिंग जोड़ियां हैं. ऑस्ट्रेलिया के लिए डेविड वार्नर और आरोन फिंच पारी की शुरुआत करते हैं. वार्नर दोनों टीमों के बल्लेबाज़ों में सबसे ज्यादा 236 रन बना चुके हैं. यह सही है कि फिंच का बल्ला अब तक उम्मीदों के अनुरूप नहीं चला है. लेकिन वह बड़े मैचों के खिलाड़ी हैं. वहीं न्यूज़ीलैंड के ओपनर्स मार्टिन गुप्टिल और डेरेल मिशेल दोनों ही जबर्दस्त फॉर्म में हैं. गुप्टिल ने अब तक 180 रन और डेरेल मिशेल ने 197 रन बनाए हैं.

इन दोनों जोड़ियों में से जो भी जोड़ी बिना झटका खाए पावरप्ले के पहले छह ओवर निकालने में सफल रहेगी, वही सामने वाली टीम पर दबाव बना पाएगी. यह दोनों जोड़ियां ऐसी हैं कि छह ओवर टिक गईं तो बोर्ड पर 50 से ज्यादा रन टंगे नजर आ सकते हैं.

ट्रेंट बोल्ट और मिशेल स्टार्क पर है दारोमदार

इस विश्व कप में बाएं हाथ के पेस गेंदबाज़ों का प्रदर्शन शानदार रहा है. ख़ासतौर से सीधे हाथ के बल्लेबाज़ों के लिए अंदर आती गेंदें बहुत ख़तरनाक साबित हुई हैं. यह दोनों ही बल्लेबाज़ इस तरह की गेंदें फेंकने में महारत रखते हैं. इसलिए टीम को शुरुआत में सफलता दिलाने का दारोमदार भी इनके ऊपर भी होगा.

इस विश्व कप की बात करें तो न्यूज़ीलैंड के बोल्ट इस मामले में कहीं बेहतर साबित हुए हैं. बोल्ट ने अब तक खेले छह मैचों में 11 विकेट निकाले हैं तो स्टार्क के नाम 9 विकेट हैं.

न्यूज़ीलैंड के टिम साउदी को आमतौर पर टेस्ट गेंदबाज़ माना जाता है और वह अक्सर न्यूज़ीलैंड के लिए सबसे छोटे प्रारूप में खेलते भी नज़र नहीं आते हैं. लेकिन इस विश्व कप में वह अपनी नपी तुली गेंदबाज़ी से प्रभाव छोड़ने में जरूर सफल हुए हैं. वह पावरप्ले में विकेट निकालने का माद्दा रखते हैं. वहीं ऑस्ट्रेलिया के पेस अटैक में स्टार्क के अलावा जोश हेज़लवुड और पैट कमिंस जैसे धाकड़ गेंदबाज़ शामिल हैं. लेकिन इनमें से कोई भी अब तक टी-20 क्रिकेट में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ खेलने का अनुभव ही नहीं रखता है.

ज़ैंपा और ईश सोढी हैं तुरुप के इक्के

आमतौर पर इस विश्व कप में मध्य के ओवरों में रन गति रोकने और विकेट निकालने की ज़िम्मेदारी स्पिनरों पर रहती है. ऑस्ट्रेलिया के एडम ज़ैंपा और न्यूज़ीलैंड के ईश सोढी ने इस ज़िम्मेदारी को अब तक बखूबी निभाया है.

ज़ैंपा तो 12 विकेट निकालकर दोनों टीमों में सफलतम गेंदबाज हैं. वहीं ईश सोढी भी 9 विकेट निकालकर अपना प्रभाव छोड़ने में कामयाब रहे हैं. पर दोनों गेंदबाज़ों की सफलता इस बात पर बहुत-कुछ निर्भर करेगी कि दूसरे छोर का गेंदबाज़ भी दबाव बनाने में कामयाब हो पा रहा है या नहीं. ऑस्ट्रेलिया के पास इस काम के लिए ग्लेन मैक्सवेल और न्यूज़ीलैंड के पास सेंटनर हैं.

दोनों टीमों में डेथ ओवर्स में आक्रामक खेल का माद्दा

ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड दोनों ही टीमों ने सेमीफाइनल में आईसीसी रैंकिंग की शीर्ष दो टीमों को हराया है. दोनों के जीतने का अंदाज़ भी करीब एक सा रहा है. उन्होंने डेथ ओवर्स में तेज़ी से रन बनाने की क्षमता की वजह से ही मैच जीते हैं.

अबु धाबी में खेले गए पहले सेमीफाइनल में न्यूज़ीलैंड को इंग्लैंड पर जीत पाने के लिए आख़िरी चार ओवरों में 57 रन की जरूरत थी. पर जिमी नीशम ने 11 गेंदों में 27 रन बनाकर और डेरिल मिशेल ने 19वें ओवर में छक्का लगाकर जीत दिलाई थी.

जिमी नीशम के लिए यह खुद पर गर्व करने वाला प्रदर्शन था. वह 2019 के विश्व कप फाइनल में आख़िरी ओवर में क्रीज़ पर थे और अपनी टीम को जीत नहीं दिला सके थे. इससे पहले 2017 में वह डिप्रेशन की समस्या से जूझने की वजह से क्रिकेट छोड़ने तक का मन बना रहे थे. लेकिन अब वह टीम के हीरो बन गए हैं.

इसी तरह ऑस्ट्रेलिया को पाकिस्तान के ख़िलाफ़ आख़िरी चार ओवर में 50 रनों की ज़रूरत थी. इस समय तक जिस तरह का खेल चल रहा था, उसमें पाकिस्तान के जीतने की संभावना ज्यादा थी.

लेकिन मैथ्यू वेड और स्टोयनिश ने आक्रामक प्रदर्शन से एक ओवर बाक़ी रहते जीत हासिल कर ली. वेड ने पाकिस्तान के तूफानी गेंदबाज़ शाहीन शाह आफ़रीदी के 19वें ओवर में लगातार तीन छक्के लगाकर मैच को पाकिस्तान के जबड़े से छीन लिया.

कीवी टीम को फाइनल से पहले झटका

कीवी टीम के लिए डेवोन कॉनवे ज़रूरत के समय तेज़ी से रन बनाकर मैच का नक्शा बदलने वाले खिलाड़ी रहे हैं. लेकिन वह हाथ में चोट लगने की वजह से फाइनल में नहीं खेल सकेंगे.

न्यूज़ीलैंड को फाइनल में कॉनवे की कमी खल सकती है. हालांकि कॉनवे ने अब तक 129 रन ही बनाए हैं पर यह रन जिस अंदाज में बनाए गए हैं, उसके ज्यादा मायने हैं.

दोनों ही टीमों को फाइनल में अपने दिग्गज बल्लेबाज़ों के चलने का भी इंतज़ार रहेगा. यह दोनों बल्लेबाज़ हैं न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियम्सन और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव स्मिथ.

यह दोनों ही अब तक बल्लेबाज़ी से प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं हो सके हैं. पर दोनों ही क्षमता वाले बल्लेबाज़ हैं और ज़रूरत के समय अड़ने का माद्दा रखते हैं.

टॉस साबित हो सकता है बॉस

दुबई में दूसरी पारी में गेंदबाज़ी करने वाली टीम को ओस की वजह से दिक्कत हो सकती है. इस विश्व कप में अब तक का चलन रहा है कि टॉस जीतने वाली टीम ने पहले गेंदबाज़ी की है.

दूसरी पारी में गेंदबाज़ी करने वाली टीमों के पेस गेंदबाज़ों के मुक़ाबले स्पिनरों को ज्यादा दिक़्क़त हुई है. असल में गेंद गीली हो जाने पर वह सही से पकड़ में नहीं आने पर स्पिन कम होने लगती है. इसके लिए पहले बल्लेबाज़ी करते समय 20-25 रन अतिरिक्त बनाकर इस समस्या से निपटा जा सकता है. दोनों ही टीमें क्षमता वाली हैं, इसलिए इसके लिए रणनीति बनाकर ही उतरेंगी.

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