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वैभव सूर्यवंशी की तूफ़ानी पारी के बाद क्यों ट्रोल हुए संजय मांजरेकर
श्रीलंका के दांबुला में खेले जा रहे 50 ओवरों की त्रिकोणीय श्रृंखला के फ़ाइनल मैच में इंडिया-ए टीम के सलामी बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी की विस्फोटक बल्लेबाज़ी के पूर्व क्रिकेटर और कमेंटेटर संजय मांजरेकर भी मुरीद हो गए है.
वैभव सूर्यवंशी ने महज़ 11 रनों में अर्द्धशतक जड़ा और 29 गेंदों में 94 रन बनाए. उनकी बल्लेबाज़ी के दम पर इंडिया-ए टीम ने श्रीलंका-ए के सामने नौ विकेट पर 377 रनों का विशाल पहाड़ खड़ा कर दिया.
हालांकि इससे पहले सिरीज़ के चौथे मैच में इंडिया और श्रीलंका के बीच मैच में विवाद के चलते वैभव सूर्यवंशी चर्चा में आए थे.
और तब संजय मांजरेकर ने कहा था कि "अगर वो इंडिया-ए के कोच या मैनेजर होते, तो अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ खेले जा रहे मैच के लिए वैभव सूर्यवंशी को टीम में शामिल नहीं करते."
लेकिन रविवार को वैभव सूर्यवंशी के विस्फोटक अंदाज़ को देखकर संजय मांजरेकर ने एक्स पर लिखा, "अभी-अभी एहसास हुआ कि वैभव 50 ओवर के क्रिकेट को एक ऐसे फ़ॉर्मेट के तौर पर देखते हैं जिसमें वह और भी ज़्यादा तहलका मचा सकते हैं! ख़ासकर इसलिए क्योंकि इसमें 10 ओवर तक सर्कल के बाहर 2 फ़ील्डर होते हैं, न कि 6."
संजय मांजरेकर के पहले और ताज़ा बयान को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं जिनमें कहा जा रहा है कि शायद उन्हें अब "अपनी ग़लती का एहसास" हुआ हो.
एक एक्स यूज़र आद्या ने संजय मांजरेकर का ताज़ा पोस्ट साझा करते हुए लिखा, "उम्मीद है अब आप ठीक होंगे."
एक अन्य यूज़र ने संजय मांजरेकर का रिप्लाई देते हुए लिखा, "खिलाड़ियों को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करने वाले आपके विश्लेषण की तारीफ़ होनी चाहिए."
11 गेंदों में 50 रन, लेकिन रिकॉर्ड से चूके
वैभव सूर्यवंशी ने रविवार को दांबुला में खेले गए 50 ओवरों की त्रिकोणीय सिरीज़ के फ़ाइनल में श्रीलंका ए के गेंदबाज़ों की जमकर धुनाई की.
श्रीलंका-ए ने टॉस जीतकर इंडिया-ए को पहले बल्लेबाज़ी का न्योता दिया.
पिछले मैच के विवादों को पीछे छोड़ते हुए वैभव ने शुरुआत से ही टी-20 के अंदाज़ में मेज़बानों के सामने अपनी आक्रामक बल्लेबाज़ी से मुख़ातिब हुए.
उनका अर्धशतक महज़ 11 गेंदों में आया. यह लिस्ट ए क्रिकेट में एक नया रिकॉर्ड है. हालांकि, बिहार के 15 वर्षीय बल्लेबाज़ लिस्ट ए में सबसे तेज़ शतक बनाने के रिकॉर्ड से चूक गए.
वह सिर्फ़ 29 गेंदों में 94 रन बनाकर आउट हुए. अपनी पारी में उन्होंने 10 चौके और 8 छक्के लगाए. अगर वह 29वीं गेंद पर आउट नहीं होते और उस गेंद पर छक्का जड़ देते, तो वह लिस्ट ए क्रिकेट में संयुक्त रूप से सबसे तेज़ शतक लगाने वाले बल्लेबाज़ बन जाते.
यह रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के जेक फ़्रेज़र-मैकगर्क के नाम है, जिन्होंने 29 गेंदों में शतक पूरा किया था. दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलते हुए उन्होंने 2023-24 सीज़न में तस्मानिया के ख़िलाफ़ यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की थी.
वहीं, दक्षिण अफ़्रीका के दिग्गज बल्लेबाज़ एबी डिविलियर्स के नाम वनडे क्रिकेट में सबसे तेज़ शतक का रिकॉर्ड दर्ज है. उन्होंने 2015 विश्व कप में वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ सिर्फ़ 31 गेंदों में शतक लगाया था. उस विश्व कप की मेज़बानी ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड ने की थी.
सूर्यवंशी का प्रदर्शन
त्रिकोणीय सिरीज़ में इन दोनों टीमों के बीच खेले गए पहले मुक़ाबले में जो कुछ हुआ था, उसके बाद सूर्यवंशी इस मैच में काफ़ी संतुलित दिखे.
दरअसल पिछले मुक़ाबले में उनका प्रदर्शन उम्मीद के अनुरूप नहीं था. साथ ही उनकी इसलिए भी आलोचना हुई कि वैभव ने मैदान पर संयम नहीं दिखाया.
यह पारी उनके अपने नज़रिए से भी बेहद ज़रूरी थी. पिछली चार पारियों में नाकामी और एक भी अर्धशतक नहीं लगाने के कारण उनके प्रदर्शन को लेकर सवाल उठने लगे थे.
लेकिन जब रविवार सुबह वो क्रीज़ पर उतरे तो उन्होंने जैसे कुछ ठान रखा था. उन्होंने तेज़ गेंदबाज़ हों या स्पिनर, किसी को नहीं बख़्शा.
यह भी चर्चा होने लगी थी कि क्या वह अभी अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुक़ाबलों के लिए तैयार हैं.
हालांकि लिस्ट ए क्रिकेट में सबसे तेज़ अर्धशतक लगाने वाले दुनिया के सबसे युवा बल्लेबाज़ सूर्यवंशी ने इस पारी से तमाम आशंकाओं का जवाब अपने बल्ले से दे दिया.
पिछले मैच में विवाद
श्रीलंका-ए से सुपर ओवर में भारत-ए की हार के बाद उनकी मैदान पर विपक्षी श्रीलंकाई क्रिकेटर के साथ तीखी बहस और धक्का-मुक्की हो गई.
दांबुला में खेले गए इस रोमांचक मुकाबले के आख़िर में वैभव सूर्यवंशी और श्रीलंका के विशेन हलाम्बागे मैदान पर ही झगड़ पड़े.
इस दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था. श्रीलंका ए के विकेटकीपर निरोशन डिकवेला बीच-बचाव के लिए आए और दोनों खिलाड़ियों को अलग किया.
दांबुला में खेले इस मुक़ाबले में भारत-ए ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 49.2 ओवर में 265 रन बनाए थे. जवाबी पारी में श्रीलंका-ए ने भी 50 ओवर में 265 रन बनाए.
श्रीलंका-ए ने सुपर ओवर में 16 रन बनाए, जिसके जवाब में भारत 9 रन ही बना सका. इस तरह श्रीलंका की टीम जीत गई.
इससे पहले टीम अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ बारिश से प्रभावित मैच में डीएलएस नियम के तहत चार रन से हार गई थी.
तिलक वर्मा की कप्तानी वाली भारत-ए टीम ने अपने अभियान की शुरुआत इसी श्रीलंका ए के ख़िलाफ़ कम स्कोर वाले रोमांचक मुकाबले में जीत के साथ की थी.
किसने क्या कहा?
वैभव सूर्यवंशी के प्रदर्शन की पूर्व क्रिकेटर, खेल विश्लेषकों और बिहार के नेताओं ने भी जमकर सराहना की है.
बीसीसीआई ने एक्स पर लिखा, "94 रन, 29 गेंद, 10 चौके और आठ छक्के. वैभव सूर्यवंशी त्रिकोणीय सिरीज़ के फ़ाइनल में ज़बरदस्त फ़ॉर्म में थे."
सूर्यवंशी के बचपन के कोच मनीष ओझा ने कहा, "वैभव ने मैच में अच्छी लय के साथ बैटिंग शुरू की. उनका इरादा साफ़ दिख रहा था. हाँ, पहले वह अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में नहीं बदल पा रहे थे और मौके गंवा रहे थे. लेकिन आज, उन्होंने उन सभी कमियों को दूर कर लिया है..."
पिछले मैच में विवाद को लेकर उन्होंने कहा, "हर इंसान भावनाओं से जुड़ा होता है और कभी-कभी जज़्बात में बहकर ऐसी प्रतिक्रियाएं सामने आ जाती हैं. लेकिन वैभव अभी काफ़ी युवा हैं. धीरे-धीरे वह समझ जाएंगे कि क्रिकेट में सिर्फ़ अपने खेल पर ध्यान बनाए रखना होता है."
"लोग बातें करते रहेंगे, इसलिए उन्हें उन बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए. मेरी सलाह है कि उन्हें पूरी तरह अपने खेल पर फ़ोकस करना चाहिए और अपनी भावनाओं पर काबू रखना चाहिए."
पूर्व क्रिकेटर शिखर धवन ने एक्स पर लिखा, "हुनर उम्र का इंतज़ार नहीं करता और वैभव इसे बार-बार साबित कर रहे हैं. 29 गेंदों पर 94 रन और सबसे तेज़ 'लिस्ट ए' फ़िफ़्टी. निडर, रोमांचक और इरादों से भरपूर. ऐसे ही चमकते रहो, चैंपियन."
वहीं पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कमेंटेटर आकाश चोपड़ा ने एक्स पर अपना एक वीडियो साझा करते हुए लिखा, "दबाव? कैसा दबाव? वैभव सूर्यवंशी तो बिल्कुल अलग ही लेवल पर खेल रहे हैं! 50 ओवर के फ़ाइनल में 29 गेंदों पर 94 रन. यह लड़का तो पूरी तरह से एंटरटेनमेंट है."
जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से राज्य सभा सांसद संजय कुमार झा ने एक्स पर लिखा, "एक और दिन, एक और रिकॉर्ड. वैभव सूर्यवंशी ने लिस्ट ए क्रिकेट का सबसे तेज़ अर्धशतक अपने नाम कर लिया. कभी-कभी नज़र की कमज़ोरी से जूझ रहे लोग अपना चश्मा उतारकर दूर की तस्वीर देखने लगते हैं. फिर उन्हें ख़ुद से पूछना चाहिए कि आख़िर माफ़ी किसे मांगनी चाहिए."
"कमेंट्री बॉक्स में बैठे एक क्रिकेटर की अजीबोगरीब सलाह न सिर्फ़ भद्दी थी, बल्कि उससे आसानी से बचा भी जा सकता था. युवा प्रतिभाओं को संवारने, सही दिशा दिखाने और उनका हौसला बढ़ाने की ज़रूरत होती है, न कि उन पर बिना सोचे-समझे बड़े-बड़े फ़ैसले सुनाने की."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.