You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
क्या इन तरीकों से इंग्लैंड को हरा पाएगा न्यूज़ीलैंड: वर्ल्ड कप 2019
- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लंदन से
- प्रकाशित
क्रिकेट को लेकर की जाने वाली भविष्यवाणियां कई बार ग़लत साबित होती रही हैं.
हाल ही में 15 प्वॉइंट के साथ ग्रुप स्टेज में टेबल के शीर्ष पर रहे भारत को '45 मिनट' के बुरे खेल के कारण विश्व कप से बाहर का रास्ता देखना पड़ा.
इसी तरह पाकिस्तान का देर से लय में आना फ़ायदेमंद साबित नहीं हुआ. पॉइंट्स टेबल पर न्यूज़ीलैंड से बराबरी होने के बावजूद वो रन रेट में पीछे होने के कारण विश्व कप से बाहर हो गए.
क़रीब 10 दिन पहले ही इंग्लैंड भी विश्व कप से बाहर होने की स्थिति में आ गया था, लेकिन अब वो कप का दावेदार बन गया है.
यही मामला न्यूज़ीलैंड के साथ भी है जो सबसे निचले पायदान से होते हुए आज इतिहास रचने की ओर बढ़ रहा है.
लेकिन, न्यूज़ीलैंड को पता है कि विश्व कप का ये आख़िरी मैच उसके लिए फूलों की सेज नहीं होगा. ऐसे में विश्व कप अपने नाम करने के लिए क्या कर सकता है न्यूज़ीलैंड? आइए देखते हैं.
सलामी बल्लेबाज़ी
इस विश्व कप में ये देखने को मिला है कि जिस टीम की ओपनिंग जोड़ी टिक गई, उसने मैच में बाज़ी मार ली. हालांकि, ये भी ज़रूरी नहीं कि अच्छी शुरुआत एक बेहतरीन अंत में तब्दील हो जाए.
इंग्लैंड के मौसम और ख़ासकर लॉर्ड्स के विकेट के हिसाब से नई बॉल खिलाड़ियों के लिए मुश्किल खड़ी करती रही है. इंग्लैंड के वोक्स, आर्चर और स्टोक्स जैसे बेहतरीन खिलाड़ी इस बात को जानते हैं और यहां के हालात उनके लिए नए भी नहीं हैं.
ऐसे में न्यूज़ीलैंड के खिलाड़ियों को शुरू में ही इस मुश्किल पर काम करना होगा. सबसे पहली चुनौती होगी- टीम के ओपनर मार्टिन गप्टिल का ख़राब फ़ॉर्म से बाहर निकलना.
वह पूरे टूर्नामेंट में अपनी फ़ॉर्म के साथ संघर्ष करते रहे हैं और उन्होंने नौ मैचों में सिर्फ़ 167 रन बनाए हैं. उन्होंने अभी तक सिर्फ़ एक ही अर्धशतक लगाया है.
इस टूर्नामेंट में उनके लिए सिर्फ़ एक बात अच्छी हुई है कि उन्होंने भारत के साथ सेमी-फाइनल मैच में बेहद नाज़ुक मोड़ पर महेंद्र सिंह धोनी को रन आउट किया था. जबकि धोनी 297 पारियों में अब तक सिर्फ़ 16 बार ही रन आउट हुए हैं.
गप्टिल ख़ुद अपनी ख़राब फ़ॉर्म को स्वीकार करते हुए कह चुके हैं, ''मैं जो करता रहा हूं, बस उसी के साथ आगे बढ़ रहा हूं. नेट पर मेहनत कर रहा हूं और उम्मीद है कि ये सब बातें मिलकर मेरे लिए फ़ायदेमंद रहेंगी.''
गप्टिल के साथ ओपनिंग करने वाले हेनरी निकोलस भी न्यूज़ीलैंड के लिए चिंता का कारण बन सकते हैं. निकोलस भारत के ख़िलाफ़ भी नहीं चल सके थे और उन्होंने तीन मैचों में महज 12 रन बनाए हैं.
इसके कारण न्यूज़ीलैंड के पास बैटिंग ऑर्डर को बदलने के लिए बहुत कम विकल्प बचे हैं. फिर फाइनल मैच में बहुत ज़्यादा प्रयोग करना भी समझदारी नहीं होगा.
कैप्टन केन विलियमसन सिर्फ़ प्रार्थना कर रहे होंगे कि उनके ओपनर्स कम से कम एक बार तो चल जाएं, चाहे पहले बल्लेबाज़ी कर रहे हों या फिर लक्ष्य का पीछा कर रहे हों.
विलियमसन पर दारोमदार
विलियमसन ख़ुद पूरे टूर्नामेंट के दौरान बेहतरीन फॉर्म में रहे हैं. 90 से अधिक औसत के साथ दो महत्वपूर्ण शतक, दो अर्धशतक मार चुके विलियमसन इंग्लैंड के गेंदबाजों के लिए सबसे बड़ी मुश्किल बन सकते हैं.
शुरुआती झटके मिलने की स्थिति में विलियमसन को पहले आने और एक स्थिर पारी खेलने को लेकर ख़ुद को मानसिक रूप से तैयार रहना होगा.
वो इंग्लैंड के स्टोक्स और लियाम प्लंकेट जैसे कुछ गेंदबाज़ों के ख़िलाफ हाथ खोलना चाहेंगे और अब्दुल रशीद की गुगली से सावधानी बरतेंगे.
इंग्लैंड के मध्यम क्रम पर निशाना
इस टूर्नामेंट में 400 रन बना चुकी नीशम और ग्रैंडहोम की जोड़ी पांचवें और छठे नंबर पर आकर मध्यम क्रम को मज़बूती दे सकती है.
विश्व कप में शानदार फ़ील्डिंग के अलावा न्यूज़ीलैंड ने गेंदबाजी में भी कमाल दिखाया है.
ट्रेंट बोल्ट अपने अब तक के सबसे जबरदस्त फॉर्म में हैं और उन्हें फरगुसन और हेनरी से पूरा साथ मिला है. इन्होंने ही भारत के साथ हुए मैच में शीर्ष क्रम को धराशायी कर दिया था.
टूर्नामेंट में अब तक 48 विकेट ले चुकी इस तिकड़ी को बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे इंग्लैंड के जेसन रॉय और जॉनी बेयरस्टो का विकेट गिराने पर फ़ोकस करना होगा.
रॉय और बेयरस्टो ने बड़े मैचों में अपनी टीम को ज़बरदस्त शुरुआत दी है. पिछले 10 मैचों में दोनों ने 950 से ज़्यादा रन बनाए हैं.
रूट, मॉर्गन और स्टोक्स इंग्लैंड के मध्यम क्रम में आत्मविश्वास पैदा करते हैं. हालांकि, सिर्फ़ जोस बटलर ही पहले जैसी फॉर्म में नहीं दिख रहे हैं.
बटलर ने टूर्नामेंट की शुरुआत बहुत अच्छे प्रदर्शन के साथ की थी और पाकिस्तान के ख़िलाफ़ बेहतरीन पारी खेलते हुए शतक लगाया था. लेकिन, पिछली पांच पारियों में वो संघर्ष करते नज़र आ रहे हैं और महज़ 68 रन ही बना पाए हैं.
नीशम न्यूज़ीलैंड की गेंदबाजी को मजबूती दे सकते हैं और उनके साथ मिलकर सेंटनर ये कोशिश करेंगे कि इंग्लैंड का मध्यम क्रम रन रेट में तेजी न ला सके.
इंग्लैंड के कप्तान इयॉन मॉर्गन पूरे विश्व कप में बाउंसर्स से परेशान रहे हैं और न्यूज़ीलैंड को इस पर खास ध्यान देना होगा.
सेमी-फाइनल हारने के बाद न्यूज़ीलैंड के गेंदबाजों को लेकर भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने कहा था, ''अगर स्थितियां गेंदबाजों के पक्ष में हों और टीम ने ज़्यादा रनों का लक्ष्य भी दिया हो तो वो बहुत ख़तरनाक बन जाता है, जैसा कि आपने इस मैच में देखा है.''
लॉर्ड्स में अच्छा नहीं रिकॉर्ड
इससे पहले लीग मैच में न्यूज़ीलैंड को 119 रनों से हराने के बाद इंग्लैंड की टीम के हौसले ज़रूर बुलंद होंगे. हालांकि, लॉर्ड्स के मैदान पर उनका प्रदर्शन ज़रूर चिंता पैदा कर सकता है.
इस मैदान पर आधे से भी कम मैच जीतने के चलते इंग्लैंड का वनडे रिकॉर्ड उत्साहित करने वाला नहीं है.
वहीं, दोनों ही टीमें विश्व कप में लॉर्ड्स में खेले गए अपने लीग मैच हार चुकी हैं.
कुछ हफ्तों पहले ऑस्ट्रेलिया दोनों टीमों को यहां पर मात दे चुकी है. ऐसे में पिछले आंकड़े दोनों के लिए ही कोई खास उम्मीद नहीं जगाते हैं. दोनों को ही आगे देखते हुए इतिहास रचने की ओर बढ़ना होगा.
ये भी पढ़ें:
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)