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BBC Hindi: बीते हफ़्ते की वो ख़बरें, जो शायद आप मिस कर गए
हेलो. उम्मीद है कि आप अच्छे होंगे, खुश होंगे और सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहे होंगे.
हम जानते हैं कि व्यस्तता की बीच आपके लिए सारी ख़बरों पर नज़र रखना मुश्किल रहता होगा.
ऐसे में हम लाए हैं बीते सप्ताह की कुछ दिलचस्प और अहम ख़बरें, जिन पर शायद आपकी नज़र ना गई हो.
ये छह ख़बरें आपने पढ़ लीं तो ये समझिए कि आप पूरी तरह से अपडेटेड हो गए.
तो फिर इंतज़ार किस बात का? पढ़िए...
श्रीलंका को आर्थिक चक्रव्यूह से निकलने के लिए क्या करना होगा?
श्रीलंका में पिछले चंद माह से जारी आर्थिक संकट ने अब राजनीतिक संकट का रूप ले लिया है. इस राजनीतिक अस्थिरता की वजह से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से बातचीत का वो सिलसिला भी रुक गया है जिससे वर्तमान आर्थिक संकट का समाधान खोजने की कोशिश चल रही थी.
साल 1948 में ब्रिटेन से स्वतंत्रता के बाद श्रीलंका अपने सबसे बदतर आर्थिक संकट से गुज़र रहा है और विदेशी मुद्रा कोष के गंभीर संकट से उबरने के लिए जल्द से जल्द उसे कम से कम चार अरब डॉलर की आवश्यकता है. इसके लिए आईएमएफ से बातचीत हो रही थी.
संगठन के एक दल ने इस सिलसिले में 20 जून को कोलंबो का दौरा भी किया था और कहा था कि आर्थिक सहायता हासिल करने के लिए श्रीलंका को अपने पुराने कर्ज़दारों से ब्याज और वापसी की शर्तों पर बातचीत करनी होगी, और वहां संरचनात्मक बदलाव की भी आवश्यकता है. आईएमएफ ने अब हालात पर निगाह बनाए रखने की बात कही है. पूरी स्टोरी यहां पढ़ें...
मोहम्मद ज़ुबैर के ख़िलाफ़ जारी कानूनी कार्रवाई पर उठ रहे हैं ये 9 सवाल
फ़र्ज़ी ख़बरों की पोल खोलने वाले पत्रकार मोहम्मद ज़ुबैर को गिरफ़्तार हुए 15 दिन से ज़्यादा हो गए हैं. उत्तर प्रदेश के पाँच ज़िलों में उनके ख़िलाफ़ छह एफआईआर दर्ज़ हैं. यूपी सरकार ने इन मामलों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है, जिसका नेतृत्व राज्य के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक करेंगे.
मोहम्मद ज़ुबैर के ख़िलाफ़ यूपी के साथ-साथ दिल्ली में भी दो मामले दर्ज़ हैं. उनके वकील उत्तर प्रदेश की ज़िला अदालतों से लेकर दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में उनकी ज़मानत की अर्ज़ियाँ लगा चुके हैं. ये सारे मामले मोहम्मद ज़ुबैर के पिछले कुछ सालों के ट्वीट्स से जुड़े हैं.
ज़ुबैर ने हाल ही में बीजेपी की राष्ट्रीय प्रवक्ता रहीं नूपुर शर्मा की पैग़ंबर मोहम्मद पर की गई टिप्पणी पर भी ट्वीट किया था, जिसके बाद यह मामला सुर्ख़ियों में आया था और बीजेपी ने नूपुर शर्मा को निलंबित कर दिया था.
पाकिस्तान की वो लड़की जिसे भारत में मिली नई ज़िंदगी
"जब ये पैदा हुई थी, उस समय ठीक थी. लेकिन जब ये आठ या दस महीने की हुई, तो हमें उसकी गर्दन में झुकाव महसूस हुआ. इससे पहले ये अपनी बहन के हाथों से गिर गई थी, हमें लगा कि शायद यह उसी की वजह से हो. हम इसे एक स्थानीय डॉक्टर के पास ले गए. डॉक्टर ने दवा के साथ उसके गले के लिए एक बेल्ट दी. हम ग़रीब लोग हैं आगे इलाज नहीं करा सके."
ये कहना था पाकिस्तान के सिंध प्रांत के थार रेगिस्तान में रहने वाली 13 वर्षीय अफ़शीन की मां जमीला बीबी का, जिनकी बेटी का सिर बचपन से ही 90 डिग्री बाईं ओर झुका हुआ था.
लेकिन अब अफ़शीन एक सामान्य जीवन जी रही हैं और यह तब संभव हुआ जब भारत के अपोलो अस्पताल में एक भारतीय डॉक्टर अफ़शीन के जीवन में एक 'फरिश्ता' बनकर आए.
शोले : अमिताभ बच्चन हों या धर्मेंद्र, सभी दूसरा किरदार निभाना चाहते थे
शोले रिलीज़ होने के कुछ दिनों बाद से ही मिनर्वा थियेटर से ताड़देव ब्रिज तक दर्शकों की लाइनें लगने लगी थीं. मिनर्वा के पास के बस स्ट़ॉप को 'शोले स्टॉप' कहा जाने लगा था. मिनर्वा के मैनेजर सुशील मेहरा रोज़ सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक इतने व्यस्त रहते थे कि उन्होंने अपने परिवार को सिनेमा हॉल के अंदर बने दो कमरों के अपार्टमेंट में बुला लिया था क्योंकि रोज़ घर जाने का कोई तुक नहीं था.
लोगों की दीवानगी का आलम ये था कि पंजाब से दिल्ली के प्लाज़ा सिनेमा के लिए दर्शकों से खचाखच भरी बसें चलती थीं जिनपर लिखा होता था 'शोले स्पेशल.' शोले पर किताब 'शोले द मेकिंग ऑफ़ द क्लासिक' लिखने वाली अनुपमा चोपड़ा लिखती हैं, '15 रुपए का बालकनी टिकट 200 रुपए में बिक रहा था.
भारतीय फ़िल्मों के इतिहास में ये पहली बार हुआ था कि कोई टिकट 100 रुपए से अधिक में बिक रहा था.
94 साल की चैंपियन दादी, फ़िनलैंड में जीते तीन पदक
94 साल की उम्र और खेलों में कई रिकॉर्ड. फ़िनलैंड में वर्ल्ड मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में एक गोल्ड और दो ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भगवानी देवी कमाल कर दिया. उनकी जीत का जश्न भी ज़ोरदार मना, भारत पहुँचने पर उनका ज़ोरदार स्वागत किया गया. देखिए बीबीसी संवाददाता सेराज अली की रिपोर्ट. पूरा वीडियो यहां देखें...
नाखून अगर सफ़ेद, पीले या फिर नीले पड़ जाएं तो समझ जाइए कि...
नाखूनों का ख्याल रखना ब्यूटी या नेल सलून जाने से कहीं ज़्यादा ज़रूरी बात है. शरीर का ये हिस्सा आपकी सेहत और कई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत वक़्त से पहले दे देता है. इसलिए नाखूनों के रंग और उसमें आने वाले बदलावों पर ध्यान देना ज़रूरी है. नाखूनों पर धब्बों का आना या चकते पड़ना या कुछ और होना किसी आने वाली बीमारी की चेतावनी हो सकता है.
जब भी ऐसा हो तो किसी चर्म रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेने की सलाह दी जाती है ताकि ख़ून की जांच और अन्य तरीकों से डॉक्टर अपने मरीज़ की स्थिति समझ सके. और जब कुछ गंभीर मसला होने का संदेह हो तो स्पेशलिस्ट बायोप्सी कराने के लिए कह सकता है.
ऐसे रोग भी होते हैं जो हमारे शरीर के एक या उससे अधिक अंगों को प्रभावित करते हैं. भले ही ये बीमारी हाथ में हो या पैर में.
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