यूक्रेन पर रूसी हमले का 12 वां दिन : अब तक क्या कुछ हुआ?

रूस और यूक्रेन के बीच बेलारूस में बातचीत का तीसरा दौर शुरू हो चुका है. दोनों पक्षों के बीच दो दौर की बातचीत नाकाम रही है.

लाइव कवरेज

प्रियंका झा, दीपक मंडल and पवन सिंह अतुल

  1. रूस ने ईरान को लेकर शर्त रख अमेरिका की परेशानी बढ़ाई

    पुतिन

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    2015 के ईरान परमाणु समझौते को बहाल करने की कोशिश को यूक्रेन संकट के कारण पहले ही झटका लगा था. इस बीच रूस ने एक शर्त रख दी है, जिससे पश्चिम के देशों की परेशानी बढ़ गई है.

    रूस ने मांग की है कि अमेरिका इस बात की गारंटी दे कि प्रतिबंधों का असर ईरान के साथ उसके व्यापार पर नहीं होगा. यूक्रेन पर हमले को लेकर पश्चिम के देशों ने रूस पर बेहद कड़े प्रतिबंध लगाए हैं.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अनुसार, रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोफ़ ने कहा कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण ईरान के साथ परमाणु समझौता बाधित हो गया है.

    रूस की इस शर्त के कारण अमेरिका की उन कोशिशों को झटका लग सकता है, जिसके तहत वह ईरान का मसला जल्द सुलझाने की कोशिश कर रहा था.

    हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि रूस पर प्रतिबंध यूक्रेन पर हमले के कारण लगा है और इसे ईरान के परमाणु क़रार से जोड़ने का कोई मतलब नहीं है.

    ब्लिंकन ने सीबीएस को दिए इंटरव्यू में कहा, ''दोनों मसले बिल्कुल अलग हैं और इन्हें साथ में नहीं जोड़ा जा सकता है. ईरान के साथ समझौता होने के क़रीब है लेकिन कई चुनौतीपूर्ण मुद्दे अब भी हल होने बाक़ी हैं.''

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स से ईरान के एक अधिकारी ने कहा कि तेहरान रूस के स्पष्टीकरण का इंतज़ार कर रहा था.

    उस अधिकारी ने कहा, ''रूस ने अमेरिका से लिखित गारंटी मांगी है. रूस चाहता है कि ईरान के साथ कारोबार, निवेश और सैन्य-तकनीक सहयोग को लेकर पाबंदी ना रहे. रूस जो चाहता है, उसे समझने की ज़रूरत है.''

    ईरान

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  2. ब्रिटिश उप-प्रधानमंत्री डॉमिनिक राब बोले- भारत रूस को लेकर यह काम करे

    ब्रिटेन

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    ब्रिटेन के उप-प्रधानमंत्री डॉमिनिक राब ने रविवार को कहा कि यूक्रेन पर हमला रोकने के लिए भारत और चीन को रूस पर कूटनीतिक दबाव डालना चाहिए. राब ने कहा कि चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है और उसे रूस पर दबाव बनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत को भी रूस पर कूटनीतिक दबाव बढ़ाना चाहिए.

    भारत और चीन दोनों के रूस से अच्छे संबंध हैं. दोनों देशों ने यूक्रेन पर रूस के हमले की निंदा नहीं की है और संयुक्त राष्ट्र में रूस के ख़िलाफ़ लाए गए प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान भी दोनों देश बाहर रहे थे.

    राब ने रूस की ओर से परमाणु हथियार के इस्तेमाल की चर्चा पर कहा, ''मुझे लगता है कि यह महज़ बयानबाज़ी है.'' राब ने यह बात स्काई न्यूज़ से कही है और इसे समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने प्रकाशित किया है.

    डॉमिनिक राब ने कहा, ''ग़लत सूचना और प्रॉपेगैंडा राष्ट्रपति पुतिन के लिए लंबे समय से हथियार रहा है. जो असली मुद्दा है, उससे ध्यान भटकाने के लिएयह होता है. यह एक अवैध हमला है. प्रतिबंध लगाना कोई युद्ध नहीं है. अंतरराष्ट्रीय नियम बिल्कुल स्पष्ट हैं. हमारे प्रतिबंध पूरी तरह से वैध और सही हैं.''

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  3. यूक्रेन के एक अंडरग्राउंड बंकर से भारतीय छात्र ने रोते हुए बताए हालात

    यूक्रेन

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    कनाडा के प्रसारक सीबीसी की पत्रकार नताशा फ़तेह ने यूक्रेन में अंडरग्राउंड बंकर में फँसे भारतीय छात्रों से बात की है. ये छात्र बहुत ही बदहाल स्थिति में दिख रहे हैं और अपनी त्रासदी बयां कर रहे हैं.

    इन्होंने कहा कि बिना खाना-पानी के अंडरग्राउंड बंकर में छुपे हुए हैं. इन्होंने कहा कि कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि ये अपनी जान बचाने के लिए क्या करें. महताब रज़ा में उन्हीं छात्रों से एक हैं.

    रज़ा ने सीबीसी की नताशा से कहा, ''मैम हमलोग बहुत परेशान हैं. 10 दिनों से हमलोग अंडरग्राउंड बंकर में हैं. हर दिन स्थिति ख़राब होती जा रही है. हमलोग बिल्कुल बेबस हैं. कुछ भी करने की स्थिति में नहीं हैं. हम कोशिश कर रहे हैं कि किसी तरह से भारत चले जाएं. हमें कोई सूचना नहीं है कि कब वापस जा पाएंगे. यूक्रेन और भारत सरकार से हमें कोई सूचना मिले, इसका इंतज़ार कर रहे हैं.''

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    नताशा ने पूछा कि ऐसा लग रहा कि आप किसी गुफा में हैं. अभी आपलोग कहां हैं? इस सवाल पर महताब रज़ा ने कहा, ''हम यूक्रेन के सुमी शहर में हैं. यहाँ 800 से 900 तक भारतीय छात्र फँसे हुए हैं. हम पश्चिमी सीमा तक नहीं जा सकते हैं क्योंकि कोई रास्ता नहीं है. रेलवे ट्रैक तबाह कर दिया गया है. कोई टैक्सी ड्राइवर तैयार नहीं है. कोई बस नहीं है. खारकीएव में एक भारतीय छात्र को गोली भी लगी है. यहाँ न तो बिजली है और न ही पानी. दो दिन पहले ही यहाँ बड़ा धमाका हुआ था और तब से हम पानी के संकट से जूझ रहे हैं. पानी की वजह से न हम ब्रश कर पा रहे हैं और न ही शौचालय जा पा रहे हैं.''

    यूक्रेन

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    महताब ने कहा, ''हमलोग बीच-बीच में रूम में जाते हैं और वहीं से किसी भी तरह अपने घर वालों से बात करते हैं. हम अपने घर वालों को यहाँ के बारे में सच नहीं बता सकते हैं क्योंकि घर वाले भी परेशान होंगे. हम जिस दर्द को झेल रहे हैं उसे झेलते हुए सोचते हैं कि यह क्या हो रहा है. यह मानवता के लिए ठीक नहीं है. हम लड़ना नहीं चाहते हैं. हमें शांति चाहिए. हम सभी भारतीय चाहते हैं कि जंग थमे.'' महताब ऐसा कहते हुए रोने लगते हैं.

    भारत सरकार ने रूस और यूक्रेन की सरकार से शुक्रवार को सुमी में युद्धविराम के लिए आग्रह किया था ताकि वहाँ से भारतीय छात्रों को निकाला जा सके. 24 फ़रवरी को रूस ने यूक्रेन पर हमला शुरू किया तब से सुमी शहर में 800 स्टूडेंट फँसे हुए हैं.

  4. यूक्रेन में लड़ने के लिए रूस सीरियाई लड़ाकों की कर रहा भर्तियां: रिपोर्ट

    रूस

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    अमेरिकी अख़बार ‘द वाल स्ट्रीट जर्नल’ से अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि रूस सीरिया से किराए पर लड़ने वाले ट्रेंड लोगों को यूक्रेन में लड़ने के लिए भर्तियां कर रहा है.

    हालाँकि ख़ुफ़िया अधिकारियों ने यह नहीं बताया है कि कितने सीरियाई लड़ाकों ने इस युद्ध में शामिल होने के लिए हामी भरी है. लेकिन अधिकारियों ने कहा है कि कुछ लड़ाके रूस पहुँच गए हैं और यूक्रेन में तैनाती की तैयारी कर रहे हैं.

    देइर एज़ज़ोर प्रकाशन के अनुसार, सीरिया और रूस ने स्वेच्छा से यूक्रेन में लड़ाई करने वालों को 200 से 300 डॉलर तक की सैलरी की पेशकश की है. रिपोर्ट के अनुसार, इन्हें छह महीनेकी लड़ाई के लिए कहा गया है. रूस के अधिकारियों का मानना है कि सीरिया में चले एक दशक तक के गृह युद्ध के कारण यहाँ के लोगों के पास लड़ने का अनुभव है और ये यूक्रेन के शहरों पर कब्ज़े में मदद कर सकते हैं.

    अमेरिका में अधिकारियों का मानना है कि सीरियाई लड़ाके केवल विदेशी नहीं हैं, जो यूक्रेन में रूस के लिए लड़ेंगे बल्कि चेचन बलों को भी भेजा गया है. चेचन रिपब्लिक के नेता रूसी राष्ट्रपति पुतिन के सहयोगी हैं.

    विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन में विदेशी लड़ाकों के आने से यह देश संघर्ष का एक नया ठिकाना बनेगा. इनका कहना है कि यूक्रेन की लड़ाई मध्य-पूर्व से जुड़ जाएगी.

    रूस

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  5. पुतिन ने अमेरिका के सामने रखी यह शर्त और तेल की क़ीमतों में लगी आग

    रूस

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    2008 के बाद तेल क़ीमतें सबसे ऊपर चली गई हैं. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, वैश्विक बाज़ार में ईरान के तेल की संभावित वापसी में देरी के साथ अमेरिका और यूरोपियन यूनियन की ओर से रूसी तेल के आयात पर पाबंदी के विचार के कारण क़ीमतें आसमान छू रही हैं.

    ईरान के साथ 2015 के परमाणु समझौते को बहाल करने की कोशिश की जा रही है लेकिन अनिश्चितता और बढ़ गई है. रूस ने शर्त रखी है कि यूक्रेन पर हमले को लेकर लगाई गई पाबंदी के कारण ईरान के साथ उसके कारोबार प्रभावित नहीं होने चाहिए.

    रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि चीन ने भी नई शर्त रखी है. रूस की नई मांग पर अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने रविवार को कहा कि यूक्रेन पर हमले कारण रूस पर लगी पाबंदी को ईरान के साथ परमाणु समझौते से जोड़ने का कोई मतलब नहीं है. दूसरी तरफ़ अमेरिका और यूरोप के सहयोगी देश रूस से तेल आयात करने पर पाबंदी के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. अमेरिकी विदेश मंत्री ने भी कहा है कि व्हाइट हाउस कांग्रेसनल कमिटी से रूस के तेल पर पाबंदी के लिए बात करेगा.

    अमेरिका

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    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की क़ीमत 7 मार्च को 129.78 डॉलर प्रति बैरल पहुँच गई है. वहीं यूएस टेक्सस इंटरमीडिएट (WIT) क्रूड की क़ीमत भी 10.83 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 126.51 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गई है. इससे पहले 2008 में ब्रेंट 139.13 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँचा था.

    थिंक टैंक एनर्जी आस्पेक्ट की सह-संस्थापक अमृता सेन कहती हैं, ''ईरान एक मात्र कारक था, जिससे तेल की क़ीमतों को काबू में किया जा सकता था लेकिन परमाणु समझौते में देरी हो रही है. अगर रूस का तेल भी बाज़ार से बाहर रहा तो स्थिति और बिगड़ सकती है.'' विश्लेषकों का कहना है कि इस हफ़्ते तेल की क़ीमत 185 डॉलर प्रति बैरल पहुँच सकता है.

    तेल

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    S&P ग्लोबल के उप-प्रमुख और लेखक डेनियल येर्गिन ने रॉयटर्स से कहा, ''ज़रूरी चीज़ों में होने के कारण तेल और गैस पर पाबंदी नहीं लगाने की बात थी लेकिन निजी कंपनियां ख़ुद से तेल ख़रीदना बंद कर देती हैं और इससे पूरा सप्लाई चेन प्रभावित होता है.'' रूस क़रीब 70 लाख बैरल तेल प्रति दिन निर्यात करता है. तेल की वैश्विक आपूर्त में रूस का हिस्सा सात फ़ीसदी है. रूसी पोर्ट से कज़ाख़स्तान का तेल भी निर्यात होता है और यह भी तनाव के कारण प्रभावित हुआ है.

    बैंक ऑफ अमेरिका के विश्लेषकों का कहना है कि रूस के तेल का ज़्यादातर निर्यात थम गया है और इसमें हर दिन 50 लाख बैरल की गिरावट आ सकती है. इसका मतलब है कि कच्चे तेल की क़ीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती है.

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