युद्ध के यूरोप में फैलने के ख़तरे के कारण यूक्रेन में नो फ़्लाई ज़ोन नहीं बनाएगा नेटो
यूक्रेन और रूस के बीच वीकेंड में हो सकती है आगे की बातचीत, फिलहाल भीषण लड़ाई जारी
लाइव कवरेज
दिलनवाज़ पाशा
रूस में नए क़ानून का प्रस्ताव, सेना के बारे में 'फ़र्ज़ी' जानकारी फैलाने पर मिलेगी ये सज़ा
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इमेज कैप्शन, रूसी संसद के निचले सदन डूमा की तस्वीर
रूसी संसद के निचले सदन डूमा ने सर्वसम्मति से एक ऐसा क़ानून पारित किया है जिसके बाद अब सशस्त्र बलों के बारे में ''फ़र्ज़ी'' जानकारी फैलाने पर जेल की सज़ा हो सकती है.
न्यूज़ एजेंसी इंटरफैक्स के मुताबिक़, कुल 401 सांसदों ने बिल के पक्ष में वोट किया है, किसी ने भी इसके ख़िलाफ़ वोट नहीं किया. किसी सांसद ने मतदान में हिस्सा लेने से मना भी नहीं किया.
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अब इस क़ानून को कल उच्च सदन से मंज़ूरी की ज़रूरत है.
निचले सदन की तरफ़ से जारी एक बयान के मुताबिक़, अगर ये क़ानून प्रभावी होता है तो सशस्त्र बलों के बारे में जानबूझकर झूठी जानकारी फैलाने वालों को 15 साल तक की जेल और जुर्माना होगा.
परमाणु पावर प्लांट पर हमला बताता है कि यूक्रेन से रूसी सैनिकों का जाना क्यों ज़रूरी - नेटो प्रमुख
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शुक्रवार तड़के यूरोप के सबसे बड़े परमाणु पावर प्लांट में आग लग गई थी.
ज़ेपोरज़िया परमाणु पावर प्लांट में लगी आग अब बुझ गई है और इस प्लांट पर रूस का नियंत्रण हो गया है.
इस बीच बीबीसी संवाददाता जेम्स लैंडेल ने बताया था कि यूक्रेन में चल रहे युद्ध में अपनी प्रतिक्रियाओं का आकलन करने पश्चिमी देशों के विदेश मंत्री ब्रसेल्स में इकट्ठा हो रहे हैं.
इस दौरान नेटो के प्रमुख जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने यूक्रेन में रूस के हमले और ज़ेपोरज़िया परमाणु पावर प्लांट पर हमले की निंदा की.
उन्होंने कहा, ''हम नागरिकों पर हमले की निंदा करते हैं. साथ ही हमने परमाणु पावर प्लांट पर हमले की रिपोर्ट भी देखी. ये इस युद्ध के परिणामों को लेकर ग़ैर ज़िम्मेदार रवैया दिखाता है, बताता है कि युद्ध को ख़त्म करना और रूसी सैनिकों का यूक्रेन से जाना क्यों ज़रूरी है.''
यूक्रेन में पिछले कुछ घंटों के दौरान क्या-क्या हुआ है?
....में
Author, जेम्स वॉटरहाउस
पदनाम, कीएव संवाददाता, बीबीसी न्यूज़
कुछ घंटे पहले हमने उत्तर-पूर्व में करीब 10-15 किलोमीटर की दूरी पर कुछ धमाकों को सुना था. इसके बाद से यहाँ सन्नाटा है.
हमने अपने बम शेल्टर में रातभर आवाज़ें सुनीं. ये दो मंज़िला अंडरग्राउंड शेल्टर है, ऐसा लग रहा था कि फ्लोर पर कोई कुछ भारी सामान गिरा रहा हो.
इससे पता चलता है कि जो धमाके हो रहे हैं वो पास में हो रहे हैं या कितना बड़ा धमाका है.
यूक्रेन के शहरों में जो पिछले कुछ दिनों से जो चल रहा है, वो अब भी जारी है. ख़ासकर दक्षिण पूर्व में मारियुपोल शहर में, जहाँ के मेयर बता रहे हैं कि आवासीय क्षेत्रों में भी गोलीबारी जारी है.
ज़ेपोरज़िया न्यूक्लियर पावर प्लांट में लगी आग अब बुझ चुकी है. अब ये प्लांट रूस के नियंत्रण में है. ऐसी रिपोर्ट है कि वहां के कर्मचारियों को रहने की अनुमति दी जा रही है, उन्हें काम करते रहने और पावर यूनिट की निगरानी का काम करते रहना है.
चेर्नोबिल के बाद ये दूसरा न्यूक्लियर पावर प्लांट है जो अब रूसी नियंत्रण में है.
इन सबसे ये दिखता है कि रूसी सैनिक यूक्रेन के दक्षिण में लगातार आगे बढ़ रहे हैं और इससे मारियुपोल जैसे शहरों पर दबाव बढ़ रहा है.
हम रूसी सैनिकों को उत्तर से भी कीएव की तरफ़ बढ़ते देख रहे हैं. इस बीच कई शहरों में लगातार गोलीबारी और जंग जारी है. राजधानी कीएव जिसपर रूस की निगाहें हैं उसपर दबाव बढ़ रहा है.
यूक्रेन में मारियुपोल के डिप्टी मेयर ने कहा- पुतिन चाहते हैं उनके देश को मरुभूमि बनाना
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यूक्रेन के दक्षिणी शहर मारियुपोल पर रूस लगातार भारी गोलाबारी कर रहा है.
शहर के डिप्टी मेयर ने नेटो नेताओं से अपील की है कि वे यूक्रेन में सेना भेजें. उन्होंने कहा कि रूस उस समय तक नहीं रुकेगा जब तक ये देश मरुभूमि न बन जाए और बड़ी संख्या में नागरिक मारे जाएँगे.
मारियुपोल के डिप्टी मेयर सर्गेई ओर्लोव ने बीबीसी रेडियो 4 के टुडे प्रोग्राम में कहा- पुतिन को हमारे नागरिकों को मारने से रोकने का कोई रास्ता नहीं जब तक कि नेटो इस बात को न समझ जाए कि ये कोई क्षेत्रीय संघर्ष नहीं, बल्कि लोकतंत्र, आज़ादी के ख़िलाफ़ है और ये सबसे बड़े यूरोपीय देशों में से एक के ख़िलाफ़ है.
उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि नेटो के नेता ये नहीं समझते कि पुतिन रुकेंगे नहीं, वे डरे हुए हैं और ये बहुत अफ़सोस की बात है. जबकि हम उम्मीद करते हैं कि किसी दिन नेटो के नेता ये समझेंगे कि यूक्रेन को सीधे सैनिक सहायता पहुँचाना पूरी तरह आवश्यक है, ताकि यूक्रेन पुतिन को रोक सके. सर्गेई ओर्लोव ने कहा कि रूस के राष्ट्रपति पुतिन यूक्रेन के सवाल का समाधन करने के लिए एक मरुभूमि खड़ा करना चाहते हैं.
हालाँकि उन्होंने ये भी कहा कि हमारे शहरों पर क़ब्ज़ा करना असंभव है, क्योंकि शहर सिर्फ़ इमारतें नहीं होती बल्कि यहाँ के लोग होते हैं. उन्होंने कहा कि पुतिन ज़्यादा से ज़्यादा आम नागरिकों को मारने के लिए भी तैयार हैं. मारियुपोल के लोगों ने बीबीसी को बताया है कि रूस लगातार यहाँ गोलाबारी कर रहा है, जिससे आवासीय इलाक़े प्रभावित हुए हैं और बिजली और पानी की सप्लाई पर भी असर पड़ा है.
रूस विरोधी भावना के आगे झुक गए हैं ज़ेलेंस्की- लावरोफ़
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रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ ने कहा है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदोमीर ज़ेलेंस्की शांति के बैनर तले सत्ता में सत्ता में आए थे.
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लावरोफ़ ने कहा कि ज़ेलेंस्की ने वादा किया था कि वे यूक्रेनी और रूसी दोनों की ज़िंदगी बचाएँगे, लेकिन अंत में वे उसी रूस विरोधी भावना के आगे झुक गए, जैसे उनके पहले ही पोरोशेन्को की सरकार ने किया. लावरोफ़ ने कहा- लागातार पाँच बार नेटो का विस्तार किया गया. हर बार इस गठबंधन की बयानबाज़ी, सैनिक योजना और अभ्यास रूस के ख़िलाफ़ बढ़ती गई.
यूक्रेन से भारतीयों को निकालने पर सीजेआई ने कहा- मसला संवेदनशील, इसके ज़रिए लोकप्रियता पाने की कोशिश न करें
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इमेज कैप्शन, सीजेआई एनवी रमन्ना
यूक्रेन से एक भारतीय लड़की को
वापस लाने से जुड़ी एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना ने कहा है कि दुर्भाग्य की बात है
कि हमने अतीत से कुछ नहीं सीखा. कोर्ट ने कोई आदेश नहीं दिया और कहा कि हम सिर्फ़
छात्रों को लेकर चिंतित हैं.
फ़ातिमा अहाना नाम की एक छात्रा
ने ख़ुद को यूक्रेन से निकाले जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.
छात्रा रोमानिया की सीमा पर फँसी थीं और उन्हें आगे नहीं जाने दिया जा रहा था.
भारत के अटॉर्नी जनरल (एजी) केके
वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता को अन्य लोगों के साथ विशेष
फ्लाइट से आज रात वापस लाया जाएगा.
सीजेआई एनवी रमन्ना की अध्यक्षता
वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच इस याचिका की सुनवाई कर रही है. बेंच ने अटॉर्नी
जनरल को यूक्रेन में फँसे भारतीयों को निकालने के लिए उठाए जा रहे सरकार के क़दमों
की जानकारी देने को कहा था.
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वकील को भी दी सलाह
याचिकाकर्ता के वकील विशाल तिवारी ने कहा कि सबसे ज़्यादा चिंता उन छात्र-छात्राओं की है, जो खारकीएव में हैं क्योंकि वो यूक्रेन की सीमाओं से करीब 1000 किमी दूर हैं.
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम जानते हैं कि ये संवेदनशील मसला है. कृपया इसके जरिए लोकप्रियता पाने की कोशिश ना करें. हमने आपकी पिछली याचिका देखी है.’’
कोर्टी ने एजी को मौजूदा स्थिति बताने के लिए कहा.
अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया कि इस संबंध में नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को जानकारी दी गई है. वह इस मामले में रोमानिया के प्रभारी हैं.
एजी ने बताया कि वो लड़की रोमानिया में है और उन्हें उनके साथियों (दूसरे कॉलेज छात्र-छात्राएं) के साथ आज वापस लाया जाएगा.
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमने युद्ध की पुरानी स्थितियों से सीखा नहीं है. हमारे पास इसमें कहने के लिए ज़्यादा कुछ नहीं है लेकिन स्टूडेंट्स को लेकर चिंताएं हैं.’’
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अब तक निकाले 17 हज़ार लोग
वहीं, सुप्रीम कोर्ट के सवाल पर अटॉर्नी जनरल ने बताया, ‘‘अब तक यूक्रेन से 17 हज़ार लोगों को निकाला जा चुका है. भारत सरकार हर नागरिक को वापस लाने के लिए सभी कोशिशें कर रही है. हमारे पास कुवैत से लाखों लोगों को निकालने का अनुभव है.’’
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि करीब सात हज़ार लोग यूक्रेन में फंसे हैं और भारत सरकार उन्हें जल्द से जल्द लाने के लिए सभी कदम उठा रही है.
अब कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनावई अगले शुक्रवार के लिए तय की है. बेंच ने कहा, ‘‘हम कोई आदेश जारी नहीं कर रहे हैं. हम बस स्टूडेंट्स को लेकर हो रही घबराहट को लेकर चिंतित हैं.’’
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस की रूस के राष्ट्रपति पुतिन से बातचीत, जानिए किन मुद्दों पर हुई चर्चा
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सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फ़ोन पर बात की है.
सऊदी प्रेस एजेंसी के मुताबिक़ बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय मुद्दों पर बात की और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी विचार किया.
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यूक्रेन के संकट पर भी दोनों नेताओं ने बात की. सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने कहा कि उनका देश इस मसले के राजनीतिक समाधान की वकालत करता है. बातचीत के दौरान सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने कहा कि वे सभी पार्टियों के बीच मध्यस्थता की कोशिश के लिए तैयार हैं.
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यूक्रेट संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा के क्षेत्र में प्रभाव पर भी दोनों नेताओं ने चर्चा की. सऊदी प्रेस एजेंसी के मुताबिक़ क्राउन प्रिंस ने ये बात दोहराई कि सऊदी अरब तेल बाज़ार में संतुलन और स्थिरता क़ायम रखना चाहता है. उन्होंने इस मामले में ओपेक प्लस देशों के समझौते का भी ज़िक्र किया और इसे क़ायम रखने की अहमियत पर भी ज़ोर दिया.
यूक्रेन से भारतीयों को निकालने के लिए 130 बसें तैयार: रूस
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इमेज कैप्शन, प्रतीकात्मक तस्वीर
रूस की समाचार एजेंसी तास के मुताबिक़ यूक्रेन के खारकीएव और सुमी से भारतीयों
और अन्य विदेशी नागरिकों को ले जाने के लिए रूस की 130 बसें तैयार हैं. यहाँ से
लोगों को रूस के बेलग्राद इलाक़े में ले जाया जाएगा.
रूस के नेशनल डिफेंस कंट्रोल सेंटर के प्रमुख करनल जनरल मिखाइल
मिज़िंत्सेव ने इसकी जानकारी दी है.
उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय और अन्य विदेशी नागरिकों
को बचाने के लिए रूस की 130 अच्छी बसें खारकीएव और सुमी जाने के लिए बेलग्राद में
दो चैकप्वाइंट्स पर खड़ी हैं.’’
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मिखाइल मिज़िंत्सेव के मुताबिक चैकप्वाइंट्स पर ठहरने और आराम के लिए अस्थायी इंतज़ाम किए गए हैं. शरणार्थियों को गर्म खाना दिया जाएगा. वहां पर्याप्त दवाओं के साथ मोबाइल क्लीनिक भी उपलब्ध कराए जाएंगे.
उन्होंने बताया, ‘‘इसके बाद लोगों को बेलग्राद शहर में भेजा जाएगा ताकि वहाँ से वो अपने देश लौट सकें. रूस के सैन्य विमान भी इसमें मदद करेंगे.’’
इससे पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच दो बार फ़ोन पर बात हो चुकी है. इसमें भारतीयों की सुरक्षित निकासी को लेकर चर्चा की गई थी.
रूस ने खारकीएव से भारतीय नागरिकों को तीन विशेष जगहों पर पहुंचने की सलाह दी थी ताकि वहां उन्हें यूक्रेन से निकाला जा सके.
वहीं, राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन पर भारतीयों को बंधक बनाने और ढाल की तरह इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया है. हालांकि, यूक्रेन ने इस आरोप को गलत बताया है.
ब्रेकिंग न्यूज़, यूक्रेन ने कहा- परमाणु पावर प्लांट पर रूसी सैनिकों का नियंत्रण
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यूक्रेन ने कहा है कि रूसी सैनिकों ने ज़ेपोरज़िया परमाणु पावर प्लांट पर क़ब्ज़ा कर लिया है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ एक स्थानीय अधिकारी ने सोशल मीडिया पर रहा है कि प्लांट का संचालन करने वाले कर्मचारी पावर यूनिट्स की निगरानी कर रहे हैं.
उन्होंने ये भी बताया है कि स्टेशन कर्मचारी अपना काम जारी रखे हुए हैं और पावर यूनिट्स की देखरेख कर रहे हैं.
यूरोप के सबसे बड़े परमाणु पावर प्लांट में शुक्रवार तड़के आग लग गई थी.
यूक्रेन का आरोप है कि रूस के हमले के कारण ऐसा हुआ है. बाद में यूक्रेन की इमरजेंसी सेवा ने इसकी पुष्टि की कि ज़ेपोरज़िया परमाणु पावर प्लांट में लगी आग पर काबू पा लिया गया है. इससे पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदोमीर ज़ेलेंस्की ने भी ट्वीट कर जानकारी दी थी कि रूसी सैनिक ने यूरोप के सबसे बड़े परमाणु पावर प्लांट पर हमला किया है. उन्होंने ट्वीट कर दुनिया से मदद की अपील की थी और कहा था कि ये पावर प्लांट ख़तरे में है. इसके बाद ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन ने ज़ेलेंस्की से फ़ोन पर बात की थी.
यूक्रेन में मारे गए नवीन को लेकर बीजेपी विधायक की टिप्पणी पर बवाल
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कर्नाटक के हुबली से बीजेपी विधायक अरविंद बेलाड के एक बयान को लेकर काफ़ी विवाद खड़ा हो गया है.
पिछले दिनों कर्नाटक के एक छात्र नवीन शेखरप्पा की यूक्रेन के खारकीएव में हुई गोलाबीरी में मौत हो गई थी.
उनके परिजनों ने पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम बासवराज बोम्मई के नवीन के शव को लाने की मांग की है.
इसी पर एक सवाल के जवाब में बीजेपी विधायक अरविंद बेलाड ने कह दिया कि एक शव को लाने में ज़्यादा जगह की ज़रूरत होती है, इतनी जगह में आठ लोगों को वापस लाया जा सकता है.
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पत्रकारों से बातचीत में अरविंद बेलाड ने कहा- सरकार अपनी ओर से नवीन के शव को लाने की हरसंभव कोशिश कर रही है. लेकिन चूँकि वहाँ लड़ाई चल रही है, इसलिए इसमें मुश्किल पेश आ रही है. जो लोग जिंदा हैं, उन्हें लाने में परेशानी हो रही है, जबकि शव लाना तो और भी मुश्किल है. उन्होंने कहा कि अगर संभव हुआ तो शव यहाँ लाया जाएगा. नवीन के मामा सदानंद ने अरविंद बेलाड के बयान पर हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि अगर सरकार चाहें तो जो जिंदा हैं, उन्हें भी वापस लाया जा सकता है और शव को भी. उ
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उन्होंने कहा- जो लोग ज़िंदा हैं, उन्हें लाना आवश्यक है. लेकिन किसी माता-पिता ने अपना बेटा खोया है. वे उसे ज़िंदा तो नहीं देख सकते, कम से कम उसके शव को तो वे देख सकते हैं. बीजेपी विधायक के इस बयान को लोग असंवेदनशील बता रहे हैं और सोशल मीडिया पर इसकी काफ़ी आलोचना हो रही है. विपक्षी पार्टियों ने भी बीजेपी विधायक को पार्टी से निकालने की मांग की है. एनसीपी की राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉक्टर शमा मोहम्मद ने कहा कि क्या बीजेपी इस बेशर्म बयान के लिए इस व्यक्ति को पार्टी से निकालेगी? हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक़ बीजेपी प्रवक्ता गणेश कार्णिक ने कहा है कि विधायक का बयान निजी है और ये पार्टी का स्टैंड नहीं है.
यूक्रेन के तट पर धमाके के बाद एक मालवाहक जहाज़ डूबा
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यूक्रेन के तट पर धमाके के बाद एक मालवाहक जहाज़ डूब गया है. इस जहाज़ के मालिक एस्टोनिया के हैं और उन्होंने ही ये जानकारी दी है.
अभी ये पता नहीं चल पाया है कि धमाका कैसे हुआ.
उन्होंने ये भी जानकारी दी है कि चालक दल के दो सदस्यों और चार अन्य लोगों को यूक्रेन के स्थानीय राहत सेवा ने बचा लिया है.
इस जहाज़ की मालिक एस्टोनिया स्थित कंपनी विस्टा शिपिंग एजेंसी है. एस्टोनिया एक बाल्टिक देश है और नेटा का सदस्य भी है. इसकी सीमा रूस से लगती है. ये जहाज़ कई दिन पहले चोरनोमोर्स्क के दक्षिणी बंदरगाह से निकलने के बाद ओडेसा के निकट यूक्रेन के तट पर खड़ा था. यूक्रेन की सेना का कहना है कि रूस ओडेसा पर कब्ज़ा करना चाहता है. इसके लिए वो कई विशेष लैंडिंग जहाज़ों को वहाँ भेज रहा है. क़रीब 10 लाख की आबादी वाला ओडेसा एक बड़ा समुद्री बंदरगाह है.
यूक्रेन के परमाणु पावर प्लांट में लगी आग बुझाई गई
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यूक्रेन की इमरजेंसी सेवा ने इसकी पुष्टि की है कि ज़ेपोरज़िया परमाणु पावर प्लांट में लगी आग पर काबू पा लिया गया है.
ये पावर प्लांट के आसपास और बाहर के लोगों के लिए भी राहत की ख़बर है.
यूक्रेन ने कहा था कि शुक्रवार तड़के रूस ने इस पावर प्लांट पर हमला किया, जिसके कारण पाँच मंज़िला ट्रेनिंग केंद्र में आग लग गई.
प्लांट को कोई नुक़सान नहीं पहुँचा था, लेकिन आशंका जताई जा रही थी कि कहीं ये आग प्लांट तक न फैल जाए.
यूक्रेन की इमरजेंसी सेवा ने बताया कि शुरू में उन्हें वहाँ जाने की अनुमति नहीं दी गई. लेकिन बाद में उन्हें इसकी अनुमति मिली और एक घंटे बाद उन्होंने आग पर काबू पा लिया. उन्होंने इसकी भी पुष्टि की है कि इस आग में कोई हताहत नहीं हुआ है.
इससे पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदोमीर ज़ेलेंस्की ने भी ट्वीट कर जानकारी दी थी कि रूसी सैनिक ने यूरोप के सबसे बड़े परमाणु पावर प्लांट पर हमला किया है. उन्होंने ट्वीट कर दुनिया से मदद की अपील की थी और कहा था कि ये पावर प्लांट ख़तरे में है. इसके बाद ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन ने ज़ेलेंस्की से फ़ोन पर बात की थी.
यूक्रेन पर हमले के बीच क्वॉड देशों की हुई बैठक, जानिए क्या हुआ फ़ैसला
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तीन
मार्च को क्वॉड्रिलैटरल सिक्यॉरिटी डायलॉग यानी क्वॉड नेताओं की बैठक हुई थी.
क्वॉड में अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया हैं.
सबसे
अहम है कि यूक्रेन पर रूस ने हमला किया, उस
बीच यह बैठक हुई. क्वॉड देशों में भारत एकमात्र देश है, जिसने यूक्रेन पर रूसी हमले की निंदा नहीं की
है.
संयुक्त
राष्ट्र में रूस के ख़िलाफ़ अमेरिकी नेतृत्व वाले निंदा प्रस्ताव के ख़िलाफ़ वोटिंग से भी भारत बाहर रहा
था.
इसके
बाद से क्वॉड में भारत की भूमिका पर सवाल उठ रहा था. कहा जा रहा था कि भारत क्वॉड
की लाइन से अलग चल रहा है. इन तमाम सवालों के बीच क्वॉड देशों की गुरुवार को बैठक
हुई थी.
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बैठक
में भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया
के राष्ट्राध्यक्ष शरीक हुए. इस बैठक के बाद क्वॉड नेताओं का एक साझा बयान जारी
किया गया है. यह बयान व्हाइट हाउस की वेबसाइट पर भी मौजूद है.
साझे
बयान में कहा गया है, ''ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट
मॉरिसन, भारत के नरेंद्र मोदी, जापान के फ़ुमियो किशिदा और अमेरिकी राष्ट्रपति
जो बाइडन ने मुक्त और खुला हिन्द-प्रशांत महासागर, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान को लेकर प्रतिबद्धता जताई
है.
सभी
ने क्षेत्रीय स्थिरता और समृद्धि पर साथ मिलकर काम करने को लेकर अपनी प्रतिबद्धता
ज़ाहिर की.''
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बयान
में कहा गया है, ''क्वॉड नेताओं ने यूक्रेन में जारी
संघर्ष और मानवीय संकट पर भी बात की और इससे अपनी सीमाओं पर पड़ने वाले प्रभाव का
भी मूल्यांकन किया. सभी ने मानवीय मदद और आपदा बचाव के लिए नई मशीनरी तैयार करने
पर सहमति जताई ताकि हिन्द महासागर में भविष्य की चुनौतियों से निपटा जा सके. इसके
साथ ही यूक्रेन संकट को लेकर भी आपस में सहयोग करने पर सहमति बनी है. मुक्त और
खुले हिन्द-प्रशांत को लेकर क्वॉड के नेता आने वाले महीनों में टोकियो में मिलने
पर सहमत हुए हैं.''
यूक्रेन के परमाणु प्लांट में आग के बाद अमेरिका ने लिया अहम फ़ैसला
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अमेरिका
की ऊर्जा मंत्री जेनिफ़र ग्रानहोल्म ने ट्वीट कर कहा है कि उन्होंने यूक्रेन के
ज़ेपोरज़िया न्यूक्लियर प्लांट में आग लगने को लेकर यूक्रेन के ऊर्जा मंत्री से
बात की है. जेनिफर ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी परमाणु इंसिडेंट रेस्पॉन्स टीम को
सक्रिय करने का फ़ैसला किया है.
ग्रानहोल्म
ने कहा कि परमाणु प्लांट के पास रूसी सैन्य अभियान बेहद लापरवाह क़दम है और यह
ख़त्म होना चाहिए.
उन्होंने
कहा कि रक्षा मंत्रालय, अमेरिकी न्यूक्लियर रेग्युलेटरी कमिशन और व्हाइट हाउस के
साथ पूरे घटनाक्रम की निगरानी की जा रही है. अमेरिकी ऊर्जा मंत्री ने कहा कि अभी
रेडिएशन के स्तर में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है.
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यूक्रेन के परमाणु प्लांट में आग: ज़ेलेंस्की ने कहा- चेर्नोबिल से भी होगा ख़तरनाक
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यूक्रेन
के राष्ट्रपति वोलोदोमीर ज़ेलेंस्की ने कहा है कि रूसी बलों ने यूरोप के सबसे बड़े
परमाणु प्लांट पर हमला किया है.
उन्होंने दुनिया से मदद की अपील की है. ट्विटर पर
पोस्ट किए एक वीडियो संदेश में ज़ेलेंस्की ने कहा कि यूरोप का सबसे बड़ा परमाणु
प्लांट ख़तरे में है.
ज़ेलेंस्की
ने कहा कि रूसी बल जानबूझकर परमाणु पावर प्लांट को निशाना बना रहे हैं. उन्होंने 1986 में चेर्नोबिल परमाणु हादसा का हवाला देते हुए
कहा कि ज़ेपोरज़िया के छह रिएक्टरों में
कोई अनहोनी हुई तो इसके नतीजे और बुरे होंगे. ज़ेलेंस्की ने कहा, ''यूरोप के लोग प्लीज़ जग जाएं. आप अपने नेताओं
से कहिए कि रूसी बल यूक्रेन के परमाणु प्लांट पर हमला कर रहे हैं.''
ज़ेलेंस्की
ने कहा कि वह अमेरिका, ब्रिटेन और ईयू के नेताओं के संपर्क
में हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी बात इंटरनेशनल टॉमिक एनर्जी एजेंसी से
भी हुई है. उन्होंने कहा कि यूरोप के लोग अपने नेताओं को जगाएं. ज़ेलेंस्की ने कहा
कि रूसी प्रॉपेगैंडा ने अतीत में दुनिा परमाणु राख से ढक जाएगी और यह चेतावनी अब
सच होती दिख रही है.
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यूक्रेन के परमाणु प्लांट में लगी आग, जानिए क्या हैं इसके ख़तरे
इमेज स्रोत, AFP/ Zaporizhzhia nuclear authority
इमेज कैप्शन, यूरोप के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट ज़ेपोरज़िया
यूरोप के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट ज़ेपोरज़िया के छह
रिएक्टरों के पास आग लगने की ख़बर है. यह पावर प्लांट दक्षिण-पूर्वी यूक्रेन में
है. यूक्रेन का कहना है कि रूस के लगातार हमले के कारण आग लगी है और गोलीबारी के
कारण आग बुझाने में दिक़्क़त हो रही है.
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में परमाणु सुरक्षा विशेषज्ञ ग्राहम एलिसन ने
बीबीसी से कहा कि अगर आग लगी रही तो परमाणु दुर्घटना हो सकती है. उन्होंने कहा कि
1986 में जिस तरह से चेर्नोबिल आपदा हुई थी उसी तरह रेडिएशन का स्तर बढ़ेगा और
सालों तक रहेगा.
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभी कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी.
ग्राहम एलिसन ने कहा कि रूसी बल प्लांट को ऑफलाइन करने की कोशिश कर रहे होंगे ताकि
पूरे इलाक़े में बिजली बाधित हो सके.
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ज़ेपोरज़िया के स्थानीय प्रशासन के प्रमुख ने कहा है कि ज़ेपोरज़िया
पावर प्लांट सुरक्षित है. एलेक्जेंडर सतारुख ने फ़ेसबुक पर एक लाइन की पोस्ट लिखी
है. इस पोस्ट में उन्होंने कहा है कि इनरहोडार मेंज़ेपोरज़िया पावर प्लांट के निदेशक से बात की
है और उन्होंने सुरक्षा को लेकर आश्वस्त किया है.
एलेक्जेंडर सतारुख ने लिखा है, ''ज़ेपोरज़िया
पावर प्लांट के निदेशक ने आश्वस्त किया है कि अभी स्थिति नियंत्रण में है.''
इससे
पहले यूक्रेन के अधिकारियों ने रूसी हमले के कारण परमाणु दुर्घटना की आशंका जताई
थी.
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदोमीर ज़ेलेंस्की ने परमाणु प्लांट पर
हमले की ख़बरों के बीच आपातकालीन मदद की अपील की है. ज़ेलेंस्की ने परमाणु आपदा के
ख़तरे की चेतावनी दी है. ज़ेलेंस्की ने कहा, ''यूरोप के लोग अब
जग जाएं!''
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के
महानिदेशक रफ़ाइल ग्रोसी ने राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की और उनकी टीम से बात की है.
आईएईए ने प्लांट के आसपास सैन्य अभियान रोकने की अपील की है. आईएईए ने कहा कि
रिएक्टर तक आग पहुँची तो यह गंभीर रूप से ख़तरनाक होगा.
हालांकि प्लांट के पास रेडिएशन के स्तर में कोई बदलाव नहीं हुआ है
लेकिन रूसी हमले के कारण चिंताएं बढ़ गई हैं.
IAEA ने कहा है कि प्लांट के भीतर ज़रूरी उपकरण अब भी काम कर रहे हैं.
यूक्रेन ने IAEA से कहा है कि परमाणु प्लांट में आग से ज़रूरी उपकरण प्रभावित नहीं
हुए हैं. प्लांट के कर्मी ज़रूरी क़दम उठा रहे हैं.
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यूरोप के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट में रूसी हमले से लगी आग: यूक्रेन
इमेज स्रोत, Getty Images
इमेज कैप्शन, ज़ेपोरज़िया न्यूक्लियर प्लांट
यूक्रेन
के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने कहा है कि रूसी सैनिक ज़ेपोरज़िया न्यूक्लियर
प्लांट पर चौतरफ़ा गोलीबारी कर रहे हैं. यह यूरोप का सबसे बड़ा पावर प्लांट है.
स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि हमले के कारण प्लांट में आग लग गई है. कुलेबा ने
ट्विटर पर लिखा है, ''रूसी तत्काल गोलीबारी बंद करें ताकि
अग्निशामक वहां तक पहुँच सकें.''
ओपन
न्यूक्लियर नेटवर्क की निदेशक लौरा रॉकवुड ने बीबीसी रेडियो 4 से कहा था कि युद्ध
के कारण यूक्रेन के इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड प्रभावित हो सकते हैं.
ये ग्रिड
न्यूक्लियर पावर पर निर्भर हैं. उन्होंने कहा था कि प्लांट के आसपस सैन्य संघर्ष
से दो ख़तरे हैं- प्लांट को भारी नुक़सान पहुँचेगा और वहां काम करने वाले लोग
प्रभावित होंगे. इससे ज़्यादा गंभीर प्लांट का ठप होना होगा और परमाणु दुघर्टना हो
सकती है.
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द
इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (आईएईए) ने कहा है कि वह यूक्रेन के अधिकारियों के
संपर्क में है. प्लांट के एक प्रवक्ता ने सोशल मीडिया पर रूसी बलों से गोलीबारी
बंद करने के लिए कहा है.
समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, टेलिग्राम पर एक वीडियो में एंड्री तुज़ ने कहा
है, ''यूरोप के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर
प्लांट पर परमाणु ख़तरा की आशंका है. रूसी भारी गोलीबारी कर रहे हैं औ वहां आग
बुझाना मुश्किल है. जिस रिएक्टर में आग लगी है, उसकी
मरम्मत की जा रही है और वर्तमान में यह चालू नहीं है, लेकिन इसमें परमाणु ईंधन है.''
इस
पावर प्लांट से यूक्रेन को 25 फ़ीसदी बिजली मिलती है. रूस ने यूक्रेन की राजधानी
किएव से क़रीब 100 किलोमीटर दूर चेर्नोबिल प्लांट को अपने नियंत्रण में ले लिया
था. यह पहले से ही निष्क्रिय है.
रूस के स्वतंत्र न्यूज़ ऑर्गेनाइज़ेशन नोवाया गज़ेटा ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से न्यूक्लियर पावर प्लांट पर हमले का एक वीडियो शेयर किया है.
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यूक्रेन
पर रूसी हमले का आज नौवां दिन है. दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूरोप के किसी देश पर
यह अब तक का सबसे बड़ा हमला है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, हज़ारों लोगों की मौत हुई है या ज़ख़्मी हुए
हैं. यूक्रेन से क़रीब 10 लाख लोग शरणार्थी के तौर पर दूसरे देशों में भागे हैं और
पश्चिम से प्रतिबंधों के कारण रूस की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है.
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यूक्रेन-रूस जंग: राष्ट्रपति पुतिन भारतीय छात्रों को लेकर बोले
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रूस
के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार की शाम को कहा कि बड़ी संख्या में
भारतीय छात्र खारकिएव में एक ट्रेन स्टेशन पर 'बंधक' बने हुए हैं.
रूसी राष्ट्रपति का यह बयान तब
आया है, जब भारत ने कहा है कि यूक्रेन के शहर
खारकिएव से भारतीय छात्रों को निकालने की योजना बाधित हुई है क्योंकि बुधवार को
जंग थोड़ी देर रुकने के बाद फिर से शुरू हो गई है.
रूसी
राष्ट्रपति पुतिन ने सिक्यॉरिटी काउंसिल ऑफ रशा में दिए अपने भाषण में कहा, ''ये विदेशी नागरिकों को बंधक बना रहे हैं. इनमें
से हज़ारों स्टूडेंट्स हैं,
जो यूक्रेन में पढ़ाई करते हैं. खारकिए
में एक ट्रेन स्टेशन पर 3,179 भारतीय छात्रों को क़ैद करके रखा गया है. वे अब भी
वहीं हैं. ज़्यादातर लोग वहीं हैं और 576 लोग समी में हैं. इन नव नाज़ियों ने चीनी
नागरिकों पर गोलीबारी की है. ये खारकिएव छोड़ना चाहते थे. दो लोग ज़ख़्मी भी हुए
हैं.''
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पुतिन
ने कहा कि यूक्रेन के सुरक्षा बल हज़ारों विदेशी नागरिकों को खारकिएव छोड़ने से
रोक रहे हैं. पुतिन ने कहा कि यूक्रेनी बलों ने इन्हें क़ैदी बनाकर रखा है.
बुधवार
को राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फ़ोन पर बात की थी. दोनों
नेताओं के बीच खारकिएव के हालात पर भी बात हुई थी. रूस इस शहर में भी सैन्य अभियान
चला रहा है. खारकिएव में बड़ी संख्या में चीनी, भारतीय
और अफ़्रीकन स्टूडेंट रहते हैं. गुरुवार देर शाम तक यूक्रेन के अधिकारियों ने कहा
था कि रूस से एक ऐसे सुरक्षित रास्ते पर सहमति बनी है, जिससे विदेशी नागरिकों को निकाला जा सके.
बेलारूस
में रूस और यूक्रेन के बीच युद्धविराम को लेकर आयोजित दूसरे चरण की बातचीत भी
बेनतीजा रही. यूक्रेन के राष्ट्रपति के सलाहकार मिखाइलो पोदोलिअक ने सोशल मीडिया
पोस्ट में कहा है, ''दूसरे चरण की बातचीत ख़त्म हो गई.
दुर्भाग्य से जो नतीजे मिलने चाहिए थे, वो
नहीं मिले. विदेशियों को सुरक्षित निकालने के लिए एक सुरक्षित रास्ता तैयार करने
पर सहमति बनी है.''
हालाँकि गुरुवार को भारत के विदेश मंत्रालय ने यूक्रेन में भारतीय छात्रों के बंधक बनाए जाने की बात को ख़ारिज कर दिया था. भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि उन्हें यूक्रेन में 'किसी भी भारतीय छात्र के बंधक बनाने जैसी स्थिति की कोई ख़बर नहीं है.
यूरोप के सबसे बड़े परमाणु संयंत्र में आग लगने की ख़बर
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यूक्रेन के इनरहोडार शहर स्थित यूरोप के सबसे बड़े परमाणु संयंत्र में आग लगने की ख़बर है.
इनरहोडार शहर के मेयर दिमित्रो ओर्लोव के मुताबिक ऐसा लग रहा है कि ''प्लांट की इमारतों और यूनिटों पर दुश्मन की लगातार बमबारी'' की वजह से आग लगी है.
ओर्लोव ने इससे पहले शहर के बाहर रूसी और यूक्रेनी सेनाओं के बीच में भीषण लड़ाई की जानकारी दी थी.
रूस की सेना ने टैंकों के काफ़िले के साथ शहर में घुसने और प्लांट पर नियंत्रण करने की कोशिश की थी.
लेकिन बुधवार को स्थानीय नागरिकों और प्लांट के कर्मचारियों ने रोडब्लॉक लगाकर प्लांट का रास्ता रोक दिया था.
यूक्रेन में इस समय चार परमाणु संयंत्र चालू हैं जिनमें इनरहोडार स्थित ज़ापोरिज़झिया प्लांट भी शामिल है.
इस प्लांट में परमाणु स्थल चर्नोबिल का परमाणु कचरा भी लाया जाता है. चर्नोबिल अभी रूस के क़ब्ज़े में है.
दस लाख से अधिक लोगों ने छोड़ा यक्रेन, सुविधाएं देगा यूरोपीय संघ
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यूक्रेन और रूस के बीच आठ दिनों से जारी संघर्ष के कारण दस लाख से अधिक लोगों ने यूक्रेन छोड़ दिया है.
यूक्रेन से भागे शरणार्थी पोलैंड, हंगरी, रोमानिया और मोल्दोवा जैसे पड़ोसी देशों की तरफ़ जा रहे हैं.
युद्ध की वजह से देश छोड़कर भाग रहे यूक्रेनी शरणार्थियों को तीन साल तक का अस्थायी निवास परमिट देने के लिए यूरोपीय संघ में सर्वसम्मति से सहमति बन गई है.
ब्रसेल्स में गुरुवार को हुई एक बैठक में यूरोपीय संघ के गृह मंत्रियों ने इस योजना को अनुमति दे दी है.
यूरोपीय संघ ने इससे पहले इस तरह की सुविधा नहीं दी है.
युद्ध से भाग रहे यूक्रेन के लोगों को तीन साल तक यूरोपीय संघ के देशों में रहने की अनुमति के अलावा रोज़गार के अवसर और शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई जाएंगी.