यूक्रेन पर रूस का हमला: कीएव के टीवी टॉवर के नज़दीक विस्फोट
रूसी रक्षा मंत्रालय की हमले की चेतावनी के बाद कीएव के टीवी टॉवर के नज़दीक एक बड़ा विस्फोट हुआ है. रूस ने कहा था कि वो कीएव के चुनिंदा ठिकानों पर हमला करेगा.
लाइव कवरेज
पंकज प्रियदर्शी, रजनीश कुमार, प्रियंका झा and दीपक मंडल
यूक्रेन की राजधानी कीएव की ओर बढ़ रहा है रूसी सैनिकों का बड़ा काफ़िला
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यूक्रेन पर रूस के आक्रमण का आज छठा दिन है और अब सैटेलाइट तस्वीरों से पता लगा है कि भारी संख्या में रूसी टैंकों के काफ़िले कीएव की ओर बढ़ रहे हैं.
ये तस्वीरें कीएव के स्थानीय समयानुसार सोमवार दोपहर से पहले की हैं. तस्वीरों में कीएव की राजधानी से क़रीब 27 किलोमीटर दूर एंतोनोव हवाईअड्डे के पास सैन्य टुकड़ियाँ दिख रही हैं.
इन सैटेलाइट तस्वीरों को जारी करने वाली कंपनी मैक्सर टैक्नोलॉजी ने कहा है कि ये काफ़िला करीब 64 किलोमीटर लंबा है और इसमें सैकड़ों बख्तरबंद वाहन, टैंक, तोपें हैं.
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सैटलाइट तस्वीरों में कीएव के पश्चिम और उत्तर पश्चिम की सैटलाइट तस्वीरों में बेकार हो चुके बख्तरबंद वाहन दिख रहे हैं. वहीं, इरपिन और स्टोयंका के पास क्षतिग्रस्त पुल भी दिख रहा है.
मैक्सर की ओर से बताया गया है कि नई तस्वीरों में दक्षिणी बेलारूस में सैनिक और जंगी हेलीकॉप्टर दिख रहे हैं. ये इलाका यूक्रेन की सीमा से महज़ 30 किलोमीटर की दूरी पर है.
अमेरिकी ख़ुफिया एजेंसियों ने सोमवार को चेतावनी दी थी कि कीएव और यूक्रेन के अन्य शहरों में अभी और बुरा होना बाकी है.
दक्षिणी यूक्रेन के इस शहर को रूस के सैनिकों ने पूरी तरह घेरा
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दक्षिणी यूक्रेन में खेरसोन का रीजनल सेंटर को रूस के सैनिकों ने घेर लिया है. उस इलाक़े से आ रही रिपोर्टों में ये जानकारी दी गई है.
ये इलाक़ा रूस के नियंत्रण वाले क्राइमिया के नज़दीक है. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक़ मंगलवार सुबह इस शहर पर रूसी सैनिकों ने ज़मीनी कार्रवाई की.
इस शहर के मेयर इगोर कोलिखायेव ने फ़ेसबुक पर लिखा है- रूस की सेना शहर में प्रवेश करना वाले इलाक़ों मे चेक प्वाइंट्स लगा रही है. उन्होंने ये भी लिखा है कि खेरसोन यूक्रेन के साथ रहा है और आगे भी रहेगा. खेरसोन स्थित पत्रकार एलेना पनीना ने यूक्रेन की सरकारी मीडिया यूक्रेन 24 को बताया कि दरअसल ये शहर पूरी तरह घिर चुका है.
हर तरफ़ रूस के सैनिक और उपकरण दिख रहे हैं. शहर से बाहर निकलने वाले रास्तों पर उन्होंने चेक प्वाइंट्स लगा दिए हैं. उन्होंने बताया कि अभी तक शहर में बिजली और पानी की समस्या नहीं है. लेकिन उनके मुताबिक़ आने वाले दिनों में तीन लाख की आबादी वाले इस शहर में खाद्यान्न लाने में मुश्किल आ सकतेी है.
ब्रेकिंग न्यूज़, रूस के हवाई हमले में यूक्रेन के 70 सैनिक मारे गए
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यूक्रेन के अधिकारियों के मुताबिक़ रविवार को रूस के हवाई हमले में 70 सैनिकों की मौत हो गई है.
अधिकारियों ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया है कि ये हमला ओख़्तिरका में हुआ.
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रूस का हवाई हमला यूक्रेन के सैनिकों के ठिकाने पर हुआ. सोमवार को भी राहत और बचाव कर्मी मलबे में जीवित बचे लोगों की तलाश करते नज़र आए. यूक्रेन की संसद ने ट्वीट करके मारे गए सैनिकों को श्रद्धांजलि दी है.
यूक्रेन पर रूस के हमले को लेकर क्या सोचते हैं चीन के लोग?, स्टीफ़ेन मैकडॉनेल, चीन संवाददाता, बीबीसी न्यूज़
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चीन में सोशल मीडिया पर यूक्रेन पर रूस के हमले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है.
हालाँकि चीन में ऑनलाइन माध्यम पर कड़ा नियंत्रण है.
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने यूक्रेन पर हमले के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सराहना की है.
लोगों ने पुतिन को 'अदभुत' कहा है और उनके क़दम को दुनियाभर में अमेरिकी प्रभाव का मुक़ाबला करने वाला बताया है. एक व्यक्ति ने लिखा है- मैं रूस का समर्थन करता हूँ और अमेरिका का विरोध. मैं इतना ही कहना चाहता हूँ. एक अन्य व्यक्ति ने लिखा है- अमेरिका हमेशा ही दुनियाभर में अव्यवस्था फैलना चाहता है. लेकिन चीन में कड़े नियंत्रण के बावजूद कुछ लोग रूस की कार्रवाई की आलोचना भी कर रहे हैं.
कुछ दिन पहले चीन के पाँच चर्चित शिक्षाविदों ने रूस की कार्रवाई का विरोध करते हुए एक ओपन लेटर लिखा है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ चीन के इतिहासकार शू गोक़ी ने लिखा है- ये एक आक्रमण है. जैसा कि चीन में एक कहावत है- आप हिरण को घोड़ा नहीं कह सकते. लेकिन इस पत्र के सार्वजनिक होने के कुछ ही घंटों के अंतर इसे हटा दिया गया.
चीन में कितने लोग शांति की मांग कर रहे हैं, इसका सही अंदाजा लगाना मुश्किल है, जब यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसे कितने पोस्ट सेंसर किए गए हैं - और अमेरिका की आलोचना करने वाले कितने पोस्ट को बढ़ावा दिया गया है। ये अंदाज़ा लगाना बहुत मुश्किल है कि चीन में कितने लोग शांति की अपील कर रहे हैं. क्योंकि यही पता नहीं चल पा रहा है कि चीन में ऐसे कितने पोस्ट सेंसर किए जा रहे हैं. साथ ही ये भी नहीं स्पष्ट हो रहा है कि अमेरिका की आलोचना करने वाले कितने पोस्ट्स को बढ़ावा दिया जा रहा है.
यूक्रेन पर रूसी हमला जारी, जानिए अब तक क्या-क्या हुआ
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इमेज कैप्शन, यूक्रेन के पूर्वोत्तर शहर ओखत्यार्का में रविवार को रूसी हमले में रविवार को यूक्रेन के क़रीब 70 सैनिकों की मौत हुई है
28
फ़रवरी को रूस और यूक्रेन के बीच पहले चरण की वार्ता बेनतीज़ा ख़त्म हो गई. दोनों
पक्षों में वार्ता जारी रखने पर सहमति बनी है.
इस
बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदोमीर ज़ेलेंस्की ने यूरोपियन यूनियन से सदस्यता की
मांग की है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र आम सभा दोनों रूसी
हमले को लेकर सक्रिय हैं.
यूएनजीए
की विशेष सत्र में संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरस ने कहा है कि किसी भी
सूरत में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को सही नहीं ठहराया जा सकता है .
संयुक्त
राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने सुरक्षा परिषद को बताया
है कि भारत सरकार एक मार्च से यूक्रेन में मानवीय मदद भेजना शुरू कर रही है. इसके
अलावा भारत सरकार के सीनियर मंत्री यूक्रेन के पड़ोसी देश जाएंगे ताकि भारतीय
नागरिकों और छात्रों को सुरक्षित निकाला जा सके.
रूस
यूक्रेन पर हमले कारण वैश्विक अलगाव का सामना कर रहा है. अमेरिका ने सोमवार को 12
रूसी राजनयिकों को यूएन मिशन से वापस जाने को कहा है.
यूक्रेन
के बड़े शहरों में गोलबारी जारी है. अब तक कुल 350 नागरिकों की मौत हुई है, जिनमें 14 बच्चे हैं. पाँच लाख से ज़्यादा
लोगों को बेघर होना पड़ा है.
21
फ़रवरी को रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पूर्वी यूक्रेन के दो अलगाववादी इलाक़े
दोनेत्स्क और लुहांस्क को स्वतंत्र क्षेत्र के तौर पर मान्यता दे दी थी. इसके अगले
दिन सैन्य अभियान की घोषणा कर दी थी.
इंटरनेशनल
क्रीमिनल कोर्ट के अभियोजक करीम ख़ान ने सोमवार को कहा है कि उन्होंने यूक्रेन पर
रूसी हमले की जाँच शुरू कर दी है. उन्होंने कहा कि सुनवाई तेज़ी से होगी. करीम
ख़ान ने कहा है, ''मैंने फ़ैसला किया है कि इस मामले की
सुनवाई यथासंभव तेज़ी से की जाएगी.'
समाचार
एजेंसी एएफ़पी के अनुसार,
''क़रीम ख़ान ने
कहा कि वो इस बात को मानने के पर्याप्त कारण हैं कि यूक्रेन में 2014 के बाद से
मानवता के ख़िलाफ़ अपराध हुए हैं.''
यूक्रेन
के राष्ट्रपति वोलोदोमीर ज़ेलेंस्की ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी
सदस्यता से रूस को हटाने की मांग की है.
यूक्रेन
के पूर्वोत्तर शहर ओखत्यार्का में रविवार को रूसी हमले में रविवार को यूक्रेन के
क़रीब 70 सैनिकों की मौत हुई है. इस इलाक़े के प्रशासक दिमित्रो ज़यवयुस्क्यी ने
कहा है कि रूसी हमले में एक सैन्य यूनिट तबाह हो गई. उन्होंने कहा, ''कई लोगों की मौत हुई है. 70 यूक्रेनी सैनिकों
दो दफ़नाने की तैयारी हो रही है. लेकिन दुश्मनों को भी वही मिला है जो मिलना
चाहिए. रूस के लोगों के कई शव हैं, जो
रेड क्रॉस को सौंपे गए हैं.''
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यूक्रेन बोला- न सरेंडर करेंगे और ना ही रूसी शर्तों के सामने झुकेंगे
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सैटेलाइट
इमेजरी कंपनी मैक्सर टेक्नॉलजी ने कहा है कि पहले रूसी सैनिकों का हथियारबंद काफिला
यूक्रेन की ओर 27 किलोमीटर लंबा था, जो
अब 60 किलोमीटर से ज़्यादा हो गया है.
मैक्सर
ने कहा है कि नई तस्वीरों से साफ़ होता है कि दक्षिणी बेलारूस में भी रूसी सैनिक
और हेलिकॉप्टर मौजूद हैं,
जो यूक्रेन की सीमा से महज़ 20
किलोमीटर की दूरी पर है.
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इस
बीच यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने सीएनबीसी को दिए इंटरव्यू में कहा
है कि उनका देश आत्मसमर्पण नहीं करेगा. कुलेबा ने कहा, ''यूक्रेन कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार है लेकिन
हम न तो सरेंडर करेंगे और न ही उनकी शर्तों के सामने झुकेंगे.'' यूक्रेन के विदेश मंत्री का यह बयान तब आया था, जब सोमवार को बेलारूस में रूस और यूक्रेन के
प्रतिनिधि बात कर रहे थे.
कुलेबा
ने कहा कि उन्हें नहीं पता है कि वार्ता कब तक चलेगी. उन्होंने कहा कि इस जंग में
जीत यूक्रेन की होगी.
कुलेबा
ने सीएनबीसी को दिए इंटरव्यू में कहा, ''मैं
एक डिप्लोमैट हूँ और मुझे वार्ता की सफलता पर भरोसा है. लेकिन एक डिप्लोमैट होने
के नाते मेरा लक्ष्य यह भी है कि रूस पर अधिकतम प्रतिबंध लगे. यूक्रेन को ज़्यादा
से ज़्यादा हथियार मिले और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस को अलग-थलग किया जा सके. यह
मेरी डिप्लोमैसी का अहम हिस्सा है.''
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रूस
ने यूक्रेन पर ज़मीन और आसमान दोनों तरफ़ से हमला शुरू कर दिया है. रिपोर्ट्स के
मुताबिक़ रूस ने कई बड़े शहरों को निशाना बनाया है. हमले के कारण यूक्रेन के लोग
जान बचाने के लिए पूर्वी यूरोप के देशों में भाग रहे हैं. पश्चिमी देश रूस पर
लगातार प्रतिबंध बढ़ा रहे हैं. सोमवार को प्रतिबंधों के कारण रूस की मुद्रा रूबल
में अमेरिका डॉलर के मुक़ाबले 29 फ़ीसदी की गिरावट आई है.
कुलेबा
ने कहा कि रूस के आम लोगों को पुतिन के कारण भुगतना पड़ रहा है. कुलेबा ने कहा कि
रूस के हर रूबल पर यूक्रेन का ख़ून लगा हुआ है.
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रूसी हमले पर यूएन की आम सभा में बोला भारत, UNHRC की वोटिंग से रहा बाहर
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यूक्रेन
पर संयुक्त राष्ट्र की आम सभा के विशेष सत्र में भारत ने कहा है कि इस संकट का
समाधान डिप्लोमैटिक वार्ता में है.
संयुक्त
राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि भारत यूक्रेन में
ख़राब होती स्थिति से बहुत चिंतित है और हम तत्काल हिंसा रोकने के साथ शत्रुता
समाप्त करने की अपील करते हैं.
तिरुमूर्ति
ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच मतभेद केवल ईमानदार, गंभीर और टिकाऊ वार्ता के ज़रिए ही ख़त्म किया जा सकता है.
तिरुमूर्ति
ने कहा कि यूक्रेन में फँसे भारतीय नागरिकों और छात्रों को निकालने के लिए जो कुछ
भी भारत कर सकता है, कर रहा है.
उन्होंने
कहा, ''भारत यूक्रेन में ख़राब होती स्थिति को
लेकर बहुत चिंतित है. हम इसी बात को दोहरा रहे हैं कि हिंसा तत्काल बंद हो और
शत्रुता ख़त्म हो. मेरी सरकार स्पष्ट रूप से मानती है कि इसका समाधान कूटनीतिक
संवाद के अलावा कुछ और नहीं है.''
हालांकि
भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस की आलोचना वाले प्रस्ताव पर वोटिंग से
बाहर रहा है. इसके अलावा सोमवार को भारत जिनेवा में यूक्रेन पर संयुक्त राष्ट्र की
एक और संस्था यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स काउंसिल (एनएचआरसी) में वोटिंग से बाहर
रहा.
यहाँ
भी यूक्रेन पर रूसी हमले को लेकर आपातकालीन चर्चा के लिए वोटिंग हुई थी. 29 देशों
ने चर्चा के पक्ष में वोटिंग की, पाँच
देशों ने ख़िलाफ़ में और 13 देश वोटिंग से बाहर रहे.
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रूस पर भारत के रुख़ को लेकर खुलकर बोला जर्मनी
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यूक्रेन
पर रूस के हमले को लेकर भारत के रुख़ की चर्चा पश्चिम के देशों में ख़ूब हो रही
है. अमेरिका और यूरोप के देश चाहते है कि यूक्रेन पर हमले के मामले में रूस को
अलग-थलग करने में भारत में संयुक्त राष्ट्र में साथ दे.
लेकिन
भारत अब तक किसी पक्ष को लेकर दूरी बनाकर रखी है. यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पर दो बार वोटिंग हुई
और दोनों पर भारत वोटिंग से बाहर रहा है. भारत अलावा चीन और यूएई भी वोटिंग से
बाहर रहे.
रूस
के वीटो करने के बाद यह प्रस्ताव अब संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में लाया गया है.
यहाँ बहुमत से प्रस्ताव पास हो सकता है. भारत यहाँ क्या करेगा, इसकी चर्चा गर्म है.
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कहा
जा रहा है कि भारत यहाँ भी वोटिंग में न तो अमेरिका के नेतृत्व वाले प्रस्ताव के
समर्थन में वोट करेगा और न ही विरोध में. लेकिन भारत को अपने खेमे में लाने की
कोशिश पश्चिम के देश और रूस दोनों कर रहे हैं.
जर्मनी
के विदेश मंत्री ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर को फ़ोन किया था और उनसे रूस को
अलग-थलग करने की अपील की थी.
भारत
में जर्मनी के राजदूत वॉल्टर लिंडर ने अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू से कहा है कि
उन्हें अब भी उम्मीद है कि भारत यूएन में वोटिंग को लेकर अपना रुख़ बदलेगा.
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रूस
का कहना है कि पिछले दो दशकों में नेटो के पूर्वी यूरोप में विस्तार के कारण
समस्याएं पैदा हुई हैं. 1997 से नेटो पूरब की तरफ़ 14 देशों तक पहुँचा और इन देशों
से रूस बिल्कुल क़रीब है. रूस नेटों को अपनी सुरक्षा को लेकर ख़तरे के तौर पर
देखता है.
इस
सवाल के जवाब में जर्मन राजदूत ने कहा है, ''इसमें
कुछ भी सच्चाई नहीं है. केवल झूठी बातें और झूठे नैरेटिव गढ़े जा रहे हैं. ज़ाहिर
है कि जब आप शांतिपूर्ण पड़ोसी पर हमला करते हैं तो इस तरह के बहाने बनाने पड़ते
हैं. इन तर्कों में कोई सच्चाई नहीं है. यह किसी देश का फ़ैसला होता है कि वह नेटो
में शामिल होना चाहता है या नहीं. यूक्रेन के मामले में तो इस तरह का कोई प्रस्ताव
भी नहीं था. यह यूरोप की शांति पर हमला है.''
जर्मनी
के विदेश मंत्री ने भारतीय विदेश मंत्री से बात की है. क्या यूक्रेन के मामले में
भारत जर्मनी के रुख़ के साथ आने को तैयार है? इस
सवाल के जवाब में जर्मन राजदूत ने कहा, ''मुझे
लगता है कि इस सवाल का जवाब भारतीय डिप्लोमौट ज़्यादा ठीक से देंगे. उन्हें ही
फ़ैसला करना है कि वे क्या चाहते हैं. लेकिन इतना तय है कि हम सभी अंतरराष्ट्रीय
नियमों की वकालत करते हैं और क्षेत्रीय अखंडता के साथ संप्रभुता के उल्लंघन का
विरोध करते हैं. भारत भी इससे लेकर असहमत नहीं है. यूक्रेन भले भारत से दूर है
लेकिन अन्याय की दस्तक एक जगह तक सीमित नहीं होती है.''
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संयुक्त
राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के वोटिंग से बाहर रहने पर जर्मन राजदूत ने कहा कि
अंतरराष्ट्रीय शांति की रक्षा सबका कर्तव्य है. जर्मन राजदूत ने कहा कि जो
अंतरराष्ट्रीय शांति को भंग करता है, उसकी
आलोचना सबको करनी चाहिए.
क्या
जर्मनी भारत के रुख़ से निराश है? इस
पर जर्मन राजदूत ने कहा,
''अब भी वक़्त है.
हम अब भी भारत से इसे लेकर संपर्क में हैं. अगर रूस को ऐसे जाने दिया गया, तो कल कोई और करेगा. मुझे उम्मीद है कि भारत का
रुख़ बदलेगा.''
कहा
जा रहा है कि पश्चिम के देशों के दोहरे मानदंड होते हैं क्योंकि अमेरिका ने 2003
में इराक़ पर हमला किया तो इस तरह की निंदा नहीं की गई. इस पर जर्मन राजदूत ने कहा, ''जर्मनी और फ़्रांस इराक़ पर हमले के पक्ष में
नहीं थे. हम अमेरिका से सहमत नहीं थे.''
संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में रूस को लेकर रात में क्या-क्या हुआ?
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इमेज कैप्शन, यूएन प्रमुख एंटोनिओ गुटेरस
यूक्रेन
पर हमले को लेकर रूस के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पर सोमवार को संयुक्त राष्ट्र की आम सभा
(यूएनजीए) को संबोधित करते हुए यूएन प्रमुख एंटोनिओ गुटेरस ने कहा कि अब बहुत हो
गया है.
इस
प्रस्ताव में रूस की निंदा की गई है और तत्काल युद्धविराम के साथ यूक्रेन के क्षेत्र
से रूसी सैनिकों को वापस बुलाने के लिए कहा गया है.
गुटेरस
ने कहा कि यूक्रेन में लड़ाई बंद होनी चाहिए. यूएन प्रमुख ने कहा, ''हम यूक्रेन के लिए तो त्रासदी झेल ही रहे हैं, साथ में यह एक बड़ा क्षेत्रीय संकट है और इसका
प्रभाव विनाशकारी है.''
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रूसी
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने परमाणु हथियारों को अलर्ट पर रखने का आदेश दिया है
और बेलारूस के राष्ट्रपति लुकाशेंको ने देश के ग़ैर-परमाणु हथियार वाले दर्जे को
बदलने की घोषणा की है.
इस
संदर्भ में गुटेरस ने कहा,
''परमाणु संघर्ष
का विचार समझ से बाहर है. परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को किसी भी सूरत में सही
नहीं ठहराया जा सकता है.''
गुटेरस
के बोलने के बाद संयुक्त राष्ट्र में रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधि आपस में उलझ गए.
यूएनजीए की अध्यक्षता मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्लाह शाहिद के पास है.
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यूएन
में यूक्रेन के राजदूत सेर्गेई किसलित्स्या ने कहा कि रूसी कार्रवाई और परमाणु
हथियारों को लेकर घोषणा पागलपन है. उन्होंने कहा कि अगर यूक्रेन नहीं बचेगा तो
संयुक्त राष्ट्र भी नहीं बचेगा.'
संयुक्त
राष्ट्रमें रूसी राजदूत वैसिली
नेबेन्ज़िया ने आरोप लगाया कि इस शत्रुता की शुरुआत रूस ने नहीं यूक्रेन ने की है.
रूसी राजदूत ने दावा किया कि यूक्रेन की सरकार ने इस संकट की जड़ रोपी है और उसने
2015 के मिंस्क समझौते का पालन नहीं किया.
यूक्रेन
पर प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र आम सभा के 11वें सत्र में सुना जा रहा है. इस
प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भेजा है. सुरक्षा परिषद में अमेरिका
के नेतृत्व में रूस के ख़िलाफ़ यह प्रस्ताव लाया गया था, जिसे रूस ने वीटो कर दिया था. इस प्रस्ताव में
भारत, चीन और यूएई वोटिंग से बाहर रहे थे.
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कहा
जा रहा है कि संयुक्त राष्ट्र आम सभा में इस प्रस्ताव पर वोटिंग में भारत के शामिल
नहीं होने की उम्मीद है. कई लोगों का कहना है कि भारत प्रस्ताव के टेक्स्ट देखने
के बाद आख़िरी फ़ैसला लेगा. उम्मीद है कि यूएनजीए में रूस के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पर
मंगलवार को किसी भी वक़्त वोटिंग हो सकती है. 100 से ज़्यादा सूचीबद्ध वक्ता बोलेंगे.
भारत भी अपना बयान जारी करेगा.
बहस
से पहले जो ड्राफ़्ट लोगों के बीच बाँटा गया है, उसमें रूस को हमलावर कहा गया है और उसे यूक्रेन से तत्काल सैनिकों को
वापस बुलाने के लिए कहा गया है. इसके साथ ही पूर्वी यूक्रेन के दो अलगाववादी
क्षेत्र दोनेत्स्क और लुहांस्क को स्वतंत्र क्षेत्र के तौर पर दी गई रूसी मान्यता
वापस लेने के लिए भी कहा गया है. इसके साथ ही तत्काल वार्ता शुरू करने की बात कही
गई है.
यूक्रेन संकट: अमेरिका में यूक्रेन की राजदूत का दावा- रूस ने किया प्रतिबंधित बम का इस्तेमाल
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अमेरिका में यूक्रेन की राजदूत ने अमेरिकी सांसदों को बताया कि सोमवार को युद्ध के पांचवें दिन रूस ने यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध में एक प्रतिबंधित थर्मोबैरिक हथियार का इस्तेमाल किया.
यूक्रेन की राजदूत ने कहा, “रूस ने आज वैक्यूम बम का इस्तेमाल किया जो कि जेनेवा कंवेंशन के तहत प्रतिबंधित है.”
हालांकि बीबीसी इस दावे की पुष्टि नहीं करता है.
थर्मोबैरिक हथियारों में पारंपरिक गोला-बारूद का उपयोग नहीं होता है.
ये एक उच्च-दाब वाले विस्फोटक से भरे होते हैं. ये शक्तिशाली विस्फोट करने के लिए आसपास के वातावरण से ऑक्सीजन सोखते हैं.
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ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, रूसी गणराज्य चेचन्या में पहले भी इसका इस्तेमाल देखा जा चुका है.
इससे पूर्व शनिवार को, सीएनएन ने रूस के शहर बेलगोरोड के पास थर्मोबैरिक रॉकेट लॉन्चर को देखने की सूचना दी थी.
इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने टेलीविजन पर अपने एक संबोधन में कहा कि यूक्रेन पर रूस के हमले को पांच दिन हो चुके हैं. इन पांच दिनों में रूस ने यूक्रेन पर 56 रॉकेट और 113 क्रूज़ मिसाइलें दागी हैं.
अपने संबोधन में ज़ेलेंस्की ने कहा कि रूस के ख़िलाफ़ यूक्रेन की लड़ाई में शामिल होने के इच्छुक विदेशियों के लिए एक मार्च से वीज़ा-मुफ़्त यात्रा की अनुमति होगी.
उन्होंने सोमवार को रूस पर ख़ारकीएव में युद्ध अपराध में शामिल होने का भी आरोप लगाया. सोमवार को दोपहर से पहले ली गयी सैटेलाइट तस्वीरों में देखा जा सकता है कि रूसी सेना का एक विशाल काफ़िला राजधानी कीएव की ओर आगे बढ़ रहा है.
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