रूस ने पांच दिनों के हमले में 56 रॉकेट और 113 क्रूज़ मिसाइलें यूक्रेन पर दागी हैं- राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस की स्थायी सदस्यता पर एक बार फिर सवाल उठाते हुए ज़ेलेंस्की ने कहा कि युद्ध अपराध करने वाले देश को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य नहीं होना चाहिए.

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मोहम्मद शाहिद, दीपक मंडल, रजनीश कुमार, प्रियंका झा and भूमिका राय

  1. यूक्रेन संकट: पुतिन क्या परमाणु बटन भी दबा सकते हैं?

    पुतिन

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    स्टीव रोज़नबर्ग, बीबीसी न्यूज़ मॉस्को

    कई बार मैं सोचता था कि पुतिन ऐसा कभी नहीं करेंगे लेकिन बाद में उन्होंने ठीक वही काम किया.

    वह कभी क्राइमिया को नहीं मिलाएंगे? लेकिन उन्होंने मिला लिया.

    वह डोनबास में कभी जंग नहीं शुरू करेंगे लेकिन किया. वह कभी यूक्रेन में पूरी तरह से हमला नहीं करेंगे लेकिन यह भी कर दिया.

    लगता है कि कभी ऐसा नहीं करेंगे वाली बात पुतिन पर लागू नहीं होती है. इस स्थिति में एक असहज करने वाला सवाल उठ रहा है: क्या वह कभी पहले परमाणु बटन नहीं दबाएंगे...क्या ऐसा करेंगे?

    पुतिन

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    यह कोई महज़ सैद्धांतिक सवाल नहीं है. पुतिन ने देश के न्यूक्लियर फ़ोर्स को 'विशेष अलर्ट' पर रखा है. रूस का कहना है कि नेटो नेता यूक्रेन को लेकर आक्रामक बयान दे रहे हैं.

    पुतिन ने जब यूक्रेन में 'विशेष सैन्य अभियान' की घोषणा की थी तो चेतावनी देते हुए कहा था, ''कोई बाहरी हस्तक्षेप करने को सोच रहा है तो उसे ऐसी क़ीमत चुकानी होगी, जो अतीत में पहले कभी नहीं चुकानी पड़ी थी.''

    नोवाया गैज़ेट न्यूज़पेपर के प्रधान संपादक और नोबेल शांति सम्मान हासिल करने वाले दिमित्री मरातोव कहते हैं कि पुतिन के शब्द सीधे परमाणु युद्ध की धमकी की तरह है.

    रूस

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    वह कहते हैं, ''रूस जो चाहता है और वो नहीं होता है तो रूस की यह धमकी सब कुछ तबाह कर देगी.''

    अगर पुतिन न्यूक्लियर बटन दबाने का फ़ैसला करते हैं तो क्या कोई उन्हें रोकने की क्षमता रखता है? मरातोव कहते हैं कि रूसी शासन में शामिल लोग पुतिन के ख़िलाफ़ नहीं जाएंगे और वे शासक के साथ ही रहेंगे. रूसी शासन में पुतिन ही सब कुछ हैं.

  2. पुतिन का वह क़दम जिसे लेकर यूरोप को है सबसे ज़्यादा डर

    पुतिन

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    यूरोपियन यूनियन ऊर्जा को लेकर बहुत हद तक रूस पर निर्भर है. रूस का राजस्व भी गैस बेचने से भरता है. इन दोनों तथ्यों को वर्तमान संकट से अलग नहीं किया जा सकता है.

    यूक्रेन पर हमले के बाद ईयू ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए हैं. पिछले हफ़्ते ईयू के नेताओं ने रूस के केंद्रीय बैंक और रूसी विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र पर पाबंदी लगा दी थी.

    इसके अलावा ईयू यूक्रेन को हथियार भी भेज रहा है. लेकिन रूस के लिए जर्मनी द्वारा गैस पाइपलाइन की मंज़ूरी का निलंबन को छोड़ दिया जाए तो ईयू ने रूस से गैस का आयात बंद नहीं किया है.

    फ्रांस

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    यूरोप में गैस की क़ीमत पहले से ही बढ़ी हुई है. पुतिन को पता है कि गैस की आपूर्ति उन्होंने रोकी तो यूरोप में क़ीमत आसमान छूने लगेगी. ईयू को डर है कि रूस गैस की आपूर्ति रोक सकता है या कम कर सकता है.

    सोमवार को ईयू के ऊर्जा मंत्रियों की ब्रसल्स में आपातकालीन बैठक हो रही है. यह बैठक यूक्रेन संकट के बीच ऊर्जा आपूर्ति को लेकर है.

    कहा जा रहा है कि यूरोप का ऊर्जा संकट अब एक आर्थिक समस्या से राजनीतिक चुनौती में बदल गया है. पहले से ही पश्चिमी देश खुलेआम रूस पर 'गैस वॉर' छेड़ने का इलज़ाम लगा रहे थे.

    अमेरिका

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    गैस की क़ीमत यूक्रेन संकट के कारण पिछले सात सालों में सबसे ज़्यादा हो गई है. हाल के वर्षों में रूस और सऊदी की साझेदारी में नाटकीय रूप से बढ़ोतरी हुई है. रूस और सऊदी अरब दोनों दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देश हैं और निर्यात के फ़ैसलों पर इनका नियंत्रण होता है.

    अमेरिका और सऊदी अरब के रिश्ते पहले जैसे नहीं रहे हैं. इसका संकेत इस महीने भी मिला था, जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने सऊदी अरब से तेल का उत्पादन बढ़ाने का आग्रह किया था. अगर सऊदी ऐसा करता तो न केवल महंगाई और गैस की क़ीमत कम करने में मदद मिलती बल्कि इससे रूस के फायदे को भी काबू में किया जाता. लेकिन सऊदी अरब ने इससे इनकार कर दिया था.

  3. यूक्रेन संकट: भारत पर बढ़ा रहा दबाव, UNGA में किसका लेगा पक्ष?

    भारत

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    कहा जा रहा है कि भारत को संयुक्त राष्ट्र में यूक्रेन पर रूस के हमले को लेकर अपना रुख़ निर्धारित करने में काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

    सोमवार को संयुक्त राष्ट्र आम सभा बुलाई गई है और इसमें रूस के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पास करने की तैयारी है. अमेरिका और यूरोप के देश रूस के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पास करने के लिए प्रतिबद्ध दिख रहे हैं.

    अमेरिका और यूरोप के देशों को उम्मीद है कि 193 सदस्यों वाली संयुक्त राष्ट्र आम सभा में बड़े बहुमत से रूस के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पास होगा. कहा जा रहा है कि यूएनजीए में रूस के ख़िलाफ़ प्रस्ताव 8979 पर 80 से ज़्यादा देश पहले से ही सहमत हैं. बाक़ियों को अमेरिका फ़ोन कॉल के ज़रिए सहमत कराने में लगा है.

    रूस

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    अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू से यूरोप के एक डिप्लोमैट ने कहा, ''हमलोगों ने भारत के विदेश मंत्रालय को बताया है कि यूक्रेन का समर्थन क्यों ज़रूर करना चाहिए. यह भारत को फ़ैसला करना है कि वह हमलावर के साथ खड़ा रहता है या पीड़ित के साथ. पहले भले भारत वोटिंग से बाहर रहा लेकिन इस बार उम्मीद है कि अपना रुख़ बदलेगा.''

    द हिन्दू से एक और पश्चिम के डिप्लोमैट ने कहा, ''यह भारत को तय करना है कि वैश्विक मंच पर हमलोग के साथ है या चीन, सीरिया और वेनेज़ुएला के साथ.'' भारत अब तक रूस के ख़िलाफ़ प्रस्ताव के समर्थन या विरोध से दूर रहा है लेकिन कहा जा रहा है कि बढ़ते मानवीय संकट के कारण भारत पर दबाव बढ़ रहा है. यूक्रेन में अब भी भारतीय छात्र और नागरिक फंसे हुए हैं.

    अमेरिका

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    भारत अब तक रूस की आलोचना करने वाले प्रस्तावों पर हुई वोटिंग से बाहर रहा है लेकिन भारत ने आज रात जो स्पष्टीकरण दिया है,उससे लगता है कि हाल के दिनों में यूक्रेन पर रूस की कार्रवाई से भारत भी असहज है.

    संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा है, ''वैश्विक व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय नियमों, यूएन चार्टर और सभी देशों की क्षेत्रीय अखंडता के साथ संप्रभुता पर टिकी है. हम सभी इस सिद्धांत से सहमत हैं.''

    यूक्रेन

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    शनिवार की रात जर्मन विदेश मंत्री ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से बात की थी. जर्मन विदेश मंत्रालय ने कहा है कि दुनिया भर से रूस को लेकर एक आवाज़ आनी चाहिए क्योंकि राष्ट्रपति पुतिन हमलावर हैं और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नियमों को तोड़ा है, साथ ही यूरोप की शांति भंग की है.

    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस के ख़िलाफ़ 25 फ़रवरी को लाए गए प्रस्ताव पर भारत वोटिंग से बाहर रहा था. इसके लिए रूस ने भारत की प्रशंसा की थी और कहा था कि भारत ने स्वतंत्र रुख़ अपनाया. विदेश मंत्रालय ने अभी तक कुछ नहीं कहा है कि भारत संयुक्त राष्ट्र महासभा में वोटिंग करेगा या नहीं.

  4. रूस पर प्रतिबंधों असर दिखने लगा, रूसी मुद्रा रूबल 30 फ़ीसदी गिरी

    रूस

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    रूस के ख़िलाफ़ पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों का असर दिखने लगा है. अमेरिकी मुद्रा डॉलर की तुलना में रूस की मुद्रा रूबल में क़रीब 30 फ़ीसदी की गिरावट आई है.

    यूरो में एक फ़ीसदी की गिरावट आई है और तेल की क़ीमत में भी उछाल है. यूक्रेन पर हमले के ख़िलाफ़ पश्चिमी देशों ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं.

    रूस में लोगों की बैंकों के बाहर लंबी लाइनें लग रही हैं. इन्हें डर है कि बैंक कार्ड काम करना बंद कर देंगे या फिर कैश निकालने की सीमा तय कर दी जाएगी.

    यूरोप में रूस के स्वामित्व वाले बैंक काम करना बंद कर चुके हैं. रूस के केंद्रीय बैंक पर प्रतिबंध के कारण वह क़रीब 630 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार इस्तेमाल नहीं कर पाएगा और इसका सीधा असर रुबल पर पडे़गा. रूस की मुद्रा रूबल कमज़ोर होने के कारण महंगाई भी तेज़ी से बढ़ेगी.

    ऐसे में केंद्रीय बैंक के पास बहुत कम विकल्प होंगे. इनमें ब्याज दरों में बढ़ोतरी और देश से बाहर मुद्रा ले जाने को सीमित करना शामिल है.

    इस बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन से फ़ोन पर हुई बातचीत में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदोमीर ज़ेलेंस्की ने कहा है कि अगला 24 घंटा यूक्रेन के लिए काफ़ी अहम है.

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  5. रूस को लेकर एक बार फिर भारत, चीन और UAE हुए एक साथ

    टीएस तिपुमूर्ति

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    इमेज कैप्शन, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति

    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने संयुक्त राष्ट्र की आम सभा बुलाने का फ़ैसला किया है. इसमें यूक्रेन पर रूस के हमले के ख़िलाफ़ एक प्रस्ताव पास किया जा सकता है.

    शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस ने वीटो कर अपने ख़िलाफ़ प्रस्ताव पास होने से रोक दिया था.

    प्रस्ताव में रूस की निंदा की गई थी और यूक्रेन से बिना शर्त सैनिकों को वापस बुलाने के लिए कहा गया था.

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    संयुक्त राष्ट्र की आम सभा की बैठक 28 फ़रवरी को न्यूयॉर्क के समय के हिसाब से दिन में 10 बजे होगी. भारतीय समय के हिसाब से शाम में होगी.

    रविवार को एक बार फिर से भारत, यूएई और चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूक्रेन पर रूसी हमले के ख़िलाफ़ संयुक्त राष्ट्र की आम सभा बुलाने के लिए हुई वोटिंग से बाहर रहे. भारत और यूएई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य हैं.

    इससे पहले पिछले हफ़्ते शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पर हुई वोटिंग से तीनों देश बाहर रहे थे.

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    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आम सभा बुलाने पर हुई वोटिंग में रूस ने ख़िलाफ़ में मतदान किया लेकिन कुल 11 देशों ने पक्ष में मतदान किए. यह वोटिंग प्रक्रियात्मक थी, इसलिए इसमें वीटो का प्रावधान नहीं था. ऐसे में बहुमत से आम सभा बुलाने का प्रस्ताव पास हो गया.

    संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने भारत के रुख़ को सही ठहराते हुए कहा कि शुक्रवार से यूक्रेन में शुरू हुई हिंसा और बदतर होती गई और यह बहुत ही दुखद है.

    तिरुमूर्ति ने संवाद और डिप्लोमैसी की राह पर बढ़ने की अपील की. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूक्रेन और रूस के राष्ट्रपति से बात की थी और भारत ने बेलारूस बॉर्डर पर दोनों देशों के बीच शुरू होने वाली बातचीत का स्वागत किया है.

    रूस

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    भारत अब तक रूस की आलोचना करने वाले प्रस्तावों पर हुई वोटिंग से बाहर रहा है लेकिन भारत ने जो स्पष्टीकरण दिया है,उससे लगता है कि हाल के दिनों में यूक्रेन पर रूस की कार्रवाई से भारत भी असहज है.

    तिरुमूर्ति ने कहा है, ''वैश्विक व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय नियमों, यूएन चार्टर और सभी देशों की क्षेत्रीय अखंडता के साथ संप्रभुता पर टिकी है. हम सभी इस सिद्धांत से सहमत हैं.''

    तिरुमूर्ति ने यूक्रेन में फँसे भारतीय छात्रों और मानवीय संकट को लेकर भी चिंता जताई.

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  6. रूसी हमले का पांचवां दिन: यूक्रेन की सेना के लिए बेहद मुश्किल समय - यूक्रेन सेना

    यूक्रेन

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    यूक्रेन की सेना ने रविवार को रूस की सेना के साथ हुई लड़ाई को लेकर अपडेट दिया है.

    फ़ेसबुक पन्ने पर यूक्रेन के सशस्त्र बल के जनरल स्टाफ़ ने रविवार को एक मुश्किल दिन क़रार दिया है.

    उन्होंने अपडेट किया है, “यह एक बेहद कठिन दिन था.रूस के सैनिक लगभग हर दिशा से हमले कर रहे हैं. वे हर दिशा से गोला-बारूद बरसा रहे हैं.”

    ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़, रूसी सैनिकों ने दक्षिणी बंदरगाह बर्दियांस्क पर क़ब्ज़ा कर लिया है.

    हालांकि इससे पहले उत्तर पूर्वी यूक्रेन के खारकीएव शहर के क्षेत्रीय प्रशासनिक प्रमुख ने बताया कि स्थानीय सेनाओं ने रूस के सैनिकों के ख़िलाफ सड़कों पर जंग लड़ने के बाद शहर पर फिर से पूरी तरह नियंत्रण कर लिया है.

    खारकीएव यूक्रेन का दूसरा बड़ा शहर है और यहां यूक्रेन की सेना को मिली ये छोटी सी कामयाबी, उनका हौसला बढ़ा सकती है.

    यूक्रेन की उप रक्षा मंत्री ने अब तक युद्ध में मारे गए लोगों और नुक़सान का एक अनुमानित आंकड़ा जारी किया है. यूक्रेन ने जो अनुमानित आंकड़ा जारी किया है उसके मुताबिक रूसी सेना के 4300 सैनिकों की युद्ध में मौत हुई है.

  7. नमस्कार!

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