कोरोना की वजह से पूरी दुनिया में 3600 फ्लाइट्स रद्द, आधी से ज़्यादा अमेरिका में

दुनिया भर में रविवार को 3,600 से ज़्यादा फ़्लाइट्स को रद्द कर दिया गया है जिनमें से आधी से ज़्यादा फ़्लाइट्स अमेरिका से जुड़ी हैं.

लाइव कवरेज

अनंत प्रकाश

  1. चीन अरुणाचल प्रदेश की कई जगहों के नाम क्यों बदल रहा है?

    अरुणाचल प्रदेश

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    चीन के विदेश मंत्रालय ने बीते गुरुवार (30 दिसंबर) को भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश की 15 जगहों के नाम बदलते हुए इसके 'मानकीकृत' नाम जारी किए थे.

    इन नामों को चीन अब अपने आधिकारिक दस्तावेज़ों और नक़्शों में इस्तेमाल करेगा क्योंकि चीन अरुणाचल प्रदेश को 'दक्षिणी तिब्बत' मानता है.

    भारत ने चीन के इस क़दम की निंदा की है और कहा है कि 'नाम ईजाद करके रख देने से' ज़मीन पर तथ्य नहीं बदलेंगे और 'अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है और आगे भी हमेशा रहेगा.'

    चीन ने इन नामों की सूची अपने नए 'लैंड बॉर्डर क़ानून' के तहत जारी किया है. यह नया क़ानून एक जनवरी 2022 से प्रभाव में आ गया है, जिसको लेकर भारत ने चिंता जताई थी.

  2. पीएम के काफिले में 12 करोड़ रुपये की कार पर बोले संजय राउत- मोदी 'फकीर' होने का दावा नहीं कर सकते

    संजय राउत

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    शिवसेना के सांसद संजय राउत ने रविवार को कहा कि अपने काफिले में 12 करोड़ रुपये की कार शामिल करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद को 'फकीर' नहीं कहना चाहिए.

    शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित होने वाले अपने साप्ताहिक कॉलम 'रोखटोक' में संजय राउत ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की भी तारीफ़ की.

    नेहरू की प्रशंसा में संजय राउत ने लिखा है कि जवाहरलाल नेहरू हमेशा भारत में बनी कार इस्तेमाल किया करते थे और मरहूम इंदिरा गांधी ने जान पर ख़तरा होने के बावजूद अपने सुरक्षाकर्मियों को नहीं बदला था.

    राज्यसभा सांसद संजय राउत ने लिखा है, "28 दिसंबर को मीडिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए मंगवाई गई 12 करोड़ रुपये की कार की तस्वीरें छपीं. एक व्यक्ति जो खुद को फकीर और प्रधान सेवक कहता है, वो विदेश में बनी कार का इस्तेमाल करता है."

    "प्रधानमंत्री की सुरक्षा और आराम मायने रखते हैं लेकिन अब के बाद प्रधान सेवक को ये नहीं दोहराना चाहिए कि वो एक फकीर हैं."

    समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री के सुरक्षा काफिले में हाल ही में 'मर्सिडीज़ मेबैक एस650 गार्ड' कार शामिल की गई है.

    गौरतलब है कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा की देखरेख का जिम्मा एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) करती है. पीटीआई ने सरकारी सूत्रों के हवाले से ये भी बताया है कि नई कार बीएमडब्ल्यू कंपनी की जगह पर इस्तेमाल की जा रही है.

    प्रधानमंत्री पहले बीएमडब्ल्यू कार का इस्तेमाल करते थे लेकिन कंपनी ने हाल ही में उस मॉडल का उत्पादन बंद कर दिया है.

  3. केंद्र सरकार के FCRA लाइसेंस न रिन्यू करने पर बोला ऑक्सफ़ैम इंडिया

    एनजीओ

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    अंतरराष्ट्रीय ग़ैर सरकारी संस्था (NGO) ऑक्सफ़ैम ने अपने फॉरेन कॉन्ट्रिब्यून रेगूलेशन एक्ट (FCRA) लाइसेंस को रिन्यू न करने को लेकर बयान जारी किया है.

    शनिवार को ऐसी कई मीडिया रिपोर्ट्स सामने आई थीं जिनमें दावा किया गया था कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ऑक्सफ़ैम इंडिया, इंडियन यूथ सेंटर्स ट्रस्ट, जामिया मिल्लिया इस्लामिया और ट्यूबरक्लॉसिस एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया समेत 6,000 NGO के FCRA लाइसेंस को रिन्यू करने से मना कर दिया है.

    विदेश से दान प्राप्त करने के लिए किसी संगठन के लिए FCRA की अनुमति ज़रूरी होती है.

    ग़रीबी उन्मूलन के लिए काम करने वाले ब्रिटेन के ऑक्सफ़ैम संगठन की भारत की ईकाई ऑक्सफ़ैम इंडिया ने बयान जारी करके कहा है कि इससे उसके संगठन के काम पर असर पड़ेगा.

    संगठन ने बयान में कहा है कि भारत में उसके 16 राज्यों में जारी मानवीय और सामाजिक कार्य संकट में पड़ सकता है. प्रेस रिलीज़ जारी करके कहा गया है कि इन कामों में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करना, जीवनरक्षक दवाएं, सिलेंडर और वेंटिलेटर्स उपलब्ध कराना और कोविड-19 महामारी के दौरान ग़रीब तबके तक खाना पहुंचाना शामिल है.

    शिक्षा

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    प्रेस रिलीज़ में कहा गया है कि गृह मंत्रालय ने 1 जनवरी 2022 को जो सूची जारी की है उसमें ऑक्सफ़ैम इंडिया के FCRA रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण के निवेदन को ख़ारिज कर दिया गया है जिसका मतलब है कि ऑक्सफ़ैम इंडिया 1 जनवरी 2022 से किसी भी काम के लिए विदेशी फ़ंड नहीं स्वीकार कर पाएगी.

    ऑक्सफ़ैम इंडिया के सीईओ अमिताभ बेहार ने कहा है कि ‘ऑक्सफ़ैम इंडिया जनता के हितों के लिए सरकार, समुदायों और फ़्रंटलाइन वर्कर्स के साथ दशकों से काम कर रही है. कोविड-19 महामारी के दौरान ऑक्सफ़ैम इंडिया ने स्वास्थ्य विभाग, ज़िला प्रशासन और आशा वर्कर्स के साथ पूरे देश में जीवनरक्षक उपकरणों और मदद के लिए काम किया. हम विभिन्न राज्यों में सरकार के साथ कोविड-19 के कारण स्कूली शिक्षा में आए अंतर को पाटने का काम भी कर रहे हैं.’

  4. योगी बोले- सपा शासन में रामपुरी चाक़ू ग़रीबों की ज़मीन हड़पने का हथियार था

    योगी

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    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के शासन के दौरान प्रसिद्ध 'रामपुरी' चाक़ू का इस्तेमाल केवल ग़रीबों की ज़मीन हड़पने के लिए किया जाता था, जबकि वर्तमान सरकार इसे ‘एक ज़िला-एक उत्पाद’ योजना के तहत बढ़ावा दे रही है.

    योगी ने ये टिप्पणी सपा नेता आज़म ख़ान के गढ़ रामपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए की. शनिवार को सीएम योगी रामपुर में कुछ परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास के लिए पहुंचे थे.

    उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव की उस टिप्पणी पर भी तंज़ कसा, जिसमें अखिलेश ने कहा था कि वह भी राम मंदिर बना सकते थे. योगी आदित्यनाथ ने कहा, "वह इसके बारे में तभी सोच सकते थे जब उनके पास कब्रिस्तान बनाने से समय बचता.’’

    रामपुर ज़िले के नाम से प्रसिद्ध "रामपुरी चाक़ू" का ज़िक्र करते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि इस हथियार को लोगों की भलाई के लिए उनकी सरकार की एक-ज़िला-एक-उत्पाद योजना में शामिल किया गया है.

    उन्होंने कहा, "हम गुरु-शिष्य परंपरा वाले लोग हैं. हम एक-ज़िला-एक-उत्पाद के तहत रामपुरी चाक़ू आगे बढ़ा रहे हैं. अच्छे लोग इसका इस्तेमाल देश और धर्म की रक्षा के लिए करते हैं. लेकिन ग़लत लोग इसका दुरुपयोग ग़रीबों और दलितों की संपत्ति को लूटने और कब्ज़ा करने के लिए करते हैं. यह सपा सरकार के दौरान ग़रीबों की ज़मीन हड़पने का एक उपकरण बन कर रह गया था."

  5. मुस्लिम महिलाओं की तस्वीर ऐप पर अपलोड करने की जाँच करेगी पुलिस

  6. लखीमपुर हिंसा मामले में SIT ने दो और किसानों को किया गिरफ़्तार

    किसान

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    लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में शनिवार को विशेष जांच टीम (SIT) ने तीन बीजेपी कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर पीट-पीटकर मार डालने के मामले में दो किसानों को गिरफ़्तार किया.

    3 अक्तूबर 2021 को लखीमपुर के तिकुनिया गाँव में हुई हिंसा में आठ लोगों की मौत हुई थी जिनमें चार किसान भी शामिल थे.

    लखीमपुर खीरी पुलिस ने प्रेस रिलीज़ जारी करके बताया है कि 29 वर्षीय कमलजीत सिंह और 35 वर्षीय कवलजीत सिंह उर्फ़ सोनू को गिरफ़्तार किया गया है जो बीते दो महीनों से फ़रार चल रहे थे.

    इससे पहले SIT ने कुछ संदिग्धों को तस्वीरें जारी की थी जिनमें इनकी तस्वीर भी शामिल थी. तीन बीजेपी कार्यकर्ताओं की मौत के मामले में छह किसानों को अब तक गिरफ़्तार किया जा चुका है.

    किसान

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    SIT ने इससे पहले विचित्र सिंह, गुरविंदर सिंह, अवतार सिंह और रंजीत सिंह नामक अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया था.

    हिंसा के दौरान चार किसानों और एक पत्रकार की मौत के मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा को गिरफ़्तार किया जा चुका है.

    इस मामले में सह-अभियुक्त सुमित जायसवाल की शिकायत के बाद ‘अज्ञात किसानों’ के ख़िलाफ़ हत्या और दंगे का मामला दर्ज किया गया था जिस मामले में इन किसानों की गिरफ़्तारी हुई है.

  7. केजरीवाल बोले- दिल्ली में कोरोना के केस बढ़ रहे लेकिन चिंता की बात नहीं

    अरविंद केजरीवाल

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    दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को बताया कि दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ ज़रूर रहे हैं लेकिन इसमें चिंता की कोई बात नहीं है.

    उन्होंने बताया, “29 दिसंबर को 923 केस आए और 30 दिसबंर को 1313 केस आए. 31 दिसंबर को 1796 केस आए और 1 जनवरी को 2796 मामले आए. आज शाम को 3100 तक केस आ सकते हैं. रोज़ाना ढाई से तीन हज़ार मामले आ रहे हैं.”

    “दिल्ली में आज 6360 सक्रिय मामले हैं और तीन दिन पहले सक्रिय मामले 2191 थे. तीन दिन में तीन गुना एक्टिव केस बढ़े हैं लेकिन 29 दिसंबर को 262 लोग अस्पतालों में एडमिट थे और तीन दिन बाद 1 जनवरी को 247 लोग एडमिट हैं. इसका मतलब है कि जो लोग कोरोना से बीमार हो रहे हैं उनको अस्पताल जाने की ज़रूरत नहीं पड़ रही है.”

    अस्पताल

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    दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह सब बिना लक्षण के मामले हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की ज़रूरत नहीं है, कोई भी ऐसा मरीज़ नहीं आ रहा है जिसे ऑक्सीजन की ज़रूरत हो.

    उन्होंने बीते साल मार्च में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान के आंकड़ों से वर्तमान आंकड़ों की तुलना करते हुए बताया कि उसकी तुलना में लोग कम अस्पताल आ रहे हैं और ऑक्सीजन की कम ज़रूरत पड़ रही है और लोगों की मौतें कम हो रही हैं.

    मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि वो यह आंकड़े इसलिए बता रहे हैं क्योंकि चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है लेकिन मास्क ज़रूर पहनना है, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना है और साबुन से हाथ ज़रूर धोने हैं.

  8. हरिद्वार ‘धर्म संसद’ मामले की जांच के लिए SIT का हुआ गठन

    हरिद्वार

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    हरिद्वार ‘धर्म संसद’ में मुस्लिम समुदाय के ख़िलाफ़ भड़काऊ बयानबाज़ी के मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच समिति (SIT) का गठन कर दिया गया है.

    समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, डीआईजी गढ़वाल करण सिंह नांग्याल ने बताया है कि पांच सदस्यीय SIT का नेतृत्व एसपी स्तर के अधिकारी करेंगे और जांच में दोषी पाए जाने वालों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी.

    वहीं, शनिवार को भड़काऊ भाषण मामले की एफ़आईआर में यति नरसिंहानांद गिरि और सागर सिंधु महाराज के नामों को जोड़ा गया.

    उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने बतायाहै कि वायरल वीडियो क्लिप के आधार पर दो नामों को जोड़ा गया है और धारा 295ए को एफ़आईआर में शामिल किया गया है.

    ग़ौरतलब है कि 17 से 19 दिसंबर के बीच हरिद्वार में हुई ‘धर्म संसद’ में मुस्लिम समुदाय के ख़िलाफ़ खुलकर बयान दिया गया था और हिंसा के लिए उकसावे वाली बातें भी कही गई थीं.

  9. पाकिस्तान में तोड़ी गई हिंदू संत की समाधि पर भारत से गए श्रद्धालुओं ने की पूजा

    प्रतीकात्मक तस्वीर

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    पाकिस्तान में नए साल के मौक़े पर पुनर्निर्मित 100 साल पुराने श्री परमहंस जी महाराज मंदिर में भारत, अमेरिका और खाड़ी देशों से आए हिंदू श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की है.

    एक साल पहले कट्टर इस्लामी पार्टी से संबंधित भीड़ ने इस मंदिर में तोड़-फोड़ की थी.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, हिंदू श्रद्धालुओं के प्रतिनिधिमंडल में भारत से तक़रीबन 200, दुबई से 15 और बाक़ी अमेरिका और अन्य खाड़ी देशों के लोग शामिल हैं.

    ख़ैबर पख़्तूनख़्वां के करक ज़िले के टेरी गांव में दिसंबर 2020 में संत श्री परमहंस जी महाराज की समाधि और मंदिर को नुक़सान पहुंचाया गया था. पूरी दुनिया में इस घटना की कड़ी आलोचना हुई थी.

    दिसंबर 2020 में मंदिर में तोड़फोड़ की गई थी और उसे आग लगा दी गई थी
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    भारतीय श्रद्धालु वाघा बॉर्डर के ज़रिए पाकिस्तान में दाख़िल हुए और फिर वहां से वे पुलिस सुरक्षा में मंदिर गए.

    इस कार्यक्रम को पाकिस्तानी हिंदू काउंसिल ने पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के साथ मिलकर आयोजित किया था.

    इस दिन टेरी गांव में भारी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया था.

    हिंदू काउंसिल के अधिकारियों ने बताया है कि रविवार की दोपहर तक कार्यक्रम चलेगा.

    यहां पर बनाए गए कमरों में श्रद्धालुओं के रहने की व्यवस्था की गई है. मंदिर के आसपास के बाज़ारों में पर्यटकों की भीड़ दिखाई दे रही है.

    हिंदू कम्युनिटी संगठन के क़ानूनी मामलों के इंचार्ज रोहित कुमार का कहना है कि मंदिर के पुनर्निर्माण की व्यवस्था पाकिस्तान सरकार ने की थी.

    उन्होंने कहा, “भारत से आए यात्रियों ने आज पूजा की जो कि शांति और क्षेत्र में धार्मिक सहिष्णुता के प्रसार के लिए भारत के लिए एक सकारात्मक संदेश है.”

  10. ब्रेकिंग न्यूज़, भारत में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 27,553 नए मामले

    कोरोना

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    भारत में कोविड-19 के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन संक्रमण के कुल मामले 1,525 हो गए हैं. इनमें से ज़्यादा मामले महाराष्ट्र में 460 हैं.

    दूसरी तरफ़ पिछले 24 घंटों में भारत में कोरोना संक्रमण के 27,553 मामले दर्ज किए गए हैं. कल यानी शनिवार की तुलना में आज 21 फ़ीसदी ज़्यादा संक्रमण के मामले दर्ज किए गए हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, कोविड से पिछले 24 घंटों 284 लोगों की मौत हुई है.

  11. इमरान ख़ान की सरकार दो बिलों को लेकर फँसी

    इमरान ख़ान

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    पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार अगले सप्ताह सीनेट का एक सत्र बुला कर औपचारिक रूप से विवादास्पद वित्त पूरक बिल 2021- जिसे आम तौर पर मिनी-बजट के नाम से जाना जाता है- पेश करने के लिए तैयार है.

    माना जा रहा है कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) जनवरी के अंतिम सप्ताह में होने वाली अपनी अगली बोर्ड बैठक तक पाकिस्तान की समीक्षा टाल सकता है.

    इस नए वित्त विधेयक में करों और शुल्कों से संबंधित कुछ क़ानूनों में संशोधन किया गया है. साथ ही स्टेट बैंक ऑफ़ पाकिस्तान (संशोधन) विधेयक 2021 के पारित होने के बाद ही पाकिस्तान को आईएमएफ़ से मिलने वाले 6 अरब डॉलर के क़र्ज़ को लेकर आईएमएफ़ की छठी समीक्षा हो सकेगी.

    12 जनवरी को आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड की बैठक होने वाली है.जिसमें पाकिस्तान को मिलने वाले क़रीब एक अरब डॉलर का फैसला किया जाएगा. लेकिन पाकिस्तान चाहता है कि ये समीक्षा, बोर्ड की अगली बैठक तक टाल दी जाए जो इस महीने के अंत में होगी.

    पाकिस्तान के एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री ने पाकिस्तान के अंग्रेज़ी अख़बार डॉन से कहा है कि सरकार सोमवार को सीनेट सत्र बुलाकर वित्त मंत्री शौकत तारिन को संविधान के अनुच्छेद 73 के तहत वित्त (पूरक) विधेयक 2021 को पेश करने की अनुमति दे सकती है.

    इमरान ख़ान

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    ये जानना अहम है कि, दोनों विधेयकों को नेशनल असेंबली में पेश करने के ठीक एक दिन पहले, 29 दिसंबर को उच्च सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी.

    कुछ ट्रेजरी सदस्यों सहित सभी को चौंका दिया था क्योंकि माना जा रहा था कि आईएमएफ़ ने दोनों विधेयकों को क़ानून बनाने के लिए पाकिस्तान को 12 जनवरी तक की बैठक का समय दिया है.

    हालांकि,वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अख़बार डॉन को बताया कि आईएमएफ़ ने कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की है.

    उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की समीक्षा अभी भी आईएमएफ बोर्ड की 12 जनवरी को होने वाली बैठक के एजेंडे में है और मंत्रालय ने बैठक के लिए आवश्यक दस्तावेज़ पहले ही भेज दिए हैं.

    उन्होंने कहा कि आईएमएफ बोर्ड नियमित रूप से बैठक करता है और पाकिस्तान की समीक्षा को स्थगित करने के अनुरोध के साथ उनसे पहले ही संपर्क किया जा चुका है.

  12. अफ़ग़ानिस्तान: तालिबान बना रहा है एक लाख सदस्यों वाली आर्मी

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    अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि 100,000 सदस्यों वाली एक नई सैन्य शक्ति बनाने की कोशिशें जारी हैं. उन्होंने ज़ोर दिया कि इस्लामी अमीरात में सैन्य बलों को प्राथमिकता दी जाएगी.

    रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इनायतुल्लाह ख्वारज़ामी ने टोलो न्यूज़ से कहा,“जब उनका नामांकन हो जाएगा,तो उन्हें दस्तों में ड्यूटी पर भेजा जाएगा. ये प्रक्रिया लगभग 80 प्रतिशत पूर्ण हो गई है.''

    पूर्व सरकार के पतन के साथ ही देश के 350,000 अफ़ग़ान राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा बल भी भंग हो गए. सैन्य जानकारों का सुझाव है कि नए सैन्य बल में पूर्व सुरक्षा बल के सदस्य शामिल होने चाहिए.

    टोलो न्यूज़ से बात करते हुए एक पूर्व सैन्य अधिकारी समर सआदत ने कहा, "सेना को मानकीकृत किया जाना चाहिए और सेना को सैन्य अनुशासन का पालन करना चाहिए. उनके पास एक उचित वर्दी और दिखने का एक अलग अंदाज़ होना चाहिए.”

    विश्वविद्यालय के प्रशिक्षक अजीज मुजादीदी का कहना है कि“राष्ट्रीय सुरक्षा बलों में देश के सभी जातीय समूहों को शामिल करना चाहिए. पूर्व सैन्य सदस्य जो अपने प्रदर्शन में पेशेवर हैं,उन्हें नई सैन्य इकाई में शामिल किया जाना चाहिए, ”

    350,000 पूर्व अफ़ग़ान सुरक्षा बलों में से 150,000 रक्षा मंत्रालय के अधीन थे.

    रक्षा मंत्रालय ने कहा कि प्रक्रिया पर काम करने के लिए 20 सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल नियुक्त किया गया है.

  13. ताइवान को लेकर चीन की आक्रामकता पर बढ़ी तनातनी

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    ताइवान ने चीन से अपने "सैन्य दुःस्साहस" पर अंकुश लगाने को कहा है. बीते कुछ सालों में दोनों देशों के बीच तनाव अपने अधिकतम स्तर पर जा पहुँचा है.

    नए साल के मौक़े पर दिए गए भाषण में ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन में कहा,"हमें चीन को याद दिलाना होगा कि वो स्थिति का ग़लत आकलन ना करे और 'सैन्य दुःस्साहस' को रोके."

    2016 में साई इंग-वेन के सत्ता में आने के बाद से चीन ने ताइवान पर सैन्य और राजनयिक दबाव बढ़ा दिया है. साई इंग-वेन ताइवान पर चीन के दावे को ख़ारिज करती रही हैं और देश को चीन का हिस्सा नहीं मानती.

    वहीं, चीन लोकतांत्रिक रूप से शासित ताइवान को अपना क्षेत्र बताता है और पिछले दो सालों में अपनी संप्रभुता के नाम पर ताइवान में सैन्य और राजनयिक दबाव बढ़ाता जा रहा है.

    हाल के महीनों में चीन के लड़ाकू विमानों ने ताइवान के हवाई क्षेत्र का जमकर उल्लंघन किया है.

    अपने भाषण में साई ने कहा कि ‘’चीन के अधिकारियों को ताइवान के आंतरिक क्षेत्र में सैन्य दुःस्साहस के प्रसार को रोक देना चाहिए."

    "सेना के ज़रिए दोनों पक्षों के बीच मतभेदों का हल करना कोई विकल्प नहीं है."

    उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में तनाव को कम करने के लिए,ताइवान और चीन दोनों को "लोगों की आजीविका और लोगों को शांत करने के लिए मेहनत करनी चाहिए" ताकि एक साथ समस्याओं का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके.

    चीन

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    आज़ादी की कोशिश बड़ी तबाही लाएगी- चीन

    वहीं, नए साल के संबोधन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और ताइवान दोनों के लोगों की साझा आकांक्षा है कि ‘’हमारी मातृभूमि को दोबारा पूरी तरह एक कर दिया जाएगा.’’

    साई के भाषण के बाद शनिवार को बीजिंग में ताइवान मामलों के कार्यालय के प्रवक्ता जू फेंग्लियन ने कहा, "हम शांतिपूर्ण एकीकरण की संभावना के लिए प्रयास करने को तैयार हैं.’’

    ‘’लेकिन अगर ताइवान की अलगाववादी ताक़तें उकसाती और मजबूर करती हैं या उन्होंने किसी भी तरह से लाल रेखा पार की तो हमें निर्णायक क़दम उठाने होंगे.‘’

    जू ने कहा कि स्वतंत्रता की कोशिश भी ताइवान को सिर्फ़ और सिर्फ़ एक "गहरी खाई" में धकेल देगी और यहाँ "बड़ी तबाही" लाएगी.

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    चीन और ताइवान के बीच विवाद

    चीन और ताइवान के बीच 1949 से विवाद चला आ रहा है,जिसकी वजह से ताइवान की पहुँच अंतरराष्ट्रीय संगठनों तक नहीं है और उसे सीमित अंतरराष्ट्रीय मान्यता ही मिली हुई है.दुनिया के सिर्फ़ 15 देश ही ताइवान को स्वतंत्र राष्ट्र मानते हैं.

    वहीं,चीन इसे अपने से अलग हुआ हिस्सा और एक विद्रोही प्रांत मानता है. साल 2005 में चीन ने अलगाववादी विरोधी क़ानून पारित किया था जो चीन को ताइवान को बलपूर्वक मिला लेने का अधिकार देता है. उसके बाद से अगर ताइवान अपने आप को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित करता है तो चीन की सेना उस पर हमला कर सकती है.

  14. नमस्कार!

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