केंद्र
सरकार ने नीट परीक्षा काउंसलिंग से जुड़े आरक्षण विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में कहा है
कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) आरक्षण का लाभ उठाने के लिए तय नियम एवं
शर्तें ओबीसी क्रीमी लेयर आरक्षण का लाभ लेने के लिए तय नियम एवं शर्तों के मुक़ाबले
कठिन हैं.
हालांकि,
दोनों आरक्षित वर्गों के लिए आय वर्ग आठ लाख रुपये ही है.
केंद्र
सरकार ने मौजूदा अकादमिक वर्ष में नीट परीक्षा में ईडब्ल्यूएस कोटे को लागू करने
का फ़ैसला किया है.
इस
फ़ैसले के तहत सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को दस फीसदी आरक्षण दे रही है.
इसके
ख़िलाफ़ कुछ छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की थीं.
इसके बाद सर्वोच्च
अदालत ने केंद्र सरकार से एक बार फिर ईडब्ल्यूएस आरक्षण से जुड़े नियम एवं
शर्तों पर विचार करने के लिए कहा था.
सरकार ने स्वीकार की कमेटी की रिपोर्ट
सरकार ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी निर्धारित करने से जुड़े नियमों एवं शर्तों पर पुनर्विचार करने के लिए बनाई गई तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है.
सरकार ने कहा है कि सबसे पहली बात ये है कि ईडब्ल्यूएस के मानदंडों में आवेदन से पहले एक साल की आय को देखा जाता है.
वहीं, ओबीसी क्रीमी लेयर के लिए तीन साल की क्रमागत आय को ध्यान में रखा जाता है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि “ओबीसी क्रीमी लेयर की न्यूनतम आय तय किए जाते वक़्त तनख़्वाहों, कृषि एवं पारंपरिक कारीगरी से जुड़ी आय को नहीं जोड़ा जाता है. वहीं, ईडब्ल्यूएस में कृषि से आने वाले आमदनी समेत सभी स्रोतों से हो रही आय को जोड़ा जाता है.
ऐसे में न्यूनतम आय की सीमा भले ही आठ लाख रुपये हो लेकिन उनको जोड़ने का तरीका अलग है. ऐसे में दोनों की तुलना नहीं की जा सकती.”
इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि जहां ओबीसी क्रीमी लेयर के तहत आने के लिए तीन साल की क्रमागत आय आठ लाख रुपये से अधिक होनी चाहिए.
वहीं, ईडब्ल्यूएस के तहत आय एक साल में आठ लाख से कम होनी चाहिए.
ऐसे में अगर किसी वर्ष किसी व्यक्ति की खेती या अन्य कारण से आय आठ लाख रुपये से ज़्यादा हो जाती है तो वह शख़्स न्यूनतम आय सीमा के पार चला जाएगा.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, पैनल ने कहा है, “समिति इस नतीजे पर पहुंची है कि ईडब्ल्यूएस और ओबीसी क्रीमी लेयर आठ लाख रुपये की आय वाली शर्त का पालन कर रहे हैं. लेकिन इसके बावजूद ईडब्ल्यूएस को लेकर जो नियम एवं शर्तें हैं, वे ओबीसी क्रीमी लेयर की अपेक्षा ज़्यादा सख़्त हैं.”
केंद्र सरकार ने इस समिति की रिपोर्ट सरकार में सर्वोच्च अदालत को सौंप दी है.