फ्रांसीसी अधिकारियों ने जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या के सिलसिले में गिरफ़्तार किए गए एक सऊदी व्यक्ति को रिहा कर दिया है. अधिकारियों ने कहा है कि इस व्यक्ति को ग़लत पहचान के आधार पर गिरफ़्तार कर लिया गया था.
33 वर्षीय खालिद अलोतैबी को तुर्की में जारी वारंट के आधार पर, मंगलवार को पेरिस के एक हवाईअड्डे से गिरफ्तार किया गया था. इसी नाम के एक साऊदी सैनिक (रॉयल गार्ड) को अमेरिका, खाशोज्जी की हत्या के अभियुक्तों में से एक मानता है. अधिकारियों का कहना है कि इसी वजह से अलोतैबी को गिरफ़्तार कर लिया गया था.
तुर्की के इस्तांबुल में सऊदी वाणिज्य दूतावास के भीतर साल 2018 में जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या कर दी गई थी. अमेरिका में रहने वाले सऊदी पत्रकार खाशोज्जी सऊदी सरकार के आलोचक थे.
सऊदी अरब का कहना है कि कि खाशोज्जी को देश में वापस लौटने के लिए मनाने के लिए भेजे गए एजेंटों की एक टीम ने उन्हें मार दिया गया था.
लेकिन संयुक्त राष्ट्र के एक अन्वेषक ने निष्कर्ष निकाला है कि खाशोज्जी को "एक जानबूझकर, पूर्व नियोजित साज़िश का शिकार थे".
यूएन ने कहा था कि इस बात के विश्वसनीय सबूत हैं कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान सहित कई वरिष्ठ सऊदी अधिकारी इस साज़िश में शामिल थे.
क्राउन प्रिंस इस हत्या में अपनी किसी भी से इनकार करते रहे हैं.
फ्रांस की पुलिस ने मंगलवार को कहा कि खालिद अलोतैबी के नाम से पासपोर्ट वाले एक सऊदी नागरिक को पेरिस के चार्ल्स डी गॉल हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया था. अलोतैबी उस वक़्त रियाद की उड़ान में सवार होने वाला था.
एयरपोर्ट पर जब उसका पासपोर्ट स्कैन किया गया तो उनके नाम से तुर्की में जारी एक अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट और एक इंटरपोल रेड नोटिस के बारे में विवरण मिला.
फ़्रांस की पुलिस ने कहा कि संदिग्ध का नाम से अलोतैबी के नाम मेल खाता था. गिरफ़्तार व्यक्ति और संदिग्ध दोनों का ही जन्मस्थान और जन्म का महीना भी एक ही था.
बुधवार को पेरिस में मुख्य अभियोजक ने घोषणा की, "इस व्यक्ति की पहचान निर्धारित करने के लिए गहरी जांच हमने पाया है कि इंटरपोल का नोटिस और तुर्की का वारंट. उसके लिए जारी नहीं हुआ था."