तालिबान के प्रवक्ता ने कहा- अफ़गानिस्तान अब इस्लामिक अमीरात है

तालिबान के प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा है कि अफ़गानिस्तान अब आधिकारिक तौर 'इस्लामिक अमीरात ऑफ़ अफ़गानिस्तान' बन गया है.

लाइव कवरेज

सिंधुवासिनी, अपूर्व कृष्ण and मोहम्मद शाहिद

  1. ब्रेकिंग न्यूज़, अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तान विरोधी प्रदर्शन, तालिबान ने हवा में दाग़ी गोलियाँ

    काबुल में बैनर लेकर प्रदर्श करती महिलाएँ जिस पर लिखा है- पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान से बाहर जाओ

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    अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में मौजूद बीबीसी संवाददाता मुदस्सर मलिक ने बताया है कि वहाँ एक जुलूस निकल रहा है जिसमें पाकिस्तान के विरोध में नारे लग रहे हैं.

    काबुल में इस रैली में बड़ी संख्या में महिलाएँ और नौजवान प्रदर्शन कर रहे हैं जो अपने अधिकारों की माँग के साथ-साथ पाकिस्तान विरोधी नारे भी लगा रहे हैं.

    प्रदर्शनकारी वहाँ “अल्लाहो अकबर”, “हम आज़ाद देश चाहते हैं, पाकिस्तान की कठपुतली सरकार नहीं“, “पाकिस्तान बाहर जाओ“ जैसे नारे लगा रहे हैं.

    संवाददाता के मुताबिक़ प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति आवास पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं, मगर तालिबान लड़ाकों ने हवा में गोलियाँ चलाकर उन्हें तितर-बितर करने की कोशिश की है.

    इससे पहले सोमवार देर रात भी सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो पोस्ट किए गए जिनमें काबुल में बड़ी संख्या में लोग पाकिस्तान विरोधी नारे लगा रहे थे.

    वे साथ ही तालिबान का विरोध कर रहे नेशनल रेसिस्टेंस फ़ोर्स ज़िंदाबाद के नारे भी लगा रह थे.

    इस गुट के नेता अहमद मसूद ने सोमवार को एक ऑडियो संदेश में काबुल और मज़ारे शरीफ़ शहरों में महिलाओं के प्रदर्शनों को विरोध का उदाहरण बताया.

    उन्होंने साथ ही अफ़ग़ानिस्तान से बाहर तालिबान विरोधी प्रदर्शनों की भी सराहना की.

    काबुल में हाल के दिनों में कई प्रदर्शन हुए हैं. इनमें कुछ में अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रध्वज को हटाए जाने का विरोध किया गया. तो कई जगह महिलाओं ने बाहर आकर अपने अधिकारों की रक्षा की माँग करते हुए प्रदर्शन किया.

    सोमवार को बल्ख़ प्रांत की राजधानी मज़ारे शरीफ़ में महिलाओं ने ऐसा ही एक प्रदर्शन किया था.

    इस रैली में शामिल एक प्रदर्शनकारी ने बीबीसी की फ़ारसी सेवा से कहा कि रैली शांतिपूर्ण थी, मगर तालिबान के सदस्यों ने उन्हें और एक पत्रकार को जान से मारने की धमकी दी.

    काबुल
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  2. करनाल में महापंचायत के लिए जुट रहे किसान, सरकार ने अपील भी की, चेतावनी भी दी

    किसान

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    केंद्र के तीन नए कृषि क़ानूनों के विरोध में हरियाणा के करनाल में किसानों की प्रस्तावित महापंचायत को देखते हुए सुरक्षा के भारी बंदोबस्त किए गए हैं.

    आंदोलनकारी किसानों के गठबंधन संयुक्त किसान मोर्चा ने आज करनाल में महापंचायत बुलाई है जिसके लिए मोर्चे के नेता राकेश टिकैत और किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी समेत अलग-अलग हिस्सों से किसान करनाल की नई अनाज मंडी में जमा हो रहे हैं.

    हालाँकि राज्य सरकार ने इससे पहले ही करनाल में धारा 144 लगा दी गई है और आधी रात से करनाल समेत चार ज़िलों में इंटरनेट, मोबाइल और एसएमएस सेवाएं बंद कर दी गई हैं.

    प्रशासन ने दिल्ली और चंडीगढ़ से करनाल पहुँचने के रास्तों में बदलाव किए हैं.

    किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा है कि ज़रूरत हुई तो बैरिकेड भी तोड़ा जाएगा.

    किसान महापंचायत

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    करनाल के पुलिस अधीक्षक गंगा राम पुनिया ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि करनाल में अनाज मंडी और आस-पास के क्षेत्र में पुलिस की 40 कंपनियाँ तैनात की गई हैं.

    उन्होंने कहा,“पुलिस इसलिए तैनात की गई है कि क़ानून व्यवस्था बनी रहे और कोई भी गैरक़ानूनी गतिविधि न हो. किसान महापंचायत के दौरान हम बातचीत भी करेंगे और चाहेंगे कि मामले का बातचीत से हल निकले.”

    हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने किसानों से शांतिपूर्ण तरीक़े से सभा करने की अपील की है.

    उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “किसी को भी क़ानून हाथ में नहीं लेने दिया जाएगा. हमारी किसान भाइयों से अपील भी है कि वो अपनी जनसभा करना चाहते हैं तो करें, परन्तु शांतिपूर्ण तरीके से करें.”

    वहीं हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने किसानों से आंदोलन वापस लेने की अपील की है.

    उन्होंने कहा, “अगर किसान शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करते हैं तो किसी को दिक़्क़त नहीं होगी... किसान जत्थेदार और नेताओं से प्रार्थना है कि अभी हरियाणा में आंदोलन की ज़रूरत नहीं है क्योंकि 3 कृषि क़ानून अभी लागू नहीं हैं.”

    करनाल में आंदोलनकारी किसान ने आज मिनी सचिवालय का घेराव करने का भी एलान किया है.

    28 अगस्त को करनाल में एक टोल प्लाज़ा पर प्रदर्शन कर रहे किसानों पर हरियाणा पुलिस ने लाठी चार्ज किया था जिसमें कई प्रदर्शनकारियों को चोट आई थी.

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  3. ब्रेकिंग न्यूज़, महबूबा मुफ़्ती को किया गया नज़रबंद, बोलीं- स्थिति सामान्य होने का दावा 'खोखला'

    महबूबा मुफ़्ती

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    जम्मू कश्मीर में पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की नेता महबूबा मुफ़्ती ने कहा है कि उन्हें घर पर नज़रबंद कर दिया गया है.

    यह जानकारी उन्होंने ट्वीट करके दी है.

    महबूबा मुफ़्ती का कहना है, “भारत सरकार अफ़ग़ानिस्तान के नागरिकों के अधिकारों की बात तो करती है लेकिन कश्मीर के लोगों के अधिकारों की नहीं.”

    जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्य मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि उन्हें राज्य में क़ानून व्यवस्था की स्थिति सामान्य न होने की बात कहते हुए नज़रबंद किया गया है जिससे, उनके मुताबिक़ यह साबित होता है कि राज्य में स्थिति सामान्य होने का दावा कितना “खोखला” है.

    जम्मू कश्मीर में हुर्रियत कॉन्फ़्रेन्स के पूर्व अध्यक्ष और अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की निधन और उनके अंतिम संस्कार के बाद से तनाव की स्थिति बनी हुई है.

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  4. किसान यूपी,पंजाब में विरोध कर रहे, हरियाणा में नहीं क्योंकि वहाँ चुनाव नहींः केंद्रीय मंत्री बालियान

    केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान

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    केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने कहा है कि कृषि क़ानूनों को लेकर किसानों का विरोध अब राजनीतिक हो चुका है और वो उन्हीं राज्यों में रैलियाँ कर रहे हैं जहाँ चुनाव होने वाले हैं.

    उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा,“मामला राजनीतिक हो चुका है. अब वे (किसान) उत्तर प्रदेश और पंजाब में ही रैलियां करेंगे. हरियाणा में चुनाव नहीं हैं इसलिए वहां कम रैलियां होंगी.”

    बालियान ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल विरोध कर रहे किसानों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

    उन्होंने कहा, “चाहे मुज़फ़्फ़रनगर की रैली हो या आनेवाली रैलियाँ हों, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल जैसे विपक्षी दल उनके लिए संसाधन दे रहे हैं. वो किसानों के कंधे का इस्तेमाल करना चाहते हैं.

    “बीजेपी का भविष्य जनता के हाथों में है और जब लोग रैलियों में दूसरे दलों के झंडे देखेंगे तो उन्हें समझ आ जाएगा कि क्या चल रहा है.”

    बालियान ने कहा कि सरकार चाहती है कि किसानों के साथ फिर से बातचीत शुरू हो और क़ानून वापसी की जगह क़ानून में बदलाव पर बात हो.

    उन्होंने कहा, “हम भी चाहते हैं किसानों से बातचीत शुरू हो और किसानों के वास्तविक मुद्दों पर सरकार के सामने चर्चा हो. कानून वापस लेने की बजाय जो संशोधन वे चाहते हैं, वो करवाना चाहिए.”

    उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि विरोध कर रहे किसानों को कुछ ना कुछ हासिल हो.

    केंद्रीय मंत्री ने कहा, “किसान 9 महीने से दिल्ली में है. किसान यहां से कुछ न कुछ लेकर जाए, खाली हाथ न जाए.”

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  5. ‘म्यांमार का लादेन’ कहे जाने वाले बौद्ध भिक्षु को सेना ने किया रिहा

    अशीन विराथु

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    म्यांमार की सैन्य सरकार ने विवादित बौद्ध भिक्षु अशीन विराथु को रिहा कर दिया है. विराथु अपनी राष्ट्रवादी और मुस्लिम विरोधी पहचान के लिए जाने जाते हैं.

    इससे पहले उनके ख़िलाफ़ नागरिक सरकार ने राजद्रोह का मुक़दमा दर्ज किया था. फ़रवरी में हुए सैन्य तख़्तापलट में नागरिक सरकार को हटा दिया गया था.

    फ़ायरब्रांड भिक्षु को अपने सैन्य समर्थित विचारों के लिए भी जाना जाता है.

    मुसलमानों और ख़ासकर रोहिंग्या समुदाय को निशाना बनाकर दिए गए उनके भाषण के कारण उन्हें ‘बुद्धिस्ट बिन लादेन’ भी नाम दिया गया.

    बीते कुछ सालों में वो सैन्य समर्थित रैलियों में नज़र आते रहे हैं जहां उन्होंने राष्ट्रवादी भाषण दिए और म्यांमार की नेता आंग सान सू ची और उनकी तत्कालीन सरकार नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी की आलोचना की.

    पिछले साल नवंबर में किया था सरेंडर

    अशीन विराथु

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    साल 2019 में उन पर नागरिक सरकार के ख़िलाफ़ ‘नफ़रत और अवमानना’ भड़काने का मामला दर्ज किया गया था.

    विराथु इसके बाद फ़रार हो गए थे लेकिन पिछले साल नवंबर में उन्होंने प्रशासन के आगे सरेंडर कर दिया था. इसके बाद से उनके ट्रायल का इंतज़ार था.

    सोमवार को सैन्य सरकार ने कहा कि उनके ख़िलाफ़ सभी दर्ज मामलों को हटा दिया गया है. इन मामलों को क्यों हटाया गया है इसका प्रशासन ने कोई कारण नहीं बताया है.

    सैन्य सरकार ने यह भी कहा है कि उनका सैन्य अस्पताल में इलाज चल रहा है. विराथु के स्वास्थ्य की स्थिति अभी तक साफ़ नहीं हो पाई है.

  6. चीन के शेयर बाज़ारों में मंदी का डर क्या भारत के लिए खुशख़बरी है?

    चीन की अर्थव्यवस्था

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    चीन के शेयर बाज़ार में पिछले कुछ समय में गिरावट आई है, वहीं भारत में बाज़ार आसमान छू रहा है.

    कोरोना महामारी से लड़ती भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ये कैसे बड़ा अवसर साबित हो सकता है.

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  7. तालिबान के इस दौर में बच्चों को कैसे दी जा रही है तालीम

    महिलाएं

    सुबह सात बजे हम काबुल से अफ़ग़ानिस्तान के लोगर प्रांत के लिए रवाना हुए. इस बार पहले की तरह हमारी मेज़बानी तालिबान को करनी थी.

    रास्ते में तीन-चार जगहों पर तालिबान के चेक पोस्ट थे. एक चेक प्वाइंट से गुज़रते हुए एक तालिब (तालिबान से जुड़ा शख़्स) की नज़र मेरे कैमरे पर पड़ी, तो उसने चिल्ला कर पूछा कि 'कैमरा कहाँ लेकर जा रहे हो' लेकिन उतनी देर में हम चेक पोस्ट पार कर चुके थे.

    लोगर अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिण-पूर्व में स्थित है, जहाँ जाने के लिए चमन हज़ूरी और जादाए मियोंद से गुज़रना होता है.

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  8. ब्रेकिंग न्यूज़, कोरोना वायरस संक्रमण के 31 हज़ार से अधिक नए मामले

    महिलाएं

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    भारत में बीते 24 घंटों के दौरान कोरोना वायरस संक्रमण के 31,222 नए मामले पाए गए हैं जबकि इसी दौरान 290 लोगों की मौत हुई है.

    बीते दिन के मुक़ाबले नए मामलों में कमी आई है. सोमवार को तक़रीबन 39 हज़ार नए मामले सामने आए थे. वहीं, बीते 24 घंटों में कोरोना वायरस संक्रमण से 42,942 लोग ठीक भी हुए हैं.

    देश में इस बीमारी के कारण अब तक 4.41 लाख लोगों की मौत हो चुकी है. इसके अलावा देश में कोरोना का टीकाकरण भी तेज़ी से जारी है.

    भारत में अब तक 69 करोड़ से अधिक कोरोन वैक्सीन की ख़ुराक लोगों को दी जा चुकी हैं.

  9. मुस्लिम नेताओं को कट्टरपंथ के ख़िलाफ़ एक स्पष्ट स्टैंड लेना चाहिएः मोहन भागवत

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत

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    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को कहा कि मुस्लिम नेताओं को कट्टरपंथ के ख़िलाफ़ एक स्पष्ट रवैया अपनाना चाहिए.

    मोहन भागवत पुणे की एक संस्था 'ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पॉलिसी फ़ाउंडेशन' की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे.

    इंडियन एक्सप्रेस अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, "ये एक ऐतिहासिक तथ्य है कि भारत में इस्लाम आक्रमणकारियों के साथ आया और ये ज़रूरी है कि इसे इसी तरह से कहा जाना चाहिए. मुस्लिम समाज के समझदार नेताओं को कट्टरपंथ का विरोध करना ही होगा. उन्हें कट्टरपंथी लोगों के ख़िलाफ़ स्पष्ट रूप से बोलने की ज़रूरत है. इस काम में लंबे समय तक काम करने की ज़रूरत पड़ेगी और धीरज रखना होगा. ये हम सब के लिए एक लंबा और मुश्किल इम्तिहान होगा. हम इसे जितना जल्द शुरू करेंगे, समाज को उतना कम नुक़सान होगा."

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  10. COVER STORY: एक अफ़ग़ान युद्ध, चार अमेरिकी राष्ट्रपति

  11. रूसी राजदूत ने कहा- अफ़ग़ानिस्तान से आतंकवाद कश्मीर तक फैल सकता है

    भारत में रूस के राजदूत निकोलाय कुदाशेव

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    अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद भारत में रूस के राजदूत निकोलाय कुदाशेव ने कहा है कि रूस और भारत कीएक ‘साझा चिंता’ है कि अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन आतंकवाद फैलाने के लिए इस्तेमाल नहीं होनी चाहिए.

    उन्होंने कहा कि रूसी क्षेत्र के साथ-साथ कश्मीर में भीआतंक के ‘ख़तरे’ की आशंका है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति को लेकर रूस और भारत की स्थिति में बहुत अधिक अंतर नहीं है.

    हालांकि, उन्होंने यह भी साफ़ किया कि अफ़ग़ानिस्तान में बनने वाली तालिबान की सरकार को मान्यता देना बहुत जल्दबाज़ी होगी. उन्होंने कहा कि तालिबान शासन को मान्यता उसके किए गए कामों के बुनियाद पर मिलेगी.

    उन्होंने कहा कि रूस अफ़ग़ानिस्तान में एक समावेशी सरकार देखना चाहेगा जो सुरक्षा, स्थिरता और पूर्वानुमान को सुनिश्चित कर सके.

    रूसी राजदूत ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान पर भारत और रूस के साथ मिलकर काम करने को लेकर ‘पर्याप्त गुंजाइश’ है और दोनों पक्ष अफ़ग़ानिस्तान की ताज़ा स्थिति को लेकर लगातार संपर्क में हैं.

  12. पंजशीर में ड्रोन से बमबारी करने के आरोपों पर पाकिस्तान की सेना बोली

    पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल बाबर इफ़्तिख़ार

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    फ़रहत जावेद

    बीबीसी उर्दू, इस्लामाबाद

    पंजशीर की लड़ाई में पाकिस्तान के तालिबान की मदद करने के आरोपों पर पाकिस्तान की सेना ने सफ़ाई जारी करते हुए कहा है कि उसका अफ़ग़ानिस्तान में जो कुछ हो रहा है उससे कुछ लेना देना नहीं है.

    पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल बाबर इफ़्तिख़ार ने कहा कि ‘अफ़ग़ानिस्तान के अंदर जो भी हो रहा है उससे पाकिस्तान का कोई संबंध नहीं है, चाहे वो पंजशीर हो या कहीं ओर.’

    बाबर इफ़्तिख़ार से पूछा गया था कि सोशल मीडिया पर पंजशीर में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर बहुत सी अफ़वाहें चल रही हैं इस पर उनका क्या कहना है? जिसके बाद उनका यह जवाब आया है.

    क्या है मामला

    ड्रोन

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    दरअसल सोशल मीडिया पर कई लोगों ने पंजशीर की जंग में पाकिस्तान के शामिल होने का दावा किया था.

    इन्हीं में से एक अफ़ग़ानिस्तान के पत्रकार ताजुद्दीन सरूश ने ट्वीट किया था कि ‘उन्हें पंजशीर के गवर्नर कमालुद्दीन निज़ामी ने कहा है कि पाकिस्तान ने ड्रोन से अफ़ग़ानिस्तान की घाटी पंजशीर में बमबारी की है.’

    हालांकि पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने इसे अफ़वाह क़रार देते हुए कहा कि ‘यह पूरी तरह झूठ और भारत का तर्कहीन प्रोपेगैंडा’ है.

    साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि पाकिस्तान के पास लंबी दूरी तक मार करने वाली ड्रोन टेक्नोलॉजी नहीं है.

    पाकिस्तान के पास लंबी दूरी के ड्रोन हमलों की तकनीक है?

    बीबीसी ने पाकिस्तान की ड्रोन क्षमता पर रिसर्च की और ये समझने की कोशिश की कि क्या पाकिस्तान पंजशीर में ऐसी किसी कार्रवाई की क्षमता रखता है या नहीं.

    पाकिस्तान ने पहली बार मार्च 2015 में घोषणा की थी कि फ़ौज ने ड्रोन का इस्तेमाल करते हुए आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया है.

    पाकिस्तान में तैयार ड्रोन बुर्राक़

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    पाकिस्तान में तैयार किए गए ड्रोन बुर्राक़ और उसी से जुड़ी हुई हवा से ज़मीन पर मार करने वाली लेज़र गाइडेड मिसाइल बर्क़ का लक्ष्य शवाल घाटी में तालिबान का ठिकाना था.

    उस वक़्त के फ़ौजी अधिकारियों ने कहा था कि ख़ैबर एंजेंसी की घाटी में बर्क़ और बुर्राक़ ने ‘बेहद कामयाबी से जंग का पांसा पलट दिया है.’

    शवाल घाटी में होने वाली पहली कार्रवाई में ‘तीन हाई प्रोफ़ाइल आतंकी’ मारे गए थे. उस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान युद्ध के उद्देश्य से ड्रोन टेक्नोलॉजी रखने वाला दुनिया का पाँचवां देश बन गया था.

    बुर्राक़ ड्रोन पाकिस्तान में नेशलन इंजीनियरिंग एंड साइंटिफ़िक कमिशन नेसकॉम ने डिज़ाइन और तैयार किया है जो हवा से ज़मीन पर मार करने वाली लेज़र गाइडेड मिसाइल बर्क़ से लेस है.

    ये जानकारी भी सामने आती रही है कि पाकिस्तान ने मध्यम दूरी तक मार करने वाले ड्रोन हासिल कर लिए हैं जिसमें उसे तुर्की या चीन या दोनों देशों की मदद मिली है.

    हालांकि, फ़ौजी अधिकारियों ने हमेशा इस बात से इनकार किया है और कहा है कि पाकिस्तान के पास लंबी दूरी तक हमले की क्षमता वाले ड्रोन फ़िलहाल मौजूद नहीं हैं.

  13. तालिबान ने पंजशीर में फहराया अपना झंडा, पूरी तरह क़ब्ज़े का किया दावा

    झंडा फहराते हुए तालिबान

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    तालिबान ने अंतिम बचे प्रांत पंजशीर पर भी अब पूरी तरह अपनी जीत का दावा कर दिया है.

    उसने अपने लड़ाकों का सोमवार को झंडा फहराते हुए एक वीडियो ऑनलाइन पोस्ट किया.

    हालांकि, विरोधी बल नेशनल रेसिस्टेंस फ़्रंट (NRF) अभी भी कह रहा है कि वो ‘सभीरणनीतिक जगहों’ पर मौजूद है और ‘लड़ाई जारी रखे हुए है.’

    उनके नेता ने तालिबान के ख़िलाफ़ 'राष्ट्रीय विद्रोह' का आह्वान किया है.

    अहमद मसूद ने जारी किया ऑडियो मैसेज

    अहमद मसूद

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    NRF के प्रमुख नेता अहमद मसूद ने सोशल मीडिया पर एक ऑडियो मैसेज जारी किया है जिसमें उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर तालिबान को वैधता देने के साथ-साथ उन्हें सैन्य और राजनीतिक समर्थन देने का दोषी ठहराया.

    उन्होंने कहा, “आप जहां भी हो, अंदर या बाहर, मैं आपसे हमारे देश की गरिमा, स्वतंत्रता और समृद्धि के लिए राष्ट्रीय विद्रोह का आह्वान करता हूँ.”

    तीन सप्ताह पहले तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान का नियंत्रण अपने क़ब्जे में ले लिया था और 15 अगस्त को राजधानी काबुल भी उनके नियंत्रण में आ गया था और पश्चिम समर्थित सरकार ढह गई थी.

    इससे पहले NRF के प्रवक्ता अली मैसम ने ‘तालिबान के दावों को ख़ारिज करते हुए’ बीबीसी से कहा था कि ‘तालिबान ने पंजशीर पर क़ब्ज़ा नहीं किया है.’

    विरोधी समूह के ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया, “तालिबान और उनके साझेदारों के ख़िलाफ़ संघर्ष जारी है जब तक कि न्याय और स्वतंत्रता की जीत नहीं हो जाती.”

    दूसरी ओर तालिबान प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने एक बयान जारी कर कहा था कि ‘इस जीत से, हमारा देश पूरी तरह युद्ध के दलदल से बाहर आ गया है.’

  14. नमस्कार!

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