क्या ईरान नहीं चाहता था कि कोई अमरीकी सैनिक हताहत हो?
ईरानी सैन्य कमांडर जनरल क़ासिम सुलेमानी की अमरीकी हवाई हमले में हुई मौत का बदला लेने के लिए ईरान ने इराक़ स्थित अमरीकी बेस पर मिसाइल दाग़े. इन हमलों में कोई भी अमरीकी या इराक़ी सैनिक नहीं मारा गया. अब इस बारे में बहस हो रही है कि क्या ईरान जानबूझकर नहीं चाहता था कि इन हमलों में कोई अमरीकी सैनिक मारा जाए. अमरीकी और यूरोप के सरकारी सूत्रों ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया है कि उनको विश्वास है कि ईरान ने जानबूझकर इस तरह से हमला किया है कि कोई अमरीकी सैनिक नहीं मारा जाए. उनके अनुसार ईरान नहीं चाहता है कि मौजूदा संकट कंट्रोल से बाहर हो जाए और उनका इरादा भी पता चल जाए. सीएनएन के पत्रकार जेक टैपर ने पेंटागन के एक सूत्र के हवाले से कहा है कि ईरान ने जानबूझकर ऐसा टारगेट चुना था जिससे कोई जानी नुक़सान न हो. लेकिन बीबीसी रक्षा संवाददाता जोनाथन मार्कस के अनुसार अभी ये साफ़ नहीं है कि ईरान ने ऐसा जानबूझकर किया है या ुउनके मिसाइलों में कोई कमी थी. मार्कस के अनुसार सैटेलाइट तस्वीरों से साफ़ पता चलता है कि अमरीकी बेस में कई इमारतों को नुक़सान पहुंचा है इसलिए अगर जानी नुक़सान नहीं हुआ है तो ये किसी रणनीति का भी हिस्सा हो सकता है और महज़ इत्तेफ़ाक़ भी.