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पुलिस हिंसा में हुई महसा अमीनी की मौत: यूएन फैक्ट फ़ाइंडिंग मिशन

संयुक्त राष्ट्र के एक फैक्ट फ़ाइंडिंग मिशन ने पाया है कि ईरान में महिलाओं के साथ अभी भी बड़े पैमाने पर भेदभाव हो रहा है.

लाइव कवरेज

दीपक मंडल and प्रेरणा

  1. इलेक्टोरल बॉन्ड उनके दफ़्तर में लोग छोड़ गए, किसने दिया ये पता नहीं है: जेडीयू-टीएमसी- प्रेस रिव्यू

  2. ट्रंप ने कहा- इस बार चुनाव नहीं जीता तो पूरे देश में ख़ूनख़राबा होगा

    अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर वो नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव नहीं जीतते हैं तो इसका मतलब ये होगा कि अमेरिका में अब लोकतंत्र ख़त्म हो सकता है.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ आयातित कारों पर टैरिफ लगाने और अमेरिकी वाहन उद्योग को विदेशी प्रतियोगिता से बचाने के विषय पर दिए जा रहे भाषण में अचानक ट्रंप ने कहा,''अगर मैं नहीं जीता तो पूरे देश में ख़ूनख़राबा हो सकता है.''

    ट्रंप ने कहा,''अगर हम चुनाव नहीं जीते तो मुझे नहीं लगता कि देश अब कोई चुनाव नहीं होगा.''

    रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति उम्मीदवार की दौड़ में सबसे आगे चल रहे ट्रंप ने ओहायो में अपने समर्थकों को संबोधन के दौरान ये दावा किया. इससे पहले वो कई बार ये कह चुके हैं कि 2020 में वो चुनाव में धांधली की वजह से जो बाइडन से हार गए थे.

    ट्रंप के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जो बाइडन के चुनाव अभियान के प्रवक्ता जेम्स सिंगर ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति बदला लेने के लिए आतुर है.

    यह उनके अतिवाद को दिखाता है. ट्रंप राजनीतिक हिंसा की धमकी दे रहे हैं. अपने भाषण में ट्रंप ने देश में अवैध प्रवासियों का भी मुद्दा उठाया. हालांकि उन्होंने ब्लैक और हिस्पैनिक मतदाताओं से वोट देने की अपील की.

    दोबारा राष्ट्रपति बनने की कोशिश में जुड़े ट्रंप को सहयोगियों का विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है. पूर्व उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने कहा है कि वो नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप का समर्थन नहीं करेंगे.

    पेंस ने शुक्रवार को कहा इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि मैं इस वर्ष डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन नहीं करूंगा. रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति चुनाव में प्रत्याशी बनने की दौड़ में पेंस भी ट्रंप को चुनौती देने वालों में शामिल थे. लेकिन पिछले वर्ष अक्टूबर में वह पीछे हट गए थे.

  3. भारत के जवाब के बाद चीन ने फिर अरुणाचल प्रदेश पर किया दावा

    चीन की सेना ने एक बार फिर अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा किया है. उसने कहा है कि अरुणाचल प्रदेश चीन का 'आतंरिक हिस्सा' है.

    चीन ने इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र की अरुणाचल दौरे का भी विरोध किया था.

    चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता सीनियर कर्नल चांग शियाओगेंग ने कहा,''शिज़ांग का दक्षिणी हिस्सा चीन का आंतरिक क्षेत्र है. चीन भारत की ओर से अवैध तौर पर स्थापित कथित अरुणाचल प्रदेश का विरोध करता है. हमने अरुणाचल प्रदेश को कभी मान्यता नहीं दी है.''

    चीन का ये बयान भारतीय सेना की ओर से अरुणाचल प्रदेश में सेला टनल के निर्माण के ज़रिये अपनी सैन्य मज़बूती की कोशिश के बाद आया है. चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत मानता है.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 मार्च को अरुणाचल प्रदेश का दौरा कर सेला टनल का उद्घाटन किया था. इस पर चीन ने आपत्ति जताई थी.

    भारत के लिए रणनीतिक तौर पर अहम इस सुरंग के उद्घाटन बाद चीन ने कहा था भारत का ये क़दम सीमा विवाद को और जटिल बना देगा.

    उस दौरान भी चीन ने कहा था कि वह अरुणाचल प्रदेश को कभी मान्यता नहीं दे सकता क्योंकि भारत ने इसे अवैध तरीके से स्थापित किया है.

    चीन की ओर से पीएम मोदी की अरुणाचल प्रदेश की यात्रा पर आपत्ति के जवाब में भारतीय विदेश मंत्रालय ने जवाब दिया था.

    मंत्रालय ने कहा था कि चीन के विरोध से यह हकीकत बदल नहीं जाएगी कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है.

    मंत्रालय ने कहा था अरुणाचल प्रदेश में भारत की विकास परियोजनाओं पर चीन का विरोध बेतुका है.

  4. व्लादिमीर पुतिन पाँचवीं बार बनने जा रहे हैं रूस के राष्ट्रपति

    व्लादिमीर पुतिन ने राष्ट्रपति चुनाव में भारी अंतर से जीत का दावा किया है. इस जीत के बाद रूस के मौजूदा राष्ट्रपति पुतिन पांचवीं बार इस पद की जिम्मेदारी संभालेंगे.

    पुतिन लगातार ये दावा कर रहे थे कि पांचवीं बार भी उनकी जीत होगी. चुनाव नतीजों के बाद जब उन्होंने 87 फ़ीसदी वोट मिलने का दावा किया गया. इस एलान के बाद उन्होंने कहा कि रूस का लोकतंत्र कई पश्चिमी देशों की तुलना में ज़्यादा पारदर्शी है. राष्ट्रपति चुनाव में पुतिन के ख़िलाफ़ खड़े तीन उम्मीदवारों को 'रबर-स्टैम्प' कहा जा रहा था.

    बीबीसी न्यूज़ के मुताबिक़ वास्तव में किसी भी विश्वसनीय विपक्षी नेता को खड़े होने की इजाज़त नहीं दी गई थी. चुनाव नतीजों के एलान के बाद पुतिन के सबसे मुखर आलोचक रहे विपक्षी नेता एलेक्सी नवेलनी के समर्थकों ने सांकेतिक प्रदर्शन किया.

    कई पश्चिमी देशों ने कहा है कि रूस का राष्ट्रपति चुनाव न तो स्वतंत्र था और न पारदर्शी. जर्मनी ने इसे एक अधिनायकवादी नेता के तहत कराया गया 'छद्म चुनाव' करार दिया. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा,''रूसी तानाशाह एक और चुनाव का नाटक कर रहा है.''

  5. नमस्कार!

    आपका दिन शुभ हो बीबीसी हिंदी के लाइव ब्लॉग में आपका स्वागत है.

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