भारत और मालदीव के बीच चल रहे राजनयिक तनाव के बीच बुधवार को
चीनी
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू के साथ बैठक की
और इसके बाद दोनों देशों ने पर्यटन सहयोग सहित 20 "प्रमुख" समझौतों पर
हस्ताक्षर किए गए.
दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और व्यापक करने की घोषणा
की.
इस बैठक को लेकर मुइज़्ज़ू ने कहा कि वह चीन में अपने पहले आधिकारिक
दौरे को लेकर सम्मानित महसूस कर रहे हैं और उन्हें खुशी है कि वो चीन के लिए इस
साल के पहले विदेशी राजनीतिक मेहमान हैं.
मालदीव के राष्ट्रपति कार्यालय ने एक्स पर लिखा, "आज मालदीव सरकार और चीन सरकार
के बीच 20 प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए और ये दोनों राष्ट्रपतियों की
मौजूदगी में हुआ."
जिन समझौतों पर हस्ताक्षर हुए है उसमें टूरिज़्म कोऑपरेशन,, ब्लू इकॉनमी, आपदा प्रबंधन, डिजिटल अर्थव्यवस्था में निवेश को
मजबूत करना शामिल है. इसके साथ ही चीन मालदीव को अनुदान सहायता भी देगा, लेकिन वो रकम कितनी होगी इसकी
जानकारी नहीं दी गयी है.
इसके अलावा समझौतों में चीन के बेल्ट एंड रोड पहल के ज़रिए निर्माण के कामों में तेज़ी लाना , फुशीदिग्गारु
फाल्हू पर आवास परियोजना, फिशरी के उत्पादों के कारखाने
बनाना, माले और विलीमाले में सड़क विकास परियोजनाओं का पुन: विकास करना भी शामिल
है.
चीन की सिन्हुआ न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक़ शी जिनपिंग ने इस
बात पर जोर दिया कि चीन मालदीव का सम्मान और समर्थन करता है और वो मालदीव के राष्ट्रीय
हित में किए जा रहे विकास के एजेंडे में उनकी मदद करेगा. साथ ही चीन राष्ट्रीय
संप्रभुता, स्वतंत्रता, क्षेत्रीय
अखंडता और राष्ट्रीय गरिमा की रक्षा करने में मालदीव के साथ दृढ़ता से खड़ा है.
मुइज़्ज़ू चीन का पांच दिवसीय दौरा ऐसे समय कर रहे
हैं जब भारत और मालदीव के बीच राजनयिक विवाद पैदा हो गया है.
दरअसल बीते दिनों
मालदीव के दो मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ़ आपत्तिजनक टिप्पणी
की. इसके बाद सोमवार को राजनयिक स्तर पर
दोनों देशों के अधिकारियों को तलब किया गया.
भारत में मालदीव के
उच्चायुक्त इब्राहिम साहिब को तलब किया गया. मालदीव में भारत के उच्चायुक्त मुनु
महावर ने माले में एंबेसडर एट लार्ज नसीर मोहम्मद से मुलाक़ात की.
मुइज़्ज़ू सरकार ने तीन डिप्टी मंत्रियों को उनके
सोशल मीडिया पर किए गए अपमानजनक पोस्ट के लिए सस्पेंड कर दिया है.
मंगलवार को मुइज़्ज़ू ने चीन में कहा था कि चीन कोविड
महामारी से पहले मालदीव के पर्यटन के मामले में सबसे बड़ा देश था और उसे वापस ये
जगह लेने की 'कोशिशें तेज़ कर देनी चाहिए.'
इस समय पर्यटन के लिहाज से सबसे ज्यादा भारतीय यात्री मालदीव जाते हैं.