सपा नेता स्वामी
प्रसाद मौर्य के एक बयान को लेकर विवाद शुरू हो गया है.
उन्होंने कहा, ‘हिन्दू धर्म एक धोखा है.’ मौर्य के इस बयान
की आलोचना हो रही है.
एक जनसभा को संबोधित करते हुए मौर्य ने कहा, “हिन्दू धर्म एक धोखा है, वैसे भी 1995 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में
कहा था कि हिन्दू कोई धर्म नहीं, ये लोगों के
जीवन जीने की शैली है.''
वो बोलते हैं, ''यही नहीं जो सबसे बड़े धर्म के ठेकेदार बनते हैं आरएसएस
प्रमुख मोहन भागवत, उन्होंने भी कहा है. एक नहीं दो-दो बार कहा कि हिन्दू नाम का कोई धर्म
नहीं है बल्कि लोगों के जीवन जीने की एक कला है.”
उन्होंने कहा, “देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भी कहा कि हिन्दू धर्म, धर्म नहीं है. लेकिन इन लोगों के कहने से किसी की भावना आहत नहीं होती है. अगर
स्वामी प्रसाद मौर्य कह देते हैं कि हिन्दू धर्म, धर्म नहीं है बल्कि एक धोखा है और जिसे हम हिन्दू धर्म कहते हैं वो कुछ लोगों
के लिए धंधा है. तो पूरे देश में
भूचाल मच जाता है. लेकिन वही चीज अगर मोहन भागवत कहते हैं, नरेंद्र मोदी जी कहते हैं और गडकरी जी कहते हैं तो इनकी भावनाएं आहत नहीं होती."
"यही बात अगर स्वामी प्रसाद मौर्य कहते हैं तो लोगों की भावनाएं इतनी
कमजोर होती हैं कि उनकी भावनाएं आहत हो जाती है.”
इस बयान की आलोचना करते हुए बिहार बीजेपी के नेता सुशील मोदी ने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य को लगता है कि हिंदू धर्म को गाली देने से उन्हें पिछड़ों का वोट मिल जाएगा.
सुशील मोदी ने कहा, “ स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरित मानस के बारे में क्या क्या नहीं कहा. उन्हें लगता है कि हिंदू धर्म को गाली देने से उन्हें पिछड़ों का वोट मिल जाएगा लेकिन वो ये भूल जाते हैं कि वो ज़माना चला गया क्योंकि पिछड़े समाज के जितने लोग राम की पूजा करते होंगे, उतना कोई और नहीं करना होगा. उन्हें अपने बयान के कारण राजनीतिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा.”