उत्तरकाशी सुरंग हादसा: 'हम लोग बस दुआएं मांग सकते हैं... तो मांग रहे हैं...', उत्तरकाशी से बीबीसी संवाददाता अनंत झणाणे और सहयोगी पत्रकार आसिफ़ अली

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उत्तरकाशी के सिल्क्यारा गाँव में सुरंग में फंसे हुए 41 मज़दूरों के कुछ परिवार वाले भी आस पास के होटलों में रुके हुए हैं और परिवार वाले समय-समय पर सुरंग में जाकर अपनों से मिलने जाते हैं और उनके हाल चाल पूछते हैं.
33 साल के सबा अहमद सिल्क्यारा में सीनियर फोरमैन का काम करते हैं. सुरंग में वो भी फंसे हैं. उनके चचेरे भाई नय्यर अहमद और परिवार के दो अन्य परिवार के सदस्य बिहार के भोजपुर ज़िले से उत्तरकाशी पहुंचे हैं.
वो भी खुद ही इस टनल प्रोजेक्ट में कंपनी नवयुग इंजीनियरिंग कंस्ट्रक्शन के लिए काम कर चुके हैं. वो कहते हैं कि मैं यहाँ "सेफ्टी" में काम करता था. लेकिन बताते हैं कि अब वो दूसरी जगह किसी और कंपनी में काम करते हैं.
नय्यर अहमद कहते हैं, "सबको (फंसे हुए मज़दूरों को) संभालने वाला मेरा ही भाई है. अगर आपने टनल से मज़दूरों के वीडियो देखे हैं तो उसमें सबसे आगे मेरे भाई सबा अहमद ही दिख रहे हैं."
उन्हें सुरंग में भूस्खलन की ख़बर उनके भाई सबा के साथ काम करने वाले राहुल तिवारी ने फोन करके दी. वो कहते हैं, "हमें यहाँ पर कोई दिक्कत नहीं है. हमारी तो रोज़ बात होती है. सुबह शाम, जब हमारा मन चाहे हम बात करने अंदर जाते हैं."
नय्यर अपने भाई सबा की बात बिहार में अम्मी अब्बू और घर के दूसरे सदस्यों से भी बात करवाते हैं. नय्यर के मुताबिक़ सबा ने उनसे कहा, "चाहे हमें बाहर निकालने में एक दिन लगे या दो दिन, लेकिन हमें सुरक्षित निकालें. हमें अंदर कोई दिक्कत नहीं है."
नय्यर कहते हैं, "राहत टीम और कंपनी के जो लोग हैं वो अपना काम कर रहे हैं. हम लोग बस दुआएं मांग सकते हैं... तो मांग रहे हैं."
वो राहत कामों से संतुष्ट नज़र आते हैं और कहते हैं, "फिलहाल हम लोग सिर्फ़ इंतज़ार कर सकते हैं और ऊपर वाले से दुआ कर सकते हैं कि जल्द से जल्द हमारे भाई हमारे साथ हों."









