दाऊदी बोहरा मुसलमानों के धर्मगुरु डॉक्टर सैय्यदना मुफ़द्दल सैफ़ुद्दीन को पाकिस्तान ने अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'निशान-ए-पाक' देने का एलान किया गया है.
इस्लाम के दाऊदी बोहरा पंथ को मानने वाले ज़्यादातर लोग मुबंई में रहते हैं.
डॉक्टर सैय्यदना मुफ़द्दल सैफ़ुद्दीन चौथे ऐसे भारतीय होंगे जिन्हें पाकिस्तान 'निशान-ए-पाक' सम्मान देगा.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ़ अल्वी के कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि डॉक्टर सैय्यदना मुफ़द्दल सैफ़ुद्दीन के योगदान की वजह से उन्हें ये सम्मान देने का एलान किया गया है.
हालांकि सम्मान समारोह का आयोजन किस दिन किया जाएगा, इसके बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी गई है.
पाकिस्तान में 'निशान-ए-पाक' सम्मान को देश के सर्वोच्च सैनिक सम्मान 'निशान-ए-हैदर' के बराबर माना जाता है.
मोरारजी देसाई पहले भारतीय थे जिन्हें साल 1990 में 'निशान-ए-पाकिस्तान' सम्मान दिया गया था. उनके बाद साल 1998 में दिलीप कुमार को और साल 2020 में कश्मीरी अलगाववादी नेता अली गिलानी को ये सम्मान दिया गया था.
कौन हैं डॉ सैय्यदना मुफ़द्दल सैफ़ुद्दीन?
डॉक्टर सैय्यदना मुफ़द्दल सैफ़ुद्दीन दाऊदी बोहरा समुदाय के सर्वोच्च धर्मगुरु हैं. इस समुदाय की विरासत फ़ातिमी इमामों से जुड़ी है जिन्हें पैग़ंबर हज़रत मोहम्मद (570-632) का वंशज माना जाता है.
यह समुदाय मुख्य रूप से इमामों के प्रति ही अपना अक़ीदा (श्रद्धा) रखता है. दाऊदी बोहराओं के 21वें और अंतिम इमाम तैय्यब अबुल क़ासिम थे.
उनके बाद 1132 से आध्यात्मिक गुरुओं की परंपरा शुरू हो गई जो दाई-अल-मुतलक़ सैयदना कहलाते हैं. दाई-अल-मुतलक़ का मतलब होता है - समुदाय का सर्वोच्च नेता.
उनको अपना अध्यात्मिक गुरु मानने वाले लोग भारत के अलावा दुनिया के कई देशों में हैं, बोहरा समुदाय के एक प्रवक्ता का कहना है कि "वे अपने मानने वालों को शांति, सदभाव और देशभक्ति का संदेश देते हैं."
सैय्यदना मुंबई में विशाल 'सैफ़ी महल' में रहते हैं, बताया जाता है कि दाई अल मुतलक की नियुक्ति मौजूदा सर्वोच्च नेता 'ईश्वरीय परामर्श' से करता है.
मौजूदा शीर्ष नेता के पिता भी बोहरा समुदाय के सर्वोच्च नेता थे. डॉक्टर सैफ़ुद्दीन जिस समुदाय के धार्मिक नेता हैं, उसे आम तौर पर पढ़ा-लिखा, मेहनती, कारोबारी और समृद्ध माना जाता है.