ऑस्ट्रेलिया की ओर से दिए गए 368 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तान की पूरी टीम 305 रन ही बना सकी.
लाइव कवरेज
स्नेहा and संदीप राय
हर मिनट रफ़ाह क्रॉसिंग पर बम गिर रहे हैं- राहतकर्मी
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इसराइल-हमास संघर्ष के बीच ग़ज़ा के लोगों को मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए अब भी रफ़ाह क्रॉसिंग नहीं खुला है.
रफ़ाह क्रॉसिंग की सड़क ख़राब है और यहां इसकी मरम्मत जारी है.
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने मिस्र और अमेरिका के बीच रफ़ाह क्रॉसिंग से 20 ट्रकों को भेजे जाने की सहमति बनने की घोषणा की थी.
उन्होंने ये भी कहा था कि सड़क में गड्ढे होने की वजह से पहले इसकी मरम्मत होगी और ग़ज़ा के लोगों तक मानवीय सहायता शुक्रवार से पहले तो नहीं पहुंच पाएगी.
इसी बीच मिस्र फूड बैंक के चीफ़ एग्जीक्यूटिव मोहसिन सरहान ने बीबीसी को बताया कि अगर रफ़ाह क्रॉसिंग पर बमबारी जारी रही तो सहायता पहुंचाने में बाधा आएगी.
उन्होंने बीबीसी के न्यूज़डे प्रोग्राम को बताया, "इसराइल की सेना की तरफ़ से बमबारी हो रही है और हम अंदर नहीं जा पा रहे हैं. हम पिछले आठ दिन से सीमा पर हैं और हर मिनट यहां बमबारी हो रही है. वे एक निर्जन स्थान पर बमबारी कर रहे हैं, जहां न तो जानवर है और न इंसान."
राहुल गांधी ने चुनावी सभा में जवाहरलाल नेहरू-इंदिरा गांधी को याद किया
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी तेलंगाना में चुनावी यात्रा कर रहे हैं. शुक्रवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कई वादे किए और अपनी दादी से लेकर जवाहरलाल नेहरू तक को याद किया.
उन्होंने कहा, "मेरा आपके साथ राजनीतिक रिश्ता नहीं है. मेरा आपके साथ मोहब्बत का रिश्ता है, पारिवारिक रिश्ता है और ये रिश्ता मेरे साथ शुरू नहीं हुआ. ये रिश्ता सालों पुराना है... ये इंदिरा गांधी जी का, राजीव गांधी जी का, सोनिया गांधी जी का, जवाहरलाल नेहरू का रिश्ता है. मुझे यहां आकर बहुत खुशी होती है."
राहुल गांधी ने कहा कि तेलंगाना में बीजेपी और एआईएमआईएम, बीआरएस (तेलंगाना की सत्तारूढ़ पार्टी भारत राष्ट्र समिति) की मदद करती हैं.
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उन्होंने कहा, "बीजेपी-बीआरएस और एआईएमआईएम एक हैं. ये एक साथ काम करते हैं. दिल्ली में बीआरएस, बीजेपी की मदद करती है. लोकसभा में बीआरएस, बीजेपी को पूरा समर्थन देती है. तेलंगाना में बीजेपी और एआईएमआईएम, बीआरएस को मदद करते हैं."
राहुल गांधी ने कहा कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद बिहार की तरह जातिगत सर्वे करवाया जाएगा.
वर्ल्ड कप: हार्दिक पांड्या चोट की वजह से न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ मैदान में नहीं उतरेंगे
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भारतीय क्रिकेट टीम के उप कप्तान हार्दिक पांड्या टखने में लगी चोट की वजह से धर्मशाला में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ मैदान पर नहीं उतर पाएंगे.
बीसीसीआई ने ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या को लेकर हेल्थ बुलेटिन जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि स्कैन के बाद उन्हें डॉक्टरों ने आराम करने की सलाह दी है.
वो बीसीसीआई मेडिकल टीम की निगरानी में हैं और 20 अक्टूबर को धर्मशाला जा रही टीम के साथ रवाना नहीं होंगे.
बीसीसीआई ने बताया है कि अब वो सीधे इंग्लैंड के ख़िलाफ़ लखनऊ में टीम में शामिल होंगे.
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कैसी लगी चोट
बांग्लादेश के ख़िलाफ़ मैच के 9वें ओवर में रोहित शर्मा ने हार्दिक पांड्या को गेंद थमाई थी. उनके सामने लिटन दास बल्लेबाज़ी कर रहे थे.
पहली गेंद पर कोई रन नहीं बना. दूसरी गेंद पर लिटन दास ने कवर की दिशा में चौका जमाया.
तीसरी गेंद को लिटन ने स्ट्रेट ड्राइव के लिए खेला और फिर चौका जड़ा.
इसी गेंद को रोकने की कोशिश में पांड्या चोटिल हो गए. हार्दिक ने लिटन की इस स्ट्रेट ड्राइव पर गेंद को अपने जूते से रोकने की कोशिश की लेकिन ऐसा लगा कि उनका टखना मुड़ गया.
मैदान में फ़िजियो आए और थोड़ी देर की कोशिश के बाद हार्दिक उठ खड़े हुए. उन्होंने चलने की कुछ कोशिश की लेकिन लंगड़ाते हुए दिखाई दिए. कुछ देर बाद ही वे मुश्किलों से लंगड़ाते हुए मैदान के बाहर चले गए.
इस ओवर की बाकी बची तीन गेंदें विराट कोहली ने डाली.
इराक में अमेरिकी सुरक्षा बल पर ड्रोन से हमले की ख़बर
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इराक में अमेरिकी सैनिकों को रखने वाले एक इराकी सैन्य अड्डे पर रॉकेट और ड्रोन से हमले हुए हैं.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सुरक्षा सोर्सेज के हवाले से जानकारी दी है कि आइन अल-असद एयरबेस के भीतर कई विस्फ़ोट की आवाजें सुनी गई हैं और इराकी सेना ने तलाश अभियान शुरू कर दिया है.
अभी इस हमले में किसी के घायल होने या मौत के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है.
पेंटागन ने इससे पहले बताया था कि मंगलवार से इराक और सीरिया में अमेरिकी सुरक्षा बलों पर ड्रोन से कई हमले हुए हैं.
पेंटागन प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल पैट राइडर ने कहा, " इस तरह के हमले ईरान समर्थित मिलिशिया करते रहे हैं लेकिन अभी इसकी जांच जारी है और जानकारियां जुटाई जा रही हैं."
रैपिडएक्स ट्रेन 'नमो भारत' को पीएम मोदी ने दिखाई हरी झंडी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर का उद्धघाटन किया.
उन्होंने साहिबाबाद को दुहाई डिपो से जोड़ने वाली पहली रैपिडएक्स ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाई, जिसका नाम नमो भारत रखा गया है.
इस दौरान उनके साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्य की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी मौजूद थे.
शनिवार, 21 अक्टूबर से यह आम लोगों के लिए शुरू हो जाएगा. पहले चरण में नमो भारत ट्रेन गाजियाबाद के साहिबाबाद से दुहाई डिपो के बीच चलेगी. पहले फेज में साहिबाबाद, गाजियाबाद, गुलधर, दुहाई और दुहाई डिपो स्टेशन शुरू किए गए हैं.
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पूरी तरह से ऑपरेशनल होने के बाद रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक होगी. साहिबाबाद से दुहाई डिपो के बीच 17 किलोमीटर की दूरी को यह ट्रेन 15 से 17 मिनट में पूरी करेगी.
फिलहाल हर पंद्रह मिनट पर ट्रेन की फ्रीक्वेंसी रखी गई है. ट्रेन हर स्टेशन पर 30 सेकेंड के लिए रुकेगी.
लेबनान की सीमा के नजदीक रह रहे नागरिकों को बाहर निकाल रहा इसराइल
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इसराइल की सेना ने बताया है कि वो लेबनान से लगती अपनी सीमा के इलाके से लोगों को बाहर निकाल रही है.
इसराइल के रक्षा मंत्री योव गलांट ने किरयात शमोना शहर के मेयर को भी ये संदेश दिया है.
यहां के लोगों को सरकारी गेस्ट हाउस में ले जाया जा रहा है. इस शहर में करीब 23,000 लोग रहते हैं और इलाके में लेबनान के चरमपंथी समूह हिज़बुल्लाह और इसराइली सेना के बीच संघर्ष चल रहा है. पिछले कुछ दिनों में यहां रॉकेट भी गिरे हैं.
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आईडीएफ़ ने सोमवार को ही घोषणा की थी कि वो एक इमरजेंसी योजना पर काम कर रही है, जिसके तहत लेबनान से लगती सीमा के दो किलोमीटर के दायरे में रह रहे लोगों को बाहर निकाला जाएगा और उन्हें सरकारी गेस्ट हाउस में भेज दिया जाएगा.
इसराइल-हमास संघर्ष के बीच अमेरिका ने भूमध्यसागर में तैनात किए युद्धपोत, बताया क्या है मकसद
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अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने इसराइल-हमास संघर्ष के बीच संयुक्त अरब अमीरात, कतर, सऊदी अरब और इसराइल के आला अधिकारियों से बात की है.
पेंटागन के एक प्रवक्ता जनरल पैट्रिक एस राइडर ने बताया, "बातचीत के दौरान उन्होंने इसराइल को आतंकवादी हमले से अपनी रक्षा करने के अधिकार को दोहराया और फ़लस्तीनी और इसराइली नागरिकों की सुरक्षा पर भी बात हुई."
अमेरिकी युद्धपोत की तैनाती के बारे में राइडर ने कहा कि इसराइल और हमास के बीच संघर्ष चल रहा है और अमेरिका ये सुनिश्चित करना चाहता है कि इसका लाभ उठाकर कोई और समूह या सरकार हमले न शुरू करे.
अमेरिका का युद्धपोत यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड कैरियर स्ट्राइक ग्रुप अभी पूर्वी भूमध्यसागर में है. वहीं इसका साथ देने के लिए यूएसएस ड्वाइट डी आइज़नहावर कैरियर स्ट्राइक ग्रुप अटलांटिक सागर पार कर रहा है.
राइडर ने ये भी पुष्टि की है कि अमेरिकी वायुसेना ने भी इलाक़े में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है.
राइडर ने कहा कि इन युद्धपोतों के ज़रिए अमेरिका ये संदेश देना चाहता है कि ये संघर्ष आगे न फैले और क्षेत्र में स्थिरता बने.
कनाडा ने भारत से अपने 41 राजनयिकों को वापस बुलाया
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कनाडा और भारत के बीच जारी कूटनीतिक विवाद में अब कनाडा ने भारत से अपने 41 राजनयिक को वापिस बुला लिया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, भारत के कनाडा के कुछ राजनयिकों की सुरक्षा वापस लेने की बात करने के बाद कनाडा में 41 राजनयिकों को वापस बुला लिया है.
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, कनाडा की विदेश मंत्री मेलानी जोली ने कहा है, "अभी के लिए मैं इसकी पुष्टि कर सकती हूं कि भारत ने औपचारिक तौर पर 21 कनाडाई राजनयिकों को छोड़कर बाकी सभी की राजनयिक सुरक्षा हटाने की बात कही थी."
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मेलानी जोली ने कहा, "इसका मतलब है कि भारत में काम कर रहे कनाडा के 41 राजनयिक और उनके परिवार के 42 लोगों की राजनयिक सुरक्षा ख़त्म हो जाएगी और इससे उनकी निजी सुरक्षा को लेकर ख़तरा पैदा हो सकता है."
"कनाडा के लोगों को ये चिंता होगी कि इससे भारत में दूतावास के काम पर क्या असर पड़ेगा."
उन्होंने कहा कि भारत के फ़ैसले से दोनों मुल्कों के दूतावासों के कामकाज के स्तर पर असर नहीं पड़ेगा. ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि चंडीगढ़, मुंबई और बेंगलुरु में मौजूद कनाडा के कंसुलेट्स में कुछ सेवाओं अभी रोक दी गई है.
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इसराइल और यूक्रेन को कितनी मदद दे रहा है अमेरिका?
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अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि इसराइल को अरबों डॉलर की सैन्य सहायता देने के लिए वो संसद में शुक्रवार को अपील करेंगे. लेकिन इसके साथ उन्होंने ये भी जोड़ा कि अमेरिका शांति या दो-राष्ट्र समाधान की कोशिशों से पीछे नहीं हटेगा.
बाइडन ने व्हाइट हाउस से अमेरिकी लोगों को किए अपने संबोधन में कहा कि हमास ने नृशंस अपराध किए लेकिन उसके इस कृत्य की वजह से फ़लस्तीनी लोगों के 'आत्म सम्मान' का अधिकार नहीं चला जाता है.
उन्होंने इसराइली नेताओं से अपील की है कि वो 9/11 (अमेरिका पर 11 सितंबर, 2001) के हमले के बाद की अमेरिकी गलतियों से सीख लें.
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इसराइल और यूक्रेन को अमेरिकी मदद
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका इसराइल को बड़ी मदद देता रहा है.
अमेरिकी संसद के एक पब्लिक पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट 'कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस' के अनुसार, अमेरिका ने अब तक इसराइल को द्विपक्षीय मदद और सैन्य फंडिंग के रूप में 158 अरब डॉलर की सहायता पहुंचाई है.
2023 में अमेरिका ने इसराइल के लिए 3.8 अरब डॉलर सेन्य सहायता की घोषणा की है.
ये पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में 10 साल के लिए हुए समझौते के तहत है जिसके अनुसार अमेरिका को इसराइल को 2019 से 2028 के बीच 38 अरब डॉलर की सैन्य मदद देनी है.
वहीं, यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक जो बाइडन प्रशासन और अमेरिकी संसद ने यूक्रेन को 75अरब डॉलर की सहायता दी है, जिसमें मानवीय, वित्तीय और सैन्य सहायता शामिल है. इसका 60 फ़ीसदी हिस्सा सैन्य सहायता के लिए है.
ये आंकड़ा जर्मनी के एक रिसर्च इंस्टीट्यूट 'काइल इंस्टीट्यूट' से मिले हैं.
इसराइल-हमास: अरब देशों की नाराज़गी से क्या बढ़ेगा संघर्ष का दायरा?
वीडियो कैप्शन, अरब देशों के गुस्से के साथ क्या बढ़ रहा है इस संघर्ष का दायरा?
हमास और इसराइल के बीच सात अक्तूबर से शुरू हुए संघर्ष का दायरा, हर दिन व्यापक होता जा रहा है और इसके साथ ही ग़ज़ा में गहराता जा रहा है मानवीय संकट, जहां राहत सामग्री पहुंचाने की कोशिशें जारी हैं.
लेकिन इसराइल के ख़िलाफ़ अरब देशों का गुस्सा बढ़ रहा है, जिससे मौजूदा संघर्ष का दायरा बढ़ने की आशंका बढ़ती जा रही है.
इसराइल-ग़ज़ा संघर्ष: सऊदी क्राउन प्रिंस और यूएन महासचिव के बीच क्या हुई बात?
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सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने गुरुवार को फ़ोन पर बातचीत की है.
दोनों के बीच इसराइल-हमास और ग़ज़ा में लगातार बिगड़ते हालात पर चर्चा हुई.
बातचीत के दौरान क्राउन प्रिंस सलमान ने इस बात पर जोर दिया कि इस संघर्ष का असर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पड़ सकता है इसलिए इसे रोकने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों में तेज़ी लाई जानी चाहिए.
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बातचीत के दौरान क्राउन प्रिंस ने फ़लस्तीनी लोगों के वैध अधिकारों की गारंटी के साथ शांति प्रक्रिया आगे बढ़ाने और शांति बहाली की जरूरत पर जोर दिया.
उस दौरान संघर्ष को रोकने में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर भी चर्चा हुई ताकि ग़ज़ा के लोगों को मानवीय गलियारे के जरिए मेडिकल और जरूरी चीज़ों की आपूर्ति की जा सके.
इसराइल के रक्षा मंत्री के बयान के बाद हमास के पूर्व प्रमुख ने ये कहा
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हमास के पूर्व प्रमुख खालिद मशाल ने कहा कि इसराइल से बंधक बनाकर लाए गए लोगों में कई सैनिक हैं.
उन्होंने कहा कि इसराइल की जेलों में बंद फ़लस्तीनी कैदियों को छुड़ाने पर बातचीत करने के लिए ये काफी हैं.
इससे पहले इसराइल के रक्षा मंत्री योव गलांट ने ग़ज़ा की सीमा पर जमा हुए सैनिकों से कहा था कि वो जल्द ही ग़ज़ा के भीतर जाकर देखेंगे. योव गलांट ने कहा था, "जल्द आदेश आएगा."
इसी बीच इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी सैनिकों से कहा है, " हम जीतेंगे."
इसराइल से लौटने के बाद बाइडन ने किया अमेरिकी लोगों को संबोधित, क्या-क्या बातें कहीं
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने इसराइल से लौटने के बाद व्हाइट हाउस से देश को संबोधित किया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में इसराइल-हमास का ज़िक्र करते हुए हमास की तुलना रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से की है.
उन्होंने कहा, "हमास और पुतिन से अलग-अलग तरह के ख़तरे हैं लेकिन उन दोनों में एक सामान्य बात भी है- दोनों ही पड़ोस में लोकतंत्र को ख़त्म कर देना चाहते हैं."
बाइडन ने अमेरिकी लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें (जनता को) ये लग सकता है कि ये दोनों ही युद्ध एकदूसरे से बहुत दूर लड़े जा रहे हैं तो फिर ये उनके लिए क्यों मायने रखता है? ये सवाल पूछना सामान्य है.
बाइडन ने कहा, "इसराइल और यूक्रेन का सफल होना अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है. अगर हमने पुतिन की और अधिक शक्ति की भूख को रोका नहीं तो वो सिर्फ़ यूक्रेन तक नहीं रुकेंगे. एक ऐसा समय है, जिसमें हम आज जो फ़ैसला करेंगे उससे आने वाले दशकों का भविष्य तय होगा."
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'अमेरिका अब भी दुनिया में प्रकाश स्तंभ'
उन्होंने इसराइल की यात्रा के दौरान फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास के हमले के पीड़ित लोगों से मुलाकात की है.
उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति के तौर पर मेरे लिए बंधक बनाए गए अमेरिकियों की सुरक्षा से बढ़कर कुछ भी नहीं है.
उन्होंने इसराइल-हमास संघर्ष में दोनों ही तरफ़ के आम लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई है."
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "ग़ज़ा के अस्पताल पर हमले में हुई मौतों से मैं बेहद दुखी हूं, ये हमला इसराइल ने नहीं किया है."
मिडिल ईस्ट को लेकर उन्होंने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी "मध्य पूर्व के के बेहतर भविष्य के लिए काम कर रहे हैं."
बाइडन ने इस दौरान यूक्रेन युद्ध का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यूक्रेन और इसराइल की "मदद नहीं करना सही नहीं होगा."
उन्होंने अपना भाषण ख़त्म करते हुए कहा कि अमेरिका पहले भी दुनिया के लिए प्रकाश स्तंभ की तरह था और अब भी ऐसा है.
नमस्कार!
आपका दिन शुभ हो.
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