छह अरब डॉलर की डील के बाद ईरान ने छोड़े पाँच अमेरिकी क़ैदी, सभी क़तर पहुंचे
ईरान में सालों तक जेल में बंद रहने वाले पाँच अमेरिकी रिहा हो गए हैं. ये पाँचों कै़दी ईरान की बदनाम एविन जेल में बंद थे.
दरअसल,राजनीतिक विरोधियों और आलोचकों को इस जेल में बंद किया जाता रहा है. इसलिए इस जेल को 'एविन यूनिवर्सिटी' भी कहा जाता है.
सूत्रों के अनुसार, इन पाँच अमेरिकियों को ईरान में मौजूद क़तर के विमान तक पहुंचाया गया. इन क़ैदियों के दोहा पहुंचने की तस्वीरें भी सामने आई हैं.
ये रिहाई उस सौदे के तहत हुई है, जिसमें अमेरिकी जेलों में बंद पाँच ईरानी नागरिकों को भी छोड़ा जाना है.
अमेरिका और ईरान के बीच क़ैदियों की इस जटिल अदला-बदली में क़तर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है. ये समझौता काफ़ी विवादास्पद और जटिल माना जा रहा है.
जिन पाँच अमेरिकी क़ैदियों को रिहा किया गया है उनमें 51 वर्षीय सियामक नमाज़ी, 58 वर्षीय एमाद शार्गी, 67 वर्षीय मुराद तहबाज़, 51 वर्षीय अहमदरेज़ा जलाली और 68 वर्षीय नाहिद तघावी शामिल हैं.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स को मामले के जानकार कुछ अधिकारियों ने बताया है कि पाँचों अमेरिकियों को पहले तेहरान एयरपोर्ट से क़तर रवाना किया गया. इन सबका स्वास्थ्य अच्छा है.
इस डील को पूरा होने में एक साल लगा. साथ ही अमेरिका को दक्षिण कोरिया को तेल बेचने से हुए ईरान की 6 अरब डॉलर की आमदनी भी वापस देने पर सहमत होना पड़ा.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, ये पैसे अब क़तर के ख़ातों में डाल दिए गए हैं.
क़तर ने वॉशिंगटन और तेहरान को पुष्टि कर दी है कि 6 अरब डॉलर का फंडे दक्षिण कोरियाई बैंकों से दोहा के बैंकों में ट्रांसफ़र कर दिए गए हैं.
हालांकि, ये पैसे पहले दक्षिण कोरिया से स्विस बैंक में भेजे गए और यहाँ इन्हें यूरो में कनवर्ट बदला गया. इसके बाद इन्हें क़तर के बैंकों में भेजा गया.
दरअसल, ये पैसे ईरान ने दक्षिण कोरिया को तेल बेचकर कमाए थे. ईरान इन पैसों को अपनी मर्ज़ी से इस्तेमाल करने का दावा करता रहा है.
लेकिन बातचीत का हिस्सा रहे एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया है कि ये पैसे केवल खाना और दवाओं जैसे तीसरे पक्ष के ज़रिए खाने और दवाइयों जैसी गै़र-प्रतिबंधित चीज़ों को ख़रीदने में कर सकता है.
अमेरिकी ब्रॉडकास्टर एनबीसी के अनुसार पिछले सप्ताह ही ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने कहा था कि इस सौदे से मिलने वाले धन पर पूरी तरह से ईरान का अधिकार है.
उन्होंने कहा, "पैसों को अमेरिका ने ग़लत तरीके से फ़्रीज़ किया. हमारा मानना है कि शुरुआत से ही अमेरिका की कार्रवाई बेहद अनुचित थी."
वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने पिछले सप्ताह कांग्रेस को बताया था कि सौदे के तहत दिए जा रहे पैसों से ईरान को 'बहुत कम' फ़ायदा पहुँचेगा, क्योंकि इसका इस्तेमाल सिर्फ़ मानवीय सहायता वाले कामों पर हो सकता है.
ईरान ने क्या कहा?
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नासिर कनान ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान बताया कि पाँच अमेरिकी नागरिकों को आज ईरान रिहा कर रहा है और बदले में अमेरिकी जेलों में बंद पाँच ईरानियों को भी रिहा किया जाएगा.
अमेरिका ने किया स्वागत
अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने क़ैदियों की रिहाई पर कहा, "इसका मतलह है कि एक बार फिर से पति अपनी पत्नी से, पिता अपने बच्चों से, बुज़ुर्ग अपने नाती-पोतों को गले लगा सकेंगे."
डील को मुक़म्मल बनाने में मदद करने वालों के लिए ब्लिंकन ने कहा, "इस दिन के लिए मैं एहसानमंद हूं."
उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रशासन में दुनियाभर में ग़लत तरीके से जेल में बंद किए गए 30 अमेरिकियों को स्वदेश वापसी हुई है.
ब्लिंकन ने कहा, "मेरी कोई दूसरी प्राथमिकता नहीं है, राष्ट्रपति जो बाइडन की भी कोई और प्राथमिकता नहीं है. हम सिर्फ़ ये सुनिश्चित करना चाहते हैं कि ग़लत तरीके से दुनिया में कहीं भी हिरासत में लिए गए अमेरिकी घर वापस आ सकें."
कैसे हुई डील?
क़तर की मध्यस्थता से परोक्ष बातचीत के ज़रिए फ़रवरी 2022 में इस सौदे की शुरुआत हुई.
बीबीसी को बातचीत से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि दोहा में अलग-अलग होटलों में ठहरे अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों से कम से कम नौ दौर की वार्ता हुई.
क़तर के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी तेहरान और वॉशिंगटन के चक्कर काटे.
कैदियों को छुड़वाने की इस डील के बारे में सबसे पहले 10 अगस्त को पता चला. जब अमेरिका ने दक्षिण कोरिया के बैंकों में ईरान के 6 अरब डॉलर के फंड को क़तर के खातों में डालने पर हामी भरी.