लीबिया की भीषण बाढ़: अधिकारियों पर लग रहे कोताही बरतने के आरोप
- Author, मैट मर्फ़ी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पूर्वी लीबिया में अचानक आई बाढ़ के पांच दिन बाद भी यहां राहत कार्य धीमी गति से चल रहा है. यहां स्थानीय लोगों की मदद के लिए और राहत कार्य के लिए आ रही अंतरराष्ट्रीय मदद अपेक्षा से काफी कम है.
बीबीसी टीम का कहना है कि बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित देरना में बिजली नहीं है और यहां स्थानीय लोग पिक-अप ट्रकों और कुछ मशीनों के ज़रिए लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं.
बाढ़ से बच गए लोगों का कहना है कि इस शहर का एक बड़ा हिस्सा बाढ़ से पूरी तरह नष्ट हो गया है और लोगों को खुले में सोने को मजबूर होना पड़ रहा है. न तो यहां बिजली की सुविधा बहाल की जा सकी है और न ही ज़रूरत के हिसाब से पीने के पानी की सुविधा है.
मानवीय राहत के काम में जुटे संगठनों का कहना है कि क्षतिग्रस्त सड़कों और ढांचागत सुविधाओं के अभाव में यहां पहुंचना मुश्किल हो रहा है.
बीबीसी की टीम का कहना है कि देरना में अभी ज़रूरत के हिसाब से मानवीय मदद नहीं पहुंची है.
कहा ये भी जा रहा है कि यहां की राजनीतिक स्थिति के कारण भी ये जगह बेहद उपेक्षित रही है, जिस कारण राहत एजेंसियों के लिए यहां पहुंचना मुश्किल हो रहा है.
पूर्वी लीबिया में अधिकारियों पर आरोप लगाया जा रहा है कि लोगों से घरों से बाहर न निकलने के लिए कहा गया था, इसी कारण यहां अधिक मौतें हुईं.
बेन्गाज़ी में मौजूद सरकार के एक प्रवक्ता उत्मन अब्दुल जलील ने इन आरोपों का खंडन किया है और सेना ने बीबीसी से कहा कि सेना ने देरना में लोगों से यहां से निकलने को कहा था.
हालांकि उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से लोगों से जगह खाली न करने को लेकर कुछ नहीं कहा गया था लेकिन कुछ लोगों को लगा अधिकारी बढ़ाचढ़ा कर बातें कर रहे हैं.
अब तक मिल रही ख़बरों के अनुसार यहां बाढ़ के कारण अब तक 11 हज़ार लोगों की मौत हुई है. देरना के मेयर का कहना है कि मरने वालों का आंकड़ा 20 हज़ार तक हो सकता है.