मणिपुर में बुधवार को चुराचांदपुर-बिष्णुपुर सीमा पर सैकड़ों प्रदर्शनकारियों द्वारा सेना के बैरिकेड को तोड़ने के एक नाकाम प्रयास के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है.
इस बीच सीमावर्ती टोरबुंग बांग्ला इलाके के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए है.
दरअसल, मैतेई समुदाय से जुड़े नागरिक संगठनों में से एक कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑफ़ मणिपुर इंटेग्रिटी (कोकोमी) ने बुधवार को मीरा पैबिस और स्वयंसेवकों के साथ टोरबुंग तक मार्च निकाला था.
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बिष्णुपुर और चुराचांदपुर सीमा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर सेना द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को हटाने की योजना बनाई थी.
इंफाल घाटी में कर्फ्यू के बावजूद कोकोमी द्वारा आयोजित इस रैली में हजारों की संख्या में मैतेई लोग शामिल हुए थे. यह विरोध मार्च क्वाक्टा से शुरू हुआ था लेकिन राज्य और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को फौगाकचाओ इखाई नामक जगह पर ही रोक दिया.
क्वाक्टा से महज थोड़ी दूरी पर सीआरपीएफ, असम राइफल और भारतीय सेना के तीन अलग-अलग चेक पाइंट बने हुए है जहां सुरक्षा के लिहाज से दोनों तरफ बैरिकेड लगाए हुए है.
यह बहुत ही संवेदनशील इलाका है जहां सबसे ज्यादा हिंसा हुई है. प्रदर्शनकारी टोरबुंग बांग्ला सामुदायिक हॉल तक पहुंचना चाहते थे ताकि मैतेई क्षेत्रों को पुन अपने कब्जे में ले सकें.
लेकिन इस बीच वहां तैनात भारी सुरक्षा बलों ने एकत्रित भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पहले आंसू गैस के गोले दागे और फिर रबर की गोलियां चलाई.
सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई में 40 से अधिक लोग घायल हुए है जिनमें से कुछ लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
कोकोमी का कहना है कि कमेटी ने पहले ही सरकार और संबंधित अधिकारियों से 30 अगस्त तक सेना के बैरिकेड्स हटाने का आग्रह किया था लेकिन उनका यह अनुरोध पूरा नहीं किया गया.
इससे पहले बुधवार सुबह सैकड़ों प्रदर्शनकारी बिष्णुपुर जिले के फौगाकचाओ इखाई में एकत्र हुए, ताकि बिष्णुपुर जिले के अंतर्गत टोरबुंग में सुनसान पड़े मैतेई लोगों के घरों तक पहुंच सकें, जो चुराचांदपुर जिले से कुछ ही किलोमीटर दूर है.
कोकोमी के समन्वयक जितेंद्र निंगोम्बा का कहना है कि हम चाहते हैं कि बैरिकेड हटा दिए जाएं क्योंकि बैरिकेड्स के पार मैतेई लोगों की जमीनें हैं. हम वहां फिर से बसना चाहते हैं और अपनी जमीन वापस पाना चाहते हैं.
इस घटना के बाद मैतेई-बहुल बिष्णुपुर जिले से 35 किमी दूर चुराचांदपुर जिले में भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.
इन दोनों जिलों के बीच एक ऐसे क्षेत्र में बैरिकेड लगाए गए हैं जिसे सुरक्षा बल अस्थायी "बफर जोन" कहते हैं.
दरअसल 3 मई से शुरू हुई हिंसा के बाद से चुराचांदपुर और विष्णुपुर जिले की सीमा पर जो बैरिकेड बनाए गए है उससे पता चलता है कि मणिपुर का वैली इलाका और पहाड़ी क्षेत्र आपस में बंट चुके है.
मणिपुर में जारी हिंसा को चार महीने से ज्यादा समय बीत गया है लेकिन इस छोटे से प्रदेश में शांति कायम करने के तमाम प्रयास बेअसर साबित हो रहें है.
इस हिंसा में अबतक 180 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है.