पाक चुनाव आयोग का फ़ैसला, इमरान ख़ान अगले पांच साल तक नहीं लड़ पाएंगे चुनाव
पाकिस्तान चुनाव आयोग ने मंगलवार को बताया है कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को अगले पांच सालों तक चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया गया है.
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प्रियंका झा and स्नेहा
तापमान बढ़ने से इंसानी शरीर पर क्या होता है असर?
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वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन के मुताबिक बहुत अधिक टेंपरेचर, टेंशन की वजह बन सकता है, जो दुनियाभर में होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण है.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेन बताता है कि बहुत अधिक टेंपरेचर, टेंशन की वजह बन सकता है, जो दुनियाभर में होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण है.
2030 से 2050 के बीच, जलवायु परिवर्तन के कारण हर साल क़रीब 250,000 अतिरिक्त मौतें होने की आशंका है.
यूनाइटेड नेशन्स के मुताबिक, गर्मी से हार्ट, रेस्पिरेटरी और लिवर से जुड़ी बीमारियों का ख़तरा बढ़ सकता है और कुछ स्टडीज़ में ये पाया गया है कि गर्मी बढ़ने से क्राइम रेट पर भी असर पड़ता है. और ये बढ़ सकता है.
ब्रेकिंग न्यूज़, तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन संसद के शेष सत्र के लिए निलंबित
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तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन को संसद के बाक़ी बचे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया है.
समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के सदन में नेता डेरेक ओ ब्रायन को राज्यसभा सदस्य के रूप में अशोभनीय अभद्र व्यवहार के लिए मौजूदा संसद सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित किया गया है.
सदन के नेता पीयूष गोयल ने सदन की कार्यवाही में लगातार बाधा डालने, सभापति की अवज्ञा करने और सदन में लगातार अशांति पैदा करने के लिए उनके निलंबन के लिए एक प्रस्ताव पेश किया था.
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चंद्रयान-3 से आई चांद की ये पहली तस्वीर
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चंद्रयान-3 ने चांद की पहली तस्वीर भेजी है. भारत का चंद्रयान-3 पांच अगस्त को चांद की कक्षा में प्रवेश कर चुका है.
आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के स्पेस सेंटर से 14 जुलाई को इसे लॉन्च किया गया था. जब ये स्पेसक्राफ़्ट चांद की कक्षा में प्रवेश कर रहा था तो चांद ऐसा दिख रहा था.
इस मिशन के लिए 23 अगस्त सबसे अहम तारीख है. इसी दिन चंद्रयान को साउथ पोल पर सॉफ़्ट लैंडिंग करनी है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इराक़ में भारतीय कफ़ सिरप को लेकर किया अलर्ट
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने इराक में भारत की कंपनी के बनाए एक कफ़ सिरप को लेकर अलर्ट जारी किया है. डब्लूएचओ ने कहा है कि इस सिरप में दूषित केमिकल मिले हुए हैं.
मिंट की ख़बर के अनुसार डब्लूएचओ ने कहा है, "बीते साल बनी कोल्ड आउट सिरप का इस्तेमाल असुरक्षित है, ख़ासतौर पर बच्चों को इससे गंभीर बीमारी हो सकती है या मौत की भी आशंका है."
कोल्ड आउट सिरप को डैबिलाइफ़ फार्मा के लिए फोर्ट्स (इंडिया) लैबोरेटरीज़ ने बनाया था.
हालांकि, फोर्ट्स के वाइस प्रेसिडेंट बाला सुरेंद्रन ने बीते महीने ब्लूमबर्ग को कहा था कि दवा बनाने का काम अब पुडुचेरी स्थित शरुन फार्मासूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड को दे दिया गया है.
उन्होंने ये भी कहा कि फोर्ट्स के पास दवा के जो सैंपल हैं, वो दूषित नहीं पाए गए हैं.
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पैरासिटामोल और क्लोरफेनिरामाइन के कॉम्बिनेशन वाली कोल्ड आउट सिरप सर्दी और एलर्जी के लक्षण होने पर किया जाता है.
'इराकी न्यूज़' के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि सिरप में डाइथिलीन (0.25 प्रतिशत) और एथिलीन ग्लाइकोल (2.1 प्रतिशत) जैसे दूषित तत्वों की मात्रा स्वीकार्य सीमा से अधिक है. जबकि इन दोनों तत्वों को इस्तेमाल करने की सुरक्षित सीमा 0.10 प्रतिशत है.
एक साल में ये पाँचवीं बार है जब किसी भारतीय कंपनी की दवा में एथिलीन ग्लाइकोल अत्याधिक मात्रा में मिला है.
बीते साल गांबिया और उज़्बेकिस्तान में 89 बच्चों की मौत को भारत में बनी कफ सिरप से जोड़ा गया था. भारतीय नियामकों ने मैरियन बायोटेक के मैन्युफेक्चरिंग लाइसेंस को रद्द कर दिया था. इसी कंपनी ने उज़्बेकिस्तान में सिरप निर्यात किए थे.
जब एक फ़ुटबॉल ने बदल दी पूरे गांव की किस्मत
वीडियो कैप्शन, जब एक फ़ुटबॉल ने बदल दी पूरे गांव की किस्मत
गुजरात में पाटन ज़िले का महादेवपुरा गांव किसी भी आम गांव की ही तरह है.
लेकिन एक चीज़ जो इस गांव को दूसरे गांवों से अलग बनाती है वो है, यहां की महिला फ़ुटबॉल खिलाड़ी.
इस छोटे से गांव ने 70 से अधिक खिलाड़ी दिए हैं, जो स्टेट और नेशनल लेवल पर देश का नाम रोशन कर चुके हैं.
फ़ुटबॉल के खेल ने इस दूर-दराज़ स्थित गांव की लड़कियों की ज़िंदगी बदल दी है.
राज्यसभा में पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई का पहला भाषण चर्चा में क्यों
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भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने दिल्ली सेवा बिल पर चर्चा के दौरान राज्यसभा सांसद के तौर पर अपना पहला भाषण दिया.
गोगोई ने कहा कि दिल्ली सरकार में अधिकारियों के तबादलों और तैनाती से जुड़े अध्यादेश की जगह लाया गया विधेयक 'पूरी तरह से वैध है.'
हालांकि, पूर्व सीजेआई के इस भाषण पर अब विवाद हो गया है. रंजन गोगोई राज्यसभा में मनोनीत सांसद हैं.
पूर्व चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई ने दिल्ली सेवा बिल का समर्थन किया.
उन्होंने कहा, "मेरे लिए ये विधेयक सही है. ये मामला विचाराधीन नहीं है. सुप्रीम कोर्ट में जो मामला लंबित है, वह अध्यादेश की वैधता है और जो दो प्रश्न संविधान पीठ को भेजे गए हैं, उनका सदन में बहस से कोई लेना-देना नहीं है."
गोगोई ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023 पर चर्चा में भाग लेते हुए राज्यसभा में कहा, "केशवानंद भारती मामले पर पूर्व सॉलिसिटर जनरल (टीआर) अंध्यारुजिना की एक किताब है."
उन्होंने कहा, "किताब पढ़ने के बाद, मेरा मानना है कि संविधान के मूल ढांचे के सिद्धांत का एक चर्चा किए जाने योग्य आधार है. इससे ज़्यादा मैं कुछ नहीं कहूंगा."
रंजन गोगोई के भाषण के इसी हिस्से पर कांग्रेस ने हैरानी जताई है.
पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने रंजन गोगोई की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "ये हैरान करने वाला है कि एक पूर्व प्रधान न्यायाधीश संविधान के मूल ढांचे पर सवाल उठाते हैं."
वेणुगोपाल ने ट्विटर पर कहा, "गोगोई का तर्क क्या है? क्या वह कह रहे हैं कि मूल ढांचे नाम की कोई चीज़ नहीं है जिसे संरक्षित किया जाना चाहिए?"
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वेणुगोपाल ने पूछा कि क्या सरकार इसका समर्थन करती है?
वेणुगोपाल ने कहा, "उन्हें इस विचार का स्पष्ट रूप से विरोध करना चाहिए, नहीं तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि भाजपा ने अब हमारे संविधान के मूल सिद्धांतों को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है."
अशोक गहलोत ने कहा- मोदी को भ्रम कि वो सिर्फ़ हिंदुओं के प्रधानमंत्री हैं
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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज़ करते हुए कहा कि उनके व्यवहार और 'बॉडी लैंग्वेज' से लगता है कि वह एक पार्टी (बीजेपी) और सिर्फ़ हिंदुओं के ही पीएम हैं. गहलोत ने इसे 'ख़तरनाक भ्रम' बताया.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार अशोक गहलोत जयपुर में सोमवार को एक कार्यक्रम में पहुंचे थे.
इस दौरान गहलोत ने पीएम मोदी के महंगे कपड़ों पर तंज़ करते हुए कहा कि वह मोदी से भी बड़े फकीर हैं. इसके साथ ही उन्होंने दोहराया कि वह कई बार मुख्यमंत्री पद छोड़ना चाहते हैं लेकिन यह पद उन्हें नहीं छोड़ रहा.
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गहलोत ने कहा कि मोद को विदेश में सिर्फ़ इसलिए सम्मान मिलता है क्योंकि लोग जानते हैं कि वो महात्मा गांधी के देश से हैं, जहाँ लोकतंत्र को 'कांग्रेस ने ज़िंदा' रखा है.
गहलोत ने कहा कि मोद को विदेश में सिर्फ़ इसलिए सम्मान मिलता है क्योंकि लोग जानते हैं कि वो महात्मा गांधी के देश से हैं, जहाँ लोकतंत्र को 'कांग्रेस ने ज़िंदा' रखा है.
गहलोत ने कहा कि मोदी लोकतंत्र में प्रधानमंत्री चुने गए हैं और कांग्रेस ने देश में लोकतंत्र की स्थापना की है और उसे ज़िंदा रखा है.
गहलोत ने ये भी दावा किया कि मोदी एक कपड़ा दोबारा नहीं पहनते जबकि वो ऐसे नहीं हैं.
सीएम ने कहा, "मैं फकीर नहीं हूं? मैंने कभी अपने जीवन में कोई प्लॉट या फ्लैट नहीं खरीदा, एक ग्राम सोना तक नहीं खरीदा. क्या वो मुझसे बड़े फकीर हो सकते हैं? मोदी का चश्मा ढाई लाख रुपये का है."
पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की इस तस्वीर पर कांग्रेस और बीजेपी क्यों भिड़ी?
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इमेज कैप्शन, मनमोहन सिंह राज्यसभा में
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सोमवार को दिल्ली सेवा बिल पर चर्चा के दौरान राज्यसभा आने को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच वार-पलटवार शुरू हो गया है.
पूर्व पीएम काफ़ी समय से बीमार चल रहे हैं और वो सदन में व्हीलचेयर पर पहुँचे थे.
पहले कांग्रेस ने मनमोहन सिंह की तस्वीर साझा करते हुए पीएम मोदी पर निशाना साधा.
कांग्रेस ने एक ट्वीट किया, जिसमें एक ओर मनमोहन सिंह और दूसरी तरफ़ पीएम मोदी की फोटो थी.
साथ में लिखा, "इंटिग्रिटी वर्सेज़ एस्केप". यानी ईमानदारी से काम करने वाला बनाम अपनी ज़िम्मेदारियों से भागने वाला.
पार्टी ने इंस्टाग्राम पोस्ट में भी पूर्व पीएम की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, "ये 90 साल के हैं. हमारे पूर्व पीएम एक ज़िम्मेदार नेता है. अपनी ख़राब सेहत और बुज़ुर्ग होने के बावजूद वो ख़ुद को संसद और अपने कर्तव्यों को पूरा करने से नहीं रोक सके. ईमानदारी और सत्यनिष्ठा ऐसी दिखती है. दूसरी तरफ़ भारत के पीएम हैं, जिनकी देश के प्रति कर्तव्य और ज़िम्मेदारियां हैं, लेकिन फिर भी वो संसद से ख़ुद को दूर रख रहे हैं, वो भी तब जब हमारे दो राज्य जल रहे हैं. भगोड़ापन ऐसा ही दिखता है. फ़र्क़ महसूस कीजिए."
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इसके बाद बीजेपी ने भी मनमोहन सिंह की व्हीलचेयर पर बैठी तस्वीर शेयर की. पार्टी ने लिखा कि ये कांग्रेस की सनक है जो एक पूर्व पीएम को देर रात ऐसे स्वास्थ्य की स्थिति में भी व्हील चेयर पर बैठाये रखा, वो भी सिर्फ़ अपना बेईमान गठबंधन ज़िंदा रखने के लिए. बीजेपी ने इसे 'बेहद शर्मनाक' कहा.
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सीएम केजरीवाल ने जताया आभार
राज्यसभा से बिल पारित हो जाने के बावजूद दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने मनमोहन सिंह और शिबू सोरेन का ख़ास आभार जताया. उन्होंने कहा कि बीजेपी की ओर से लाए काले कानून के ख़िलाफ़ संसद के अंदर और बाहर बहुत सारी पार्टियों ने, बहुत सारे नेताओं ने दिल्ली के लोगों का साथ दिया.
केजरीवाल ने कहा, "इस समर्थन के लिए उन सभी नेताओं और सभी पार्टियों को दिल्ली के दो करोड़ लोगों की तरफ से मैं तहे दिल से धन्यवाद करता हूँ. ख़ासतौर से पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और जेएमएम अध्यक्ष शिबू सोरेन स्वास्थ्य के नजरिए से विपरीत परिस्थितियों में भी संसद में आए, दोनों वरिष्ठ नेताओं का सभी दिल्लीवासियों की तरफ से बहुत-बहुत आभार."
दिल्ली सेवा बिल पारित होने पर क्या बोले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल
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दिल्ली में ट्रांसफ़र-पोस्टिंग का हक़ उपराज्यपाल को देने वाला विधेयक राज्यसभा से भी पास होने के बाद आम आदमी पार्टी ने कहा है कि आगे की लड़ाई वो अदालत में लड़ेगी.
दिल्ली सेवा बिल लोकसभा में पहले ही पास हो चुका है. राज्यसभा में पर्ची के जरिए इस बिल पर वोटिंग हुई. बिल के पक्ष में 131 वोट जबकि इसके विरोध में 102 वोट पड़े.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, ''दिल्ली सेवा बिल इसलिए लाया गया क्योंकि आप सरकार नियमों का पालन नहीं करती है.''
दिल्ली के मुख्यमंत्री ने इस विधेयक को काला बिल बताते हुए कहा है, "बीजेपी 2013, 2015, 2020 और फिर एमसीडी का चुनाव बीजेपी बुरी तरह हारी है. दिल्ली वालों ने इन्हें 25 साल से वनवास दिया हुआ है तो ये चोर दरवाज़े से सरकार चलाना चाहते हैं. दिल्ली की जनता ने चिल्ला कर कहा कि सरकार के कामों में दखअंदाज़ी मत करना, लेकिन मोदी जी कहते हैं कि मैं जनता, सुप्रीम कोर्ट, संविधान की नहीं मानता."
अरविंद केजरीवाल ने ये भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि लोग सरकार चुनते हैं, इसलिए सरकार को पूरी ताकत मिलनी चाहिए. लेकिन प्रधानमंत्री ने एक हफ़्ते में अध्यादेश से उसको पलट दिया.
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केजरीवाल ने कहा कि केंद्र की बीजेपी सरकार ने संसद में दिल्ली के लोगों को गुलाम बनाने वाला ग़ैर-संवैधानिक क़ानून पास करा कर दिल्ली के लोगों के वोट और अधिकारों का अपमान किया है.
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क्या है दिल्ली सेवा बिल
इस विधेयक के ज़रिए मोदी सरकार उस अध्यादेश को क़ानून बनाना चाहती है, जिसमें दिल्ली के उपराज्यपाल के पास दिल्ली में अधिकारियों की पोस्टिंग या ट्रांसफ़र का आख़िरी अधिकार होगा.
सीमा पर बुनियादी ढांचे को लेकर विदेश मंत्री जयशंकर ने पिछली सरकारों को घेरा
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पिछली सरकारों पर वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि साल 2000 के बाद सीमा पर किस हद तक चीनी बुनियादी ढांचे का विकास हुआ है, ये उन्होंने खुद देखा है.
जयशंकर ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि साल 2009 से 2013 के बीच जब वो चीन में भारत के राजदूत थे, उस समय उन्होंने एलएसी का दौरा किया था.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार जयशंकर ने पिछले नौ सालों में चीन से लगी एलएसी पर बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय वृद्धि का ज़िक्र भी किया.
उन्होंने कहा, "समस्या ये है कि पिछली सरकारों ने बुनियादी ढांचा विकसित करने पर ध्यान नहीं दिया क्योंकि उनकी सोच ये थी कि अगर सीमा वाले इलाके अविकसित रहेंगे, तो इससे चीनी सैनिक आसानी से सीमा पार नहीं कर सकेंगे. लेकिन ये गलत सोच थी क्योंकि जिन्हें आना था वो किसी भी तरह आ गए."
'द हिंदू' की रिपोर्ट के अनुसार जयशंकर ने बाद में स्पष्ट किया कि वो साल 2014 (मोदी सरकार बनने से पहले) के पहले चीनी घुसपैठ के बारे में बात कर रहे थे, न कि 2014 में डेमचोक और 2020 में एलएसी के अलग-अलग सेक्टर में चीन के साथ हिंसक झड़पों के बारे में.
जयशंकर ने ये भी कहा कि सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे का विकास करने से भारत के उसके पड़ोसी देशों- नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार और श्रीलंका से रिश्तों में बड़े सुधार आए हैं.
यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की को मारने की कथित साज़िश के आरोप में एक महिला गिरफ़्तार
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यूक्रेन की सिक्यॉरिटी सर्विसेज़ का कहना है कि राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की की हत्या के लिए रूस की साज़िश से जुड़े मामले में एक महिला को गिरफ़्तार किया गया है.
सिक्यॉरिटी सर्विसेज़ ने कहा कि महिला ने जून में ज़ेलेंस्की की बाढ़ प्रभावित मायकोलाइव की यात्रा से पहले उनके कार्यक्रम के बारे में पता लगाने की कोशिश की थी.
यूक्रेन अक्सर रूस का समर्थन करने वाले स्थानीय निवासियों पर मॉस्को की सेना की मदद के लिए जानकारी देने का आरोप लगाता है.
राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने इस गिरफ़्तारी की पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि सिक्यॉरिटी सर्विसेज़ ने उन्हें 'ग़द्दारों के खिलाफ़ जंग' के बारे में सूचित कर दिया है.
हालांकि, रूस ने अभी तक इस गिरफ़्तारी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
यूक्रेन की सिक्यॉरिटी सर्विसेज़ एसबीयू ने एक बयान में ये बताया है कि महिला को उस समय रंगे हाथों पकड़ा गया जब वह रूसियों को ख़ुफ़िया जानकारी दे रही थी.
एसबीयू ने ये भी आरोप लगाया कि महिला ने मायकोलाइव की ज़ेलेंस्की की यात्रा से पहले कई खुफ़िया जानकारियों का पता लगाने की कोशिश की थी.
एसबीयू के अनुसार, ये संदिग्ध महिला ओचाकिव नाम के छोटे से कस्बे में रहती है, जहाँ ज़ेलेंस्की जुलाई महीने में ही गए थे. वहाँ ये महिला एक सैन्य अड्डे में बनी दुकान पर काम करती है.
ऐसा कहा जा रहा है कि एजेंसी ने महिला को ज़ेलेंस्की की यात्रा के बाद गिरफ़्तार किया है. महिला पर हथियारों और सैनिकों की गतिविधियों के बारे में जानकारी लीक करने का आरोप है. अगर वह दोषी पाई गईं तो उन्हें 12 साल तक की क़ैद हो सकती है.
नमस्कार!
आपका दिन शुभ हो.
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