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संसद में सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है.
राहुल गांधी केरल के वायनाड से लोकसभा सांसद हैं. लोकसभा सचिवालय की ओर से सोमवार को अधिसूचना जारी होने के बाद उनकी सदस्यता बहाल हुई.
साल 2019 में राहुल गांधी ने 'मोदी सरनेम' को लेकर दिए एक बयान दिया था, जिसे लेकर बीजेपी विधायक पूर्णेश मोदी सूरत की निचली अदालत पहुंचे थे. निचली अदालत ने राहुल गांधी को दो साल की सज़ा सुनाई थी.
अदालत के इस फ़ैसले के 24 घंटे के बाद ही लोकसभा की उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई थी.
हालांकि, बीते शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय ने राहुल गांधी की सज़ा पर रोक लगा दी थी. इसके बाद उनकी सदस्यता बहाल की गई है.
अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में बोले ये सांसद, बहस जारी
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अविश्वास प्रस्ताव पर लोकसभा में बहस चल रहा है. इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई सांसदों ने अपनी बात रखी है.
एनसीपी एमपी सुप्रिया सुले ने लोकसभा में कहा, "मणिपुर के मुख्यमंत्री को तत्काल इस्तीफ़ा देना चाहिए...दंगा, हत्या और रेप की 10,000 घटनाएं हो चुकी हैं. क्या हम इतने अंसवेदनशील हो गए हैं? इस सरकार की यही समस्या है..."
सपा सांसद डिंपल यादव ने कहा, "सत्ता पक्ष के लोग कह रहे थे कि हमको राजस्थान पर चर्चा करनी चाहिए. तो मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की भी चर्चा जरूर होनी चाहिए. एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि हर तीन घंटे में एक महिला का शारीरिक उत्पीड़न उत्तर प्रदेश में हो रहा है और उत्तर प्रदेश की सरकार और केंद्र की सरकार इस बात का संज्ञान नहीं ले रही है."
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उन्होंने कहा, "मणिपुर की घटना कोई मामूली घटना नहीं है. यह बेहद संवेदनशील घटना है. और सर, सरकार का रवैया बहुत संवेदनहीन रहा है. यह सरकार अहंकार में डूबी हुई सरकार है. मणिपुर में मानवाधिकार का व्यापक उल्लंघन हुआ. मणिपुर में महिलाओं का हिंसा में इस्तेमाल किया गया. और यह स्वीकार्य नहीं है."
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, "अध्यक्ष महोदय, ये लोग नहीं समझेंगे सर. माननीय प्रधानमंत्री जब परिवारवाद की बात करते हैं तो वह परिवार की बात नहीं करते हैं. वकील का बेटा वकील हो जाए. क्या दिक्कत है?.... आज जो ये अविश्वास प्रस्ताव है, वो एक गरीब के बेटे के ख़िलाफ है. ये अविश्वास प्रस्ताव उस आदमी के पीछे है जिसने लोगों को पीने का पानी दिया."
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शिवसेना (शिंदे) गुट के सांसद श्रीकांत शिंदे ने सदन में महाराष्ट्र की राजनीति का ज़िक्र करते हुए कहा कि इन्होंने (उद्धव ठाकरे) बाला साहेब ठाकरे के विचारों से दूर जाने का काम किया.
उन्होंने सदन में हनुमान चालिसा भी पढ़ी.
सदन में शिवसेना के दो गुटों में आरोप प्रत्यारोप का दौर सदन में भी खुलकर हुआ.
अरविंद गणपत सावंत (उद्धव गुट) ने कहा, "एक बहुत गंभीर विषय पर विपक्षी दलों ने प्रस्ताव रखा और गौरव गोगोई ने जिस गंभीरता से शुरुआत की लेकिन उसके बाद जो मैं भाषण सुन रहा हूं. 1953 में क्या हुआ, 76 में क्या हुआ. ये सब गंभीरता को कम करने का प्रयास हो रहा है. भैया सिर्फ, आदरणीय पीएम को लाने की बात नहीं है. बात यह है कि मणिपुर के मुद्दे पर केंद्र सरकार 70 दिन तक चुप रही. सुप्रीम कोर्ट के बयानों के बाद सरकार का मुंह खुला, 36 सेकेंड के लिए.''
समंदर का बढ़ता तापमान बना बड़ा ख़तरा
वीडियो कैप्शन, समंदर का बढ़ता तापमान बड़ा ख़तरा
वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनियाभर के समंदर की सतह पर औसत तापमान अपने अधिकतम रिकॉर्ड को तोड़कर बढ़ चुका है.
यूरोपीय यूनियन की क्लाइमेट चेंज सर्विस ने चेतावनी दी है कि तापमान में इस बढ़ोतरी की वजह ग्लोबल वॉर्मिंग है.
देखिए बीबीसी संवाददाता जस्टिन रॉलैट की रिपोर्ट.
केरल विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड से जुड़ा ये प्रस्ताव पारित हुआ
....में
Author, इमरान क़ुरैशी
पदनाम, बेंगलुरु से, बीबीसी हिंदी के लिए
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केरल विधानसभा ने मंगलवार को सर्वसम्मति से यूनिफॉर्म सिविल कोड के संबंध में एक प्रस्ताव स्वीकार कर लिया.
इस प्रस्ताव में केंद्र सरकार से अपील की गई है कि वो देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड लाने से बचें.
इस साल फरवरी में, मिजोरम विधानसभा ने देश में यूसीसी लाने से संबंधित किसी भी कदम का विरोध करने के लिए एक आधिकारिक प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था.
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मंगलवार को केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने यूसीसी के ख़िलाफ़ सदन में प्रस्ताव पेश किया और इसे 'एकतरफा और जल्दबाजी' में उठाया गया कदम बताया है.
विजयन ने कहा कि यूसीसी संघ परिवार की परिकल्पना है और यह संविधान के अनुसार नहीं है बल्कि मनुस्मृति के आधार पर है.
राज्य में कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन यूडीएफ ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया.
सीपीएम सरकार का यूसीसी पर प्रस्ताव लाने का यह फ़ैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य की सत्तारूढ़ वाम गठबंधन और विपक्षी यूडीएफ समेत कई धार्मिक संगठन इसका विरोध करते हुए अभियान चला रहे हैं.
भारत ने गोवा को ऐसे कराया था आज़ाद
वीडियो कैप्शन, सैनिक कार्रवाई के बाद भारत ने कराया था गोवा को आज़ाद
हाल ही में वाल्मीकि फलेरो की किताब आई है 'गोवा, 1961 द कंप्लीट स्टोरी ऑफ़ नेशनलिज्म एंड इंटीग्रेशन ऑफ़ गोवा' जिसमें उन्होंने गोवा को भारत का हिस्सा बनाए जाने की कहानी बताई है.
पति को काला कहना भी क्रूरता, तलाक़ का मज़बूत आधार: कर्नाटक हाई कोर्ट
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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कहा है कि अगर किसी व्यक्ति की पत्नी उसके काले रंग की वजह से अपमानित करती है तो इसे क्रूरता माना जाएगा और ये तलाक की अपील का मज़बूत आधार है.
हाई कोर्ट ने एक 44 वर्षीय शख्स को उसकी 41 वर्षीय पत्नी से तलाक़ की मंज़ूरी देते हुए ये टिप्पणी की.
कोर्ट ने ये भी कहा कि रिकॉर्ड में जो सबूत हैं, उससे भी ये निष्कर्ष निकलता है कि पत्नी काली त्वचा की वजह से अपने पति को अपमानित करती थीं और वो इसी वजह से बिना किसी अन्य कारण पति से अलग रहने लगीं.
वीडियो कैप्शन, हिंदू मैरिज एक्ट क्या है और शादी को लेकर क्या है कानून?
हाई कोर्ट ने कहा, "इस पहलू को छिपाने के मकसद से उन्होंने (पत्नी) पति पर अवैध रिश्ते रखने के फर्ज़ी आरोप लगाए. ये तथ्य बिलकुल क्रूरता का कारण हैं."
इस कपल ने साल 2007 में शादी की थी और दोनों की एक बेटी है. साल 2012 में पति ने बेंगलुरु की फ़ैमिली कोर्ट में तलाक़ की अर्ज़ी दी थी.
महिला ने आरोप लगाया था कि उनके पति और ससुराल वाले दहेज़ मांगते हैं और उन्हें अपनी बेटी के साथ घर छोड़कर नहीं जाने दे रहे.
वीडियो कैप्शन, हिंदू मैरिज एक्ट के तहत ये हैं तलाक़ के आठ आधार
पत्नी ने आरोप लगाया था कि उनके पति का किसी दूसरी महिला से अवैध संबंध हैं और दोनों का एक बच्चा भी है.
फ़ैमिली कोर्ट ने पति की तलाक की अर्ज़ी साल 2017 में खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय का रुख किया.
हाई कोर्ट ने कहा, "पत्नी ने पति के पास वापस आने की कोई कोशिश नहीं की और रिकॉर्ड में जो सबूत हैं वो ये साबित करते हैं कि महिला की अपने पति के काले रंग की वजह से शादी में रुचि नहीं थी."
फ़ुटबॉल बदल रही है इन लड़कियों की ज़िंदगी
वीडियो कैप्शन, फ़ुटबॉल बदल रही है इन लड़कियों की ज़िंदगी
गुजरात के पाटन ज़िले का महादेवपुरा गांव, दिखने में किसी भी आम गांव की तरह ही है, लेकिन एक बात है जो इसे बाक़ी गांवों से अलग बनाती है.
इस अकेले गांव ने देश को 70 से अधिक महिला फ़ुटबॉल खिलाड़ी दिए हैं.
देखिए बीबीसी संवाददाता तेजस वैद्य और पवन जायसवाल की रिपोर्ट.
राहुल गाँधी की सज़ा पर रोक में लगे चार महीने, बीजेपी सांसद को दो दिन में राहत: पी चिदंबरम
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कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने बीजेपी सांसद राम शंक कठेरिया को हुई जेल की सज़ा और दो दिन के अंदर सज़ा पर लगी रोक के ज़रिए देश की न्यायप्रणाली पर सवाल उठाए हैं.
चिदंबरम ने कहा है कि बीजेपी सांसद को अदालत से सज़ा पर स्टे लेने में सिर्फ़ दो तीन दिन लगे जबकि राहुल गांधी को इसी के लिए चार महीने से अधिक समय लगा.
दरअसल, उत्तर प्रदेश के इटावा से सांसद राम शंकर कठेरिया को मारपीट के एक मामले में आगरा की एमएलए अदालत ने दो साल की सज़ा सुनाई थी, लेकिन दो-तीन बाद ही आगरा ज़िला अदालत ने कठेरिया की सज़ा पर रोक लगा दी और जुर्माने की राशि भी घटा दी.
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वहीं, मोदी सरनेम से जुड़े बयान पर गुजरात की सूरत कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को इसी साल मार्च में दो साल की सज़ा सुनाई थी. इसके अगले ही दिन उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द कर दी गई थी.
राहुल गांधी की सज़ा को गुजरात हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा और बीते शुक्रवार सुप्रीम कोर्ट से राहुल गांधी को राहत मिली. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सोमवार को राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता बहाल हुई.
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इस पर पी चिदंबरम ने ट्वीट किया, "इटावा से सांसद (बीजेपी) राम शंकर कठेरिया को मारपीट के आरोप में दो साल की सज़ा हुई. दो-तीन दिन के भीतर पहली ही अपील पर आगरा की अदालत से उनकी सज़ा पर रोक लग गई. कठेरिया के लिए अच्छा है. मैं इसपर कुछ नहीं कहूंगा."
"राहुल गांधी को कथित मानहानि (झूठा आरोप) के केस में मिली सज़ा पर रोक के लिए 4 महीने लग गए और वो भी सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा. भारत में न्याय देने की प्रक्रिया रहस्यमय तरीके से चलती है."
इसराइल-लेबनान सीमा पर बढ़ता तनाव क्या युद्ध की तरफ़ बढ़ रहा है?
वीडियो कैप्शन, इसराइल-लेबनान सीमा पर बढ़ता तनाव
इसराइल और लेबनान में आख़िरी बार साल 2006 में जंग हुई थी. उसके बाद दोनों की सीमा पर कमोबेश शांति बनी रही.
लेकिन बीते कुछ महीनों से हालात में काफ़ी बदलाव देखे जा रहे हैं. ऐसे में क्या ये दोनों देश जंग की ओर बढ़ रहे हैं. कभी लेबनान की तरफ़ से इसराइल में रॉकेट दाग़े जा रहे हैं, तो कभी इसराइल हवाई हमले कर रहा है.
बीबीसी संवाददाता टॉम बेटमैन इसराइल-लेबनान बॉर्डर पर पहुंचे और वहां के हालात का जायज़ा लिया.
चीन का निर्यात तीन साल बाद इतना घटा
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चीन के आयात और निर्यात में बीते महीने अनुमानित गति से भी तेज़ गिरावट दर्ज की गई है.
आधिकारिक आंकड़ें दिखाते हैं कि बीते साल की तुलना में चीन का निर्यात 14.5 फ़ीसदी गिरा है.
वहीं,आयात में 12.4 फ़ीसदी की गिरावट आई है.
इस घाटे के बाद ये चिंता ज़ोर पकड़ने लगी है कि देश का आर्थिक विकास इस साल और धीमा पड़ेगा.
वीडियो कैप्शन, कोरोना के बाद चीन कर रहा है अर्थव्यवस्था सुधारने की कोशिश लेकिन अर्थव्यवस्था पड़ रही सुस्त
वहीं, इससे चीन पर कोविड महामारी के बीच अर्थव्यवस्था में जान फूंकने का दबाव भी बढ़ेगा.
आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में जीवनयापन के लिए ज़रूरी सामानों के ऊंचे दाम का चीन की अर्थव्यवस्था को महामारी के बाद उबारने की कोशिशों पर प्रभाव पड़ रहा है.
महंगाई बढ़ने से चीन के उत्पादों की मांग घट रही है.
क्या दवाइयां मोटापे से निजात दिला सकती हैं?- दुनिया जहान
वीडियो कैप्शन, क्या दवाइयां मोटापे से निजात दिला सकती हैं?- दुनिया जहान
जून 2023 में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने देश में मोटापे की समस्या सुलझाने के लिए एक शुरुआती योजना यानी पायलट प्रोजेक्ट की घोषणा की. इस योजना पर 4 करोड़ पाउंड खर्च होंगे.
उन्होंने कहा कि देश के लोगों में ओबेसिटी यानी मोटापा घटाने के लिए नवीनतम दवाओं के इस्तेमाल से बड़ी सफलता मिल सकती है.
इसमें से एक दवा की मांग तो अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अभी से आसमान छू रही है.
सोशल मीडिया पर भी अटकलों का बाज़ार गर्म है कि हॉलीवुड के कौन से सितारे इस दवा के इस्तेमाल से मोटापा घटा रहे हैं?
मगर यह सबके लिए नहीं है. इस सप्ताह दुनिया जहान में हम यह समझने की कोशिश करेंगे कि क्या दवाओं के इस्तेमाल से मोटापे की समस्या हल हो सकती है?
राहुल गांधी सावरकर हो भी नहीं सकते: अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे
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अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर कई टिप्पणियां की.
निशिकांत दुबे ने कहा कि उन्हें लग रहा था कि राहुल गांधी शायद भाषण शुरू करेंगे, लेकिन हो सकता है तैयारी पूरी न हुई हो, वो देर से सोकर उठे हों.
इसके बाद निशिकांत दुबे ने मोदी सरनेम मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहुल गांधी को मिली राहत का भी ज़िक्र किया.
उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने अभी बस स्टे ऑर्डर दिया है. राहुल गांधी कहते हैं कि वो माफ़ी नहीं मानेंगे. वो कहते हैं कि वो सावरकर नहीं हैं. वो हो भी नहीं सकते क्योंकि उस आदमी (वीडी सावरकर) ने 28 साल जेल में बीता दिए."
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दरअसल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में मानहानि केस को लेकर एक हलफ़नामा दाख़िल कर कहा था कि केस को रफ़ा-दफ़ा करने के लिए वो माफ़ी नहीं मागेंगे.
बाद में इसी मामले में उनकी सज़ा पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई, जिससे राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता बहाल हुई.
बीजेपी सांसद ने विपक्षी गठबंधन इंडिया पर भी ये कहते हुए निशाना साधा कि इसके अधिकांश सदस्य 'इंडिया' का पूरा मतलब नहीं पता होगा.
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मणिपुर हिंसा: क्या है मौजूदा स्थिति, देखिए ये ग्राउंड रिपोर्ट
वीडियो कैप्शन, मणिपुर हिंसा: क्या है मौजूदा स्थिति, देखिए ये ग्राउंड रिपोर्ट
मणिपुर में अभी क्या चल रहा है? ये जानने के लिए बीबीसी की टीम एक बार फिर मणिपुर पहुंची है.
फिलहाल, प्रदेश में जातीय हिंसा का दौर रुकने का नाम नहीं ले रहा है.
वीडियो में दिख रही ये जगह भारत-म्यांमार सीमा पर बसा मोरेह है.
हिंसा के बाद यहां की स्थिति बदतर नज़र आ रही है.
पूरी जानकारी दे रहे हैं बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्ताव.
जयंत चौधरी के दिल्ली सेवा बिल पर वोटिंग के लिए राज्यसभा न पहुँचने को लेकर चर्चा गर्म
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दिल्ली सेवा बिल पर राज्यसभा में चर्चा और इसपर वोटिंग के दौरान राष्ट्रीय लोकदल के सांसद जयंत चौधरी के न पहुँचने पर चर्चा गर्म है.
जयंत चौधरी विपक्षी पार्टियों के गठबंध 'इंडिया' का हिस्सा हैं. वह बीते महीने बेंगलुरु में हुई बैठक में भी शामिल हुए थे.
दिल्ली सेवा बिल लोकसभा में पहले ही पास हो चुका है. राज्यसभा में पर्ची के जरिए इस बिल पर वोटिंग हुई. बिल के पक्ष में 131 वोट जबकि इसके विरोध में 102 वोट पड़े.
इस विधेयक के ज़रिए मोदी सरकार उस अध्यादेश को क़ानून बनाना चाहती है, जिसमें दिल्ली के उपराज्यपाल के पास दिल्ली में अधिकारियों की पोस्टिंग या ट्रांसफ़र का आख़िरी अधिकार होगा.
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राष्ट्रीय लोकदल के प्रवक्ता अनिल दुबे ने इस मामले पर एक वीडियो संदेश जारी किया है.
उन्होंने कहा, "जयंत चौधरी की पत्नी का मेजर ऑपरेशन हुआ था, जिसकी वजह से राज्यसभा की कार्यवाही में दिल्ली सेवा विधेयक में भाग नहीं ले सके. लेकिन वो इस विधेयक पर इंडिया गठबंधन के साथ हैं, विपक्ष के साथ हैं. अगर पत्नी का स्वास्थ्य खराब न होता, तो वो इस चर्चा में हिस्सा लेते. अगर कोई गंभीर स्थिति आती, तो वो किसी भी कीमत पर राज्यसभा पहुँचते."
इमरान ख़ान को पाकिस्तान की जिस जेल में रखा गया है, वो कैसी है?
वीडियो कैप्शन, इमरान ख़ान को पाकिस्तान की अटक जेल में मिल सकती हैं ये सुविधाएं
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) के चेयरमैन और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को तोशाखाना केस में तीन साल क़ैद और जुर्माने की सज़ा सुनाए जाने के बाद लाहौर में उनके आवास से गिरफ़्तार कर पंजाब प्रांत के सीमाई ज़िले अटक की जेल भेजा गया है.
इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी के बाद पहले उन्हें हेलीकॉप्टर की मदद से इस्लामाबाद लाने की ख़बरें चल रही थीं लेकिन बाद में पुलिस उन्हें मोटरवे के रास्ते इस्लामाबाद लेकर आई जहां से मेडिकल जांच के बाद उन्हें अटक जेल ले जाया गया है.
जेल के कानूनों के अनुसार इमरान ख़ान को पूर्व प्रधानमंत्री होने की वजह से 'ए' क्लास कैटेगरी दी जा सकती है लेकिन अटक की जेल के वार्डन ने बताया कि इस जेल में 'ए' या 'बी' क्लास कैटेगरी की सुविधा उपलब्ध ही नहीं है.
पाकिस्तान के मौजूदा हालात, इमरान ख़ान को जेल और पूर्व प्रधानमंत्रियों के जेल जाने के इतिहास पर वुसअतुल्लाह ख़ान का व्लॉग. वीडियो: वुसअतुल्लाह ख़ान/ रोहित लोहिया
पीएम मोदी के मौनव्रत को तोड़ने के लिए लाना पड़ा अविश्वास प्रस्ताव: कांग्रेस नेता गौरव गोगोई
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कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू करते हुए प्रधानमंत्री पर ज़ोरदार हमला किया. उन्होंने कहा कि पीएम ने मौनव्रत ले लिया है जिसे तोड़ने के लिए ये अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है.
उन्होंने कहा, "हमारी मांग स्पष्ट थी कि देश के मुखिया होने के नाते प्रधानमंत्री सदन में आएं, अपनी बात रखें, संवेदना प्रकट करे और उसपर सारी पार्टी अपना समर्थन दें ताकि मणिपुर को संदेश जाए कि इस दुख की घड़ी में हम उनके साथ हैं. ये हमारी अपेक्षा थी."
गौरव गोगोई ने कहा, "लेकिन अफ़सोस की बात है कि ऐसा नहीं हुआ. प्रधानमंत्री ने एक मौनव्रत लिया कि सदन में न लोकसभा में कुछ बोलेंगे, न राज्यसभा में कुछ बोलेंगे. इसलिए ये नौबत आन पड़ी कि अविश्वास प्रस्ताव के ज़रिए हम प्रधानमंत्री जी का मौनव्रत तोड़ना चाहते हैं."
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गौरव गोगोई ने ये भी सवाल किया कि आजतक प्रधानमंत्री मणिपुर क्यों नहीं गए जबकि राहुल गांधी गए, गृह मंत्री गए और विपक्षी गठबंधन के सांसद भी गए. उन्होंने दूसरा सवाल किया कि प्रधानमंत्री को मणिपुर पर कुछ बोलने के लिए 80 दिन क्यों लगे. उन्होंने कहा कि जब बोले पीएम तो सिर्फ़ 30 सेकेंड बोले.
गौरव गोगोई ने कहा, "मंत्री कह रहे हैं हम बोलेंगे, लेकिन प्रधानमंत्री होने के नाते मोदी जी के शब्दों में जो महत्व है, वो किसी मंत्री के शब्दों में नहीं हैं. माफ़ कीजिएगा."
गौरव गोगोई ने तीसरा सवाल किया कि अभी तक मणिपुर में मुख्यमंत्री क्यों नहीं बर्खास्त किए गए. जबकि गुजरात, उत्तराखंड, त्रिपुरा में चुनाव आने से पहले मुख्यमंत्री बदले गए.
लोकसभा में मोदी सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा लाइव
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अविश्वास प्रस्ताव पर कांग्रेस की तरफ़ से गौरव गोगोई ने की शुरुआत, राहुल गांधी पर क्या हुई बात?
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मंगलवार को लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के ख़िलाफ़ लाए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होते ही खूब हंगामा देखने को मिला.
शुरुआती रिपोर्टों में ये कहा जा रहा था कि कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू करेंगे.
हालांकि, सदन में बताया गया कि कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई चर्चा की शुरुआत करेंगे.
इस पर केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने तीखे अंदाज़ में पूछा कि पाँच मिनट में ऐसा क्या हो गया जिसकी वजह से राहुल गांधी की बजाय गौरव गोगोई चर्चा शुरू करने जा रहे हैं.
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हालांकि, इसी समय गौरव गोगोई ने कहा, "अध्यक्ष महोदय आपके दफ्तर में क्या हो रहा है, क्या दरख्वास्त दी गई है, आप इस सदन के रक्षक हैं, क्या हम बताएं कि आपके दफ़्तर के अंदर प्रधानमंत्री मोदी जी ने क्या-क्या बाते कही हैं? हम नहीं कहते."
इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीच में ही तीख़े अंदाज़ में कहा, "बताना चाहिए, क्योंकि ये गंभीर आरोप हैं."
हालांकि, बाद में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा, "कभी भी ऐसी कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, जिसका कोई तथ्य और सत्य न हो."
इस पर प्रल्हाद जोशी ने कहा, "प्रधानमंत्री पर कोई भी अनाप-शनाप आरोप नही लगा सकते. हमने वही सवाल किया जो पब्लिक डोमेन में है, जो मीडिया में है."
गौरव गोगोई ने जवाब में कहा, "जो बातें अध्यक्ष महोदय के दफ्तर में हुई है, उसे यहाँ न लाएं. आप संसदीय मंत्री हैं. आप तो कम से कम अपने कर्तव्य को याद रखें."
नूंह ग्राउंड रिपोर्ट: हिंसा के बाद अब घरों और दुकानों पर चले बुलडोज़र
वीडियो कैप्शन, नूंह ग्राउंड रिपोर्ट: हिंसा के बाद अब घरों और दुकानों पर चले बुलडोज़र
हरियाणा के नूंह में बीते सप्ताह भड़की हिंसा के बाद भले ही अब शांति हो लेकिन इलाक़े में तनाव साफ़ तौर पर महसूस किया जा सकता है.
हिंसा के बाद प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए कई घरों और दुकानों पर बुलडोज़र चलाए गए हैं. एक ओर जहां प्रशासन का दावा है कि उन्होंने सिर्फ़ अवैध निर्माण पर कार्रवाई की है, वहीं जिनके घर और दुकान तोड़े गए हैं, उनका दावा है कि उनके पास पूरे काग़ज थे.
उनका कहना है कि प्रशासन की ये कार्रवाई बिना किसी नोटिस के की गई है.
देखिए नूंह से बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा की ये रिपोर्ट.
अमित शाह राहुल गांधी की तरह राघव चड्ढा की सदस्यता ख़त्म करना चाहते हैं: संजय सिंह
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इमेज कैप्शन, संजय सिंह और राघव चड्ढा की फाइल फोटो
आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने मंगलवार को ये आरोप लगाया कि बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की राहुल गांधी की तरह सदस्यता लेना चाहते हैं.
उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा, "देश के गृह मंत्री अमित शाह राघव चड्ढा के पीछे पड़ गए हैं. जैसे झूठा बेबुनियाद केस बनाकर राहुल गांधी की सदस्यता ली, ऐसे ही राघव की सदस्यता लेना चाहते हैं. ये बहुत ही खतरनाक लोग हैं."
"कुछ भी कर सकते हैं. लेकिन हम लोग आम आदमी के सिपाही हैं. हम इनसे डरते नहीं हैं. इनसे लड़ते हैं और लड़ते रहेंगे. अगर राघव की सदस्यता ली तो राघव फिर चुनकर आएंगे और इनके ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई, अपनी जंग जारी रहेंगे."
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संजय सिंह ने कहा, "गृहमंत्री सदन में बौखलाए हुए थे, कहा - 'राघव चड्ढा का नाम विशेषाधिकार समिति में भेजो.' क्या आपको पता नहीं सेलेक्ट कमेटी में नाम प्रस्तावित करने के लिये किसी के सिग्नेचर की ज़रूरत नही? झूठ और अफ़वाह मत फैलाइये गृह मंत्री जी."
'फ़र्ज़ी हस्ताक्षर कराने का आरोप, जानिए पूरा मामला
सोमवार को राज्यसभा में दिल्ली सर्विस विधेयक पारित हो गया लेकिन इस दौरान आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा विवाद में घिर गए.
उन पर पाँच राज्यसभा सांसदों ने "फ़र्ज़ी हस्ताक्षर" कराने का आरोप लगाकर विशेषाधिकार हनन की शिकायत की है.
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दरअसल, राघव चड्ढा इस विधेयक को सिलेक्ट कमिटी के पास भेजने का प्रस्ताव लेकर आए थे. इस प्रस्ताव पर पाँच सांसदों के नाम शामिल किए गए थे, जिनका कहना है कि उन्होंने इस पर हस्ताक्षर ही नहीं किए, ना ही उन्हें इस बात की कोई जानकारी थी कि उनके नाम इस प्रस्ताव के समर्थन में शामिल किए जा रहे हैं.
राज्यसभा उपसभापति हरिवंश ने इन शिकायतों की जाँच के आदेश दिए हैं. सांसदों के 'फ़र्ज़ी हस्ताक्षर' करवाने के आरोप पर चड्ढा ने कहा, "विशेषाधिकार समिति को मुझे नोटिस भेजने दीजिए, मैं अपना जवाब समिति को दूंगा."
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दिल्ली सर्विस विधेयक को सिलेक्ट कमिटी को भेजने के राघव चड्ढा के प्रस्ताव को ध्वनिमत से ख़ारिज कर दिया गया. इस विधेयक के ज़रिए मोदी सरकार उस अध्यादेश को क़ानून बना रही है, जिसमें दिल्ली के उपराज्यपाल के पास दिल्ली में अधिकारियों की पोस्टिंग या ट्रांसफ़र का आख़िरी अधिकार होगा.
जिन पाँच सांसदों ने ये दावा किया गया है कि प्रस्ताव पर उनके हस्ताक्षर फ़र्ज़ी थे उनमें बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी, नरहरि अमीन, पी कोन्याक, बीजेडी सांसद सस्मित पात्रा और एआईडीएमके सांसद थम्बी दुरई का नाम शामिल है.